अच्छे पेरेंट्स कैसे बने? Riddhi Deorah

Riddhi Deorah and others discuss how parents can manage anger toward their children and build healthier family relationships. They explore how parental beliefs shape behavior and offer practical advice for creating a more democratic, understanding home environment.
ऐसे फादर भी मेरे मन में कुछ सवाल उठे तो मैंने सोचा की लगे। हाथ मैं भी सवाल आप से पूछता हूँ जब हम ऐसे पेंट करते हैं, बड़ा स्वाभाविक है की हम बच्चों से कुछ एक्सपेट करते हैं और बच्चे हमारे वो शायद उस तरीके से या कुछ समय नहीं करते है तो हमारे अन्दर कहीं न कहीं ये गुस्सा आना स्वाभाविक है। और उस गुस्से में हमें यह नहीं पता होता की ये पॉजिटिव है या निगेटिव है यानि की ये कॉन्फिडेंस को बढ़ाये गए बच्चे के कॉन्फिडेंस को गिरा सकता है। तो कहीं न कहीं हम सभी पेरेंट्स जो हमारी मम्मी, पापा या दादा, दादी, नानी सब सुन रहे हैं। तो सबके मन में 1 सवाल आता है की क्या ऐसे पेरेंट हम जब बच्चों पर गुस्सा करते है तो क्या इसकी कोई डिग्री है की हमें कितने डिग्री का गुस्सा करना है और वो गुस्सा क्या रूप ले कर के जाएगा। तो कहने का मतलब है कि हाऊ टू कंट्रोल और एंगल पर सारे मम्मी पापा के सवाल होगा।
तो ये सबसे कॉम्मन क्वेश्चन यही है क्यूँकि कोई भी माता पिता गुस्सा नहीं करना चाहते, सब चाहते है की सब खुश रहे, हम भी खुश, बच्चा भी खुश, सब अच्छे से हो। पर गुस्सा 1 ऐसी चीज है जो आप कभी अपने अन्दर से पूरी तरह नहीं सकते। न इमोशन एंगल, न इमोशन यू कैनोट गेट ऑफ़ इसको आप उसको मैनेज कर सकते कितना आपको करना है और कब आपको करना है। तो सपोजिंग आपका बच्चा है और आप हर समय उससे गुस्सा कर ले तो आपके गुस्से का कोई असर नहीं पड़ेगा। बच्चे पे आफ्टर पॉइंट बच्चे को लगेगा, ये तो मेरी मम्मी की आदत है, वो तो हर चीज में गुस्सा करती है। अब मुझे इसकी आदत हो चुकी है और मेरा जैसा मन में वैसा करूंगा, मैं कुछ भी कर लो, मैं अपनी मम्मी को खुश नहीं कर सकता और मैं कुछ भी कर दूं वो कभी खुश नहीं हो सकती। वो गुस्सा करेंगे ही करेंगे। तो इससे क्या हो रहा है। आपको जो चाहिए हम गुस्सा क्यों करते हैं? गुस्सा इसलिए करते हैं ताकि बच्चे सुधरे और अगर हर समय यूज करेंगे तो उनका कोई असर नहीं होगा। आपके बच्चों पर बच्चों को छोड़िए। बहुत बार शादी के बाद जब हम जाते हैं सास बहु में हम देखते हैं बहुत कॉमन है। यह कम्युनिटी में बहुत पैरेंट्स है। मेरे जो कहते है मुझे की आई हैव गिविन अप फोर ईयर्स ऑफ ट्राइ न हाव, गिविन मैं कोशिश ही नहीं कर रही, जितनी भी कोशिश कर लू, मैं उनको कुछ नहीं कर सकती। तो अब मैं कोशिश ही नहीं मेरी जो मेरी मर्जी के मुताबिक मैं सारे काम करती हूँ तो वैसे ही बच्चे हैं। अगर आप पूरी टाइम उनको डाटेंगे तो आपके डांट का असर खत्म तो आप भूल जाइए। गुस्सा अब सेकेंड चीज काफी बार क्या होता है। हर समय पेरेंट्स नहीं गुस्सा करते। कभी कभी बच्चे बात नहीं मान रहे हैं या आप कुछ नहीं कर रही है। उनके अकॉडिग क्लास के लिए नहीं बैठ रहे हैं। ऑनलाइन क्लास के लिए ये सब कॉमन खाना नहीं खा रहे। यह सब कॉमन रीजन है जिस कारण माता पिता गुस्सा करते है बच्चों पर तो उससे क्या