Swami Swaroopananda Saraswathi recounts Krishna's childhood miracles, including his defeat of demons Shakatasur and Batta. Sage Garga declares the child no ordinary boy and names him, promising that devotees who love Krishna are protected from their enemies.
Chapters
तो भगवान औतार लेकर मनुष्यों जैसी लीला करते हैं। उनकी लीलाओं को देखकर बहुत से लोगों को मुंह हो जाता है। भगवान श्रीकृष्ण भी इसी प्रकार की लीला करते हैं। वो भी बालक बनते हैं, बालक बनते हैं, उनका भी नामकरण संस्कार होता है और कभी भी अपना व्याव दिखा भी देते हैं। शकटासुर आया तो अपने कोमल चरणों से शकट को उड़ा दिया और दूसरा आया बातता रूपधारण उसको भी मारा और बालक के बार लोग समझ नहीं पाये। कौन है उन भगवान का गर्ग जी ने नाम करण किया। गर्ग ने कहा आसनबरणातहस्गृणतूण युगम दनु, शुक्र, रक्त तथा बीता दानी कृष्ण। तांगा ये जो बालक है, यह साधारण नहीं है। जी। ये युग युग में उतार लेता है। सत्युग में शुक्र होता है, पर कृष्ण होता है, पीत होता है, जो रक्त होता है, रक्त होता है, पर पीत होता है। ani kinta kunta ki ye to tumhara beta le ke इसलिए श्रीमान वेद जी इसको बाल सुदेव कहेंगे। लेकिन गुण श्री कीर्ति में तुम्हारा बेटा नारायण के समान होगा। जो इससे प्यार करेगा, उसके शत्रु उसका किसी प्रकार से अहित नहीं कर पाएंगे। जैसे जिन देवताओं के पीठ पीठ पीछे रक्षक के रूप में भगवान विष्णु हैं, असुर उनका कुछ नहीं है। भगवान श्री कृष्ण के स्मरण मारते शत्रुओं का नाश हो जाता है। तो तुम उनको बहुत सावधानी से इनका पालन करो। इस तरह से गर्ग जी ने उनका नामकरण किया।