In this Hindi‑Urdu monologue, the speaker denounces the Pakistan Cricket Board (PCB) for providing sub‑standard facilities in the Quaid‑e‑Azam Trophy, Pakistan’s premier domestic tournament. He describes filthy washrooms, shared towels, and a lack of basic hygiene in dressing rooms, contrasting these conditions with the expectations for producing international‑level cricketers such as Imam‑ul‑Haq, Babar Azam, Shaheen Shah Afridi, and future legends like Wasim Akram or Javed Miandad. The speaker argues that PCB’s financial priorities are misplaced: large sums are spent on foreign mentors, coaches, and high salaries for administrators while the basic infrastructure remains neglected. He highlights the misallocation of millions of rupees, the absence of proper ground maintenance, and the scarcity of quality venues, comparing Pakistan’s situation unfavourably to the clean, well‑staffed facilities in places like Dubai. The commentary also critiques PCB leadership, pointing out the involvement of political figures (e.g., the interior minister) and the lack of full‑time, accountable management. Ultimately, the speaker calls for a revamp of domestic cricket infrastructure, proper funding of stadiums and grounds, and a focus on hygiene and facilities as essential for nurturing talent capable of competing on the world stage.
Chapters
गंदे वॉशरूम नहाने के लिए बाल्टी, एक वो टॉवल जो पूरी टीम इस्तेमाल करेगी, ये कोई पुराना रेलवे स्टेशन नहीं है, ये पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का जो सबसे प्रीमियर टूर्नामेंट है कायदे आजम ट्रॉफी, उसके एक मैच की ड्रेसिंग रूम की तस्वीरें हैं। कायदे आजम ट्रॉफी जो कि पाकिस्तान का स उसमें मुल्तान और कराची की टीम्स चार सदा में ये मैच खेल रही थीं और ये फैसिलिटीज प्रोवाइड की गई हैं पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की तरफ से यार मुल्तान और कराची की टीम्स में ना वो प्लेयर्स भी मौजूद हैं जो पाकिस्तान से खेल चुके हैं इमामुल हक खुर्रम मंजूर चलो अगर इनमें कोई इंटरनेशनल प इन में से कल को कोई अगला बाबर आजम है, इन में से कल को कोई अगला वसीम अक्रम है, इन में से कोई कल कोई जवेद मियादाद बनेगा, कोई शहीनशाह फ्रीदी बनेगा। ये आपके सुपरस्टार्स बच्चे हैं। आप तवक्कू करते हैं कि आप ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराएंगे, आप वर्ल्ड कप्स जीतेंगे, क्रिकेट जब ओलंपिक ये गंदे वॉशरूम्स यूज़ करके, वो मेरा खून जब खोलता है ना कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड 50-50 लाखों रुपया जाया करता है मेंटोर्स के ऊपर, और वो मेंटोर्स भी शजादे हैं जो चुप करके 50 लाखों रुपया पकड़ लेते हैं। जाहिरी बात है पैसे आते किसको बुरे लगते हैं? हालाँकि पता उनको भी लेकिन मजाल है यहाँ पे कोई ठीक जगह पैसा लगा दे। अब ऐसा बिल्कुल नहीं है। ओह, अब ऐसा बिल्कुल नहीं है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पास पैसे नहीं हैं। देखें, आप मिस्बा जैसे बंदे को कोच लाते हैं जब, आप मिस्बा को भी 32-32 लाख रुपया दे देते हैं। आप जब मेंटोर्स लाते हैं, आप उनको भी पचास पचास लाखों रुपए देते हैं। मतलब आपके पास पैसे तो अच्छे खासे हैं देने के लिए, लेकिन कहाँ पे लगाने हैं? इस चीज की मुझे बड़ी तकलीफ है। अब आप में से बड़े कम लोगों ने ये चीज नोट की होगी, लेकिन मैं तो बहुत ही बारीकी से ये चीजें नोट करता जब ड्रॉन शॉट आता था ना एमसीजी का एक लाइट टावर के पीछे लाइट टावर नजर आ रहा है यार वो लाइट टावर उसका जो लो है लाइट टावर का वो इतना साफ है और जब मुल्तान में या कराची में या लाहौर में कहीं पे ड्रॉन शॉट आता था तो हमारी छतों पे जंग लगे होते थे याद ही होगा आपको और अनफॉर्च्य आपके पास कोई इंडिया की तरह 40-50 मैदान नहीं हैं और मुश्किल से आपके पास चार ग्राउंड भी नहीं हैं उनकी भी आपसे देखबाल नहीं होती अगर आप अपने मेल स्टेडियम्स की देखबाल नहीं कर सकते तो चार सदा का एक जो लोकल ग्राउंड है जहांपे तो खैर फर्स्ट क्लास के मैच होने ही नहीं चाहिए आप उसकी देखबाल क्या करेंगे मुझे बताओ आप चार सदा में अपने डोमेस्टिक का मैच करा रहे हो यार इससे अच्छा आप लाहौर में मॉडल टाउन में इतने