Amrit Pravachan 28 Sept 2018 Palwal Harayana

A recorded pravachan by Swami Swaroopananda Saraswathi (Amrit Pravachan, Palwal, 28 Sept 2018) presented in Hindi/Urdu with Sanskrit references. The speaker discusses the nature of creation and the creator (Brahman/Paramatma), the role of dharma and spiritual teachers, the duty of parents and gurukuls to pass on Vedic knowledge, and contemporary socio-religious issues (protection of Sanatan Dharma, Ram temple, legal/political challenges, threats to traditional practices). The talk mixes theological exposition, cultural-preservation appeals, and calls for community action and education.
Chapters
Ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ � ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ ὑπὸ � ḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤḤ� जब हम किसी तुरित्ती के खड़े बोल देते हैं तो वो अन्वान करते हैं कि इसको वराने वाला कोई अन्वान होगा और जब किसी आमुशन को देखते हैं अन्वान करते हैं कि इसको वराने वाला कोई अन्वान होगा इसी तरह से जब हम इस संसाथ को देखते हैं भूदर, आगर, अगर, परवर और यहां भी सब सुभ्यास्ता को देखते हैं तो साहार वरुसे इन्मान कर सकते हैं इसकी निर्मान का भी कोई कारण नहीं था किसी ने इसको बनाया था और जो जिसका निर्मान करता है वो पहले उनको तुम्हें मन में सोच लेता है कि हमको क्या बनाया है जाना की پُسْتِبَاتِ جِتْشَةِ کَرْتَاۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤۤ और उनके लिए कौन-कौन से शरीरों की आवश्यक्ता है, तो दाखता हैं। मिलिश्य दाखता हैं। तो सुमार्थ दाखता हैं। तो उसके पास अनन्त दियावर अनन्त शक्ति दाखता हैं। इसको हमारे महारत के लोगों ने पहली थी खोड़ते हैं। उसको हम जो कहते हैं, वो इश्व है, ब्रह्मन ख़वान। यतों मा इमान्यों ता नियायते, जीर जाता नहीं होती, यत प्रयंक्यों जम्प्रन्ती होती। जिस से सब कारी प्रत्ती होती है जो सबका पारण करता है और अन्हेन सबका इसमें प्रत्ती होती है उस बर्मात्मा ने जब संसार की रच्चिना की तो अन्हेन को शरीर मिलाए पिरिच बनाये, सादतने वाले पराड़े बनाये, चोड़ाये बनाये, पोड़ने वाले पच्चे बनाये। जैसे मैं देधर वाले पच्चेवों का रिमार्ण कर रहा हूँ। लेकिन उनको किसी भी सरीद में रिमार्ण थे उतना संतोष नहीं हुआ इतना मनस सरीद थी। म क्योंकि इसने जीतन ऐसे गुल्दी थी जिससे होग बर्मात्मा को जान सकता था। बर्मात्मा का नाम है। आप दिखिये एक कोई बोल बड़े आपने साथ देखें। उनकी पर्पुस्थ गर्मात्मा तो गर्मों बात है। वो लोग पुसले माता ने अपने बेट्टी को भुगवान का ज़्यान करने के लिए है। वो थोड़ी देव बेट कर भुगवान का ज़्यान करते है।.
एक दिन मीच मी पर तुसी पिता.
ने बुलाया, आने में भिरंब हुआ.
नान पर बोला, इतनी देव तो नहीं है.
