Screen Time, Junk Food & Your Child’s Eating Habits | 5 Hidden Reasons & Real Solutions

This is a short parenting coach video by Riddhi Deorah explaining five hidden reasons why children develop poor eating habits and practical solutions parents can implement. The five problems outlined are: (1) screen use during meals overriding hunger/fullness signals (claim: "4 in 5 children" rely on screens), (2) addictive effects of ultra-processed/junk food via dopamine spikes, (3) loss of family mealtime connection reducing social and language development, (4) parental pressure making children resist healthy foods, and (5) emotional/stress-driven eating. Recommended solutions include screen-free meals (make food=no-screen a non-negotiable), addressing emotional needs (hugs, activities, comfort without junk food), involving children in cooking/food prep, setting realistic expectations and praising small wins, and creating healthier "junk" alternatives at home.
Chapters
अगर आपका बच्चा बिना स्क्रीन या कार्टून के खाना नहीं खाता तो ये विडियो बिल्कुल आपके लिए है। यह विडियो इम्पोर्टेंट इसलिए है क्योंकि स्क्रीन टाइम एंड जांगपुर डिडेक्शन, बच्चे के, ब्रेन, हेल्थ, इमोशनल, वेल, बी और उनके ईटिंग हैबिट्स को सीरियसली इफेक्ट कर रहा है। हाई आम रदी देवरा सर्टिफाइड पैरेंटिंग कोच, ऑन मिशन टू हेल्प मदर्स बिल स्ट्रॉन्गर एंड हेल्दी ऑफ फैमिली एंड। आज मैं आपको बताने वाली हूं फाइव मेजर रीजंस फॉर, दिस ग्रोइंग प्रॉब्लम एंड देयर सल्यूशंस सो। इस वीडियो को बिल्कुल भी मिस मत करिएगा प्रॉब्लम नंबर न, स्क्रीन टाइम हैबिट्स आपको ये सुनकर शौक लगेगा, दैट मोर, दैन ए टी, वन परसेंट चिन रिक्वायर, स्क्रीन टाइम ड्यूरिंग मील टाइम मतलब। हर 5 में से 4 बच्चे बिना स्क्रीन के खाना खा ही नहीं सकते। जब खाने के टाइम पर बच्चे का अटेंशन स्क्रीन पर रहता है तो ब्रेन का जो हंगर और फुलनेस सिग्नल है वो ओवरराइड हो जाता है। इसका मतलब यह है कि बच्चा खाना खाने का प्रॉपर एक्सपीरियंस मिस कर रहा है, वो टेस्ट नहीं समझ रहा है, क्वालिटी क्वांटिटी पर फोकस नहीं कर रहा है और फैमिली के साथ कॉन्वरसेशंस भी नहीं कर रहा है। स्क्रीन टाइम ड्यूरिंग मील टाइम से बच्चे मिस कर देते हैं। सोशल ग्रोथ वोकैबलरी ग्रोथ एंड फैमिली, बॉन्डिंग टाइम, प्रॉब्लम नंबर टू, jangfotasdopomin trap जंक फूड खाने में तो बहुत टेस्टी लगता है, लेकिन अल्ट्रा प्रोसेस फूड डिजाइन तो इनक्रीस the डopoमiन रेलीज इन योर चाइल्ड्स बॉडी लेट मी एक्प्लanwिt वेरी सिम्पल एx्ाmपल। जब भी आप अपने बच्चे को चिप स्पीड्जाबर्गर ये सारी चीजें देते हैं तो बच्चे के ब्रेन में केमिकल रिलीज होता