इतने ग्रा�ун्ड मौजूद हैं मॉडल टाउन में वहाँ के तीन चार मैदान आप रेंट आउट कर लो अपने मैच करा दो इससे बेहतर है यहाँ तो टाइम से कायदे आजम ट्रॉफी शुरू नहीं हुई और लड़क कि जी ट्रॉफी नहीं है अब मैच नहीं होने और रस्ते में मैसेज आता है नहीं जी कल से मैच है आजाओ मुझे ऐसे गली मोहल्ले में मैच है ना यार कल मैच है आजाओ ये प्रीमियर टूर्नामेंट है आपके डोमेस्टिक का जिससे आपको प्लेयर मिलने चाहिए असूलन या पास्ट में आपको मिले भी हैं कायदे आजम ट्रॉफ आप में से जितने लोग दुबई गए हैं, आपने देखा होगा आप कभी किसी सर्विस स्टेशन में किसी पेट्रोल पंप पे भी रुकके जब वॉशरूम में जाते हैं ना दुबई में, तो वो भी बहुत ज़्यादा साफ होता है। क्यों? क्योंकि हर वॉशरूम के लिए एक बंदा रखा होता है उन्होंने। इनसे तो वो भी नहीं होता। कितने का क्या है पीसीबी के सामने 25-30 हजार कुछ भी नहीं है तो आपने क्या प्लेयर्स निकालने हैं मतलब आपने दुनिया से कंपटीट करना है फिर हम कहते हैं यार कि पाकिस्तान के पास उस लेवल के एथलीट नहीं आते ऐसी जगहों से खेल के आएंगे और आप क्रिकेट बोर्ड को जो लोग चला रहे हैं किसी की 10 लाख तनख्वाह है मतलब जो सामने नहीं आते, चाहे वो मार्केटिंग डिपार्टमेंट वाले हों या लोजिस्टिक्स वाले हैं, जो जिनको आप नहीं जानते। किसी की 12 लाख तनख्वाह है, किसी की 15 लाख तनख्वाह है, किसी की पांच लाख मतलब ये लाखों रुपए कमाते हैं, लेकिन जिसका ये खाते हैं, क्रिकेट का खाते हैं ना, उसपे प एक फजूल का टूर्नामेंट 50-50 लाख वहाँ बांटते हैं। मैंने उस टूर्नामेंट में बताया था आपको कि मुझे मेरी ये ख्वाहिश है कि पाकिस्तान का कोई डोमेस्टिक का टूर्नामेंट हो और कितनी बेसिक मुझे तो ये बात करते हुए भी शर्म आ रही है कि ये कितनी बेसिक बात है। मेरी ये ख्वाहिश है कि पाकिस अभी ये जो फैसला बाद में टूर्नामेंट हुआ है, मैं देखना चाह रहा था कि कौन सा बॉलर कितने रिदम में बॉल कर रहा है। आप फास्ट बॉलर को कैसे जज करते हैं? उसकी स्पीड से। यार वो कितनी तेज बॉल फेंक रहा है। वो क्रिकेट बोर्ड जो लाखों डॉलर्स डॉलर्स की बात कर रहा हूँ, रुपए नही ले तो सकता है, awareness ही नहीं है जो chairman साब हैं, वो हफ़ते दस दिन के बाद तस्वीरे खिचवाने आ जाते हैं क्योंकि वो interior minister हैं उनके पास देखो जी एक बनदा interior minister है उसने पूरे country की security देखनी है, उसके पास थोड़ी ये time है है न वैसे शरम का मुकाम मुझे बड़े गिले हैं ये पाकिस्तानी media से ये जो पाकिस्तानी हमारे जर्नलिस्ट हैं ना, इनमें से कोई मेनस्ट्रीम मीडिया वाला है, या कोई YouTube पे रेगुलर कंटेंट बनाने वाला है? किसने मोहसन रज़ान नकवी को क्रिटिसाइज़ किए? सब इसलिए चुप हैं कि यार वो इंटीरियर मिनिस्टर है। यार हमारी क्रिकेट खत्म कर देंगे ऐसे लोग। अनफॉर्च्यूनेटली मैं हैरान होता हूँ एक वो बंदा जो हफ़ते में दो दिन क्रिकेट बोर्ड आता है लोग उसको तारीफों के फूल बांध रहे हैं और दो साल के बाद कहेंगे कि यार पाकिस्तान की क्रिकेट तो खब हो गई है तबाव हो गई है यार पढ़े लिखे लोग कंट्रोल में आ रहे हैं और क्रिकेट की बैंड बजाके जा रहे हैं अब मौसिन रज ना पैसे की कमी है, ना एजुकेशन की कमी है, किस चीज़ की कमी है? मतलब एक पढ़ा लिखा बंदा है, उसको पता है यार कि जो पीसीबी का चेयरमैन है ना वो फुल टाइम जॉब है, मुझे वो नहीं लेनी चाहिए। वो हकूमत को, गवर्नमेंट को ये मशवरा नहीं देता कि यार आपको ऐसा बंदा रखें जो फुल टाइम आए। आईस तो ये कोई अच्छी बातें तो नहीं हैं। अब मैं पॉलिटिक्स से हट के एक बात कह रहा हूँ, इस बात का ताल्लुक पॉलिटिक्स के साथ नहीं है, जो मैं अब करने लगा हूँ। आप में से बड़े लोग ना नजम सेठी को बहुत क्रिटिसाइज़ करते हैं, क्योंकि उनका ताल्लुक एक उस पॉलिटिकल पार्टी से है, जिसको पाकिस मतलब 2016 में जब आपकी HBL PSL लॉंच हो रही थी तब PSL की टीम में गिने चुने साथ आठ लोग भी नहीं थे यार वो एक एक बनदे के साथ बैठ के काम करवाते थे वो ग्राफिक डिजाइन के भी साथ बैठते थे एक एक्जांपल दे रहा हू अब ये गंदे वॉशरूम अगर तो इनसे आपने प्लेयर प्रोड्यूस करने और आपको हाइजीन का कोई ख्याल ही नहीं है, तो I am sorry to say आप इंटरनेशनल लेवल के एथलीट नहीं पैदा कर सकते। हाँ, आप एक आधा मैच कोई फ्लूक के साथ जीत जाएंगे बड़े लेवल पे। हो सकता है कोई सौ साल के बाद आप एक ट्रॉफी भी जीत जाएं आईस अच्छी क्रिकेटिंग नेशन ऐसी फैसिलिटीज देके नहीं पैदा कर सकते हैं।