क्यों � موسیقی کی ایسی طرح میں دھیان کر رہا ہوں کس کا دھیان ہے؟ تمہاری ماں کچھ نہیں سمجھتی کھولیں جس نے دنسار کو بنایا اس پہ کھند کرنا کوئی نہیں یہ کمکری سے بنایا تطوہ پسو میلے پھر مانو میلے ہوا سے ظاہر بن گیا ہے اس کا میشن بن گیا تھا اس نے پوچھا کی پیتا سے محسوس کرنے کی اس نے چھت سے جلا کی ایک بہت سمدھر چھت سے جلایا اور اس میں رکھایا بنا کر जहां यसा लंग चाहिए हूँ प्लान पिनारा पिनारा उसे करण रहे हैं। पिता यह नहीं में उचित रहे हैं। जब पिता आपका बेटा उसे नहीं उचित रहे था वह बेटी नहीं हो रहे है। पुछा आये जिन्द तुमने वराया अगर में तुमना जी नहीं चाहते नहीं वराया। गळग गळग देट नहीं चाहते नहीं वराखा। अब अच्छा नहीं चाहते नहीं। समझी है तुम? ताकि इस गळग गळग देट गळग वाला अच्छा नहीं चाहते नहीं तुमन مجھے پوچھا ہے کہ مجھے جنگتار کیسے کے؟ تو کہنے کا عرصہ یہ ہے کہ اس جنگتار کو بنانے مارا برماتمہ ہے اور اس برماتمہ نے جیسے منوشنوں کو برماتمہ کرتے.
Ḍarbda dhyan dharajīya ہیں dhīnī brahmī ḍarbda dhyan dharajīya dhīnī brahmī ḍarbda dhyan dharajīya dhīnī brahmī ḍarbda dhyan dharajīya dhīnī brahmī ḍarbda dhyan dharajīya dhīnī brahmī ḍarbda.
Dhyan dharajīya dhyan dharajīya dhīnī brahmī ḍarbda.
Dhyan dharajīya dhīnī brahmī ḍarbda dhyan dharajīya dhīnī brahmī ḍarbda dhyan dharajīya.
Dhī.
उसी वैदिय धर्म को हिंदू धर्म कहते हैं और इस देश में उसी धर्म को जानने वाले हिंदू रहते हैं इसलिए इस देश का नाम हिंदुस्तान तो कहने का हमारा उप्रा यह है कि ये देश हिंदुतान भी कहलाता है भारत भी कहलाता है भा माने ब्रह्मविद्या उस ब्रह्मविद्या में जोरत लेने वाला है जो समादी के दोरा परमात्मा का साथकार करता है वो देश आरत है शिकन्दर बाद्शाय जब अपने तो उसका गुरु था अफलातुन उसने अपने गुरु से पूछा कि मैं भारत जा रहा हूँ तेरे जी क्या लाऊँ उसने कहा जदी तू वहाँ जा रहा है तो गंगा जल लियाना। और कहा गीता की एक पुस्तख लियाना। और मिल जाये तो घ्यानी गुरू लियाना। ये भारत की माताएं हैं जो घ्यानी गुरू को जनव देती हैं जो संक्राच्छारी को जनव देती हैं جو درم کو جنب دیتی ہیں برہلاک کو جنب دیتی ہیں آج اُن ماتاوں کو اُن کو سکھا جا رہا ہے آج احوال آرہا ہے کی اگر کوئی پربولش کے ساتھ امپر کرتی ہے یا پربولش کرتا ہے تو وہ عبراد نہیں ہے یہ قانون مردا ہے اِس دیش میں شبری ملے میں جو نانیاں رجسلہ ہو جاتی ہیں اُن کو جانے سے رُک دیا گیا تھا آج قانون آ گیا ہر کوئی جا سکتا رجسلہ دوشہ ہی نہیں ہے استیوں کے حدیقار کا آنہ اے بتائیے कि ये जो भैसले हो रहे हैं ये रिशीयों के भैसले हैं कि और किसी के हैं रिशी उसको कहते हैं जो साक्षाद धर्म को जागने वाले होते हैं साक्षाद धर्म साक्षाद रिश्यों धर्म दिस्ता था। धर्म धर्म। जो साक्षा धर्म को जानते वाला होता है उसको रिश कहते हैं। आप देखिए आज जो कानून बन रहे हैं, पाल्लामेंट बन रहे हैं, इसमें योगों बन रहे हैं, कहते हैं बैठा बनिया क्या करे? इस कोठी का पैस, इस कोठी का सामान उ बिना बात हमारी करंपराओं को निष्ट की निष्ट की निष्ट की निष्ट की निष्ट की निष्ट की निष्ट निष्ट.