है। कॉल डोपोमीन द सेम केमिकल इज रिस्पांसिबल फॉर हैपिनेस एंड प्लेशरइनयोरचाइट। तो बच्चा कॉन्स्टेंट ली चेस करता है कि उसे नेक्ट डोपोमीन हिट कब मिलेगी। तो ये सिर्फ टेस्ट ही नहीं, एडिक्टिव भी हो जाता है। और फिर वही बच्चा सिम्पल घर का दाल चावल रोटी। ये सारी चीजें नहीं खा पाता। बिकॉज उसे डोपोमीन स्पाइक नहीं मिल रहा है और ब्रेन ऐसे खाने को बिल्कुल रिजेक्ट कर देता है। रिसर्च बताता है कि जो बच्चे जंग फूड रेगुलरली खाते हैं। दिस फोर फ्रॉम एंग्जाइटी एंड मूड डिसऑडर्स प्रॉब्लम नंबर थ्री मिसिंग कनेक्शन। आपको याद है पहले जब ज्वाइंट फैमिली हुआ करती थी तो खाने के समय सब स्टोरी शेयर करते थे, दिन भर की बातचीत शेयर करते थे, जिससे बच्चे का लैंग्वेज स्किल्स और सोशल स्किल्स इम्प्रूव होता था। और वो कल्चर अब ऑलमोस्ट खत्म हो गया है। आजकल हर मील 1 सोलो एक्टिविटी बन गया है। बच्चा टीवी देख रहा है, कार्टून देख रहा है और देखते देखते खाना खा रहा है। और पैरेंट्स अपने अपने कामों में बिजी है। कहीं न कहीं यह इमोशनल कनेक्शन खत्म होते जा रहा है। और ये कनेक्शन ही तो है जो बच्चे की ईटिंग हैबिट्स को डेवलप करता है। प्रॉब्लम नंबर फोर, पेरेंट्स प्रेशर बैक फायर्स। कई बार आपका प्रेशर बैक फायर करता है। जब आप बच्चे को प्रेशराइज करते हैं कि खाना नहीं खाओगे तो अभी तुरंत टीवी बंद कर दूंगी तो बच्चा खाने को रजिस्टेंस के साथ जोड़ देता है और मील टाइम्स उनके लिए 1 बैटल जैसा बन जाता है। इसका मतलब यह है कि जितना आप कोर्स करेंगे ये खा लो वो खालो उतना ही बच्चा उसे रिजेस्ट करेगा। तो जब आप अपने बच्चे से कहते हो कि वेजिटेबल खालो। यह हेल्दी है तो वो बच्चे के लिए 1 प्रेशर सा बन जाता है और बच्चा फूड को नेगेटिवली लेने लगता है। आज डल्स हम डिसाइड करने लगते हैं कि बच्चे को क्या खाना चाहिए। बेस्ट ऑन हंगर एंड हेल्थ। और हम अपने बच्चे को बिल्कुल भी चोइस नहीं देते। प्रॉब्लम नंबर फोर इमोशनल एंड स्ट्रेस ईटे। ये प्रॉब्लम बहुत ही नॉर्मल और कॉमन है। और आपने भी नोटिस किया होगा कि जब बच्चे स्ट्रेस और अपसेट होते हैं तो वो जंग फूड की डिमांड करते हैं। फॉर एग्जांपल। अगर आपका बच्चा स्कूल से परेशान होके आता है में भी बिकॉज ऑफ फाइट विथ, अ फ्रेंड या बिकाज ऑफ एग्जाम प्रेशर तो वो घर आके कुकीज, चॉकलेट, इन सारी जंग चीजों की डिमांड करता है। एंड इंट्रस्टिंग ली। आप दे भी देते हो बिकाज यू वांट टु कंफोर्ट, योर चाइल्ड एंड आपको लगता है। चलो इस बहाने कुछ तो खाले का मेरा बच्चा बच्चों के लिए इमोशंस समझना मुश्किल होता है इसलिए वो फूट से कोप करते हैं। स्पेशली शुगरी एंड सॉल्टी स्नैक्स इन फैक्ट नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन ने बताया है कि सिक्टी परसेंट से भी ज्यादा बच्चे अन हेल्दी स्नैक से कोप करते हैं। वेन दे आर स्ट्रेस एंड बोर्ड सो नाव