In this Hindi monologue, the speaker expresses frustration over India’s poor infrastructure ranking (44th globally) and traces its decline from the British colonial era, when well‑built roads and infrastructure existed, to post‑independence neglect and a 50‑year lag in budget allocation. He notes that only after the 1990s did the government begin to invest significantly, leading to modest improvements but still far behind. The speaker criticises chronic planning failures – projects start and stop arbitrarily, potholes are dug without notice, and coordination among officials is weak. He contrasts this with Dubai’s rapid, well‑planned construction of the Burj Khalifa, highlighting efficient use of manpower and technology. He also discusses India’s export of physical and mental labour abroad, while domestic projects suffer from corruption, land‑grabbing, and construction scams, especially the “Adar scam” where projects stall for years and funds disappear. A historical anecdote about the Taj Hotel’s origin illustrates reliance on foreign expertise and the mishandling of design work. The talk concludes with a call for grassroots activism, better planning bodies, and personal responsibility to drive change, urging listeners to raise their voice and take small, concrete actions.
Chapters
आज न यार थोड़ा नाराज हो कर आया हूँ। पता है क्यूँ? मैं ऐसे ही गूगल पर रिसर्च कर रहा था इनफ्रास्टक्चर के बारे में और वहाँ मुझे पता चला कि इंडिया फोर्टी फोर रैंक पे आती है। आउट न सिक्टी सेवन ये भाई क्या हुआ। देखिये हम सबको पता है इंडिया डेवलपिंग कंट्री है। मुझे पता चला की हम सिर्फ फोर्टी फोर रैंक पर है। तब मैंने अपनी टीम को 1 घंटा के लिए सब कुछ करने के लिए मना करते है। भाई इस पर रिसर्च करो एग्जेक्ट पता लगाने का। हम ट्राई करते हैं कि कहाँ हम लैग कर रहे हैं कि हम इतना पीछे हमारे दिन रस्ते खराब है, रस्ते में गड्ढे है, गड्ढों की वजह से एक्सीडेंट होता है। देखिये ये सारी चीजों को बहुत ही एफेक्ट करती है। लेकिन मैं आज कुछ आपको इतिहास में ले जाना चाहूंगा। जब ब्रिटिश आए थे तब तो 1 चीज क्लियर था कि काफी अच्छे अच्छे रोड्स और इन्फ्रास्क्चर को डेवलप किया था। यह बात अलग है की उन्होंने अपने फायदों के लिए डेवलप किया था। लेकिन आप समझ गए है की मैं क्या कहना चाह रहा हूँ। तो जो इतने अच्छे च्छे रोड्स और इंफ्राचर को डेवलप किया था उसका क्या हो गया। अचानक से सब कहा गए। हम क्यूँ इतने पीछे गिर गए। जब नाइटी में ब्रिटिश जाना चालू कर दिए इंडिया से, तब 1 चीज क्लियर था कि इंडिया की इकॉनमी काफी हिल चुकी थी, काफी हो गई थी इंडिया की इकॉनमी। और फिर हमारे जो नए नए रूलिंग पार्टी आये उनका सबका फोकस इकोनोमिक बढ़ाने में हो गया। और हमने इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान ही नहीं दिया और वही बाकी सब कंट्रीज अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रो करने में काफी मेहनत करते लगे और इंडिया में बजट ही नहीं दे पा रहे थे। हम इंफ्रास्क्चर के लिए लगभग 50 साल लग गए। 