की निष्ट की निष्ट की निष्ट की.
निष्ट की निष्ट की निष्ट की निष्ट मनुष भी कर देता पस्व भी कर देता अरे पस्व तो मनुष को तो भोजन पकाना पड़ता है और पस्व से गोड़े के मुह में तोड़ा मांग दिया जाये एक पसेरी चना छोड़ी देर में फुर रखा जाया और पचा जाया नहीं मनुष को नीज देना है तो इसको विस्तर चाहिए, तकिया चाहिए मच्चनों तो मजहरी चाहिए एर कंदिशन चाहिए और फिर भी नीन ना आये तो फिर नीन की गोली चाहिए लेकिन कुछता बैठे बैठे सो लेते हैं पशु सो लेते हैं इसी तरह से मनुश दो साल में एक बच्चा बेदा करता है एक दिवार, एक दिवार, डडडड बच्चे पे लागते हैं। क्या विशेस्ता मनुष में है? मनुष में विशेस्ता ये है कि ये जानता है कि ये मा है, ये बेन है, ये मेटी है, ये पाप है, ये पुन है, ये साथ के बृत है, ये साथ के अनुपूर है, धर्म अगर वो जानता है और धर्म के अनसार सलता है तो भी वो मनुष ने लाएगा है नहीं तो पसु में और मनुष में क्या है आज की जो सरकारे हैं ये मनुष को पसुता की तरब ले जा रही है आज का जो संभिधान बना है वो इश लोक के लिए है परलोक के लिए � सुप्रीम कोर्ट का जज़ जब भगवान यमराज के सामने जाएगा तो उसका जज़मेंट मना जाएगा कि भगवान यमराज का मना जाएगा किसका मन होगा अल्याकार का मन होगा तो यही सब उल्टा प्रस्टा लोग कर रहे हैं एसे जब जज़में आ रहे हैं और राज का � सर लक्षन राजविदी कर रहे हैं हिंदु धर्म के नाम पर हम लोगों को बहकाया गया कि गोमानस का निर्यात भारत नहीं करेगा गंगा की धारा अभिजल बहेगी और हम सिक्षा में अहूनतूर परिवर्थर कर देगे और हम कास्मील की हलत ठिक कर देगे کیا کیا آپ؟ اُلٹے اور ہندو دھرم کو نشھ کرنے کے لیے کہہ رہے ہیں کہ انتر جاتی بیوائی کرنا چاہیے سادھی جو ہے contract ہے جبکہ ہمارے ہاتھ بیوائی جو ہے وہ سنسکار ہے contract نہیں ہے اور اس کو تہہ کرتا ہے دھرب آج بھی یہ قانون ہے کون کسی بطمی ہے اس کے بارے میں کوئی پوچھے گی کس نے ساتھ پھیری گی جس کی شادی ہوتی ہے کسی مندل میں کسی استان پر وہی بطمی بنایا جاتا ہے तो धर्म को तो आप मानते भी हैं और रादा मानते हैं और रादा चोड देते हैं तो ये सब बातें ऐसे हैं किन पर हम रोमों को विचार करना चाहिए ऐसे ये समय आ गया था जब भारत में बहुत धर्म फेल गया था बहुत लोग ईशर को नहीं मानते थे आत्मा को भी नहीं म और वेदों को भी पुराण नहीं मानते थे तो उनको राज का आश्य मिल गया था तो भगवान शंकराचारी आया आये और नोने 32 वर्ष की अवरता में