5 Real Tips for Balanced Screen Time & Safer Kids (No More Stress!)

Riddhi Deorah shares five ways parents can manage kids' screen time and online safety. Set boundaries by modeling good habits yourself, use parental controls with open talk, teach children about cyber risks, create screen-free zones, and anchor them in family routines and spirituality to build confidence.
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जब देखो स्क्रीन से चिपका हुआ रहता है। मैं क्या करूँ इसका इफ यू हैव। ए सेडिस्ट योर चाय। तो इस विडियो को एंड तक जरूर देखिएगा। आज हम बात करेंगे कि कैसे आप अपने बच्चे को ऑनलाइन दुनिया के खतरों से सेफ रख सकते है। ये विडियो उन पैरेंट्स के लिए है जो चाहते हैं अपने बच्चे को डिजिटल ऑनलाइन स्पेस में सेफ रखना बिना उनके पर्सनल स्पेस को इन्वेट किए। तो चलिए शुरू करते हैं। रोज पेरेंट्स। मुझसे कहते हैं, ऋद्धि मेरा बच्चा पूरे टाइम फोन पर लगा रहता है, स्क्रीन पर लगा रहता है। और सच तो यही है कि आजकल ऑनलाइन गेम्स, फ्रॉड, कॉल्स और स्टेंजर्स के साथ चैटिंग सिर्फ वन टैप दूर है हमारे बच्चों से और आपका ये जो कंसर्न है यह बहुत ही जेनविन है। लेकिन सिर्फ चिंता करने से या टेंशन लेने से कुछ नहीं होगा। जरूरी यह है कि हम ऐसे एक्शन लें जिससे हमारे बच्चे सेफ रहे और स्क्रीन को जो है बैलेंस तरीके से यूज करें। सच तो यह है कि हम बच्चे की सेफ्टी के लिए बहुत कंसर्न रहते हैं लेकिन बच्चों को समझ में नहीं आता। वाइर वी टेकिंग, सो, मच टेंशन इसमें कंसर्न होने की क्या बात है। और आज के वीडियो में मैं आपके साथ शेयर करूंगी। 5 सिम्पल चीजें जिससे आप अपने बच्चे को बैलेंस क्रीम टाइम दे सकते हैं। सबसे पहला प्वाइंट है या फिर इस रियल यानि कि आपके अंदर जो डर है वो जायज है और आस्पेरेंट्स हमें कंसर्न होना भी चाहिए। तो अभी हमने बात की, फिर इज रियल, विच, मींस, य कंसर्न इस बैलेट। और अब हम बात करेंगे सेटिंग बाउंडरीज, द राइट, वे सिर्फ, डाटने, चिल्लाने और फोन छीलनेे से कोई सॉल्यूशन नहीं मिलने वाला। अगर आप सच में अपने बच्चे को बैलेंस क्रीन टाइम देना चाहते हैं, देन सेटिंग हेल्दी बाउंडरीज, इज, वेरी इम्पॉर्टेंट। और ये बाउंडरीज तब काम करेंगी जब आप ऐज पैरेंट सही एग्जाम्पल सेट करेंगे। अगर आप खुद 5 छ घंटे फोन पर लगे रहेंगे और ये एक्सपेक्ट करेंगे कि मेरा बच्चा सिर्फ 10 से पंद्रह मिनट फोन देखें तो ये बिल्कुल पॉसिबल नहीं है बच्चा जो देखेगा वही करेगा। and that is why seting boundries and limiting your on screen time should be your number one। prati। अब चलिए चलते हैं थर्ड