How Tusharika Sharma Earns by Writing Scripts for Celebrities | Her Success Formula Revealed!

In this Hindi‑English podcast, host Abhit Upadhyay interviews content creator and scriptwriter Tusharika Sharma. Tusharika recounts her career from radio RJ to voice‑over artist, copywriter, and founder of TS Media and TS Publication. She stresses that hard work cannot be substituted, but advocates smart work—focusing on deep research, structured scripting, and storytelling. She outlines a repeatable script framework (hook, bridge, body, call‑to‑action) and a research workflow that uses authentic sources such as Economic Times, Business Today, government portals, and industry reports. Tusharika explains how stories give products emotional weight and drive brand growth, citing examples from Indian cinema and influencer marketing. Her company employs a largely female team (20 members, only 3 men) and aims to financially empower women by offering work‑from‑home opportunities. TS Publication’s mission is to publish around 10,000 books of Indian stories, breaking the myth that truth is not social, and to reach national and international audiences. She also runs social‑work initiatives, supporting the education of 234 children with a goal to reach 500. Throughout, she offers practical advice for freelancers on scriptwriting, content creation, and leveraging books for personal branding and authority. The conversation ends with a motivational message encouraging listeners to work with passion and uniqueness.
Chapters
हमारे ऑडियंस जो हैं वो फ्रीलांसर है। एजेंसी से ट्वेंटी थर्टी के बीच में मैक्सिमम लोग सो आप क्या मैसेज देना
चाहोगे उनको मैं सिर्फ यही कहना चाहूंगी क्यूंकि आप मिडल क्लास फैमिली में या तो डॉक्टर बन सकते हो या इंजीनियर बन सकते हो या ऑफिसर बन सकते है। लोग नौकरी पर महिलाओं को पता है क्यों नहीं रखते है। अगर कोई मैरिड वुमन है, प्रेग्नेंट होगी, उसका बच्चा होगा, उसको मेटरन लीव देनी पड़ेगी। आपके इन्टरनेट पे अच्छी चीजें भी हैं, बुरी चीजें भी हैं। आपको चुनाव करना है। ऐसा कई बार मेरे साथ हुआ है कि मुझे सौ नंबर डायल करना पड़ा। पुलिस बुलानी पड़ी, ऐसा कई बार मेरे साथ हुआ है। मुझे 10 90 डायल करना पड़ा क्योंकि
welcome to the पोडकास्ट सावर और आज हमारे साथ हैं। तो शारिका शर्माजी एंड, ये 1 ऑंध्रपिनोर हैं। इनका 1 बुक पब्लिशिंग हाउस भी है। and she s also स्क्रिपराइटर और ये बहुत मस्त वाइसउगरभीकरलेती है। कार्टून टून्स के मतलब मस्त वॉइसेज भी निकाल लेती है। सारे। तो कैसी आप मैं बहुत अच्छी हूं,
बहुत बहुत शुक्रिया मुझे यहाँ बुलाने के लिए, इनवाइट करने के लिए एंड।
मैं आपको सबको बताना चाहता हूँ की ये न बहुत अच्छा कंटेंट स्ट्रक्चर बनाती है। कंटेंट राइटिंग बहुत ही अच्छा है, उनका एंड बहुत अच्छे से क्लाइन है। जो आप जानते होंगे टॉप यू, ट्यूबर्स, टॉप कोचिस इनके क्लाइंटस हैं। ये उनके स्किल्स दिखती है। कोचेज वगैरह के एंड कंटेंट में है। तो आज जानेंगे इनकी जर्नी और सीखेंगे की आप भी काम कैसे कर सकते हो। रेडी रेडी यस ओके सो थोड़ा बताओ आप क्या कर रहे हो?
अभी इस समय तो अभी मैं प्रोफाइल तो मेरी अभी भी राइटर की है। मैं पेशे से 1 लेखिका हूँ। पिछले 12 साल से लिख रही हूँ। 16 साल की थी, तब से रिकगनाइज कर लिया था कि लिख सकती हूँ। और तब से अपनी जर्नी कंटिन्यूस ली। इसी फील्ड में लेकर आगे बढ़ रही हूं। इसके साथ में अभी कांटपे बन गई हूं। 2 कंपनीज बना ली है। 1 टी एस मीडिया है। ए टी एस पब्लिकेशन है। टी एस मीडिया में हम कोचिस को, इन्फ्लूएंसर्स को, ऑंटरपेनर्स को, ब्रांड्स को हेल्प करते हैं। कंटेंट की मदद से अपने फील्ड में आगे बढ़ने के लिए ओके क्यूंकि आप देख रहे हैं। डिजिटलाइजेशन में कंटेंट का 1 बहुत बड़ा हिस्सा है। बहुत बड़ा पार्ट है। वो पार्ट में हम उनकी हेल्प करते हैं। टी एस पब्लिकेशन में हम एमएस, एमीज, डॉक्टर्स, पॉलिटिशंस, इन्फ्लूएंसर, स, कोचिज इन सबकी किताबें लिखते हैं। उनको लिखने में भी हेल्प करते हैं। साथ ही साथ हम पब्लिश भी करते हैं।
उनकी बुक्स को हम आपने बताया था कि कोई बिग बॉस कंटेस्टेंट भी लाइन है। राइट, येस येस अमेजिंग अमेजिंग थोड़ा सा पीछे चलते हैं। शुरू शुरू करते हैं। 1 बार। तो थोड़ा अपने स्टोरी बताए कि कैसे सब चीज स्टार्ट कहा से हुई। एग्जैक्टली।
तो वैसे तो कहानी बहुत साल पहले शुरू हुई थी। लेकिन अगर मैं अपने इस करियर में शिफ्ट करने की बात करती हूँ तो वैन सिक्स्टीन रियलाइज्ड की मैं कुछ कुछ चीजें लिख लेती हूँ। मैंने स्कूल में भी देखिये, हमारा एजुकेशन सिस्टम ऐसा है कि उसमें मुझे कभी रियलाइज ही नहीं हो पाया कि मैं लिख लेती हूँ। कभी मुझे मेरे स्कूल टाइम में लिखने का मौका नहीं मिला या कभी लिखा तो उसे प्रदर्शित करने का मौका नहीं मिल पाया। और ये मैं 1 बहुत बड़ा लूपहोल समझती हूं। क्योंकि जो चीज मैंने 16, 17 की उम्र में या 20 की उम्र में रिलाइज थी, वो अगर मैं 11, 12 की उम्र में रेलाइज कर पाती तो शायद मुझे अपनी फील्ड को या अपनी स्किल को बढ़ाने के लिए ज्यादा समय मिल जाता। मैंने 2017 में ऑफिशियली इस काम को शुरू किया था, जब मैं अपने कॉलेज में गई। अब मैंने पहले ट्वेल्थ के बाद मेडिकल की तैयारी की, मुझे वहां सफलता नहीं मिली। मगर हिम्मत नही हारी 1 एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया, वहां से अपना ग्रेजुएशन किया। और ग्रेजुएशन के पहले साल से ही ये डिसाइड कर लिया था कि जिंदगी में अब कुछ करना है। अब अगर राह बदल गई है, अगर डॉक्टर की तरफ नहीं जा पाई हूं तो भले ही वो न करूं, मगर कुछ अच्छा जरूर करूंगी, कुछ ऐसा करुंगी कि लोग याद करें। तो मैंने रेडियो किया। मुझे सबसे पहले रेडियो में ब्रेक दिया, आर जे शेवा ने मेरे ऊपर ट्रस्ट किया और मुझे थोडा सा इसको पास
करते है सो आप रेडियो में थोड़ा बताओ कि कैसे थोड़ा डिटेल में जानते हैं, ओके हैं।
ये बहुत लोगों का सवाल होता है कि आर जे कैसे बज ्योंकि इंट्रस्टिंग टॉयस क्यूंकि हम सबने रेडियो सुना है, कहीं न कहीं हम बचपन से सुनते आए हैं और आज भी रेडियो का जो क्रेज है वो बरकरार है। मैं जब कानपुर में थी तो 1 ऐसा किस्सा हुआ मेरे साथ मैं 1 छोटी सी बात बताना चाहूंगी। मैं हमेशा ये कहता हूँ कि 1 पल, 1 डिसीजन और 1 इंसान आपकी जिंदगी बदल देता है। और बिल्कुल ऐसा ही मेरे साथ हुआ। मैं हर चीज कहानियों में बताती हूं तो मैं स्टोरी अपनी सुनाती हूँ बड़ी कमाल की स्टोरी आपको बहुत मजा आएगा। सुनकर 1 सड़क थी सड़के इस बार मैं खड़ी थी, उस पार आरजी सेवा खड़ी थी। कॉलेज में आलरेडी स्केट माय, छोटे छोटे इवेंट्स करके समझ आ गया था कि लिख लेती हूं। और हमने 1 छोटा सा ग्रुप बनाया था जिसका नाम था संवाद, जिसमें हम सब आर्टिस्ट लोग कॉलेज के जुड़े हुए थे। अब आरजे शेवा को हालांकि मैं ज्यादा कभी रेडियो नहीं सुनती थी पर कहीं उनकी आवाज सुनी थी क्योंकि उनकी आवाज इतनी खूबसूरत है कि पर्जेबशेवाकीयेस आप 1 बार उनकी आवाज सुन ले, आप, मंत्र मुग्ध हो जाएंगे। तो उनकी आवाज कहीं न कहीं मेरे कान में थी। मेरी बहन सुबह रेडियो सुना करती थी, कुछ काम करते हुए घर का तो मैंने उनकी आवाज सुनी थी। मैं अपने 1 मित्र के साथ ही मैंने कहा कि ये आरजे सेवाएं हैं, हमें इनसे चल के बात करनी चाहिए, हम अपने ग्रुप संवाद के साथ जोड़ सकते हैं, इनके साथ मिलकर कुछ कर सकते हैं, रिवॉल्यूशनरी कुछ अच्छा कर सकते हैं। तो मैंने अपने सीनियर को कॉल किया, मैंने कहा कि सर आप आ सकते हैं क्या बात करने उनसे। तो उन्होंने कहा कि यार मैं तो नहीं आ पाऊंगा। तो मेरे दोस्त ने बोला तुमने उनको क्यों कॉल किया, वाई नॉट गोइंग तुम जाओ। तो मैंने कहा कि यार मैं कैसे बात कर सकती, मेरे अंदर उतना कॉन्फिडेंस नहीं था। तो उन्होंने बोला नहीं नहीं नो यू हैव टू गो आई नो और आप जाओ। तो मैंने कहा कि ठीक है आ गो और वो रोड क्रॉस करना, मुझे मुझे 45 मिनट लगे। इस पार से उस पार जाने में मगर मैं गई और मैंने जाकर उनसे सिर्फ इतना बोला कि आपकी आवाज लाखों लोग सुनते हैं, क्यों न आप इस आवाज का इस्तेमाल करके कुछ अच्छा करें और मैं आपके साथ जुड़ना चाहती हूँ। उन्होंने मेरी तरफ देखा, अपने प्रोड्यूसर को बोला कि इसका नंबर ले लीजिए और मैं वापस आ गई। मैं वापस आई तो मेरे हॉस्टल में आज भी मुझे याद है मेरी बहन के साथ 34 और लड़कियां बैठी थी और मैंने आते ही एक्साइटमेंट में बोला कि आज मैं 1 आरजे से मिलकर आई हूं। मेरा उन्होंने नंबर लिया तो वो लड़कियां बड़ी जोर जोर से हंसी के ऐसे आर जी को पता नहीं दिन में 10 मिलते होंगे, वो कॉल नहीं करेंगे आपको। मैं 1 छोटे बच्चे की तरह इंतजार करती रही कि शायद कॉल आएगा। 1 दिन गुजर गया, 2 दिन गुजर गया, 3 दिन गुजर गया लेकिन मेरे पास कॉल आ आया नहीं आया। चौथे दिन मेरे पास मेरा फ़ोन बचता और वो बोलती है हलो, मैं आरजे शेर पर बात कर रही हूँ। फिर से आपस में मिली थी। 3 दिन पहले 1 इवेंट में मैं चाहती हूँ की आप आये और आप अपना इंटरव्यू दे। और मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था कि आखिरकार मेरे पास वो फ़ोन आया