पूरे भारत को पुरा बैदिक धर्म में दिख्षित कर दिया वो गुर्ण थे जगत गुरू उन्होंने बताया है। चारों युगों में गुरू होते हैं। कृते विश्य गुरुर ब्रह्मां। त्रेतायां बनशी सत्यमां। द्वापरेव्यासेवास्त्यात् कलावत्रभौम्यां। सत्युग में ब्रह्मा निवत गुरू थे। त्रेता में बसेच्चरी हुए। दापर में ब्यास हुए और कल्यों में शंक्राचारी बनते हैं तो अब आप ये हालत हैं आप ध्यानते सुनिये शंक्राचारी का जुरूत हैं ये आपने सुन लिया लेकिन नकली बनाय जा रहे हैं बैजी चेवन शंक्राचार जगह लगे के लोगों को बनदिया जाता है कि जिस से वो एसी व्याक्षा करें जिस से की नासिक्ता पैदा होता है। उस से हम को बचना चाहिए। और भारत में हमारी नदियां पवित में हैं। अब रंधारा चले गंगा यवना पवित रहो नदियां पवित रहो گو ماتا کے رکشہ ہو اور ہمارے سوروں کالیجوں میں مہا بھارت رمائن کی شکشہ دی جائے اور دیش کی جو پراعچین سنسکتی ہے اس سے نئی پیری کو اوغد کرایا جائے ماتاوں کا ایک عرطب ہوتا ہے कि वे अपने बच्चों को संस्कार देखें। उनको प्यार देखें और उनके बाद धर्म की सिख्षा देखें। आजकल तो यह है जिश्म में वो कहां से आये। माबाब के प्यार की दूद तो है जिबों का है तालीम है सरकार। जिबों का दूद पिलाते हैं। और तीन सान के लाड़े को स्कुल में ही देती हैं। बच्चों को पता ही नहीं जाता कि हमारे थसकती क्या है। हमारा धर्म क्या है। और आज एस्टी लगा जी गई। कोई भी कह दे कि हमको इसमें अमुख कह दिया। तो साथ दिल की सजा उनको बिना विचार कर जा इनको नश करो। जो हमारी संस्कृती हैं हमारे विश्वास हैं उनका एक मूल कारण बताते हैं जो कि और से नहीं मिलता है वो यह है कि हम लोग पुनर जन्म में विश्वास आते हैं और यह मानते हैं कि मनुश के कुण पर्मात्मा जन्व देता है। और जन्व से ही धर्म का ज्यान होता है। इसी को समाप करने का प्रेतन हो रहा है। यह आपको अच्छी लिए समझना चाहिए है। जो ब्रामन कुल में जन्वे हैं। उनका कर्तब होता है की वेद साथ की अपने बालकों को सिख्षा दिलाएँ। वेद वेनान का घ्यान कराएं। और माताओं को भी चाहिये कि ऐसे वेटे उत्पन करें। जो हमारी संस्कृति की समता की रख्सा करें। तो ये आवश्चक हैं। पल-वल-वल। आस्तिकों का नगर हैं हरियाना पर्देश हैं जहाँ हरी कायान चल रहा है आप लोगों ने चातुर मास में आकर हमारे प्रभचन भी सुने और जहाँ आने के लिए अलोध किया हमें आपकी शद्धा से यह बुच्चित लगा कि यहाँ पर सनातन धर्म का एक केंद बनना चाहते हैं.
सनातन.