होता है आप सोचिए कि गुस्सा किसके किसके बारे में है बच्चे के बारे में, माता पिता के बारे में तो मैं सिर्फ माँ कर रही हूँ एक्चवलीमातापिता दोनो इनक्लूड हो जा रहा है तो जैसे अगर बच्चा कुछ कर रहा है और उसमें अगर आपको गुस्सा आ रहा है तो उसमें बच्चे के बारे में नहीं है या आपके बारे में गुस्सा जो है वो आपके बारे में। अब इसको मैं एग्जांपल के रूप में समझाता हूँ। तो सोचिये 2 बच्चे हैं बिल्कुल आइडेंटिकल दोनो हुमक नहीं कर रहे, दोनों मना कर रहे हैं हुम्वफ़ करने के लिए दोनों की अलग अलग मम्मियां हैं। 1 मम्मी शांत है, बच्चा हम्बर नहीं करता, वो बोली है, ठीक है, बच्चा ठीक है, बेटा कोई बात नहीं, वो शांत है, दूसरी जो मदर है वो बहुत गुस्से में है, बच्चे दोनों सेम है नेचर भी सेम भहेलियरभीसेम काम भी सेम कर रही, जो दूसरी मदर है वो एकदम गुस्से में आग भोर हो रही है और दूसरी मदर जो है वो एकदम शांत है। तो क्यूँ ऐसा है क्योंकि दोनो मदर्स का जो बिलीफ सिस्टम है वो अलग है। 1 मदर सोच रही है कि ठीक है कभी कभी मेरे बच्चे होमवर्क नहीं करेंगे चलेगा, हो सकता है उसका आज मन नहीं शी इज मोर फ्लेक्सिबल, उनका बिलीफ सिस्टम फ्लेक्सिबल है, लिलियन है और जो दूसरी मदर है जो गुस्सा कर रही है वो सोचिए ऐसा कैसे हो सकता है मैं माँ हूँ उसे मेरी बात माननी ही पड़ेगी माई, चिलरेन मास्ट, ओबेमियाएनीकॉस्ट वो अपने मन की नहीं कर सकते बिल्कुल जो मैं बोलूंगी वहीं उन्हें करना होगा। तो जब आपका बिलीफ सिस्टम इतना रिजिड है, इतना इर्रेशनल है, इतना फिक्स है तो आपको गुस्सा तुरंत से आएगा अगर आप अपने बिलीव सिस्टम को थोड़ा रिलैक्स करेंगे, ईजी करेंगे, थोड़ा रेशनल करेंगे, आप सोचेंगे की ठीक है, बच्चा ही है कभी हो सकता है इसे अभी मन नहीं है थोड़ी देर बाद मैं ट्राई करूँ, आपको गुस्सा तुरंत से नहीं आएगा तो जब आप सोचेंगे की आम तो सुप्रीम अथॉरिटी आम द बॉस वाटेवर सी हैज टू बी डन गुस्सा तुरंत आएगा पर अगर आप सोचेंगे कि ठीक है हम दोनों इक्वल है कभी मेरी चलेगी, कभी उसकी चलेगी, आज मदर आई, वुड लव माई, चाइल टो, मी बट, समटाइम्स ट के फॉर माई, चाइल्ड टू नॉट लिसन तब आपका गुस्सा कम हो जाएगा और धीरे धीरे आपको गुस्सा आना बहुत कम हो जाएगा सो अगर आपको गुस्से को मैनेज करना है तो आपको अपने अंडरलाइन जो बिलीफ सिस्टम है उसको चेंज करना होगा बिल्कुल तो आपको ये बिल चेंज करनी पड़ेगी अपने बारे में की मैं जो बोलूंगी वैसा ही होना चाहिए और ये सिर्फ पेरेंटिंग पर ही है या हर रिलेशनशिप में आपके चाहे दादा दादी का हो, दादा पोते का हो या हसबैंड वाइफ का हो या सास बहू का हो या कोई भी रिश्ते में आप ये चीज जब भी आपको गुस्सा आता है उसका कारण आपका बिलीव सिस्टम होता है की आप अपने बारे में क्या सोचती हैं और आप सामने वाले से क्या एक्सपेक्ट कर। ते है। तो अगर आप सोचेंगी जैसे अगर सास बहु। अगर सोचेगी ठीक है, चलो नई है घर को समझ रही है, हो सकता है इसका अलग तरीका है और तरीका उस घर में कभी प्रोब्लम नहीं होगा। सास पर अगर सास ये सोच शुरू करेगी। जो मैं बोलूंगी वही इसको करना पड़ेगा। मैं इस घर की बौस हूँ, ये तो अभी नई नहीं आई है, ये अपनी कैसे चला सकती है। जो मैं बोलूंगी वही इसको करना पड़ेगा। मैं जानती