है, कैसा रिएक्शन था उस समय मतलब
इट वाज वनफुल, वो 3 दिन, इंतजार के वो 30 दिन जैसे थे, लेकिन 1 उम्मीद थी मन में कि जो कह कर आई हूँ जिस उम्मीद से गई हूँ। मैंने ये सोचा ही नहीं था की मैं एफएम में जाओ में आरजे जाओ, मुझे लाखों लोग जाने नहीं, मुझे कानपुर की दशा बदलनी थी, कानपुर के लिए कुछ अच्छा करना था, कुछ सीखना था। मैं 1 अच्छी इंटेंशन से गई थी और 1 अच्छा डिसीजन लिया। मेरे दोस्त ने मुझे हिम्मत दी, रोड पार की, मैंने उनके पास मिलने गई, उस 1 डिसीजन ने आज मुझे यहां लाकर बैठा दिया है। मैं वहां गई, मैंने इंटरव्यू दिया, मैंने 1 कॉपी राइटिंग टेस्ट दिया। यकीन मानिए मुझे यह भी नहीं पता था। लोग कहते हैं कि सीखना चाहिए, डिग्री जरूरी है। मुझे यह भी नहीं पता था कॉपी राइटिंग क्या होती है। उन्होंने बोला कि ये 3 हम टॉपिक देते हैं, इनपर आप कुछ लिख के दिखाइए। मैंने उन्हें लिखकर दिखाया और उन्हें इतनी पसंद आई। मेरी कहानियां कि उन्होंने बोला आप कल से ज्वाइन कर लीजिए।
मतलब मतलब पूरा राउंड भी नही हुआ।
इंटरव्यू का सारा सब कुछ होता है, प्रोसेस हुआ था। बट, मैंने, सारे, प्रोसेस, वॉइस, टेस्टिंग, एवरीथिंग, आई, क्लैड और शेबा में न 1 बहुत कमाल की महिला हैं। उन्होंने मुझमें वो चीज देख ली जो मैं नहीं देख पाई। 1 साल में उनके साथ रही। मैंने बहुत कुछ सीखा। हालांकि रेडियो में ऐसा होता है कि नॉन ग्रेजुएट्स को वो जनरली इंटर्नशिप्स नहीं देते हैं। लेकिन शेबा मेमने में ग्रेजुएट नहीं थी। उसके बाद भी मुझे इंटर्नशिप दी। मुझे मौका दिया और उस 1 फैसले ने। उस 1 इंसान ने मेरी जिंदगी यहां ला कर रख दी है।
गॉड गॉड, सो, फिर फिर क्या हुआ आगे।
उसके बाद मैं जब फीवर में काम कर रही थी तो कई सारे सेलिब्रिटीज से मिलना हुआ। क्योंकि आपको पता है ये रेडियो में बहुत लोग आते रहते हैं। मैंने वहां से ऐड लिखना सीखा, मैंने वॉइसओवर करना सीखा। मुझमें सीखने की भूख और क्षमता दोनों ही ईश्वर ने अच्छी दी थी। तो मैंने बहुत कुछ वहां से सीखा। उसके बाद मुझे वहीं से 1 दोस्त मिल गया। उसने मुझे छोटे भाई जैसा। आज तो वो फिल्म इंडस्ट्री में वो काम कर रहे थे। उन्होंने मुझे ताशकंद फाइल्स। उस समय आई थी फिल्म लाल बहादुर शास्त्री जी के ऊपर आई है विवेक अग्निहोत्री जी की। उन्होंने बोला कि इसकी प्रमोशनल वीडियोज बनानी है। मैंने उसकी प्रमोशनल वीडियोज बनाई है। उनका कंटेंट लिखा वॉइस ओवर किया। उसके बाद फिर 12 फिल्में और मिली मुझे करने के लिए मैंने उनमें रिसर्च का काम किया, डायलॉग राइटिंग का काम किया। मैंने स्क्रीन प्ले लिखना सीखा। वो सीखने के बाद मुझे 1 पोडकास्ट मिला करने के लिए मैंने पूरा पोडकास्ट एनएस मीडिया पोडकास्ट आप सुन सकते हैं। हमने इंडिया के लीडिंग स्कैम्स और मर्डर्स की स्टोरीज लिखी और उनको मैंने वॉइस ओवर किया। इसके अलावा मैंने दैनिक जागर के साथ काम किया। जागरण न्यू पार्लियामेंट किया, ओके जो मौका मुझे करने का मिला मैंने। सब कुछ किया। मैंने दैनिक जागर के साथ स 6 महीने का सिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट भी किया। जहां मैंने कानपुर की गली गली में जाकर, उनकी सफाई के ऊपर, उनके हाईजीन के ऊपर अवैरनेस क्रिएट किया और शहर में लोगों से मिली और काम भी किया। ऐसे करके किस्सा चलता गया, चलता गया, चलता गया। और आज हम इस लेवल पर आ गए हैं कि अब बहुत सारे अच्छे कोचिस के साथ सीखने का मौका मिलता है।
गॉड इट सो, हाउड कश्मीर फाइल्स एंड केरला स्टोरी हैप्पन। मतलब कांटेक्स कैसे मिले वो कि वहा आपको काम करने का थोड़ा मौका मिला।
येस तो कश्मीर फाइल्स के लिए क्या था कि जब रिसर्च हो रही थी तो उनके जो राइटर हैं। उन्होंने बोला कि रिसर्च टीम में जरूरत है हमें रिसर्च करने की और मुझे इतिहास में बड़ी दिलचस्पी थी।
रिसर्च करना पसंद है।
ये मुझे बहुत हिस्ट्री में इंट्रस्ट है। त मुझे म्यूचुअल कॉन्टैक्ट के थ्रू वो मिले थे। सौरभ पांडे नाम है उनका। आज तो वो बड़े भाई जैसे हैं। बहुत अच्छे अच्छे प्रोजेक्ट्स ला रहे हैं। 1 और उनका प्रोजेक्ट मनोज वाजपेयी जी के साथ आ रहा है। तो उनके साथ मुझे मौका। मिला काफी एक्स्टेंसिव इंटेंस प्रोजेक्ट था, लेकिन किया मैंने उनके साथ और बहुत कुछ सीखा करेला। स्टोरी जब आई तो उसके प्रमोशन के लिए बहुत रिक्वायरमेंट थी रिसर्च करने की। और मेरा जो एक्सप भी रिसेंटली आई थी तो उस एक्सपीरियंस को इस्तेमाल करके वो भी मुझे म्यूचुअल कॉन्टैक्ट्स के थ्रू काम मिला देखिये। जब आपका काम अच्छा होता है तो
लोग आपको याद रखते हैं, रेफर भी करते है।
जब भी कोई अच्छा काम इंडस्ट्री में होता है और लोग अगर मुझे जानते हैं तो दे यूजुअलीकमटुमीं क्योंकि उन्हें पता है कि ये अगर किसी काम को लेती है तो ये उसको कोशिश करती है कि बेहतर से बेहतर तरीके से किया जाए। 1 राइटर के लिए बहुत इम्पोर्टेंट होता है रीड करना, पढ़ना और पढ़ने की क्षमता मेरी अच्छी है। तो वो चीज मैंने बहुत लेवरेज की और जितना भी काम अभी तक किया है फील्ड में वो सारा अभी तक नेटवर्क की मदद से ही किया है। मतलब समझ लीजिए मैंने किसी तरह का कोई एड्वटीजमेंट आज तक नहीं चलाया अपने
लिए और वो रेफरेल से ही सारे। यस यस शो गुड डेफिनिटली गोर गोर इट सो। मैं यह पूछना चाहता हूं कि क्या कोई आपके में मेंटर की तरह आया जो की आपको थोड़ा सपोर्ट किया हो? गाइड किया लाइफ में मैं उसके बार में थोड़ा जानने में इंटरेस्ट रहेगा। मेरा थोड़ा क्या आप इतना को अचीव कर रहे हो? स पोसिबल विदाउट में थोड़ा एक् तो
जिंदगी में सपोर्ट सिस्टम तो बहुत रहे हैं। मेरे जीवन का सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम मेरे पिताजी है। माई फादर इज एन मेजिंग मैन। जब मैं उनके बारे में बात करती हूं तो मेरी मतलब बॉडी में एकदम कहते हैं न कि रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि किसी पिता में इतनी हिम्मत कैसे हो सकती है। मेरे 1 लड़की जब भी एम्पावर होती है, हमेशा याद रखिये कि उसके पीछे उसके फादर होते हैं। जब आप घर से बाहर निकले हैं और आपके पिता आपके कंधे पर हाथ रखके कहते हैं कि बेटा तू जा बाकी जो होगा हम देख लेंगे। तो वो हिम्मत, जो होती है वो फिर आपके पैर उखड़ने नहीं देती है। तो सबसे पहला सपोर्ट सिस्टम तो मेरे फादर हैं, मेरी मदर हैं, मेरी फैमिली बहुत सपोर्टिव हैं, इन्क्लूडिंग माई, ब्रदर, इन सिस्टर। तो वहां से सबसे पहले सपोर्ट मुझे मिला। मैंने कभी भी कोई जीवन में अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए दिशा चुनी चाही। तो मेरी फैमिली ने कभी उसके बीच में हर्डल नहीं बने। वो उन्होंने हमेशा मुझे हर डिसीजन में सपोर्ट किया। मैंने पहले मेडिकल की तैयारी की। वहां से स्विच करके मैंने एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। उन्होंने वहां भी सपोर्ट किया। उसके बाद मैंने स्विच किया। सिविल सर्विसेज पर। उन्होंने वहां भी सपोर्ट किया। जब सिविल सर्विसेज से मैंने बिजनेस में आने का फैसला लिया। उन्होंने वहां भी सपो किया। तो मैं फादर हैज बीन बिग, सपोर्ट सिस्टम। लेकिन अगर मेंटोर की बात करें, गुरु की बात करें तो मेरे जीवन में सबसे बड़े 2 गुरु रहे हैं। सबसे पहले आरजे शेवा। मैंने आपको बताया, क्योंकि उनसे मैंने इनीशियली सीखा। उसके बाद मेरी जिंदगी में, 2020 में मेरे गुरु, मेरे बड़े भाई चित्रेश सोनी जी आए थे। मैंने 1 इंटर्नशिप के लिए अप्लाई किया था। राजस्थानी नमकीन में वहां साढ़े 708 सौ लोगों ने अप्लाई किया और उनमें से 1 उन्होंने मुझे चुना। तो साल 2020 में जब चित्रेश सर मुझे मिले तो उन्होंने मेरा पोटेंशियल देखा तो उन्होंने थोड़ा थोड़ा, थोड़ा, थोड़ा मुझे काम देना शुरू किया, कुछ स्मॉल प्रोजेक्ट्स दिए, फिर धीरे धीरे प्रोजेक्ट्स का ड्यूरेशन लेवल बढ़ता गया। पहले एड्स मैंने बनाये, उसके बाद उन्होंने स्टोरी, टेलिंग, का या किसी को भी कहीं कंटेंट की जरूरत होती थी। तो वो मेरा नाम रेफर करते गौर। फिर उन्होंने देखा कि लोग पसंद कर रहे हैं इनका काम। और वो 1 ऐसे इंसान हैं जो मुझे नहीं। बहुत लोगों ने सपोर्ट करके उनकी लाइफ में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा दी है। मेरे लिए भी वो 1 प्रेरणा स्रोत रहे हैं। आज भी मैं कोई छोटे बड़े डिसीजन लेती हूं तो उनसे पूछ लेती हूं, उनके गाइडेंस में लेती हूं। और अभी भी वो मुझे मेरी जर्नी में, मेरे मेंटोर बनकर मेरे साथ आगे बढ़ रहे हैं। और मुझे लगता है कि ईश्वर ने चाहा तो जो विजन वो मेरे लिए लेकर चलते हैं या जहाँ वो मुझे चाहते हैं कि मैं पहुँचूँ मैं मेहनत
करके, वहां जरूर पहुंचूंगी स के फादर और मतलब वो सर्विस लास से हैं या फिर बिजनेस बैग्राउंड से है कैसा?