आइडिया की तरफ थर्ड इडिया। is practical steps to limit your screen time, so already share to point with you and now, i want to share a third point with you and third point is। हाऊ कैन यू प्रोटेक्ट योर child इन the ऑनलाइन space सबसे पहला पॉइंट है। पेरेंटल कंट्रोल तो बच्चे के डिवाइस में कंट्रोल लगाए जैसे कि या तो आप टाइम लिमिट कर सकते हैं या ऐप का एक्सेस कंट्रोल कर सकते हैं। दिस इज, वेरी इम्पोर्ट और सेकेंड तरीका। यह है दैट वी हैव ओपन कम्यूनिकेशन वित और चिल्डरेन। हम उनसे रेगुलरली बात करें और उनके ऑनलाइन एक्सपीरियंस और उनके ऑनलाइन कंसर्नस के बारे में समझें नंबर थ्री जो है हमें उन्हें अवेयर करना है, उन्हें साइबर क्राइम के बारे में बताना है जैसे ऑनलाइन बुलिंग स्कैम्स रॉन्ग लिंक पर क्लिक ना करें, चेंजर्स से चाट ना करें। ये सारी इंफॉर्मेशन उनके साथ डिस्कस करनी है और उन्हें यह भी बताना है कि अगर बाईचांस उनके साथ कोई फ्रॉड हो जाए तो वो खुल कर हमें उसके बारे में बताए। इससे जो है आपका बच्चा सेफ और प्रोटेक्टेड महसूस करेगा। फोर्थ आइडिया ये है कि अब अपने घर पर कुछ स्क्रीन फ्री जोन्स बनाए जहां पर टैबलेट्स, फोन्स, टीवी, ये सारी चीजें अलाउड ना हो। कुछ ऐसे एरियाज जैसे कि आपके डाइनिंग एरिया। आपके बेड रूम में बिल्कुल भी स्क्रीन अलाउड न करे। तो अभी हमने डिस्कस किया कि हम अपने बच्चों को ऑनलाइन डिजिटल स्पेस में कैसे प्रोटेक्ट कर सकते हैं और अब हम डिस्कस करेंगे अबाउट बैलेंसिंग स्क्रीन टाइम योर चाय। जब आप बच्चे को स्क्रीन देते हैं तो उनकी बॉडी में 1 केमिकल रिलीज होता है डोपोमिन जो उन्हें टेम्परेरी जॉय महसूस कराता है और घंटो स्क्रोल करने से जो उन्हें अच्छा फील होता है वैसा उन्हें और कोई चीज से महसूस नहीं होता। यह चीज तो आपने भी देखी होगी कि कैसे बच्चे कान्सटेंटली स्क्रोल करने के बाद घंटों तक स्ट्रेस रहते हैं और फिफ्थ जो है वो है रियल लाइफ। अभी तक हम स्क्रीन की दुनिया में थे। अब हम स्क्रीन की दुनिया से निकाल के रियल लाइफ के बारे में कुछ समझते हैं। तो आजकल जो रियल एनवायरमेंट है वो बहुत ही हाइली स्टिमुलेटिंग है। जहां भी हम देखें स्क्रीन ही स्क्रीन है। तो ऐसे हाइली स्टिमुलेटिंग एनवायरमेंट में स्पिरिचुएलिटी जो है आपके बच्चे के लिए 1 स्ट्रॉंग एंकर बन सकता है। वेन यू इंटरड्यूस वैल्यूज लाइक प्रेयर्स, ग्रैटिट्यूड चांटिंग तो योर चाइल्ड, योर चाइल्ड, वैलप्स एंड अंडरस्टैंड थिंग्स लाइक फेर, ट्रस्ट कम्पैशन, एमपी, दीज रियल वैल्यू, दैट विल शेप, दैर कैरेक्टर एंड डिफाइन नोट प्रेजेंट बट आलसो देर फ्यूचर तो 1 सिम्पल एग्जामपल देती हूं। अगर आपको लगता है कि नहीं