हूँ इस घर के तौर तौर तरीके तब क्या होगा। उस घर में कभी भी वो पीस नहीं देख पाएंगे, हारमनी नहीं मिलेगा आपको। तो आपको अगर अपने गुस्से को मैनेज करना है और बहू का भी सेम अगर बहु सोचती है की सास ऐसे करें जैसे मैं सोच रही हूँ अपने बच्चे को पाना वैसे ही एक्जैटली करें तो वैसा कभी नहीं होगा। तो फिर वो हारमनी कभी नहीं बनना सो। इफ यू वांट टू मैनेजर आंगर बिली सिस्टम को पहले मैनेज करे दैट। एंड सेकेंड स कमिटमेंट है, चीज में कमिटमेंट जरूरी है, डोंट मेक लाइक अ लौंग कमिटमेंट की फॉरएवर की मैं लाइफ में कभी गुस्सा नहीं करती। ऐसा करने से कभी भी भी हम कोई अच्छे डायटिशन के पास जाते हैं। तो वो क्या बोलता है बोलता है नो शुगर फॉर थ्री डेज चीनी छोड़िए 3 दिन के लिए हमें लगता है 3 दिन बस मैं कर सकती हूँ अगर वही डायटीशिन। आपको बोल दे की हमेशा के लिए चीनी छोड़िए अब फर्स्ट डे नहीं छोड़ेंगे आपको हमेशा मुझसे हो गई न, तो आज भी मैं क्यूँ नहीं आज तो लेता हूँ क्यूंकि मैं ये कर ही नहीं सकता। तो आप 23 दिन के लिए ट्राई करेंगे। तो गुस्से के साथ भी आपको यही करना है। आप आज मैं गुस्सा नहीं करूंगी किसी पर आज खत्म कल उठे सुबह फिर से यह कमिटमेंट बनाए। आज मैं शांत रहूंगी और अगर आपको बहुत ज्यादा गुस्सा आता है आपका टॉलरेंस बहुत ही कम है तो पूरा दिन भी मत रखिये। हाफ डे से स्टार्ट कर। दोपहर तक में आज शांत रहूंगी किसी ऐसे कुछ लोग जो झगड़ा कुछ नहीं करूंगी। उसके बाद मैं देखती हूँ जो होगा होगा। तो अब जब डेली कंटिन्यूस प्रैक्टिस करने लगेंगे तो दिस विल बिकम अ पार्ट ऑफ़ योर नेचर बिकम समथिंग पार्ट ऑफ़ यू और आप लोगों से बात करिए इसके बारे में, जब आप लोगों को बताएंगे इसके बारे में तो वो आप खुद करने लगेंगे, अपने लाइफ में बिल्कु आई थिंक ये सारी चीजें करेंगे तो आप एंगल ईजली मैनेज कर सकते हैं। चेंज और बिली सिस्टम हाव स्ट्रोंग कमिटमेंट 1 लाइन में अगर आपको याद कर.
इसमें दीदी, जी 1 चीज कई बार मुझे ऐसे जो आपने कहा की हम चाहते है की हमारे बच्चे ओविडिनेकोलगता है, कई बार हमें शायद पीयर प्रेशर या समाज में यह दिखाने का भी बड़ा होता है कि मेरा बच्चा मेरी सारी बात मानता है तो शायद वो भी चीज कहीं पर काम करती है। देखो मेरा बच्चा बना तुम्हारा बच्चा सारी बात है मेरा बच्चा मानता है है.
सही कहा आइ थिंक सा होना नहीं चाहिए क्यूंकी देखिये ये कान्फ्लिक्ट है हम चाहते हैं हमारे बच्चे इंडिपेंडेंट हो और हम उनको फ़ोर्स भी करे की वो सारी चीजे हमारे अकॉर्डिंग करे बिल्कुल कैसे इंडेंट उनको फ्रीडम फ्रीडम ऑफ़ एक्शन नहीं दे रहे आप खुद को कॉन्टेडिकटकररे पेरेंट 1 तरफ इंडिपेंडेंट बच्चे रेस करना है दूसरी तरफ मेरा बच्चा में सारी बात माने तो कैसे आपका बच्चा इंडिपेंडेंट बनेगा जब आप उसको अपने अकॉर्डिंग ली चीजें करने का मौका ही नहीं देंगे तो आपका बचा जी का 1 यूनिक पर्सनैलिटी होना चाहिए बिल्कुल जी, दीदी जी जस्ट.
लाइटर में अगर में आपकी बात को सम करूँ तो भारत वर्ष 1 डेमोक्रेटिक कंट्री है तो घरों में भी डेमोक्रेसी का पालन होना चाहिए नो ऑटोक्रेसी कोई 1 दूसरे के ऊपर फ़ोर्स नहीं करे आपस में सामंजस्य स्थापित करके आगे बढ़े।
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