तो मेरे फादर बाय प्रोफेशन 1 लॉयर है। मेरी मदर होम मेकर है और उनका 1 बिजनेस भी है। फाइनल्स का बट 1 बहुत बड़े स्केल पर नहीं है। हम 1 मिडल क्लास फैमिली से बिलोंग करते हैं। इसलिए मुझे शायद इतना समय लग गया ये फैसला लेने में कि मुझे बिजनेस करना है। मुझे राइटिंग करनी है। मुझे लेखन की फील्ड को चुनना है। क्योंकि आप मिडल क्लास फैमिली में न या तो डॉक्टर बन सकते हो या इंजीनियर बन सकते हो या ऑफिसर बन।
सके। 23 चीज रह जाती है।
मेरी बहन एम बी बी एस कर रही है। मेरा भाई भी एम बी बी एस करने के लिए ही आगे बढ़ रहा है। नीट की वो प्रिपरेशन कर रहा है। तो लोगों को हमेशा ये रहता है कि 2 बच्चे तो अच्छे सेटल हो गए। तीसरी ये क्या कर रही है राइटिंग राइटर क्या होता है तो लोग नहीं समझते है उस चीज को।
मैं यही पॉइंट पे आ रहा था। एक्ली कि फादर मत तो ठीक है, सपोर्ट कर दिया। बट रिलेशन में जो लोग रिलेटिव्स वगैरह था, क्या रिएक्शन था वो लोग कहते थे यार वो ये लड़की क्या कर रही है, बिजनेस में घुस रही है ये। वॉइसेस। ये थोड़ा सा ऐसा कुछ हुआ है।
रेलेटिव् जानने वाले लोग अभी भी ऐसी बातें करते हैं। और मैं तो इन चीजों से ज्यादा तेफाक नहीं रखती क्योंकि मेरा घर जाना बहुत कम होता है। जब भी मैं जाती हूं, मैं अपनी फैमिली के साथ हमेशा फैमिली टाइम स्पेंड करती हूं। मुझे इन चीजों से तकलीफ कम होती है लेकिन उन्हें लोग बहुत परेशान करते हैं। इस चीज को लेकर कि आपकी बेटी क्या करती है? ये कोई काम थोड़ी होता है, इतना ट्रैवल करती है, मुंबई रहती है, दिल्ली रहती है। आपने इतनी छूट क्यों दे रखी है? लेकिन मेरे फादर 1 बड़े मैंने कहा न आपको बड़े विश्स इंसान है। और मेरे जितने भी सपनों को पंख देते हैं, वो मेरे पिताजी देते है। वो मुझसे कहते हैं कि वो पूरा आसमान देख रही है। वो तुम्हारा है, मतलब उन्होंने कभी मुझे बांधा नहीं। मेरे पैरों में बेड़ियां नहीं डाली। तो जब आपके माता पिता साथ है, तो फिर दुनिया कुछ भी बोलती है, उससे क्या फर्क पड़ता है? देखिये, हमारे सामने हमारा विजन क्लियर होता है। हमारी पोटेंशियल हमें पता होती है। हमे जहाँ पर पहुंचना है, अगर हमें वहां जाना है, तो हमें सारी दुनिया को भूल कर आगे बढ़ना। पड़ेगा। कहते हैं न कि जैसे 1 घोड़ा नहीं होता है, उसकी आँखों पर पट्टी बंधी होती है।
सीधा देख रहा हूँ।
हां, बिल्कुल आपको वैसे ही आगे चलना है। जो मुझे करना है, वो करना यू हैव। टू बी वेरी स्ट्रोंग। मैं जितना जर्नी में आगे बढ़ रही हूं, उतना लोग रिटालुएट भी कर रहे हैं। बहुत सारे उनके कलर्स भी देखने को मिलते हैं। लेकिन मेरा लक्ष्य तो सामने है। न लोग साथ चले, न चले। मुझे तो वहाँ पहुँचना है। तो मेरी फैमिली सपोर्टिव है। इसलिए मुझे कोई दिक्कत नही है। नहीं, कोई प्रॉब्लम नहीं होती।
मतलब कोई कुछ भी बोले तो माइंड नहीं करती। अगर वो फादर मदर नहीं बोल रहा,
तो ओके हाँ, ऐब्सोलूटली फर्क पड़ना भी नहीं चाहिए, क्योंकि ये मेरा विजन है। अगर आपको महेंद्र सिंह धोनी अगर ये सोचते होते तो आज वो महेंद्र सिंह धोनी नहीं होते। अगर लता मंगेश्कर ने सोचा होता कि सोसाइटी बोल रही है, मैं डॉक्टर बन जाती हूं। तो आज हमारे पास नाइट एंगल ऑफ इंडिया नहीं होती।
इंडिया में न मतलब, हमे बहुत काम है। आप इस बात में गिरते ऐब्सोल्यूटली क्यों, ऐसा क्यों है? मतलब लड़की क्यों नहीं स्टेप हो रही हैं, को नहीं बन रही है।
देखिये, अब तो ये सिचुएशन कहीं न कहीं बदल रही हैं। आप देख भी रहे होंगे कि धीरे धीरे चीजें चेंज हो रही हैं। लेकिन ये हालात आज के नहीं हैं। ये बहुत पहले ही खराब हो गए थे। हमारा वैदिक पीरियड जो है, उसे 2 हिस्सों में बांटा गया है। अर्ली वेदिक पीरियड और लेटर वेदिक पीरियड। अर्ली वेदिक पीरियड। शुरुआत का पीरियड था, जिसमे रिग वेद लिखा गया। सरस्वती नदी के किनारे सबसे पुराना वेद हमारा रिग वेद है। जब आप उस समय की चीजों को पढेंगे तो आपको यह रियलाइज होगा कि महिलाओं का स्तर सोसाइटी में बहुत अच्छा हुआ करता था।
अच्छा जी जी,
अर्ली वैदिक पीरियड में जैसे लोपा मुद्रा है। जैसे बहुत सारी महिलाएं थीं, जो विदेशी हुआ करती थी। पॉलिटिकल डिसीजन में, सभाओं में, समितियों में महिलाएं उनका हिस्सा हुआ करती थी। जो महिलाएं नृत्य करती थी, डांस की करती थी। इट वाज, सेट, टू, बी, अ, फॉर्म ऑफ आर्ट और उन्हें पूजा जाता था। उन्हें देवी माना जाता था। महिलाएं घर घर के डिसीजन लिया करती थी। आज भी लोगों को मैं 1 बड़ा खूबसूरत सा एग्जामपल देना चाहूंगी। हम क्या कहते हैं आदिवासी पिछडे हुए होते हैं। मैं आपको 1 एग्जांपल देती हूँ। 1 ट्राइव है, गारो, ट्राइब आदिवासियों की मेघालय की है। तो लोग जनरली कहते हैं कि जो ट्राइब्स होती है वो पिछड़ी होती है, ट्राइवल कम्युनिटीज जो होती है वो पिछड़ी हुई होती है। और सो कॉल्ड म जो शहर में रह रहे हैं वो बड़े सिविलाइज्ड है, बड़े आगे बढ़े हुए है। मैं आपको 1 बड़ा कमाल का फैक्ट देती हूं, आपका दिमाग खुल जाएगा। एकदम 1 गारो ट्राइब है। मेघालय की ट्राइबल कम्युनिटी है जिसमें पुरुष महिला के घर विवाहित होकर जाते हैं, उल्टा होता है।
जो यहाँ पे होता है वो सीधा होता है।
आम कर रहे हैं। जो शायद उलटा है उनके महिलाओं को इतना पवित्र माना जाता है कि 1 माँ जो जननी है, 1 महिला जो परिवार को आगे बढ़ा सकती है, शायद पुरुष को उसके घर जाना चाहिए। इन फैक्ट देर, आर वेरियस ट्राइबल कम्युनिटी जिनमें जो सरनेम होता है वो मां का इस्तेमाल किया जाता है, जो लीनिएज होती है वो माँ के इस्तेमाल की जाती है। और जो प्रॉपर्टी ट्रांसफर होती है वो भी माँ के नाम होती है। यानि महिला जो होती है घर की, उसके नाम होती है। बहुत सारी ट्राइब्स हैं जहां पर परिवार की मुखिया महिला होती है।
ओह, इंटरस्टिंग सो जी हैं। ये कौनसी ट्राइब है ये जिसके बारे
में मैंने बताया, यह मेघालय की गारो ट्राइब है ओह।
और ये अभी भी मतलब प्रॉपर है।
बिल्कुल डेफिनिटली। मैं तो कहती हूं नॉर्थ हिस्ट, इतना खूबसूरत है, सबको जानना चाहिए, उसके बारे में पढना भी चाहिए। हम अपने ही देश के बारे में नहीं जानते, हम बाहर की क्या बात करें। मेघालय नार्थ िस्ट का इतना खूबसूरत स्थान, वहाँ की 1 ट्राइब के बारे में मैं आपको बता रही। भारत में न जाने ऐसी कितनी खूबसूरत ट्राइप्स मिल जाएंगी, उनके ट्रेडिशन मिलेंगे। ऐसे नॉर्थ िस्ट के और भी बहुत सारी कमाल की ट्राइप्स हैं। आप पढिएगा जयंतिया है, खासी ट्राइब हैं, ल, गारो ट्राइब हैं, नागाज हैं इनके बारे में। जब आप पढेंगे आपको बड़े अलग अलग ट्रेडिशन्स नजर आएंगे और आपको दिखेगा कि कितना क्लोजली जिस सस्टेनेबल लिविंग पर आम काम कर रहे हैं, इतना सब कुछ खराब करने के बाद उस सस्टेनेबल लिविंग को वो आलरेडी फॉलो कर रहे हैं। बहुत लंबे समय से तो महिलाओं का जो हम स्तर की बात करे थे, वो खराब हुआ। जब से इन्वेजन हुआ, एक्सटरनल इनवेजियंट जब इंडिया में हुआ तो महिलाओं की कंडीशन फिर डिग्रेड करने लगी, खराब होने लगी क्यूंकि जब भी बाहर से लोग आते थे तो वो मेस को टारगेट किया करते थे। हमारे यहाँ के विमेंस को प्रोटेक्ट करने के लिए। फिर वो पर्दा सिस्टम आया, और भी बहुत सारी चीजें आने लगी। लेकिन अगर आप अरली वेदिक पीरियड को पढ़ते हैं, जो ऐक्चवली में हमारी संस्कृति है, उसमें महिलाओं का स्थान बहुत ऊपर है। आज भी आप देखिये, 9 देवी पूजी जाती है, आज भी आप देखिए, जो हमारा धर्म सिखाता है, वो तो महिलाओं के स्थान को बहुत ऊपर रख रहा है।
जैसे हम लोग थोड़े पिछड़े होते थे, वो महिलाओं को रिस्पेक्ट नहीं करते थे। ऐसा नहीं था, लिटरली बहुत ऐसा नहीं था, ऐसा नहीं था।
उस समय है बिल्कुल ऐसा नहीं था। और आपने जो सवाल किया वुमन ऑंटरपिनर्सकातो महिलाओं के साथ मैं। क्यूंकि खुद भी 1 महिलाओं आगे बढ़ने में बहुत सारी दिक्कतें आती हैं।
क्या? अगर 23 प्रोल में बड़ी 23 प्रोबलम की बात कर पाओये? आती आती है हर रो में ंधरप्रिनय
और या महिलाओं के लिए सबसे पहले तो फैमिली का सपोर्ट बहुत कम मिलता है। क्यूंकि फैमिली कहती है कि डॉक्टर बन जाओ, इंजीनियर बन जाओ। 1 सेटल लिन कम पे रहो। क्योंकि देखिये जब आप स्टार्ट अप करते हैं या जब आप बिजनेस करते हैं तो 1 बहुत हेक्टिक शेड्यूल होता है। कभी कभी आप खुद को, परिवार को समय नहीं दे पाते हैं, आप बाहर रहते हैं। और जनरली फैमिलीज महिलाओं के लिए इस चीज को सपोर्ट नहीं करती है। इ। इसका 1 कारण यह भी हो सकता है कि आजकल की सोसाइटी उतनी ज्यादा सेफ नहीं रही। अब महिलाओं के लिए अभी रिसेंटली कोलकाता में केस हुआ। इस तरह के किस्से अगर होंगे तो माँ बाप के मन में डर बैठना बिल्कुल लाजमी है। क्योंकि आप 24, 25, 26 साल की उम्र से जब आप यंग होते तभी से ये जर्नी शुरू करेंगे। आप 50 की उम्र पे। तो स्टार्ट करेंगे नहीं फैमिली जब सपोर्ट नहीं करती फैमिली की बात। जब हम सोसाइटी में आते हैं बाहर निकल के, तो सोसाइटी में 23 चैलेंजेज हमें देखने को मिलते हैं। जिनको हम बोलते हैं। ग्लास सीलिंग 1 होता है पिंग कॉलर जॉब में आपको एक्सप्लेन कर देती हूं। क्या होता है पिंग कॉलर्ड जॉब्स का मतलब होता है देर आर सर्टेन जॉब जो महिलाओं के लिए डिफाइन कर दी गई है। जैसे रिसेप्शनिस्ट की जॉब, जैसे टीचिंग की जॉब, जैसे नर्स की जॉब। आप पुरुष देखते हैं अब, लेकिन बहुत कम देखते हैं ये पिंक कॉलर जॉब है। इन जॉब्स को आलरेडी महिलाओं के लिए रिजर्व कर दिया गया है कि आप यही काम कीजिए, इससे ऊपर सोचने की क्षमता मत रखिए। इससे ऊपर सोचने के बारे में। मत सोचिए। 1 और बहुत खराब चीज है। जिसको बोलते है ग्लास सीलिंग। आप कॉर्पोरेट में देखिएगा। महिलाओं को 1 लेवल तक इंक्रीमेंट मिलता है, 1 लेवल तक उनको कह सकते हैं कि पोजीशन मिलती है। उसके आगे पोजिशन महिलाओं को बहुत कम मिलती है।
