बच्चों की study के लिए 3 easy tips | Riddhi Deorah

Riddhi Deorah, a parenting coach, shares three tips to help kids study better: minimize distractions, set realistic expectations, and have them explain what they learned. Simple strategies parents can use right away.
मैं हूं रदी देवरा पेरेंटिंग कोच और आज हम हिंदी में बात करेंगे बिकाज बहुत सारे मदज ने मुझे मैसेज लिखा है कि मुझे हिंदी में भी वीडियोज बनाने चाहिए तो आज का वीडियो और आज का हमारा टॉपिक है वो 3 आसान तरीके जिससे हम बच्चों को पढ़ा सकें हम कैसे बच्चों को आसानी से बढ़ा सकते हैं तो टिप नंबर वन है कि हम जब बच्चों को पढ़ाने बैठे हमें इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि उनके अगल बगल काफी डिस्ट्रेक्शन नाव मतलब कि उनके पास काफी खिलौने टॉयज और बहुत सारी अलग अलग चीजें न रखी हो बिकाज जब उनके सामने टॉयज अलग टाइप के बॉक्स और ये सारी चीजें रखी रहती हैं तो बच्चों का ध्यान आसानी से भटक जाता है और फिर वो पढ़ाई छोड़ के उन चीजों को देखना चाहते हैं बिकॉज बच्चे बहुत ही क्यूरियस होते हैं उनका माइंड जो है अलग अलग चीजों की ओर भटकता है तो हमें यह जरूर ख्याल रखना चाहिए कि जब भी हम अपने बच्चों को पढ़ाने बैठे तो हम बस उनकी जो पढ़ाई की चीजें हैं वहीं लेकर बैठे तो जब मैं अपने बेटे के साथ कुछ भी एक्टिविटी बुक या कुछ भी लेकर बैठती हूं तो में बस कुछ कलर्स 1 पेंसिल और उसकी बुक लेकर बैठी हूं और बाकी सारी चीजें वहां बिल्कुल नहीं रखती तो इससे हमारा जो है काम बहुत आसान हो जाता है तो इस चीज का आप बिलकुल ध्यान रखें एंड टिप नंबर टू इस टू हैव रियलिस्टिक एक्सपेक्टेशनस इसका मतलब यह है कि हमें बच्चों से जो उम्मीद है वो सही उम्मीदें करनी है जब हम उन्हें लेटर्स ऑफ द इंग्लिश आर सिखाते हैं वेन भी टीच लेटर a तो हमें लगता है यह कितना आसान है मैं ऐसे कब से सिखा रही हूं पर यह अब तक नहीं सीख पाया या यह अब तक नहीं सीख पाए और हम बहुत जल्दी इरिटेट हो जाते हैं बहुत जल्दी गुस्सा करने लगते हैं बट हमें ऐसा नहीं करना चाहिए बिकॉज हमें यह समझना जरूरी है कि लेटर a हमारे लिए आसान है बट उनके लिए बहुत ही टफ है आप सोचिए अगर आपको कोई चाइनीज टैक्स दे दे और आपको बोले कि आप ये लिख के मुझे दिखाइए सिर्फ 2 बार आपको दिखाए और आपसे यह उम्मीद करे कि आप उसे तुरंत से लिख के उन्हें दे सकते हैं हम भी ऐसा नहीं कर पाएंगे तो हमें अपने बच्चों से जो है एक्सपेक्टेशन रियलिस्टिक रखनी चाहिए हमें उन्हें फोर्स नहीं करना है हमें थोड़ा शांत रहना है, थोड़ा पेशेंट रहना है और धीरे धीरे उन्हें सिखाना है सो वी डोंट वांट टू, फोर्स वी जस्ट, वांट टू कपोज न्यू थिंग स्टू, दम वी वांट टू, शो, दम डिफ्रेंट, थिंग दैट इज वेरी इम्पॉर्टेंट हमें दिखाना जरूरी है हमें उन्हें समय देना भी जरूरी है सो लेट्स गिव दैम टाइम, आन लेट्स बी पेशेंट सो, ये है टिप नंबर टू और टिप नंबर थ्री यह है कि हमें बच्चों को बोलना कम है और उनसे पूछना ज्यादा है और ये हमारे इंडियन एजुकेशन सिस्टम में बहुत ही बड़ा फोल्ड है क्योंकि अगर आप देखेंगे तो क्लास रूम लेक्चर्स। ये सब हम नोटिस करते हैं कि टीचर्स सब टाइम बोल रहे हैं और बच्चों से पूछते बहुत कम हैं पर बच्चे अपना माइंड तभी यूज करेंगे। जब हम उनसे पूछेंगे तो जब भी आप अपने बच्चों को कुछ भी सिखाएं आप इस चीज को जरूर करें। आप उनसे वापस पूछिए कि आप मुझे समझाइए बेटा क्या आपने उससे क्या सीखा कैन यू एक्सप्लेन दिस कॉन्सेप्ट टू मी, अगन कैन यू, टेल मी, वाट यू लर्न सो इट्स वेरी इमपोर्टंट कि हम उनसे बहुत क्वेशचंस पूछे बिकॉज जब हम उनसे क्वेश्चंस पूछेंगे तब वो अपने माइंड को अप्लाई करेंगे और जब वो अपने माइंड को अप्लाई करेंगे तब उनकी जो लर्निंग होगी वो बहुत ही डीप होगी सो इस वेरी इम्पोर्टेंट कि हम ये करें। तो अगर आप इन तीनों चीजों का ध्यान रखेंगे, रिमूव डिस्ट्रैक्शंस हैव, रियलिस्टिक एक्सपेक्टेशंस एंड आस्क, अ, लॉट ऑफ क्वेश्चंस। अगर हम ये तीनों चीज कर सकते हैं तो बहुत ही आसानी से अपने बच्चों को बहुत सारी नई चीजें सिखा सकते हैं ऐसा जरूर करिए और अगर आपको मेरा ये हिंदी का विडियो पसंद आया तो नीचे जरूर कमेंट करिए इससे मुझे और कॉन्फिडेंस मिलेगा और मैं आपके लिए और हिंदी में वीडियोज बना पाउंगी। थैंक यू।
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