Shankaracharya Swaroopananda Saraswathi explains that Krishna's appearance on Janmashtami is not a literal birth but a manifestation of the eternal Supreme. He connects Krishna's revelation to spiritual guidance for modern problems, emphasizing Mathura as the place of this divine manifestation.
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जिसको हम लोग जन्माष्टमी के रूप में जानते मनाते हैं, वस्तुत जो अनंतपुर ब्रह्मा का निष्ठा और जो समस्त प्राणियों का अपना अंतरात्मा है और सबका अंतरात्मा होने के कारण सबका परिमास बंद है और परमात्मा परिमास बंद होने के कारण परमानंद स्वरूप है, वह परमात्मा जन्माष्टमी के दिन पहले से ही था। केवल उस परमात्मा ने अपनी या 1 दिन शरीर धारण किया, जिसका वर्णन उन्होंने भगवत जीवता में किया है ात्माभूतानाशरुप प्रकृति स्वामी ठाह सम्भव मायाया अर्जुन मैं अजन्मा हूँ, अविनाशी हूँ, समस्त जगत का स्वामी हूँ। पर जो अपनी सचिदान्रुपा प्रकृति है, उसका बिना त्याग किए ही सचिदानंद स्वरूप में विद्यमान रहते हुए भी अपनी योग माया से जन्म ग्रहण करता। शिक्षा से भक्तों के लिये भगवान दिव्रदय धारण करते हैं और दिव्रदयधारण करके भी अपने स्वरूप में ही प्रतिष्ठित रहते हैं। ऐसे भगवान श्री कृष्ण ने जन्माष्टमी के अवसर पर देव की वस्तुओं को माध्यम बनाकर स्वयं को प्रकट किया। उनका जन्म नही हुआ, प्रकट हुआ है। वहां वर्णन आता है कि जैसे प्राची दिशा में से पूर्ण चंद्रमा का दर्शन होता है तो प्राची दिशा चंद्रमा को उत्पन्न नहीं करती। केवल वो उनके प्रखंड का प्राकट का मात्र 1 माध्यम बनती। उसी प्रकार परमात्मा देव देव के माध्यम से कंस के कारागार में प्रकट हुए थे और ऐसा करके उन्होंने बताया कि संसार कारागार में फसे हुए जीवों के लिए मुझे भी पहले कारागार में आना पड़ेगा, वहाँ आकर ही मैं उनका मुख कर सकता हूँ। श्री भगवान ने जन्माष्टमी के अवसर पर स्वयं को प्रकट किया है। आज हम भारतवासी धन्य है जो हमारे इस भारत देश में और भारत देश में भी मथुरा में भगवान ने अपने आप को प्रकट किया है और उनके प्रकट से ये देश ये भारत विश्व में अपना 1 कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। भगवान श्री कृष्ण की जीता, भगवान श्री कृष्ण का पवित्र चरित्र हमारे लिए आज भी प्रासंगिक है। उसके द्वारा आज की समस्त समस्याओं का निराकरण हम उनके देश से प्राप्त कर सकते हैं। ओम शांति।