Bhoomi Pujan Importance & Vidhi By Dr. Vaishali Gupta | भूमि पूजन का महत्व व विधि

A Hindi-language YouTube monologue by Dr. Vaishali Gupta explaining the significance and practical procedure of Bhoomi Pujan (land-puja) performed before beginning construction. She emphasizes selecting the correct mahurat (auspicious time), preparing and purifying the site (cleaning, sprinkling Ganga water or cow urine, optionally bringing a cow), choosing the north-east (Ishaan) area for the ceremony, required participants (the owner couple and a priest), the ritual items to be placed in the pit, and performing a brief puja for masons/tools; she closes by promising a follow-up video about foundation and construction steps.
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नमस्कार मैं हूँ वास्तु कंसल्ट एंड एस्ट्रॉलजी डॉक्टर वैशाली गुप्ता। आज के अपने इस एपिसोड में मैं आपको बताने जा रही हूँ भूमि पूजन के बारे में। भूमि पूजन के बारे में हम सभी लोग जानते हैं और जब भी हम कोई नया लैंड लेते हैं चाहे वो रेजिडेंशल पर्पस के लिए हो या फिर ऑफिस के पर्पस के लिए हो, फैक्टरी के लिए, इंडस्ट्री के लिए हो उस पर से पहले भूमि पूजन कराया जाता है। भूमि पूजन का वास्तु शास्त्र में बहुत ज्यादा महत्व है क्यों की भूमि की जो पहली पूजा की जाती है वो है भूमि पूजन, शीला, नास और नीव का डालना। तो वैसे तो हमारे आस पास में बहुत सारे ज्ञानी प्रकांड पंडित होते हैं जो कि ऑलरेडी जानते हैं कि भूमि पूजन कैसे किया जाना चाहिए लेकिन फिर भी आज मैं अपने इस वीडियो में आपको कुछ इम्पोर्टेंट चीजें बता रही हूँ जिसको की हम भूमि पूजन करवाते वक्त ध्यान में रखे प्लस। यह भी बताने जा रही हूँ की आखिर भूमि पूजन का महत्व है क्या, ऐसा कहा जाता है कि किसी भी भूखंड के नीचे, किसी फ्लॉट के नीचे है, पृथ्वी के नीचे, पाताल लोक में शेषनाग का वास और जब हम भूमि की पूजा करते हैं उसमें नाग नागिन डालते हैं तो असलियत में हम इन्ही शेष नाग की पूजा करते हैं। शेष जहाँ हम शेष नाग की पूजा करते हैं और साथ ही साथ हम पृथ्वी की भी पूजा करते हैं, पंच महाभूतों की भी पूजा करते हैं और जो किसी भी प्लॉट के देवता हैं वास्तु पुरुष उनकी भी पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि अगर हम विधि विधान से भूमि पूजन करते हैं तो हमारा जो प्लॉट है उसमें अगर किसी भी तरह का दोष होता है, उसकी मिट्टी में किसी भी तरह का दोष होता है या फिर जो उस प्लॉट के ओनर हैं उनके द्वारा कभी कोई तृति, गलती या पाप हुआ होता है तो उससे भी हमको मुक्ति मिल जाती है। तो ये बहुत जरूरी है कि प्लॉट लेने के बाद सबसे पहले हम उस प्लॉट का भूमि पूजन करें। अब इस भूमि पूजन के करते समय यह बात जय ध्यान में रखना बहुत इम्पोर्टेंट है कि भूमि पूजन का महूरत क्या। भूमि पूजन को सही महुरत पे करना वास्तुशास्त्र में बहुत ही इंपॉर्टेंट होता है। यह तो हमारे शास्त्र में कहा गया है कि सही महुरत पे अगर काम शुरू किया जाए तो वो कार्य अवश्य ही सिद्ध होता है। अब बहुत सारे ऐसे महीने हैं जिसमें की भूमि पूजन नहीं किया जा सकता। फिर कुछ ऐसे महीने हैं जिसमें अगर पक्ष सही नहीं हो, कृष्ण पक्ष लग जाए तो भी है। जो भूमि पूजन है कहा जाता है कि उसको नहीं करवाना चाहिए। साथ ही साथ कुछ दिन ऐसे होते हैं जैसे संडे का दिन होता है उस दिन भी कहा जाता है कि भूमि