1 डीसेंट, 1 अच्छा अमाउंट का बजट को देने के लिए। 1990 के बाद 1 अच्छा अमाउंट इफ्रास्टक्चर में डालना चालू किया हमारे गवर्नमेंट ने। फिर हम कह सकते हैं कि फिर जा के हम थोड़ा सा पोकअपकरपाए थोड़ा सा ऊपर आ पाए। लेकिन अभी भी बात करे तो कुछ ऐसी चीजों पर गौर करने की जरुरत है जहाँ हम इम्प्रूवमेंट कर सकते हैं। देखिये इंडिया में बहुत पोटेंशल है लेकिन हमारा मेन दिक्कत पता है, क्या है हर 1 चीज में मेन दिक्कत यही है। मैं पुराने वीडियो में बता चुका हूं कि प्लानिंग इंडिया का प्लानिंग ही ऐसा होता है कि कुछ समझ नहीं आता है। कब काम चालू हो, कब काम बंद होता है, कुछ समझ नहीं आता है। आए दिन हम देखते, कहीं भी लोग गड्ढा खोद देते हैं। जहाँ गड्ढा खोदते हैं, उसके आज सोसाइटी को नोटिस भी नहीं देते कि यहाँ रास्ते बनने वाले हैं, कि क्या बनने वाले है। बस अपने हिसाब से काम किए जाते हैं। गवर्नमेंट ऑफिसर्स की क्या बात, सबको पता है। इनका हाल क्या है। मैं कुछ अलग नहीं बताने वाला हूँ। दुनिया का सबसे बड़ा टावर की बात करूँ तो वो है दुबई में खलीफा खलीफा बनाने में टाइम कितना का तकरीबन सिर्फ 5 साल 5 साल में पूरी इमारत न बना डाली। इसका 1 बहुत ही 1 किस्सा था। कि भोज खलीफा में जो ग्लासिस लगे है जो उसको बनाने के लिए उन्होंने कास्ट और मैन पावर बचाने के लिए कांच बनाने की फैक्ट्री लगा डाली। उसे मैन पॉवर और मटेला कोश बहुत ही कम लगा और टाइम भी बहुत बचा। इससे हम अंदाजा लगा सकते हैं कि कितना डीपली उन लोग प्लान करते हैं। कोई भी चीज को बनाने के लिए तो हम क्यों नहीं करते। आज हमारे इंडियन हमारे इंडियन के मेन पॉवर की बात करो, फिजिकल पॉवर की बात करो, में पॉवर की बात करो, वो बाकी सब कंट्री यूज कर रहे है। मैन पॉवर की बात करो तो दुबई हो गई, कुवेत हो गया कितने सारे शहरों में इंडियन लेबर जाके काम कर रहे है। और मेंटल पॉवर की बात करूँ तो यूएस कनाडा में तो आधी से ज्यादा इंडियन ही भरे पड़े हैं। जो अपना मेंटल पॉवर किसी और को दे रहे है, किसी और के आइडिया में लगा रहे हैं और उनको ग्रो कर रहे है। और इंडिया में प्लानिंग कौन करता है पता है वो लल्लू लाल लोग जिनको ए बी सी डी भी नहीं पता और वो लोग मिनिस्टर बन के बैठे है। मैं माफी चाहता हूँ मैं आज बहुत कठोर शब्द यूज कर रहा कंस्ट्रक्शन स्कैम में इंडिया बहुत पॉपुलर है लेकिन अगर आप नेट पे सर मारोगे न कंस्टक्शन स्कैम तो कुछ नहीं मिलेंगे। आपको हमने बहुत ढूंढा लेकिन अंदर ही अंदर बहुत स्कैम है। अच्छी अच्छी नामचीन बिल्डर लो का स्कैम है मैं नाम यहाँ लेना नहीं चाहूंगा लेकिन बहुत सारे व्यूज अगर आप भी कभी देख रहे तो आपने भी कभी न कभी कोई बिल्डर के स्कैम में फंसे ही रहोगे। बहुत ज्यादा चांसेस है, पैसा भाग जाता है या प्रोजेक्ट 4455, 10, 10 पंद्रह पंद्रह साल से खत्म नहीं हो रहा है। ये सब स्कैम्स चलती ही रहती है लेकिन गूगल पर नहीं आता है। भाई बेसिकली 1 स्कैम की बात करो न जो बहुत ही घातक थी वो है आदर स्कैम की। ये आज भी जब मैं ये किस्सा सुनता हूँ या किसी को बताता तो