लीड पोजीशन में बहुत कम रही, बहुत कम रहती है।
इसी को हम ग्लास सीलिंग बोलते हैं। ये नजर नहीं आएगी आपको मगर आप जब बैठकर सोचेंगे पढ़ेंगे। और हम सोसाइटी में इस चीज को पढ़ते भी हैं। रियलिटी है ये ग्लास सीलिंग। येस ग्लास सीलिंग। इज वेरी डाक रियलिटी, विच, वी हैव, टू रियलाइज, अंडरस्टैंड एंड आल्सो रिजॉल्व। इसीलिए आपको ज्यादातर सीईओ, एमडी या बड़ी बड़ी पोजीशन पे पुरुष ही दिखाई देते हैं। महिलाएं दिखाई नहीं देती हैं क्योंकि लोग उस लेवल पर जाने के लिए उनको सपोर्ट नहीं करते हैं। आपको 1 और चीज मैं बताती हूं। लोग नौकरियों पर महिलाओं को पता है क्यों नहीं रखते हैं। अगर कोई मैरिड वुमन है, प्रेग्नेंट होगी, उसका बच्चा होगा, उसको मेटरनल ली देनी पड़ेगी कितनी खराब चीज है।
वो सोचते है।
बहुत सारी महिलाओं को 5566 महीने की प्रेग्रेंसी में निकाल दिया जाता है कि अरे अब तो ये काम ही नहीं करती है, हम प्रोडक्टिविटी में ह्यूमैनिटी को तो खत्म ही कर चुके हैं। ये चीजें अगर होंगी तो महिलाएं कैसे आगे बढ़ेंगी है, गवर्नमेंट सपोर्ट कर रही है। डेफिनिटली बहुत सारे प्लान्स हैं, बहुत सारी स्कीम्स हैं जिनमें महिलाओं को सपोर्ट किया जाता है, या अगर आपको प्रॉपर्टी लेनी है, बिजनेस करना है, ईजी लोन मिल जाता है, ज्यादा माउंट में मिल जाता है, कम ब्याज दर पर मिल जाता है। लेकिन वहां तक महिलाएं पहुंची तो सही बात है। फिर तीसरी प्रॉब्लम आती है जब आप क्लाइंट के पास जाते हैं, बड़ी प्रैक्टिकल प्रॉब्लम बता रही हूँ, मैं खुद क्लाइंट्स के पास जाती हूँ, वो मुझे गलत नजर से देखने लगते हैं। डेफिनिटेली होता है, ये बहुत होता है, अच्छा ये इतना होता है कि वो मैं किसी मीटिंग में जा रही हूं तो वो पहले तो मुझे यह इनश्योर करना पड़ता है की इंसान मेरे बारे में कुछ गलत न सोचने लगे। और ऐसा बहुत बार होता है, कई बहुत बड़ी डील्स मैंने मना किए है, सिर्फ इसी वजह से देवर थिंकिंग समथिंग एल्स, अबाउट मी और मुझे मना करना पड़ा कि नहीं ये तो पॉसिबल ही
हमेशा 1 थोड़ा डर तो बना रहता हो, माइंड में अगर आप किसी से मिलने जा रहे हो लाइन से तो थोड़ा डर तो बनाते है की पता नहीं कौन कैसे होंगे। 1 अंदर तो रहा होगा, 1 समय
तक रहता था लेकिन अब नहीं रहता है। क्योंकि अगर मैंने जो सोचा है उस लक्ष्य तक मुझे पहुंचना है। तो ऐसे बहुत लोग मुझे मिलेंगे, मैं 140 करोड़ लोगों को नहीं बदल सकती, पर मैं 1 तो शारिका में तो बदलाव ला सकती हूं। तो अब मैंने खुद को ही इतना स्ट्रोंग बनाने की कोशिश की है, या मैं खुद में ही इतना कह सकते हैं कि मजबूत हो गई हूं कि या तो मुझे इन लोगों के साथ काम करना नहीं है और अगर करना है तो कम से कम मेरे बारे में ऐसा न सोचे, यह मैं मेक शोर कर सकती हूँ। तो ये मैं इन द, वेरी, फर्स्ट, मीटिंग, ये क्लियर कर देती हूँ की ये बाउंड्रीज हैं, इन बाउंड्रीज के बाहर ही आप काम कर सकते हैं, इसके अन्दर आप नहीं आ स ये टम्स, इन कंडीशन, इफ, यू, वोमनऑंटोपिनर या आप सर्विस क्लास में भी हैं। तो आपको क्लेयर करना पड़ेगा लोगों को। और ये समय के रहते ही हम
सीख जाते हैं आपको बताए मतलब आप। तो अवेयर बहुत सारे छोटे बच्चे अवेयर नहीं होते न तो उनको मालिस किया जाता है, वो उनको गलत तरीके से देखा जाता है, टच किया जाता है। तो आप के में मेरे को बता रहे थे कि आपने इसमें कुछ किया है तो मैं जानना चाहूंगा कि आपने क्या अवैरनेस चलाइए इस में तो मुझे।
मैं इसे सोशल वर्क तो नहीं कहूंगी मगर मैं कहूंगी कि मुझे अपनी जिम्मेदारी निभाना बहुत पसंद है और जिस सोसाइटी में आप रहते हैं उसे कुछ देना, उसके लिए कुछ करना। ये सोशल वर्क नहीं है, यह आपकी जिम्मेदारी है जो आप निभाते हैं। जिस भी स्तर तक आप कर सकते हैं उस स्तर तक आप कीजिये। मैं जब 14 पंद्रह साल की थी तब मैं अपने घर से निकल गई थी और मैं जब बाहर निकली तो मैंने पहली बार सोसाइटी का वो रूप देखा जो कभी नहीं देखा था। क्योंकि 14 पंद्रह साल तक तो मैं अपने माता पिता के साथ थी बड़े प्यार से उनकी गोद में रहती थी। तो मुझे कभी उन समाज के भक्षकों से मैं मिली ही नहीं। लेकिन जब मैं बाहर निकली तो मैंने देखा लोगों की कितनी गन्दी नजरें होती है। मेरे खुद के साथ कई बार ऐसी ऐसी चीजें हुई कि मुझे लगा कि यार ऐसा क्यों हो रहा है। 1 समय ऐसा भी आया कि मुझे लगने लगा कि कहीं मुझमें तो कमी नहीं है। जो लोग मेरे साथ इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं इस तरह की खराब चीजें कर रहे हैं। यकीन मानिए 1 बार की बात ऐसी है कि मुझे यह पता भी नहीं था कि यह व्यक्ति जो मेरे साथ इस तरह का व्यवहार कर रहे है मैं बहुत लंबे समय तक उस बैड टच को समझ ही नहीं पा रही थी। रियली येस इट हैपन विद मी, it happn और वो बड़े क्लोज रिलेटिव थे और ये बड़ी खराब विडंबना है हमारी सोसाइटी की कि ज्यादातर इस तरह के किस्से जो होते हैं वो हमारे आसपास के लोग करते हैं। तो मैं हमेशा से इस चीज के लिए कुछ करना चाहती थी और जब मैं कानपुर में थी तो आरएन एक्टिविटीज और आजिंदीदेनिका 1 इनिशिएटिव शुरू हुआ प्रोजेक्ट शक्ति जिसमें मुझे काम करने का मौका मिला। जिसमें हम बहुत सारे अंडरप्रिवलेज या ऐसे स्कूल्स में जाते थे जो अंडरप्रिवलेज लड़कियां हुआ करती थीं और उनके लिए हम कॉम्बैट टेकनीक सिखाया करते थे उसेल्फडिफेंसयस सेल्फ डिफेंस, रोड, साइड सिनैरियो से कैसे बच सकते हैं। कोई आपको गलत तरह से टच करता है या आप किसी ऐसी सिचुएशन या कंडीशन में फंस जाते हैं जहां आपको डर लग रहा है और आपको वहां से निकालना है तो आप किस तरह से वहां से निकल सकते है वो सारी चीजें हम उन्हें सिखाते थे और मैं वहां उन्हें मेंसुरल, हेल्तेनहाइजीन, गुड, टच, बैड, टच, इन चीजों के बारे में बात करती थी। जब मैंने शुरू किया तब तो क्योंकि मेरे मैं भी बहुत यंग थी 20 21 साल की जो मेरे लिए नया था। धीरे धीरे जैसे जैसे मैं बच्चों से खुलने लगी, यकीन मानिये मैंने ऐसी ऐसी चीजें सुनी कि मेरे पैरों तले जमीन
खिसक गई बच्चों से।
जी हा हा बहुत सारी बच्ची आंखें कहती थी। मैं उनको बोल देती थी कि अभी मैं यहाँ 1 घंटा पीछे बैठी हूँ अगर आपको कुछ बताना है तो आप आकर बता सकती है। बच्चियां मुझे बताया करती थी कि मैम ये जो सर है न ये हमें इस तरह से दरवाजा बंद करके छूते हैं या टच करते हैं। या 1 बच्ची थी जिसके साथ तो बड़ा गलत हुआ भी था और वो किसी को बता नहीं सकी। इस तरह की बहुत चीजें और 12 किस्से नहीं हैं ये मतलब। ये मैंने कम से कम हजारों लड़कियों से बात की होगी। और ऐसे सैकड़ों किस्से थे। और ये वो लड़कियां थीं जिन्होंने हिम्मत करके मेरे सामने आकर बात करने की कोशिश किया, बताया या शेयर किया। 70 प्रतिशत लड़कियाँ ऐसी थी जिन्होंने यह बातें अपनी शेयर नहीं की। कभी किसी के साथ है, वो डरती है, उनके अंदर हिम्मत ही नहीं होती है। मैं सारे पेरेंट्स से आग्रह करना चाहूंगी कि प्लीज अपनी बच्चियों को गुड टच, बैड टच के बारे में अवेयर कीजिये। साथ ही साथ उन सबको ये बताइए कि अगर कभी भी कुछ भी होता है तो बच्चों। सबसे पहले आकर हमें बताइए बड़ी गलत और खराब चीज है कि बच्चे अपनी माँ से ओपन नहीं होते। नहीं बता पाते वो कंफर्ट माता पिता को देना पड़ेगा बच्चों को, जिससे वो आपको ये सब चीजें बता पाए। वरना आपका बच्चा कब किसी गलत चीज का शिकार हो जाए। आप नहीं जान पाएंगे इस चीज को। तो ये मैंने प्रोजेक्ट शक्ति किया और प्रोजेक्ट शक्ति से मैंने। खुद में भी बड़ा एम्पावर्मेंट महसूस किया। इसके अलावा बहुत सारे काम करती थी, वृद्धाश्रम में जाती थी, ओल्ड होम्स में काम किया, फुड डिस्ट्रीब्यूशन। मतलब जिस भी चीज को करने का मौका मिला वो मैंने किया। स्टूडेंट लाइफ में हम जितना सीख सकते हैं, नामित हम उतना कभी नहीं सीख सकते, क्योंकि उस समय हम स्टूडेंट होते है और सीखने का समय स्टूडेंट जोन का ही होता है। अभी मैं किताबों से पढ़ के सीख सकती हूं। लेकिन अब मेरी आज लिमिटेशंस हैं। मैं हर जगह नहीं जा सकती, हर तरह के लोगों से नहीं मिल सकती, हर काम नहीं कर सकती। मगर। उस समय जब मैं स्टूडेंट थी तो मैं हर जगह जाती थी, हर तरह के लोगों से मिलती थी, हर काम करती थी। औ और मैंने सबसे ज्यादा तभी सीखा। इसलिए अच्छी चीजें हम किताबों को पढ़े अपने कॉलेज के समय में लेकिन अलग अलग चीजों को भी ट्राय करें। क्यूंकि जिंदगी का मजा ही इस चीज में, जिंदगी में कई सारे रंग है। हम जीवन भर 1 ही रंग से अपने कैनवास को अगर रंगते रहेंगे तो उसमे कोई पेंटिंग ही नहीं बनेगी।
गौर गौर सो कितने बच्चे रहे होंगे, जो आपने प्रोजेक्ट शक्ति बताया कितने बच्चे रहे होंगे। जिनको आपने यह ट्रेनिंग दिया।
थोड़ा ऐसे कोई काउंटिंग तो नहीं है, पर मैं अंदाजा लगा सकती हूं। 10, 15 हजार के आसपास बच्चों से
इंटरेक्ट कर चुके वेरी ह्यूज नंबर बाई द।
वे हां काफी बड़ा है।
और भी ज्यादा काम नहीं था यह पूरा प्योर ऑफलाइन।
हांजी हांजी, आप मेरी प्रोफाइल पर जाकर देख सकते हैं। मैं ज्यादा तो सोशली एक्टिव नहीं हूं। मेरी टीम बड़ी इस चीज से नाराज रहती है। लेकिन मैंने कुछ कुछ चीजें वहां पर डाली हैं। तो आप जाकर देख सकते हैं कि हम कैसे उन बच्चों से इंटरैक्ट करते थे, 1 बार में कम से कम 203 सौ 500 बच्चियां हुआ करती थी। जिनसे हम बात करते थे और वीडियो
भी लगा दूंगा आपके इंस्टाग्राम के youtub
