A short Hindi interview with Dr. Vaishali Gupta about Vastu considerations for apartments and high-rise buildings. Dr. Gupta explains that Vastu effects decrease with higher floors (so residents on very high floors experience weaker Vastu influence), but overall correct or incorrect Vastu still impacts residents. She also explains why different towers within the same apartment complex may show different health/outcome patterns: tower location (notably southwest exposure), local energy imbalances, and geopathic stress (e.g., underground water streams or earth-energy defects) can cause health and satisfaction differences. The chunk closes with a brief promotional call-to-action for Dr. Gupta's online Vastu consultancy.
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बहुत बहुत स्वागत है डॉक्टर वेशाली आप थैंक्यू पूछा। तो यहाँ पर हम बात कर रहे हैं अपार्टमेंट के डॉक्टर वेशाली मेरा। सबसे पहले सवाल यही आता है कि अपार्टमेंट की बात करते हैं यानी की हाई राइज बिल्डिंग। तो हाई राइज बिल्डिंग के अन्दर का जैसे जैसे मतलब स्तर बढ़ता जाता है फ्लैट ऊपर नीचे होते रहते हैं। क्या सब मकानों के ऊपर, सभी फ्लैट के ऊपर, हर फ्लोर के ऊपर 1 जैसा इफेक्ट पड़ता है।
वास्तव यह बहुत अच्छा सवाल पूछा है। पूछा आपने और विस को बताना चाहूंगी मैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार आप जितना हायर जाते जाते हैं। तो उतना जो है वो वास्तु का, असर आपके जीवन पर कम होता जाता है। तो अगर कोई पर्सन जो है वो किसी फ्लैट में ट्वेंटी फिफ्थ फ्लोर पर रहते हैं और कोई पर्सन जो है वो फर्स्ट फ्लोर पर रहते हैं तो उनमें थोड़ा सा वास्तु का जो है वो असर का डिफ्रेंस हो जाता है। लेकिन अगर ओवरॉल वास्तु गलत है तो उसका डिफ्रेंस चाहे कितना भी हो, कम हो, ज्यादा हो पर उसका जो दुष्ट प्रभाव है वो आपके जीवन में जरूर आएगा लेकिन और अच्छा प्रभाव है वो भी जीवन में जरूर आएगा। लेकिन थोड़ा राइजिंग फ्लोर के साथ हल्का सा वास्तु के इफेक्ट में जो है वो कमी आती है। तो यह ठीक बात है कि हायर फ्लोर्स, एक्पीरियंस लेस ऑफ वास्तु, डिफेक्ट सास कंपैर टू द लोअर फ्लोर्स जी, यहाँ.
पर 1 क्वेश्चन और है कि हम देखते हैं कि क्योंकि अपार्टमेंट की बात होती है तो अब 1 ही अपार्टमेंट के अन्दर कई सारे टावर्स होते हैं, 1 टावर के लोग बिल्कुल हंसी खुशी के साथ रहते हैं, हेल्दी रहते हैं अच्छा इनवायरमेंट होता है लेकिन दूसरे टावर के लोग बीमार रहते हैं कुछ न कुछ प्रॉब्लम न आई रहती है।
तो इसका रीजन क्या बता सकता इसमें बेसिकली अगर हम वास्तु के अनुसार देखें तो टावर की लोकेशन जो है वो 1 इम्पॉर्टेंट रीजन हो सकता है। कई टावर्स ऐसे होते हैं जिनके पीछे जो साउथवेस्ट का पाठ होता है वो खाली होता है वहां पर कोई मैदान होता है या वहां पर कोई हैवी स्ट्रक्चर नहीं होता है। तो ऐसे टावर्स में जो है वो साउथवेस्ट के एनर्जी ज्यादा होती है या किसी भी वजह से अगर किसी टावर में साउथ और वेस्ट के एनर्जी ज्यादा हो रही है वहाँ पर संभावना है कि लोगों को जो है वो हेल्थ इशूज आ सकते हैं, कुछ मेंटली थोड़ा सा वो डिस्सार्टिसफाइड हो सकते हैं और उसके अलावा कई चीजें और होती हैं जैसे कि हम साइंटिफिकली, जियोपैथिक स्ट्रेस वगैरह भी जो है वो मेजर करते हैं और जियोपैथिक स्ट्रेस जो होता है वो आपके अर्थ के अंडर की एनर्जी होती है जिनको कि हम 1 नेकेड डाई से नहीं देख सकते लेकिन वो आपके जीवन को इफेक्ट करते हैं। मान लीजिए कि आपका जो टॉवर है उसके नीचे कोई अंडरग्राउंड वाटर स्ट्रीम जा रही है या किसी तरह से जो है वो अर्थ एनर्जी का डिफेक्ट है तो उसको जियोपैथिक स्ट्रेस कहा जाता है और जनरली जो टावर्स ऐसी लाइन में बन जाते हैं तो कभी कभी उनका जो है वो रेजिडेंट को। हेल्थ के जो इशूज हैं वो आ सकते हैं। बट इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं है क्योंकि जियोपैथिक स्ट्रेस का मेजर भी हो सकता है और इसके करेक्शन के लिए जो है वो रेमेडियल इंस्ट्रूमेंट भी। आजकल आते हैं जी, तो ये कुछ वजह हो सकती है अपार्ट, फ्रॉम, दी, पर्सनल इशु, जिसकी वजह से लोग बीमार पढ़ रहे हो सकते हैं। जी.
वास्तु 1 साइंस है जिसके पास आपकी हर प्रॉब्लम का सॉल्यूशन है। डॉक्टर वैशाली गुप्ता से अपने घर, ऑफिस या फैक्ट्री की ऑनलाइन कंसल्टेंसी, मैप, मेकिंग या वास्तु विजिट के लिए स्क्रीन पर दिए गए नंबर पर कांटेक्ट करें।