धर्म की रक्षा के लिए सनातन धर्म क्या है सिदिस्म जी सदाचारा सत्य चप के लिए मात मना एताच्चतर्विजम् प्राहुर्स्थाक्षान् धर्म रक्षन। शुती, स्मिती, सदाचार और आत्मा की प्रशनन्ता। यह धर्म के रक्षन है। आत्मा की प्रशनन्ता सदाचार के अनुपूर होना चाहिए। सदाचार की स्मिती के अनुपूर होना चाहिए। और स्मिती ब्रामण अपने हिदे में रखें सिकाल धन्या करें और अपने ब्रामणत की रक्षा करें जाती पहती तोड़ने के वड़े प्रियास हो रहे हैं अंतर जाती दिवायक के लिए आज करके हीदू नेता भी घरे हैं इन सब को ठुकराएं اور اپنا جو سناتاً دھرم جو اپنے پرمبراہ ہے اس کی ذرتہ سے رکھشہ کرے آپ دیکھئے جب کوئی کتہ کھریتا ہے تو ساتھ پیوری کا اس کات پیوری کا بہت سامہ نہیں جان لیتے اس کی نسل کی رکھشہ ہوتی ہے برامڑ کی نسل کی رکھشہ کیوں نہیں ہو رہی ہے کیوں اس کو بگاڑ رہے ہیں؟ یہ بات کوئی حمد سے کہنے کو تیار نہیں ہے ہمیں روگا کوئی کہتے ہیں اور ہماری بات لوگ نہ سنے اس لیے نکلی اور بنا کر لے آتی ہیں تو آپ یہ دھیان رکھیں کہ بھارت میں چاری مٹھ ہے اتر میں جوتر مٹھ दक्षिन में शिंदेरी मत पूरु में गुवर्धन मत और पस्चिम में द्वार्ण का संग्रशाच और आपका जो हरियाना है अगर ये पस्चिम में है तो आपका गुरु द्वार्ण का संग्रशाच है और अगर ये उत्तर में है तो आपका गुरु जोतिर्श्मी का संग्र� पहले अपने गुरु की बात बान बानी। जो जिसका जुरीडिक्षन है वहां उसकी बृधानता होती है। आजकल ये भी लोग कहते हैं चार मिल की बात करीं, चार मिल। तो करें। जब चार राज़ानी बनाई गई हैं तो जो नहां का राजा है धर्म का उसकी बात चले जो तिरमच सरेगा, वो पच्चम में दौर का सरेगा। वहाँ ते जल करने में हो, उसको सर्मान किया जाना चाहिए। और इतना ही कहते हैं, प्रोजियत बूल करते हैं। एक बात और है, वो यह है कि एक फ्रेसना कल हुआ। کی مسجد میں نماد کرنا اسلام کا عبارہ نہیں ہے اب یہاں پر مقدمہ چلے گا اور ہم لوگ کا ہی تو یہ کہنا ہے کی جس کو آپ مسلمان بھائی مسجد کہتے ہیں اور کہتے ہیں ہماری مسجد شہید ہو گئی हम आपको प्रावानिक रूप से बतलाना चाहेते हैं कि वहाँ मज़ित थी ही नहीं.
हमने.
खुद अपनी आग से देखा है वहाँ तोड़-तोड़ तो ही है लेकिन 14 कसोटु के खम्बे थे उन में मंगल का रस्ता, अन्मान जी का चित था مسجد میں چتر نہیں ہوا کرتے اس میں چتر تھا تو ایسے حستی میں یہ لوگ جو رانجی دکھ لوگ ہیں انہوں نے جھوٹا پرشاہد کیا تیل لگاو نابر کر نہ مٹھاو بابر نہ بابر آیا نہ کیا جبرزستی وہ چودہ کھمیں اور توڑ دیئے دو مسلمانوں کہنے کا موقع ملیا ہے کہ ہمارا مسجد تھوڑ دیئے وہاں مسجد تھی ہی نہیں وہاں ہمارا مسجد تھا اور اگر یہ لوگوں کو نہ توڑتے تو ہم اُس کا جیروں دھار کر گئے اور دوسری بات آپ کو ہم بتا دیئے لوگ یہ چاہتے ہیں ایدھا میں رام جنمونی میں رام مندل کا نرمان ہو ہم آپ کو بتانا چاہتے