लेट्स टॉक अबाउट द सॉल्यूशंस, दैट ऐक्चवली वर्क नंबर न सॉल्यूशन स स्क्रीन फ्री मेल्स। तो इसे हम कैसे यूज कर सकते हैं। सबसे पहले आप कोशिश करें कि मैक्सिमम आप 1 मील बच्चे को स्क्रीन के साथ दें। फिर धीरे धीरे आप इसे 1 नॉन नेगोशिएबल बनाएं की फूड मीन्स नो स्क्रीन। शुरुआत में बच्चा रजिस्ट करेगा लड़ेगा चिल्लाएगा रोएगा, लेकिन आपको डटे रहना है और बिल्कुल भी खाने के साथ आपको बच्चे को स्क्रीन नहीं देना है। चाहे आपका बच्चा कुछ दिनों तक बिल्कुल न खाएं। सेकेंड अड्रेस, इमोशनल, ईटिंग, पैटेंस, जब बच्चा इमोशनली, अपसेट हो, सो, 2, नोट यूज जंक फूड, आज, मींस टो कंफर्ट, योर चाइल्ड इंस्टेंट। आप ये सारी चीजें कर सकते हैं। बच्चे को हग दें, उनके साथ कुछ गेम्स खेले, एक्टिविटीज खेलें, एनवायरमेंट चेंज करें, घर के बाहर निकले, इन सारी चीजों से अपने बच्चे के इमोशनल लीड्स को सर्टिसफाई करिए। थर्ड इनवॉल्व योर चाइल्ड इन कोकिंग। जब बच्चे फूड प्रेपरेशन में इंवॉल्व होते हैं तो उनका भी फूड के तरफ 1 पॉजिटिव असोसिएशन बनता है। उनसे आप सिम्पल सिम्पल चीजें करा सकते हैं। जैसे वॉशिंग द वेजिटेबल्स शॉपिंग, द फूड नीडिंग। the do ऐसा करने से वो फूड को 1 पॉजिटिव चीज की तरह देखने लगते हैं। सॉल्यूशन फॉर इस सेट रियलिस्टिक फूड, एक्सपेक्टेशंस, डू नॉट, एक्सपेक्ट, योर चाइल्ड, टू, ईट, एवरीथिंग इन फैक्ट। जब वो थोड़ा सा खाए तो आप उन्हें एप्रीशिएट करें, उनके स्मॉल विन को भी मेंशन करे और उनसे आप यह पूछ सकते हैं कि आज उन्हें खाने में क्या पसंद आया? वो नेक्ट मील में क्या खाना चाहते हैं। एंड गिव दैम चोइसेस बिटवीन हेल्दी फूड ऑप्शन एंड सॉल्यूशन फाइव्स हेल्दी जंक ऑल्टिनेटिव्स क्रिएट हेल्दी ऑल्टिनेटिव्सइंसट ऑफ कम्प्लीट रिस्ट्रिक्शन। इससे क्या होगा आपके बच्चे को टेस्ट भी मिलेगा और न्यूट्रीशन भी नो नीड टू गो ओवर द बोर्ड बट यू कैन मेक हेल्दी जंग फूड ऐट होम वित ट्विस्ट। अगर आप इमोशनल ईटिंग करेंगे तो बच्चे आपको देखकर ही सीखेंगे। इसलिए जरूरी है कि आज पैरेंटस हम अपने बच्चे के लिए 1 अच्छा एग्जाम्पल सेट करें तो बच्चा। जब नेक्ट टाइम बोर होकर आपसे जंग फूड की डिमांड करे तो बच्चे को जंग फूड ना दें। बल्कि उनसे पूछें आयु रियल्ली हंगरी और जस बोर्ड बच्चे खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं खाते, वो फीलिंग्स और इमोशंस भी कंज्यूम करते हैं अंडरस्टैंड दैट इमोशनल ईटिंग पैटेंस कैन भी चेंज वित राइट अप्रोच अगर आपको ये वीडियो अच्छा लगा और आप मेरी पेरेंटिंग कम्यूनिटी से जुड़ना चाहते हैं, जहां हम रियल पेरेंटिंग चैलेंजेस को सॉल्व करते हैं। then i share the details with you in the description blu, thanks for watching and do not for get to subscribe to माई चैनल for more such videos।
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