पे है दखेंगऐब्सोलूटली एब्सोलूटली जहाँ जब भी मौका मिले तो इस तरह की चीजें करते रहनी चाहिए। बहुत कुछ सीखने के लिए मिलता है और ये हमारी जिम्मेदारी है।
गोर बट आपको ही लगता कि ये एक्च्वालली फैमिली में ओपन होना जरुरी है क्योंकि इसे मैं अवैर हूं या फिर कोई लड़की छोटी वो अवैर है। बट फैमिली ही ओपन नहीं है, उसकी फैमिली उसको उल्टा डाल देगी, क्या पता उसको डर लगेगा तो क्या फैमिली को भी पेरेंट्स को भी थोड़ा। अगर आप कोई सजेशन देना चाहोगे तो आप क्या देना चाहते।
देखिये पेरेंट्स को तो अवैर होना, ओपन होना जरूरी है। लेकिन अगर वो नहीं भी है या नहीं भी हो पाते हैं तो बच्चियों को भी अपनी जो ग्लास शील्ड है वो तोड़ने पड़ेगी है ना पड़ेगा ये आप पूरी दुनिया को नहीं बदल सकते लेकिन आप अपने आप को बदल सकते है। बदलाव आप से शुरू होगा। अगर माता पिता नहीं समझ रहे। मेरे पिताजी को 1 समय तक ये चीज पसंद नहीं थी कि मैं लिखती हूँ लेकिन मैंने लिख कर जब उसमे करियर बनाया और आज मैं अच्छा कर रही हूँ तो वो खुश हैं। तो कभी कभी हमारे माता पिता कुछ चीजों को नहीं समझते है। गलती ये है की हम उन्हें समझाने लगते हैं, हम उन्हें समझते नहीं है, हमे भी उन्हें समझना पड़ेगा ये बिल्कुल वैसा ही 1 स्टिक को उतना बैंड कीजिये जहाँ तक वो बैंड हो सके टूट न जाए। हमारे माता पिता 1 लेवल तक चीजें समझ सकते हैं। जहाँ तक वो समझ रहे हैं, ठीक है वहां तक उन्हें समझाइए एम्पावर कीजिए। लेकिन सबसे पहले एम्पावरमेंट आपको अपने अंदर लाना है। मैं 1 एग्जांपल देती हूं जनरली आपके साथ कोई भी गलत सिनारियो होगा तो आप अकेले होंगे। उस वक्त तब होगा राइट पेरेंट्स के सामने तो नहीं होगा। वहां पेरेंट्स का रोल आता है। डेफिनिटली मगर, आपका रोल सबसे ज्यादा बड़ा है। यू शुड नो कि आपको सिनैरियो से कैसे निकालना है। वहाँ कॉन्फिडेंस, अवेरनेंस, कॉम्बैट टेक्निक्स ये सब चीजें काम आती है। ऐसा कई बार मेरे साथ हुआ है कि मुझे सौ नंबर डायल करना पड़ा पुलिस, बुलानी पड़ी। ऐसा कई बार मेरे साथ हुआ है। मुझे 10 90 डायल करना पड़ा क्योंकि ये बड़ा खराब स्टेटमेंट है, बोलते हुए दिल दुखता है। मगर ये सब चीजें महिलाओं के जीवन का 1 हिस्सा बन गई हैं। आप बाहर जाते हैं तो ईव टीजिंग होती है, लोग आपको गलत नजर से देखते हैं, लोग आपको घूरते हैं, लोग आपके कॉमेंट पास भी करते हैं, आप किसी सोसाइटी में बैठे होते हैं तो लोग आपको जज भी करते हैं। तो महिलाओं के साथ तो सुबह से लेकर शाम तक 50 चीजें ऐसी होती हैं। और अब हमें लड़ने की और उन चीजों के साथ जीने की आदत हो गई है। लेकिन आवाज उठानी चाहिए अपने आप को आप एमपावर करेंगे तो आप किसी भी चीज से निकाल सकते हैं।
ओके सो लेट्स। 20 से 24 साल के कोई स्टूडेंट्स देख रहे हैं। इस वीडियो को राइट बज। मेरी जो ऑडियंस है, वो ट्वेंटी ू थर्टी के बीच में मैक्सिमम लोग, एंड दे वांट टू स्टार्ट the ओन बिजनेस बट पैरेंट्स भाई, कॉलेज कर तो जॉब कर, सर्विस में ही रहे, क्या बिजनेस में रिस्क बात है और वो कैसे कनविंस कर सकते। मतलब आपने बोला स्टिक टूट जाए, उनको कैसे कनविंस करें।
तो ये सेम सिनारियो मेरे साथ था, मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं सिविल सर्विसेज करूँ। और अच्छी सोच थी उनकी डेफिनिटली अच्छी सोच है। लेकिन मुझे बिजनेस करना था। तो मैंने एकदम से सारी चीजें नहीं की। मैंने धीरे धीरे धीरे धीरे पढ़ाई के साथ अपने स्किल सेट को डेवलप किया, इंटर्नशिप किया, फ्रीलांस किया। और जब मेरे को लगा कि अब मैं अपना बिजनेस सेट अप कर सकती हूं, त धीरे धीरे स्विच किया। अगर मैं एकदम से अपने पिताजी को बोलती है लाइए, मुझे 5 लाख 10 लाख रुपए इन्वेस्टमेंट दीजिए और मैं अपना बिजनेस शुरू करती हूं तो शायद वो उतनी हिम्मत नही कर पाते। मगर मैंने फ्रीलांस किया, अपना पैसा कलेक्ट किया, पैसा कलेक्ट करने के बाद अपने बिजनेस में इनवेस्ट किया। देन स्लोली, मैंने अपना बिजनेस स्टार्ट किया। तो वो समझते हैं। देखिये, कोई भी माता पिता ये नहीं चाहते कि हमारा बच्चा दुखी रहे, उसे खाना न मिले। वो आपको जॉब के लिए इसलिए बोलते हैं क्योंकि वो सर्टेनिटी चाहते हैं। वो चाहते हैं कि आप 1 पीसफुल लाइफ चिए। लेकिन अगर मैं तो कहती हूँ जब रिस्क है तभी तो इस है तो रिस्क लेना, अगर आपको बड़ा करना है तो आपको रिस्क लेना। पड़ेगा। अगर माता पिता नहीं समझ रहे हैं तो आप उन्हें धीरे धीरे करके समझाइए, एकदम से सब कुछ उनके ऊपर मत डालिए डेफिनिटली। वो समझेंगे, अगर आप अच्छा करेंगे अपने करियर में, तो वह डेफिनिटली समझेंगे। आप अपनी स्किल साइट को इतना मजबूत कीजिए कि आपका क्लाइंट आपको, आपके नाम से, आपके काम से जानें।
इसमें मैं अपना एग्जामपल थोड़ा दूं।
डेफिनिटली सो।
मैं इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा था, लाइन ट्वेल्थ में सोचा की इंजीनियरिंग करना और मैं काम भी करता था अपना। तो वो लोग कहते थे कि यार काम हो, इतना क्या करते हो, पढाई करो। तो मैं उनसे कोई झगड़ता नहीं था, कोई लड़का नहीं था एंड। उसके बाद फिर ट्वेल्थ के एंड तक। मैं तो ढाई लाख अर्न करने लग गया था। तो वो कुछ बोल नही पाता, क्योंकि वो आलरेडी प्रूफ और रिजल्ट को देख पा रहे रहे। अब वो ज्यादा कुछ बोल नहीं पाते, क्योंकि there is प्रूफ राइट एंड। अगर मैं बोलता उनको शुरुआत में अगर मैं जीरो अर्न कर रहा हू, मैं बोलता कि मुझे बिजनेस करना है, मैं कम्पलीटली पढाई छोड़ने वाला हूँ, तो मेरे लिए भी सही नहीं है। तो आपने सही बोला कि हां, स्ट्रिक को इतना बैंड नहीं करना चाहिए कि वो टूट जाए। आप थोडा अर्न करके कांसेप्ट अप्रूव तो 2 राइट सो। आप ऐसे करते हैं कि कांसेप्ट अप्रूव
देना बहुत जरूरी है, थोड़ा सा एबसोलूटली बिल्कुल इम्पॉर्टेंट है। क्योंकि मैंने बोला आपके पेरेंट्स चाहते हैं कि आप 1 सर्टेन लाइफ जिएं, वो आपका बुरा नहीं चाहते। आप ऐसा सोचते हैं क्योंकि वो आपके अकॉर्डिंग चीजें नहीं बोल रहे है। तो आपको लग रहा है कि ये तो मेरा साथ ही नहीं दे रहे हैं। वो हमेशा आपके साथ है। आप इस फील्ड में अच्छा करें। किसी और फील्ड में अच्छा करें। प्रूफ योर सेल्फ दे विल बी, विद
यू, सर आपका बुक पब्लिशिंग हाउस भी है। आप दूसरों के लिए बुक्स वगैरह पब्लिश करते हैं। राइट येस सो आपकी अपनी बुक है।
अभी मैं अपनी 2 बुक्स पर काम कर रही हूँ। पिछले डेढ़ साल से मैं अपनी किताब पर काम कर रही हूँ।
थोड़ा सा रिलीज चाहोगे इस टॉपिक के बारे में, ये रिलीज होने बाद है।
वो 1 बार रिलीज होगी। एक्वल मैं बता देती हूँ। मैं 1 महिला के बारे में किताब लिख रही हूँ। किताब का नाम जब आएगा तो आपको समझ आएगा कि क्या है। 1 महिला जो ये रियल लाइफ स्टोरी है। 1 लड़की जो 1 बहुत छोटे से गाँव में जहाँ सड़क भी नहीं पहुँची है, वहाँ पैदा हुई है। वहाँ से पैदा होकर कैसे वो स्कूल के हेडमास्टर बनती है, यह आपका बुक का पूरा बिल, ये पूरी स्टोरी है। और मैं मुंशी प्रेमचंद जी की कई किताबें पढ़ चुकी हूँ। और जिस तरह से वो भारत के गाँव को, उनकी चीजों को नैरेट करते हुए मैंने कोशिश की, मैं उसे सी तरह से लिखूं। ये 1 उस महिला के बारे में किताब हैं जिनसे मैं बहुत इंस्पायर होती हूं। कैसे उन्होंने अपना जीवन बदला, अपने गाँव की पहली ग्रेजुएट महिला बनी और आज उनके गांव में हर महिला ग्रेजुएट हैं। तो ये उनके बारे में कहानी।
मैंने लिखी है सो बहुत सारे लाइन्स होंगे जो आपसे बुक लिखवाते होंगे। आपको कटिंग है आई सी ई गया, मैं तो लिख दूंगा राइट, बुक, फॉर मी, थोड़ा मैं प्रॉम, डालता रहूंगा, वो लिखता जाएगा। फिर मैं सेकेंड चैप्टर लिखवाऊंगा और लिखवाऊंगा तो थोड़ा मेहनत में आई के साथ करूँगा। मुझे आपकी जरुरत क्यों।
फिर देखिये आर्टिफिशिल इंटेलीजेंस, आर्टिफिशिल इंटेलीजेंस है, आर्टिफिशल है, उसमें इमोशनल इंटेलिजेंस, ह्यूमन इंटेलिजेंस
नहीं है भी नहीं है।
हम कह सकते हैं हां डेफिनेटली कल हो सकता है आ जाए। लेकिन अगर देखिये ये सारी चीजें ह्यूमन से हैं, ह्यूमन जिनसे नहीं है तो कोई भी चीज इतनी पावरफुल नहीं आ सकती। कोई भी दुनिया का लेंस इतना पावरफुल नहीं आ सकता, जितनी पावरफुल आपकी आंख का लें। ये कोई भी दुनिया की टेक्नोलॉजी इतनी पावरफुल नहीं हो सकती जितना पावरफुल आपका ब्रेन है। कभी भी आई आने के बाद बहुत सारे लोगों की नौकरियां गई हैं। मगर आप ये देखिए किन की नौकरियां गई हैं जो स्क नहीं है।
जो सिर्फ कोन्टीनाटिंगके नाम पे सिर्फ लिख देते हैं, बस दिमाग में जो आता है वो लिख देते हैं।
जो बेसिक लेवल का काम कर, जो बहुत बेसिक लेवल का काम करते हैं। जब कम्प्यूटर आया था तब भी लोगों ने उसका विरोध इसी तरह किया था कि अरे इस सिर्फ लाखों नौकरी आ जायेंगी। कंप्यूटर ने हमारी जिंदगी को आसान किया है। टेक्नोलॉजी हमारी लाइफ को ईजी करने के लिए आती है, बर्बाद करने के लिए नहीं। आती है। ए आई आने के बाद मुझे इतनी मदद मिली है कि मैं प्रोडक्टिव कामों में मैं और मेरी टीम ज्यादा समय दे पाते हैं। राइट हम जब किताब लिखते हैं तो किताब में बहुत सारी चीजें होती है, कांसेप्ट डिजाइनिंग होती है, सिनॉप्सिस होता है। इसके बाद किताब की स्टोरी लाइन डेवलप की जाती है, चैप्टर्स डेवलप किए जाते हैं। वो सारी चीजें जो ह्यूमन ब्रेन के साथ पॉसिबल है। डेफिनेटली हम भी एआई से मदद लेते हैं, लेकिन सिर्फ मदद लेते हैं। वो हमारा पूरा काम नहीं करता। आप कभी देखिएगा एआई के जो एआई द्वारा लिखे हुए जो आर्टिकल्स होते हैं वो रैंक नहीं करते हैं, बिलकुल नहीं है।
