A multi-voice Hindi poetic performance celebrating the nation as beloved homeland. Speakers A through J repeat the refrain "ye jo desh hai tera, swadesh hai tera" alongside themes of unbreakable bonds and the promise "phir laut ke aayega," weaving patriotism and hope through choral repetition.
Chapters
ये जो देश है तेरा स्वदेश है तेरा तुझे है पुकारा,
ये वो बंधन
है जो कभी टूट नहीं सकता,
ये
है तेरा स्वदेस है तेरा तुझे है
पुकारा
2 बंदर है जो कभी टूट
नहीं सकता,
खुशबू तू कैसे बुलाएगा लूटा
है जा
फिर लौट के आएगा नई
नई राहों में भी भी राहो में
खोए खोए दिल से तेरे कोई कहे गए है तेरा स्वदेश है तेरा तुझे
है पुकारा,
ये वो बंधन है जो
कभी टूट नहीं सकता,
तुझसे जिंदगी है ये गैर ही सब तो पार या अब है क्या कभी यूँ तो सारे
सुख भर से और दूर तो है अपने घर से, आ लौट चले तो दीवाने जहाँ कोई तो तुझे अपना माने आवाज़ दे, तुझे बुला ले वह दे
ये जो देश है तेरा स्वदेश है तेरा तुझे है पुकारा,
ये वो बंधन
है जो कभी टूट नहीं सकता,
तेरा
जल से तेरा ये जो है धुकरारोबंदनेजोकभी, टूट नहीं सकता, हर रोग, हर बा।