This content was created by swami swaroopananda saraswathi shankaracharya. This content was uploaded by swami swaroopananda saraswathi shankaracharya. This is a YouTube video titled "Amrit Pravachan Jagadguru Shankaracharya Swami Shree Swaroopanand Saraswati ji maharaj Kolkata 2019" featuring a lecture or discourse by Swami Swaroopananda Saraswathi Shankaracharya. The content, created on August 14, 2019, involves a spiritual discussion on various philosophical and religious concepts, including the integration of different practices and the importance of focused devotion.
Chapters
Shakti, jo, dusre, srekineeheram ये सब परस्पर विरुद्ध बाते है। वहीं व्यास कह रहे है तो इसका समन्वय हमको करना चाहिए। हाँ हाँ ये भी कहा है। सवाल यह है कि जिसकी बराहत होती है उसके गुण गाय की है। तो ये जितने भी और समाचारी लोग हुए हैं उन्होंने 1 सीढी तक लोगों को पहुँचाया। जैसे मीमांसा ने हमको कर्म तक पहुंचा दिया, फिर दूसरे दूसरे चारियों ने उपासना तक पहुंचा दिया। जब हमारी क्षेत्र की शुद्धि हो गयी तो उसके आवरण दूर दूर करने के लिए वेदांत में है। तो हमारा जो वेदांत है वो कर्म का विरोधी नहीं है। न वासना का मोती है कि उनका ये कहना है, हम महातातवरीकेअनुकूल उसको समझते है। बेनाम को समझने के लिए साधन तरुपये संपत्ति की आवश्यकता है। तो वो तमेतमब्रह्मणऔविधिषण लाने में बसा नाचते ब्राह्मण लोग उसको जानने की इच्छा करते हैं। यह विधान नाच तो यह विधान तब से सीधे सीधे परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती है। उस को प्राप्त करने की योग्यता आई। इसी प्रकार ये जो भिन्न भिन्न देवताओं को श्रेष्ठ बताया गया, जैसा सुना कि 1 बार उसमें पक्की निष्ठा हो जाए। अगर हम कभी किसी जी कभी किसी करते है तो काम नहीं बनता है। 1 विस्टा और बात खत्म करते हैं। ज्यादा बोलने का हमको टाइम नहीं है, 1 साल लगता है वो 12 साल से 1 स्थान पर बैठ के जब कर रहा तो वो सभी देवताओं को जप कर रहा था, थोड़ा गणेश जी का किया, उसके बाद शंकर जिला किया, रामचंद्र जी किया, कृष्ण भगवान का किया, फिर उसका किया। बदल बदल के बुगाता 12 साल के भगवान का साक्षाकार से क्या वो वहाँ पर सामने जमीन खोदने लगे। 122 फुट का गड्ढा किया, पोर्ट का गड्ढा किया, 4 पोस्ट का गड्ढा घडा किया, ऐसे दसों घंटे कर जाते ये देखता रहा ये क्या कर रहा है। तो अंत में उसने पूछा भाई ये क्या बात है, तुम क्या कर रहे हो उन्हें हम पानी निकालना चाहे उन्हें पानी निकालना था तो 1 जगह तुम गड्ढा करते, 2 जगह जग गढढा कर रहे हो तो पानी तो नहीं निकलेगा। इसी तरह 1 का भी न करे तरह अनेक रूपों का भजन कर रहे हो नष्ट। तो समझना चाहिए कि संपादन के लिए प्रशंसा करते है, नहीं निंदा।