मैं बताता हूँ। बहुत सारे ब्लॉक है। जो एआई से लिखते थे, वो 2 साल बहुत कम आये क्योंकि उतना अपडेट नहीं आया। 1 अपडेट google go वो खत्म हो गए। पूरे ब्लॉक से। मेरे बहुत सारे फ्रैंड्स हैं, जो ब्लॉगिंग करते थे, आई से लिखते थे। सो पूरे। उनका जो रेवेन्यू 2, 3 लाख प्रबंध जीरो पर आ गया। आप ये बात सही बोल रहे।
कंटिन्यू कर येस? क्योंकि इसका कारण सिर्फ यही है। क्योंकि यह टेक्नोलॉजी ह्यूमन से हैं। ह्यूमन इन टेक्नोलॉजी से नहीं है। गूगल या बड़े, बड़े, स्टार्ट अप्स या बडे बडे बिजनेस। ये सभी जानते हैं कि ह्यूमन इंटरफेस ह्यूमन टच इम्पोर्टेंट है यस और इसलिए ये भी सपोर्ट नहीं करते। उस चीज को तो आई आपकी जिंदगी आसान बनाएगा। अगले 10 साल 20 साल में लाइफ बहुत बेहतरीन कर देगा। मगर ये सब मितकी कॉन्टेंट राइटिंग की नौकरी चली जाएगी या ये हो जाए। ऐसा कुछ भी नहीं है। इस हेल्प्स लॉट हम खुद चार्ट जीपीटी से कई बार आइडियाज ले लेते हैं कि किस तरह से हम और चीजों को बेहतर कर सकते हैं। फिर हम अपने आइडियाज उसमें इम्प्लीमेंट करते हैं। हम टेक्नोलॉजी के साथ मर्ज होकर काम करेंगे। इसी को तो फ्यूचर बोलते हैं।
मैं। 1 ई बुक लिख रहा था। मैंने सोचा कि पहले मैंने बहुत मेहनत किया, अपने हाथ से। ई बुक डॉक्स में लिख रहा था। उसके बाद कम देते हैं। आई ने बुक बहुत लिख दिया, बहुत सारे लिख दिया मेरे को। मजा लिटरली। ऐसा लगा था कि वो किसी और ने लिखा है या फिर आई ने ही लिखा है। तो पता चल जाता है कि यह नहीं लिखा है। कुछ वर्ड्स ऐसे यूज करते है। कॉमनली पता चल जाता है हम राम डाले की वो वर्ड्स में इस्तेमाल करो।
बट।
फिर भी ह्यूमन टेस्ट तो आ ही नहीं सकता। अभी अभी के हिसाब से तो नहीं आ सकता। इन फ्यूचर वी नेवर नो बट। वो इतना तो कभी नहीं हो पायेगा कि ह्यूमन से मैच कर पाए।
हमारे पास जो क्लाइंट्स आते हैं, सबसे पहले यही बोलते हैं। मैडम आया तो यूज नहीं करेंगे।
आप गैली एग्जैक्टली जो मैं फ्रीलांसिंग सिखाता हूँ लोगो को। बहुत सारे लोग तो बहुत सारे कोंटे उसमें वो यही बोलते हैं। सर बोलते है। पहला क्वेश्चन ही क्लाइंट पुछते है। ए आई सी तो नहीं लिखोगे। आप तो ये बात तो है।
क्योंकि रैंक नहीं करेगा। वो गूगल की जो क्रॉलिंग है आप उसको अंडरस्टैंड कीजिए वो रैंक ही नहीं करेगा। क्योंकि आप जो लिख रहे हैं सेम टॉपिक पर 10 लोग लिख देंगे। बिल्कुल सेम तरीके से। क्योंकि प्रॉम्ट अगर सेम हो गया तो सेम तरीके से लिखा हुआ आर्टिकल आएगा। अब उसमें कुछ अलग चीज तो है नहीं न। और गूगल लोग क्यों सर्च करते हैं। सिर्फ इसलिए कि उनको डिफरेंट चीजें मिल पाए हैं। अलग अलग पॉइंट व्यू ओपिनियन मिल पाए। तो इसलिए ए आई को इस्तेमाल कीजिये आई के साथ आगे पढिए। यह मत सोचिए कि वो आपको खत्म कर देगा। अगर आपके अन्दर स्किल सेट है तो डेफिनेटली कोई भी चीज आपको सपोर्ट कर सकते हैं, फिनिश नहीं कर सकते हैं।
आजकल जो यू है वो भटक रहे हैं। थोड़ा मतलब वो ट्रेडिंग कर रहा था कि जल्दी पैसा कमाएगा थोड़ा। क्यों फालतू के स्किल सीख जाए। वो ट्रेडिंग करते हैं। आपको पता है बहुत सारे स्कैम्स भी हो रहे हैं। कुछ लोग कलर ट्रेडिंग करते हैं, कलर पता नहीं क्या होता है, उसमें तो क्यों भटक रहे हैं लोग। मतलब वो 1 स्किल सीख के प्रोपर काम क्यों नहीं करना चाहत है।
आपको क्यों लगता है इसमें बहुत सारी चीजें हैं। देखिये ह्यूमन रिटेंशन डिजिटलाइजेशन के बाद बहुत कम हो गया है। पहले हमें कोई जानकारी लेनी होती तो हम किताब ढूंढा करते थे, किताब ढूंढ के उस किताब को पढते थे। उस किताब में से इंफॉर्मेशन निकालते थे। आज हम 1 प्रॉम डालते हैं, गूगल पे और हमें सारी चीजें मिल जाती हैं। यहां तक भी ठीक था। समझ में आती थी चीजें। इसके बाद जब ये वीडियोज का कल्चर चला। अब हमें कौन क्या इनफार्मेशन दे रहा है। हमारे ब्रेन में क्या फीड हो रहा है। हमें कोई आइडिया नहीं है। यू ट्यूब आया। यू ट्यूब पर लोग 8, 10, 10 मिनट के वीडियोज बनाने लगे। रिटेंशन हमारा कम हो चुका था। क्यूंकि हम जो किताब से निकालते थे या गूगल से निकालते थे, उसको और ड्यूरेशन कम कर दिया गया। कि भाई हम सब कुछ कंपाइल करके आपको यहां पर दे देंगे यानि आपके दिमाग को अब कुछ काम ही नहीं करना। उसके बाद आया रील्स और शॉट। आज हमें 30 सेकंड में स्टोरी चाहिए। राइट इस चीज का इम्पैक्ट हूमन साइकॉलोजी पे इतना बुरा है कि आजकल के जो नए बच्चे उनमें नए नए डिसॉर्डर्स बनने लगे। आज के जो नए त है उसमें नए नए डिसॉर्डर बनने लगे। लोग 1 दूसरे की बात सुन नहीं पाते हैं। 1 दूसरे को समय नहीं दे पाते हैं। आप कोई बात बोल रहे। मेरे अंदर इतना रिटेंशन का पॉवर ही नहीं है कि मैं आपकी बात को समझ पाऊं। क्यूंक्योंकी मुझे 30 सेकेंड में स्टोरी सुननी है।
जब आप के लिए अपने साथ समय नहीं बता पाते हैं। उनको हमेशा कॉल करना है।
हम जल्दी जल्दी जल्दी जल्दी में उस चीज का जो एक्चुअल ब्रेन को मिलने वाला है या बॉडी को मिलने वाला न्यूटेशन है, वो खत्म कर चुके हैं। देर इज नथिंग लेफ्ट। आजकल लोगों को 5 मिनट में खाना बना हुआ चाहिए। कैसे बन जाएगा उसमें न्यूट्रीशन ही नहीं है। वो आपके शरीर के लिए अच्छा ही नहीं है। तो यूथ के भटकने का सबसे बड़ा कारण डिजिटलाइजेशन है। वो पॉवर ऑफ डिजिटलाइजेशन को नहीं समझ रहे हैं। आपके इन्टरनेट पे अच्छी चीजें भी हैं, बुरी चीजें भी हैं। आपको चुनाव करना है और यूथ को चुनाव नहीं कर पाता। जनरली जो चीजें आसान होती है, वो हमारे लिए बहुत अच्छी नहीं होती है। जैसे बर्गर खाना आसान है, मगर जिम जाना थोड़ा मुश्किल है। बट हमारी बॉडी के लिए बेटर क्या है, जिम जाना एग्जैक्टली ना कि बर्गर खाना राइट। तो जो चीजें, जो रास्ते, जनरली आसान दिखते हैं, वो रास्ते अक्सर हमारे लिए अच्छे नहीं होते। मगर क्यूंकि हमारे अन्दर ना पेशेंस हैं, न हमारे अंदर अब रिटेंशन है, न हमारे अंदर अंडरस्टैंड करने की क्षमता है, न हमारे अंदर खोजने का जज्बा बचा है। किसी भी चीज को याद करने का, सीखने का जज्बा बचा है। इसकी वजह से हम क्या करते है। 1 आसान रास्ते का चुनाव कर लेते हैं और जनरली लोग उस चीज पर भटक जाते हैं। लेकिन आप यह मानिए या मत मानिए। जितने भी लोग अपनी जिंदगी में आगे बढ़े हैं या कुछ अच्छा कर रहे हैं। उ उन्होंने 2 साल, 3 साल, 4 साल अपनी स्किल सेट पर काम किया है, मेहनत की है, तभी वो यहां पर पहुंचे हैं। चाहे आप महेंद्र सिंह धोनी को ले लीजिये, चाहे आप लता मंगेशकर को ले लीजिये, चाहे आप ए पी जे अब्दुल कलाम को ले लीजिये, ये तो बहुत पुराने लोग हैं। चाहे आप मार्च जुकरबर को ले लीजिये, आप लॉन मस्क को ले लीजिये। आप इनको पढिए इन्होंने कितना कितना साल अपनी फील्ड को दिया है, क कितनी छोटी उम्र से ये लोग काम कर रहे थे। तो जल्दी मिलने वाली सक्सेस पर्मानेंट नहीं होती है। जनरली टेम्परेरी होती है। अगर आपको लंबी रेस का खिलाड़ी बनना है तो वो स्टैमिना अपने अंदर डेवलप करना पड़ेगा। वो स्टैमिना डेवलप करने के लिए लगती है। मेहनत उसैन बोल्ड कुछ सेकेंड की स्प्रिंट मारते हैं, जिसके लिए वो पूरे साल मेहनत करते हैं। आपको पता है 1122 सेकंड की फाइट के लिए 6677 महीने, 10 10 घंटे
के के के लिए भी वो लड़ते हैं।
10 10 घंटे काम करना पड़ता है तो चीजें डेवलप होती है। समय के साथ। अगर हम समय नहीं देंगे तो हम न स्किल डेवलप कर पाएंगे, न जिंदगी में कुछ बेहतर कर पाएंगे। शार्टकट आपको आपकी मंजिल तक नहीं पहुँचा सकता। 1 डेस्टिनेशन तक पहुंचा सकता है मगर वहाँ तक पहुँचने के लिए तो आपको रास्ता पूरा तय करना पड़ेगा।
कोई हार्डवर्क का सब्सिट्यूट नहीं है, बिल्कुल भी नहीं है।
हार्ड वर्क में थोड़ा सा बिलीफ कम करती हूँ। स्मार्ट वर्क कीजिये। आप गधे की तरह काम नहीं करना है, स्मार्ट वर्क करना है। लेकिन शार्ट कट के पीछे मत भागिए है कि 2 घंटे में मैं ट्रेडिंग सीख लूंगा। इसलिए तो पैसा डूब रहा है। आपका 2 घंटे की स्मार्ट क्लास में आप कैसे ट्रेडिंग सीख लोगे, कैसे स्टॉक मार्केट सीख लोगे। स्टॉक्स की प्रॉपर स्टडी होती है, पूरी हायर की निकाली जाती है। इस कंपनी का स्टॉक। अगर आगे बढ़ेगा तो क्यों बढ़ेगा इसका स्टॉक व र द। थिंग्स दे, आर, इन्वेस्टिंग, इन, ये सस्टेनेबल चीजों पर काम कर रहे हैं या सीज पर काम कर रहे हैं या ये किसी फ्यूचर टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं। क्योंकि हम भी बिजनेस केस स्टडीज में हेल्प करते हैं, रिसर्चेज में हेल्प करते हैं। तो हम भी ये सब चीजें पढ़ते रहते हैं। मगर हमें उतना ज्ञान नहीं है कि हम स्टॉक्स और शेयर्स में ट्रेड करे। तो हम नहीं करते। तो अगर कोई भी काम करते है उसपर रिसर्च कीजिए, उस फील्ड को 1 साल, 2 साल दीजिए और देखिए आप कैसे एक्सेल करते हैं इस डिजिटलाइजेशन की पॉवर का इस्तेमाल कीजिए
गॉड इंटरस्टिंग सो मेरा नेक्ट। क्वैशचन यह है कि आप स्क्रिप्टिंग करते हो अच्छेअच्छे लोगों के लिए बड़े बड़े, अपनी मूवीज में भी अपना पार्ट निभाया। स्क्रिप्टिंग में मैं यूट्यूबर हूँ। मेरे को 1 वीडियो स्क्रिप्ट करना है तो 1 स्ट्रक्चर क्या होना चाहिए। क्योंकी मेरे को दिक्कत आती है। स्क्रिप्टिंग में ज्यादातर पॉइंटर बना लिया। ऐसे से एंड। फिर वीडियो स्टार्ट हो गया। बीच बीच में रोक रोक के पॉइंट कम्प्लीट हो गया। सो क्या तरीका होना चाहिए। स्क्रिप्ट का अगर आप शार्ट में बता पाओ। ताकि लोग समझ पाए की दराती हो गया। ऐसे बहुत सारे हैं, मोह हो सो लोग स्रिप्स कैसे करते है। वो उनका क्या तरीका होता है। थोड़ा सा बताओ मेरे हां तो 1