ہیں ان لوگوں نے گرم گرے سے ایک سو بانویں فٹ دور شلالیات کردیا دیا سنگ دوار کا شلالیات کردیا دیا تو ہم کو لگا کہ رام جنمونی کا ادھار ہوگا نہیں और शिरान्याज जो होता है वो गर्वग्रे के आग्ने कोण में होता है तो गर्वग्रे के आग्ने कोण में चार शिरा लेके नंदा, भद्रा, जया, पुना, चतः, सत्, सीर्मा, शिरा सम्रांगन शुक्तिदार के अनुसार चार शिराएं होती हैं बहुत शिराएं नहीं होत हम लोगों अमको उन्होंने पहले गरमतार करते हैं ना वो फूलबुर्म भी हमको नहीं जाने दिया और महाच कहते हैं तो अब हम लोग यह चाहेते हैं कि राम मंदर यदी बनेगा तो वो कहते हैं मोहन भागवत कि हम राम मंदर बनाएंगे लेकिन देव हम तो आदर्शराम का मनदर मुझे आए थे। लोड़। बात सुन लो। बगवान राम चिंदली आदर्श तव हुए जब उन्होंने बिशामित लीजे यग भी रख सके। जब पिता की आगें मान कर मैं चले गए। और औहां से लोड़ के आदर्शराम। नियापक निर्गुन विगत विनोत सोज़ वक्त प्रिविवस कौशल जागया। कौशल जागी गोध वाला राम हमको हुआ चाहिए है। हम और किसी बात में नहीं आएंगे। और कोई भी पार्टी मंदर नहीं बना सकते। मंदर बनाने के लिए उसको सरकार बनना पड़ेगा। सरकार मरपे इस धर्म निर्पेख्ष हो जाएगे। वो मंदिल-मंजिल बनाई नहीं सकते। इसको संत, महत्मा, सद्गृयात हम आप सब मिलके बनाएंगे।.
आप साथ लोग नहीं बनाएंगे।.
हमारे पास दो से लोग आएंगे। मुसल्मान आएंगे हमारा अविद्या में कौन सा दंगा हो रहा हैं। जो फालतु बात करते हैं। जो कोर्ट में हिस्टे लग रहे हैं। कोर्ट से तुम अपना दावा वाफिस लो। जावरा ख़ता है। वो करते नहीं हैं। पर राणी जी करते हैं। तो ये आप तमझ दिखे तुमारा ये संग्राच سجد اور وہ یہ چاہتا ہے کہ سناتن دھرم کے ہی ازار رامندر.
وہاں پر بنائے گا یہ ہمارا کیا.
ہے اس لئے آپ پوچھئے ان لوگوں سے کہ تم کسا مندر بناوے گے کون بناے گا پوچھا کیسے ہوگی یہ تھوڑی ہے پتہ بنا کھڑا کردیا جیسے ये आदर्श कुछ होते हैं न वो तरदार पते हैं उनका पुद्रा लग रहा है साजू किनारे पुद्रा खड़ा कर जिया कराम मंदिल मनदिल कहाये न मंदिल हैं हमको पुद्रा नहीं खड़ा करना है छोड़ से जाम लेना गराज करना है और हम ये मानते हैं कि वो जो चुटा सा राम लाला जन्मा था वो परब्रहम का अवतार था जगत के कल्यान के लिए उसका जन्मुआ था और केबर असलों को मानने के लिए नहीं ध्यान के लिए बना था कि जिससे हम उनका ध्यान करें उनका इसमनन करें उनके बाल चेरिष का शमनमनन करें उनक.
اس.
کے لئے بھگوان کا اوتار بڑھ جاتا ہے تو وہ سلطنتن بتائے گا تو بہت بہت باتیں ہم نے آپ کو سمجھا ہی تھی اسی کو لے کر آپ سن رہے ہیں سری رام جے رام جے جے رام Śrī Rāma Jaya Rāma Jaya Jaya Rāma Śrī Rāma Jaya Rāma Jaya Jaya Rāma Dharmakī हर हर मकार राणियों में विष्य का गो माता की हर हर माते.
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