मेरे रोगटे खड़े हो जाते हैं। आदर स्कैम हम सब को पता है। हमारे जो जवान है जो लड़ते लड़ते देश के लिए शहीद हो जाते हैं उनकी बीवियों को, उनकी वाइफ को, गवर्नमेंट ने योजना बनाया था की वहाँ घर मिलेगा लेकिन यह हमारे लोगो ने वो भी नहीं छोड़ा और वहाँ भी अपना कब्जा बिठाने का ट्राय किया। हमारे भारत देश में अजीब सी लालच है, सबको जमीन का क्या रखा है जमीन में ये मुझे नहीं पता लेकिन अजीब सी लाल जमीन चाहिए। मैं मुंबई में रहता हूँ, मुंबई में देखा कि वो गरीब यहाँ है, उसके गाँव में जाकर देखा तो बड़ा बड़ा बंगला दिखा रहे। यहाँ खाने के भी वनडे है क्यूँ ऐसा जमीन का लालसा है पता नहीं। और ऐसे ही लल्लू लाल अच्छे अच्छे पायदान मिनिस्टर बने पड़े आदर स्कैम उसका ही नतीजा था और इसी आदर स्कैम ने पूर्व चीफ मिनिस्टर विलास देश को रिजाइन करने पर मजबूर कर दिया होटल ताज का नाम किसने ने सुना है उसका 1 स्टोरी सुना जो तकरीबन सर आपने सुनी ही होगी जमुशीजीटाटाको 1 बार यूरोप में सन होटल में यूरोपियन लोग ने जिनको बोलते वाइट लोग सफेद लोगों ने एंट्री नहीं दी जमशेदजी टाटा ने कभी सोच लिया की मैं ऐसा रॉयल अपने इंडिया में इंडियन को देना चाहता हूँ वो इंडिया में आये और 1 रॉयल होटल बनाने की शुरुआत की इनिशियल जो ड्राइंग थे ताज होटल के वो इंडियन नहीं बनाये थे राहुल साहब वाडिया और डी एन मिर्जा जी ने इनिशियल ड्राइंग्स बनाये थे जिससे चालू हुआ लेकिन बीच में ही दुख वादिया जी इस दुनिया में नहीं रहे और कैसे कारणों के कारण मिर्जा जी भी न कर पाये और जी टाटा को कोई दुसरे लेके आना पड़ा फिर आगे के काम के लिए डब्लू डब्लू कौन थे सन होटल जिनमें टाटा को नहीं दिया था जो वो होटल बनाये थे उनको जी टाटा लेके आ गया और ताज होटल उन्ही से बनवाया वो होटल के डिजाइनर से बनाया जो होटल में उनको एंकर नहीं मिली ये तो चलो 1 था लेकिन इससे भी यह पता चलता है की फिर भी इंडियन स्कूल नहीं था नाइन टी जीरो थ्री के तकरीबन यह होटल बना था और तब भी भी जमशेजीडाटाने बाहर को हायर करके अपना अगर गवर्नमेंट ऑफिशियल्स भी अच्छे से प्लानिंग करना चालू करे क्या 1 अलग बॉडी ही अप्वाइंट कर दे इन सब चीजों के लिए इंफ्रास्टक्चर में गुस खोरी तो बंद हो जाएगा जिसके से पैसा भी बचेगा और वे पानी से अगर हम चलते हैं तो इन्फ्रास्ट्रक्चर का बहुत डेवलपमेंट हो स अगर इस चीज को हमने कवर किया तो शुरुआत देखिये मेरे और आपसे ही होगी बातें तो हम बहुत सारी कर लेते हैं बातों से पेट नहीं भरता कुछ करके दिखाना पड़ता है बार बार सपने मत दिखाओ क्यूँकि वो कभी कभी चहकता है देखिये जो नेता लोग होते हैं न ये लम्बा लम्बा सपना ये बनायेंगे वो बनायेंगे बनता कुछ नहीं है और हम उनके भरोसे रह जाते है हम और आप छोटा सा कुछ उठा सकते है देखिये मैं कुछ ट्राय कर रहा चेंज करने का लेकिन नहीं कर पाऊँगा छोटा से छोटा चीज कुछ भी बनवा रहे हो रहे हो कहीं छोटा सा आवाज आवाज उठा सकते हो तो जरूर उठाना चाहिए 1 प्रॉपर प्लान देखिये जिस साब से अपना घर सजाते है जिस हिसाब से लोग आगे जाके आपकी ही पीडी ने वाली है इसी को देख इस वीडियो को देखने के लिए ये मैसेज सबको फैलाने के लिए आप सभी भी लोग का दिल से धन्यवाद।