जनरल स्ट्रक्चर है जो आप इस्तेमाल कर सकते हो। वैसे तो क्या होता है कि हर वीडियो के साथ, हर टॉपिक के साथ थोड़ा बदलाव आता है, स्ट्रैटेजी बदलती है। लेकिन 1 जनरल स्ट्रक्चर की। अगर मैं बात करूं कि हम किस तरह से काम करते हैं। सबसे पहले तो हम एस ओ बेस टॉपिक्स ढूंढते हैं कि मार्केट में आपकी नीच में क्या चल रहा है। अगर आप 1 हेल्थ कोच है, आप 1 बिजनेस कोच है, आप 1 फाइनल्स कोच है, आप किसी और चीज के बारे में बात करते हैं तो आपकी फील्ड में क्या चल रहा है। तो वो बहुत सारे टूल्स आपको मिल जाएंगे जहां से आप को वो टॉपिक मिल जाते हैं। जब आपको वो टॉपिक मिल जाते हैं, ट्रेंडिंग टॉपिक के लोग ये सर्च कर रहे हैं। अब आप उस टॉपिक को लेकर कीजिए। रिसर्च रिसर्च करने के लिए आप गूगल का इस्तेमाल कर सकते हैं। मगर ऑथेंटिक वेबसाइट का इस्तेमाल कीजिए। जैसे इकॉनमिक टाइम्स है, बिजनेस टुडे है, लाइवमिंट है, द हिंदू है, मनी कंट्रोल है। ऐसी बहुत सारी आपको वेबसाइट्स मिल जाएंगी। अच्छी जहां से आप रिसर्च करके कंटेंट को निकाल सकते हैं। हमने बहुत सारे सब्स्क्रिप्शंस ले रखे हैं, सबस्क्राइब भी कर सकते हैं। यह बहुत सारे आपको फ्री आर्टिकल भी मिल जाते हैं। गवर्नमेंट वेबसाइट्स आप प्रेफर कर सकते हैं। पी आर एस हो गई है न। बहुत सारी वेबसाइट्स। गवर्नमेंट वेबसाइट मिनिस्ट्री की वेबसाइट है, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की वेबसाइट है। वहां से आपको बहुत सारे, बहुत सारी चीजें, बहुत सारी डीटेल्स मिल जाती है। ऑथेंटिक वेबसाइट से हम रिसर्च करके उसका 1 रिसर्च डॉक्यूमेंट बना लीजिए। हायरार्की में जैसे मान लीजिये आप पारले जी के ऊपर कर रहे हैं रिसर्च। तो पार्ले जी की शुरुआत कहां से हुई, क्या आइडिया था उस समय मार्केट कैसा था, प्रोडक्ट में इनिशियल इनोवेशन किस तरह से की गई। उसके बाद आज मार्केट कितना बड़ा है, कैसे पार्ले जी ने मार्केटिंग की किस तरह से उसने पेबेट किया मार्केट में या किस तरह की स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल किया। आज क्या है फ्यूचर में क्या करने वाले कॉम्पेटिटर्स कैसे है? मार्केट में किस तरह के बदलाव आ रहे है। सारी चीजें आपने लिखी रिसर्च बना लिया। अब उस रिसर्च को बैठ कर देखिए कि अब इससे मैं कहानी कैसे निकाल सकता हूं। जब उस रिसर्च को आप देखेंगे, धीरे धीरे उसको 1 स्क्रिप्ट में कनवर्ट कीजिए। हम स्क्रिप्ट में जनरली 1 हुक रखते हैं, 1 ब्रिजिंग रखते हैं उस ब्रिज को कनेक्ट करते हैं स्टोरी से जो आपकी बीच की बॉडी है। बॉडी के बाद 1 ब्रिज होता है जो कनेक्ट करता है आपके काल्टू एक्शन क ो भी आपका बाद में कनक्लूजन होगा, काल्टू एक्शन होगा। ये 1 जनरल स्ट्रक्चर है जिससे हम यूजुअल ली फॉलो करते हैं।
अरे वाह मतलब। मैं कहाँ आपको छोड़ता हूँ क्योंकि हमलोग इतना रिसर्च कर नही पायेंगे जो हम लोग एक्सपर्टीज है। मैं उसपर फोकस करूंगा बर। मेर को समझ आ गया कि बेसिक स्ट्रक्चर क्या होना चाहिए। स्क्रिप्टिंग का नेक्स्ट टाइम में मैं थोड़ा यूज भी करूंगा की हर 1 चीज नोट कर लिया है एंड देन ट्राई तो गिव अ प्रॉपर हुक ब्रिज करना स्टोरी से एंड उसके बाद स्टोरी ही कैसे स्टोरी से ले जाके कंटिन्यू कर सके बक बोलते हैं उसको की स्टोरी सेल्स बिकता स्टोरी अगर बचपन से ही सुनते आ रहे है। कहानी सुनते आ रहे है। सो वही बिकता है। अगर स्टोरी है कहीं सब लोग डॉक्टर विवेंद्र को देख लीजिये। दुरराठीदेखलीजिये सब लोगों ने जो अपना यूट्यूब चैनल ग्रो किया, दे हैव आल यू स्टोरीज सो स्टोरीज की पॉवर बहुत है। आप भी बहुत सारी स्टोरीज सुनाते हो। र क्पर्टबकआपकोभ काम है कोनटनक्रएनस्किपटिं अमेजिंग मैं
हमेशा बोलती हूँ मेरे जितने भी क्लाइंसआतेहैमार्केट में कभी भी प्रोडक्ट नहीं बिकता। आपकी कहानी बिकती आप प्रोडक्ट के साथ कहानी जुड़ी आप मार्केट में जब टाटा का नमक लेने जाते हैं तो आप भरोसा लेने चाहते हैं। जब आप पतंजलि का प्रोडक्ट लेते हैं तो आप स्वदेशी चीज लेने चाहते हैं। राइट। तो हर 1 ब्रांड जिसने एक्सेल किया है ग्रो किया है उसके साथ 1 कहानी जुडी है। तो क्योंकि ह्यूमन साइकोलॉजी सिर ऐसे ही काम करती है। हम बचपन से दादी नानी की कहानियां सुनते हुए बड़े हुए, हम स्कूल में गए तो हमें स्टोरी बुक्स पकड़ा दी गई। उसके बाद हम बड़े हुए तो हमने मुंशी प्रेमचंद की कहानियां पढ़ी। हम और बड़े हुए तो हमने स्कूल में, कॉलेज में जाकर हमने नॉवल्स पढ़नी शुरू कर दी। तो हम बचपन से बड़े होने तक कहानियों में ही रहते हैं।
सही बात है।
और हमारा ह्यूमन ब्रेन जो है वो डेटा फैक्ट्स भूल सकता है। पर स्टोरी नहीं भूलता कभी भी तो इसीलिए कभी भी आपके ब्रांड के साथ 1 कहानी जुडी होती है तो लोग उससे ज्यादा कनेक्ट कर पाते हैं और आप जल्दी ग्रो कर पाते हैं।
गोर गोर इट परफेक्ट समझ गया मैं सो अब जो हम लोग का पार्ट आया थोड़ा रेपीडफायआराउंड है। ऐसे में आपको कुछ ऑप्शन दूंगा सो it is a वन पार्ट उसके बाद दोबारा भी आयेंगे कंटेंट पे सो इसमें मैं कुछ आपको कुशन पूछूंगा एंड यू हैव टू आंसर इन लाइक वन और टू वर्ल्ड्स और मैक्सिमम वन सेंटेंस ready
येसलकdीoरकॉफी नथिंग वाई क्यूंकि दोनो चीजों की आदत लग जाती है और मैं नहीं चाहती कि मुझे जिंदगी में किसी भी चीज की आदत लगे।
ओके ओके नाइट आवल और मॉर्निंग पर्सन
i m a नाइट आव।
आप देर तक रात में काम करना पसंद करते हैं।
मैं करती हूं पसंद, तो मैं कोशिश करती हूं सुबह उठने की पर हो
नहीं पाता वन ब्रैंड यू ड्रीम टो
कोलैबरेट विद, आई ड्रीम टो कोलैबरेट विद पर ओके क्यूंकि मुझे लगता है कि वो जिस तरह से अपने आप को मार्केट करते हैं, महिलाओं की कहानियां लेकर आते हैं, वो मुझे बहुत अच्छा लगता है और मैं उनके साथ काम करना चाहूंगी। मुझे लगता है मैं कुछ बेहतर कर
सक आपकी टीम में कितने लोग है?
अभी हमारी टीम में वी आर ट्वेंटी
पीपल कितनी महिलाए है, उसमे हमारे पास
सिर्फ 3 पुरुष हैं।
बाकी सारी महिलाएं, ऐसा क्यों सारी महिलाएं क्यों कर रखी है? क्या लड़के काम नहीं करते?
नहीं, नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। लड़के काम करते है, बहुत अच्छा काम करते हैं। मैं जब ये बात निकली है तो मैं कहना चाहूंगी कि मेरे यहाँ तक पहुँची। मेरी में पुरुषों का बहुत बड़ा हाथ रहा है। चाहे वो मेरे मित्र रहे हो, चाहे मेरे पिताजी रहे हों, चाहे मेरे भाई हो, चाहे मेरे गुरु, चित्रेशलरहों, चाहे मेरे बाकी सपोर्टर्स रहे हों। तो पुरुषों ने मुझे बहुत सपोर्ट किया। आगे बढ़ने में तो ऐसा नहीं है। पुरुष काम नहीं करते हैं, लेकिन क्या होता है कि महिलाएं घर पर रहती हैं तो उन्हें काम नहीं मिलता है। अगर हम ही यह काम उनको नहीं देंगे, हम ही उनकी हेल्प नहीं करेंगे तो कौन करेगा? तो बहुत सारी लेडीज। हमारे साथ जुड़ी हुई, जिनके बच्चे हैं, फैमिली हैं, उनको जॉब छोड़ना पड़ा, तो हम उन्हें वर्क फ्रॉम हो अपॉर्चुनिटी दे देते हैं। दे आर, टैलेंटेड, इन ऑफ अपनी फैमिली भी संभाल लेती हैं, हमारे साथ काम भी कर लेती हैं और फिनेंशियल एम्पॉवर हो जाती है। तो यही हमारा गोल है कि हम ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को फिनेंशियल इम्पॉवर कर पाए, उनके कॉन्फिडेंस को वापस ला पाए। जनरली शादी के बाद बच्चों के बाद महिलाएं अपना कॉन्फिडेंस लूज कर देती है, तो वो कॉन्फिडेंस उन्हें हम वापस दे पाए।
गौर बिजनेस और जॉब बिजनेस, ओके एंड क्या जॉब करना खराब चीज है?
नहीं, जॉब करना खराब चीज बिल्कुल भी नहीं है। अगर आपका टेम्परामेंट वैसा है, अगर आपको रिस्क नहीं लेना है, मुझे जहाँ तक पहुँचना है, वहाँ तक मैं नौकरी के साथ नहीं पहुँच सकती। मेरा विजन जो है, जो मेरा परपज है, वहाँ तक जॉब के साथ जाना मेरे लिए पॉसिबल नहीं है। इसलिए मैंने बिजनेस को चूज किया है। अदर वाइज जॉब इज आलसो अ वेरी
गुड, ऑप्शन आपको रेडियो में काम करना ज्यादा पसंद है या फिर अपना खुद
का मुझे अपना खुद का काम ज्यादा पसंद है।
ओके आपने रेडियो कब छोड़ा था मैंने
2017 18 रेडियो किया है उसके बाद मैंने पोडकास्ट किया है 3 साल तो और अभी भी मैं वॉइसओवर कर रही हूँ तो प्रोफेशनली शायद ऑफिशियली कह सकते हूँ रेडियो छूट गया है लेकिन वो अभी भी गले में है अभी भी बहुत सारे लोगों के वाइस ओवर करने
होते है और आपको वाइस ओवर करना वेलकम टू, द पोडकास्ट, आवर नंबर न शो, फॉर, डिजिटल, ऑन बार करो हई
वेलकम, to the podcast, आवर नंबर ने पोडकास्ट, फॉर, डिजिटल, ऑंटरपेनeर्सये आपका नेचुरल है मुझे ये सब चीजें बहुत पसंद है मैं अलग में कार्टून की आवाज निकालती हूँ रिटेल करती हूँ अपने फ्रेंड्स को
1 बार जरा
तुम्हें डोरेमॉन की आवाज बहुत निकालती हूँ मै बोलती थी नोबिता अब तुम्हें 1 भी कैच और नहीं मिलेगा कोई और जैसे हम नोबिता की आवाज निकाल सकते है डोरेमोन आज सुनिए ने मुझे फिर से मारा एग्जैक्टली
अगर आप कोंटेन क्रिएशन या फिर स्क्रिप्टिंग ये काम नहीं कर रहे थे तो आप क्या कर रही होती सोशल वर्क पक्का
येस मेरा कोई एनजीओ होता या मैं कहीं ऐसी जगह काम कर रही होती।
ओकagodthatisnडपिड फाय राउंड ना मैं आपसे कुछ क्वेश्चन पूछूंगा एंड इसका रॉंग आंसर ही देना है। so it is called round and sarson। so you ready yes mera pehla sawal है। what is the secret of perfect condnationsleping? what s your name anvovsermaapke eitenyersokay, what s e favrate tool for coniitincयजबीड,
ye
wala bhotzatawhat inspire to start contangration
m
nde sing धhonyhowdou prepare for important meeting
i eat in i sleep okay
whats or prades achivement?