मुझे अपने बच्चे को कुछ क्रीन टाइम देना ही पड़ता है तो आप कुछ अच्छे शोज दे जो कि एंटरटेनिंग भी हो। आपके बच्चे को मजा भी आए और साथ ही साथ आपका बच्चा कुछ सीखें भी कुछ एग्जांपल मैं। आपको देती हूं यू कैन, शो या, चाइल्ड, अकबर, बीरबल, विक्रम, बेताल, लिटिल, कृष्णा, महाभारत, रामायण, माइथोलॉजी। वर्ल्ड लाइफ के बारे में, नेचर के बारे में, इन सारी चीजों के बारे में आप अपने बच्चे को स्क्रीन टाइम दे सकते हैं। तो बच्चे को जो है शॉर्ट टर्म थ्रिल भी मिलेगा, लर्निंग भी मिलेगी और ओवर एक्सपोजर का रिस्क भी खत्म हो जाएगा क्योंकि आप खुद अपने बच्चे को थर्टी थर्टी फाइव मिनट। स्क्रीन टाइम अलाव कर रहे हैं। क्योंकि अगर आप उसे हमेशा दूर रखने की कोशिश करेंगे तो बच्चा स्क्रीन के लिए डेस्परेट हो जाएगा एंड फिर वो बाउंडरीज भूल कर ओवर एक्सपोज हो जाएगा। स्क्रीन टाइम से ये छोटी छोटी हैबेड जैसे कि डिनर से पहले वन मिनट का प्रेयर, सोने से पहले वन मिनट का मेडिटेशन, उनके फोकस और अवैरनेस को इम्प्रूव करते हैं एंड उन्हें स्क्रीन से दूर रखते हैं। सो बेसिकली यह समझिए कि स्क्रीन का जो थ्रिल है वो टेम्परेरी है। बट इनर पीस स परमनेंट सो एज अ पैरेंट। हमारी रेस्पॉंसिबिलिटी यह है कि हम अपने बच्चे के अंदर इनर पीस इनर कॉन्फिडेंस सेल्फ स्टीम सेल्फ वर्त भरे। क्योंकि अगर आप ये सारी चीजें अपने बच्चे को ट्रांसफर करेंगे देन। योर चाइल्ड विल नोट डिपेंड ऑन स्क्रीन टाइम। क्योंकि बच्चे जो हैं स्क्रीन नहीं चाहते, वो चाहते हैं स्क्रीन से वैलिडेशन लव एक्सपेक्टेशन केर फुल फिलमेंट, तो ये सारी चीजें। अगर आप उन्हें रियल वर्ल्ड में प्रोवाइड करेंगे, आपका बच्चा स्क् करन के पीछे नहीं भागेगा सो बेसिकली स्क्रीन टाइम को एनिमी मत समझिए। लेकिन अपने बच्चे को 1 बैलेंस तरीके से स्क्रीन को यूज करना सिखाए। और सबसे बड़ी बात उन्हें डिस्कनेक्ट नहीं बल्कि री कनेक्ट करना, सिखाएं अपने आप से, नेचर से, अपने फैमिली से, ताकि उन्हें ये टेम्परेरी फिक्स की जरूरत ही न पड़े। तो ये थे कुछ सिम्पल तरीके जिससे आप अपने बच्चे को ऑनलाइन डिजिटल स्प में प्रोटेक्टेड रख सकते हैं। सो पेरेंटल कंट्रोल स्क्रीन टाइम, मैनेजमेंट एंड स्पिरिचुअल प्रैक्टिसेस इन सारी टेक्नीक्स का। जब आप कॉम्बिनेशन यूज करेंगे तो आपके बच्चे का जो स्क्रीन टाइम है वो बैलेंस रहेगा और आपका माइंड काम रहेगा। सो देर न करे, आज से ही शुरू करें और इसमें से कौन सा आइडिया आप यूज करने वाले हैं। वो कॉमेंट में लिखकर बताए एंड इफ यू वांट मोर, ऑथेंटिक एंड प्रैक्टिकल पैरेंटिंग टिप्स। तो इस चैनल को जरूर सब्सकाइी क्राइब करें।
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