प्लेइंग क्रिकेट क्रिकेट पसंद है मुझे स्पोर्ट्स बहुत पसंद है चली मैंने यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स खेला भी है नेशनल खेला है मैंने शार्ट पुट डिस्कस रो में यूनिवरसिटी इसमें
थोड़ा सा बताओ न कैसे मतलब यहाँ
पर कैसे हुआ मुझे स्पोर्ट्स करना था बट व नोट फिजिकली बहुत ज्यादा फिट या मैंने बचपन से स्पोर्ट्स नहीं किया क्यूंकि वज आलवेज टू बुक्स स्टडीज लेकिन मेरे अंदर था के मुझे करना है तो मैंने अपने बैचमेट को बोला की भाई मुझे ट ट्राय करना है यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स के लिए तो 1 साल मैंने ट्राय किया मेरा नहीं हुआ दूसरे साल ट्राई किया नहीं हुआ, तीसरे साल ट्राई किया नहीं हुआ। मैंने फोर्थ हियर सोच लिया था मैंने कहा अभी तो जाना ही है तो मैंने कोशिश की सीखने की शार्ट पुट डिस्कस हर बर और 1 डायलॉग है न कि जब आप किसी चीज को शिद्दत से चाहते हैं तो पूरी कायनात आपको उससे मिलाने की कोशिश में लग जाती है तो मुझे कोच मिले नीरज शर्मा जिन्होंने इंटरनेशनली और नेशनल इंडिया के लिए बहुत सारे मेडल्स लाये हैं। वो वो पुलिस में थे। ऑलरेडी। उन्होंने देखा कि भई ये बच्ची सीखना चाहती है, तो उन्होंने मुझे ढाई 3 महीने कोच किया। मैंने सीखा है देन। फिर मुझे फाइनली नेशनल्स में परफॉर्म करने का मौका मिला। ऑल 2 मैं। वहां कोई मेडल नहीं ला पाई। बहुत नेल खेलो येस यूनिवर्सिटी, ज में यूनिवर्सिटी नेशनल्स खेला है। मैंने इंटर यूनिवर्सिटी। उस समय था वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी। तिरुपति। तो वो फिर मेरा 1 सपना पूरा हो गया कि मुझे नेशनल खेलना था।
सो आपका विजन क्या है? आगे जाके आपको अगर मैं पूछा 5 साल में क्या अचीव करना है।
अगर मैं विजन की बात करूँ तो अगले 5 साल में हमारा विजन है कि हम लगभग 10 हजार ऐसी किताबें छापें जिनमें हम इंडियन स्टोरीज को, इंडियन लोगों की कहानियों को एम्पावर करें, उनको किताब के फॉर्मेट में क्रिएट करें और उन्हें नेशनली इंटरनेशनली लोगों तक पहुंचाएं। हमारे ब्रांड का नाम है हमारे जो फॉर्म है पब्लिशिंग हाउस, स का नाम है टी एस पब्लिकेशन। इसका फुल फॉर्म है ट्रूथ एंड सोशल। इसके पीछे आइडिया ये था कि लोग जनरली ये कहते हैं कि जो सच होता है वो बहुत सामाजिक नहीं होता, लोग उसे एक्सेप्ट नहीं करते। लेकिन हम इस मिथ को ब्रेक करना चाहते हैं। हम सच भी बोलेंगे और डंके की चोट पर बोलेंगे इस तरह बोलेंगे कि समाज से दिल खोलकर बाहें खोलकर न सिर्फ, एक्सेप्ट करेगा, मगर पसंद भी करेगा। हम ये जो मित है, झूठ बोलना चाहिए या सच छुपाना चाहिए, इसे ब्रेक करेंगे हम अपनी किताबों में सच्ची कहानियां लेकर आ रहे हैं और हमारे साथ इतने कमाल के लोग जुड़ रहे हैं कि अगले 1 साल 2 साल में मुझे लगता है कि आपको कुछ ऐसी बेहतरीन बुक्स पढ़ने के लिए मिलेंगी कि पढ़कर खुद आप और हम इंस्पायर होंगे।
गोड गोड एड सो। अगर किसी को बुक लिखना है स्टार्टिंग से उसको हेल्प चाहिए या फिर वो चाहता है कि मेरे साथ आप बेटिंग कर लो एंड देन आप लिखो उसका स्टोरी पूरा सो हो। दे कैन रीच आउट टो यू।
मैं आपको अपना ईमेल और अपना सोशल मीडिया अकाउंट का डिटेल्स भेज देती हूं आप वो लिंक यहाँ पर, डाल दीजिए, डिस्क्रिप्शन में दे कैन रीच आउट टू मी ऑन इंस्टाग्राम एंड दे कैन सेंड इन ईमेल। तो हमारी टीम उन्हें वापस कॉन्टैक्ट कर लेगी। अगर किसी के पास कोई आइडिया है और उन्हें लगता है कि वो किताब नहीं लिख पा रहे तो हमारी टीम उन्हें सपोर्ट करेगी लिखने में भी। और अगर आपके पास लिखी हुई कोई किताब है तो उसे प्रूफ रीड करके, 1 बुकलेट में या बुक में तैयार करके उसे प्रिंट करने का भी हम काम कर सकते।
सो यू प्रोवाइड एंटोएन बुक रेटिंग सर्विसेस ऐबसोलूमब from rti तो पब्लिशिंग to the एंड यस एंड।
तो मार्केटिंग आलसो मारके इफ यू वांट की हम आपकी बुक को मार्केट करने में हेल्प करें तो हम वो भी कर सकते हैं।
अरे वाह परफेक्ट बहुत सारे लोग जो बुक चाहते हैं, बट एक्वलीसबसेबडा ये होता है कि यार पूरा आइडिया, उनके पास सब कुछ है, पूरा न लिखनी बाते, they are not have stories the no, so many thing, but they are not राइटर्स and the डू नो, how to tell the स्टोरी सो, उसमें आप मदद करोगे।
येस टीएस पब्लिकेशन का मोटो ही यह है कि आपके पास किस्सा है, कहानी है, कुछ बात है जो आप कहना चाहते हैं, कोई लाइफ का एक्सपीरियंस है जो आप लोगो के साथ शेयर करना चाहते हैं तो हम आपके साथ हैं कोई आपकी किताब नहीं भी छापेगा तो हम आपको लिखने में भी मदद करेंगे। आपकी किताब छापने में भी मदद करेंगे। क्योंकि मैं विश्वास इस चीज में रखती हूं कि हर इंसान के पास कहानी है, हर इंसान के पास एक्सपीरियंस है और हर इंसान 1 किताब लिख सकता है और लिखनी चाहिए इंटरनेशनली आप देखें मैक्सिमम लोग बुक राइटिंग में इन्वेस्ट करते ॉरिटी वाई नॉट, वी, इंडियंस, शुड, राइट, शुड, कम फॉरवर्ड और इंटरनेशनली। हमारी किताबें भी बेस्ट सेलर होनी चाहिए।
इस मच बेटर दैन गिविंग a बिजनेस
कार्ड तो एब्सोलूटली मैं हमेशा बोलती हूं आप किसी को काट दीजिएगा वो कार्ड जनरली डेस्टि में जाएगा लेकिन अगर आप किसी को 1 किताब देते तो वो किताब हमेशा उसके ड्राइंग रूम में रखी रहेगी और पॉसिबिलिटीज बढ़ जाएंगी कि वो कभी न कभी उसपर नजर जाए उसकी उस कहानी को पढ़े और अगर नहीं भी पढता तो कम से कम आपको कॉल तो जरूर करेगा।
क्लाइंट्स भी बहुत ज्यादा मिलते हैं किताब जो पढ़ते हैं बी शर्मा के 1 ऑथर बहुत अच्छे उनकी बुक है। बहुत सारी एवरीडे हीरो मैनिफेस्टो ोल्डिकसफरारी ऐसी बहुत सारी बुक्स लिखते हो मैक्सिमम टाइम वो फोकस करते है बुक लिखने पे। एंड जो उनके क्लाइंट बुक कौन पढ़ता है वहीं पढ़ता उसके पास विजन है जिसके पास कुछ करना है। लाइफ में कोई भी यूट्यूब खोल सकता है। बुक तो बहुत कम लोग खोलते हैं जो वो बहुत बड़े बड़े एथलीट है, बहुत बड़े बड़े मीडिया सुपर स्टार है सो वो भी फायदा होता है बुक से न अथॉरिटी जात है। लेकिन कंटेट भाई आपने स्पीड फॉर एग्जांपल इसने लिख दिया कि प्रोटी कैसे बढ़ाए नाव अगर। बहुत सारे लोग बुक पर रेकमेंड आपको कांटेक्ट करेगा कि हां हमारी टीम को फैशन तो प्रोरटिविटीकाहु सो यू कैन गेट पीड आलसो रट ऐबसोलूटली।
इसके अलावा आपकी मार्केट में क्रेडिबिलिटी अथॉरिटी क्रिएट होती है। अगर आप कहीं जॉब करते हो, मैं 1 बहुत बड़ी कंपनी में मैनेजमेंट में 1 अच्छी पोस्ट में हैं। उनकी मैंने किताब लिखी उन्होंने लगभग अपने 1000 कस्टमर्स को कस्टमर नहीं कह सकते हजार। जो भी उनके कलीग्स हैं या उनके जो कमर्शियल रिलेशंस हैं उन सबको वो बड़े अच्छे से पैक करके उन्होंने गिफ्ट किए। एंड उनसे जब रिव्यू लिया कि सर इससे क्या बेनिफिट हुआ तो उन्होंने कहा डेफिनेटली रिलेशन, बिल्डिंग में हेल्प होती है। जब आप किसी से मिलने जा रहे हो, आप उसको बुक दे रहे हो, उसको स्पेशल फील हो रहा है कि भाई ये बंदा मेरे को यहाँ तक बुक देने आया तो उनको उनकी कंपनी में, उनके इंडस्ट्री में बड़ा रेकॉर्डनेशन मिला। इसके अलावा बहुत सारे आोन्टिपिनेट्स के लिए लिखते हैं बुक हम बहुत सारे कोचिस के लिए लिखते हैं किताबें हम बहुत सारे इन्फ्लूएंसर्स के लिए जो बहुत सारे एक्टर्स हैं उनके लिए कहानी उनकी होती है। मगर हम उन्हें हेल्प करते हैं कि आप कैसे इस किताब को स्ट्रक्चर कर सकते हैं, कैसे इस किताब को लिख सकते हैं क्योंकि उनके पास स्टोरी है बट उन्हें स्ट्रक्चर नहीं पता है तो वो मदद हम उनकी कर सकते हैं। तो डेफिनेटली बुक बुक बहुत ज्यादा हेल्प करती है। क्रेडिबिलिटी क्रिएट करने में आपके ऊपर लोगों का फेद बनता है। आप 1 ऑथर बन जाते हो। सिर इससे बड़ा क्या चाहिए। आपको बहुत ही बढ़िया आप 1 ब्रांड बन जाते हो। आपकी ब्रांडिंग में बहुत हेल्प होती है।
सही बात है बुक से ब्रैंडिंग भी बहुत प्रूफ हो जाती है। अच्छा इस बंदे का बुक है। मैं जानता हूँ कि आपका कोई कोर्स है कुछ भी 1 लाख का प्रवक् वो नहीं के पहले आपकी बुक पड़ेगा वो 203 सौ रुपए की 400 रुपए की बुक पड़ेगा उसके लिए आसान है खरीदना पड़ेगा इन देन ही कैन बिकम योर बिग कस्टमर अब्सोलूटलीसो बुक में तो बहुत पावर है ना। आपने बुक का टारगेट बता दिया की मेरे को 10 हजार बुक पब्लिश करवानी है।
सोशल वर्क का क्या टारगेट है, सोशल वर्क का टार्गेट है। मैं सोचती हूँ कि जितना इशुर जिस लायक करे उस हिसाब से मैं अपनी जिम्मेदारियां निभाऊं। मैं एजुकेशन में करना चाहती हूं। मैं अभी 234 बच्चों को उनके एजुकेशन में सपोर्ट कर रही हूं। मैं चाहती हूं कि मैं अगले 5 साल में इस नंबर को 5 सौ तक ले जाऊं और ईश्वर ने चाहा तो हम इसे 5010 हजार तक भी ले जाना चाहेंगे। जैसे भी प्रभु की इच्छा होगी।
अमेजिंग सो अगर मैं आपको 1 लास्ट मैसेज ऑडियंस को देने को बोला। हमारे ऑडियंस जो हैं वो फ्रीलांसर्स हैं एजेंसी, उनसे ऑन, मोस्टली फ्रॉम, एस, ट्वेंटी, टू, थर्टी, थर्टी फाइव, जी सो आप क्या मैसेज देना चाहोगे उनको 1 लास्ट मैसेज। कोई भी कुछ भी लास्ट मैसेज।
मैं सिर्फ यही कहना चाहूंगी कि दिल से जो काम करने की आवाज निकले वो काम कीजिए और इतनी शिद्दत से कीजिए कि आपके जैसा आपकी इंडस्ट्री में कोई काम न कर सके। 1 किस्सा छोटा सा मैं सुनाना चाहूंगी। मैंने कहीं पढ़ा था कि 1 मोची जो चप्पल बनाता था उसने अपने बेटे को इस काम में लगाया तो उसका बेटा बोला कि मैं रोज दुकान पर जाता हूँ और कोई चप्पल बिकती नहीं है, तुम्हारा काम खराब है, मैं नौकरी करने जाऊंगा। बाहर शहर में तो उसका पिता उससे बोलता है कि चलो 1 बार दुकान में चलते हैं। उसको दुकान में लेकर गया और बोला कि तुम जितनी भी चप्पल तुमने सीली है मन से 1 भी नहीं सीली है। सारी की सारी चप्पलें देखो वापस आ गई है। उसने 1 बड़ी कमाल की लाइन बोली और उसने बोला बेटा मोची बन लेकिन ऐसा बन कि तेरे इलाके में तेरे जैसा मोची। कोई दूसरा नहीं होना चाहिए। यानि इतनी शिद्दत से इतना बेहतरीन काम कीजिए त आपके काम, जैसा काम, कोई आपकी फील्ड, इंडस्ट्री में कर ही ना पाए। फिर देखिये, हो ही नहीं सकता कि आपको सक्सेस ना मिले, थैंक यू सो मच।
for doing this have you injaidteconversation absolutly i love।
डेट इट वाज वेरी वन्डरफुल एक्सपीरियंस और आपके साथ बैठना रूबरू होना, मुझे भी
बहुत कुछ सीखने के लिए मिला, मैंने बहुत कुछ सीखा। मेरे लिए भी बहुत लर्निंग रही। जैसे की स्क्रिप्टिंग कैसे करते हैं, बुक्स कैसे पब्लिश करवा सकते हैं, अपनी बिकज न आइडिया नहीं होता। हमें लगता है कि बुक्स पता नहीं क्या ही करना पड़ेगा। बुक्स पब्लिश करने के लिए बट इट इज नॉट वेरी हार्ड थैंक यू सो मच फॉर डूइंग दिस थैंक यू सो
मच गॉड ब्लेस यू।
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