पूजन नहीं किया जाए। जिस समय देव सो रहे होते हैं उस समय भी भूमि पूजन नहीं किया जाता। तो भूमि पूजन जो है वो बहुत ही कम समय ऐसा में शुभ महूरत मिलता है। जब हम भूमि पूजन करें हम किसी भी अच्छे पंडित से कंसल्ट करके ये डेट, ये तिथि, समय, योग हम निकलवा सकते हैं। जिस समय हमें भूमि की पूजा प्रारंभ करनी चाहिए। तो अगर आपने अभी प्लाट लिया है और आप भूमि पूजन करने जा रहे हैं तो इस बात का खास ध्यान रखें क आप पहले किसी पंडित से अच्छे से महूरत जरूर निकलवा ले क्योंकि यह बहुत ही इम्पोरटेंट प्रोसेस है। अच्छा इसके बाद जब हम पूजा करते हैं तो पूजा करने से पहले जिस जगह पर हमको पूजा करनी है, जिस भूमि पर हमें पूजा करनी है उसकी सफाई हो जानी चाहिए। आपकी जो भूमि है, जिस आपका भूमि पूजा है उससे 1 दिन पहले रात पहले आप भूमि को पूरी तरह से स्वच्छ करवाएं, थोड़ी सी उसकी लेबलिंग कराए उसमें अगर कुछ काटिंग हो, कुछ भी अगर कूड़ा कर, कुछ भी कुछ भी गार्ड भेजनमोन्टेड समान हो वी शुल्ड, गेट, दैट, क्लियर्ड, कम्प्लीटली एंड उसके बाद जो है भूमि पूजन का प्रोसेस स्टार्ट होना चाहिए। जब हम प्लॉट की सफाई करते हैं तो हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जो नॉर्थ ही का हिस्सा है प्लॉट का वो साउठवेरसे थोड़ा सा नीचे होना चाहिए। एंड इस बात का भी ध्यान रखें कि सफाई करने के बाद आप जब भूमि को साफ कर लेते हैं तो आप थोड़ा सा द, मूत्र छिड़क सकते हैं या फिर गंगा जल छिड़क सकते हैं। ऐसा करके भूमि की शुद्धि हो जाती है। और 1 बात जो आपको बहुत इंट्रस्टिंग लगेगी। वास्तु शास्त्र में पहले ये कहा जाता था कि अगर हम भूमि पूजन से पहले उस भूमि पर गाय माता को बांध देते हैं तो भी उस भूमि की शुद्धि हो जाती है कि गऊ माता को शुद्धता और 1 मातृत्व का प्रतीक माना जाता है। तो हम यह भी कर सकते हैं। अगर आप चाहे तो आप भूमि में कुछ समय पहले गऊ माता को बाल सकते हैं, गव झड़क सकते हैं, गंगा जल से साफ कर सकते हैं। इसके बाद जब आपने पूजा के लिए सब तैयारियां कर ली, सारी सामग्री ले ली, 1 अच्छे पंडिजी का एग्जाम कर लिया तो जो पूजन का प्रोसेस प्रारंभ होगा। तो जो में मास्टर ऑफ दी हाउस हैं उनका और उनकी जो अरधांगिनी है उनकी जो वाइफ हैं उनका होना बहुत जरूरी है। अगर 1 कपल साथ में मिलकर भूमि पूजन करता है तो उस पूजन को कम्प्लीट माना जाता है। तो अब बात करते हैं कि वास्तुशास्त्र में क्या नियम दिए गए हैं भूमि पूजन के बारे में। सबसे पहले भूमि पूजन का स्थान वैसे तो कहा जाता है कि सूर्य के मूवमेंट के हिसाब से जो भूमि पूजन का स्थान है वो प्लॉट में बदलता रहता है। लेकिन अगर मैं आपको सिम्पल वर्ड्स में बताऊं तो स्ट यानी की ईशान कोण का जो स्थान है वो हमारे लिए, हमेशा सूटेबल है। तो हम 1 स्टैंडर्ड थम्ब रूल से अगर चले तो भूमिपूजन के लिए नॉर्थ, ईस्ट का जो आपका ब्लॉट का स्थान है, जो ईशान कौन है उसको आप भूमि पूजन के लिए चुने जैसे मैंने आपसे पहले भी कहा था की भूमिपूजन के लिए नॉर्थ ईस्ट को थोड़ा सा लो कर दें। अब अपने भूमि पूजन के लिए नॉर्थ ईस्ट का स्थान शुरू कर दिया। आपने पंडित जी के साथ जो है वो आपने फिट करवा दिया, गड्ढा करवा दिया। अब इस बात का ध्यान रखें कि वास्तु के अनुसार भूमि पूजन करते समय जो ओनर्स हैं, जो मास्टर और उनकी वाइफ हैं, उनकी जो फेसिंग है वो ईस्ट या नॉर्थ ईस्ट की तरफ होनी चाहिए। तो जो भी आप पूजन कर रहे हैं उसको सही दिशा में देखते हुए उसको प्रारंभ करें सही दिशा में उसको संपन्न करे। अब इस बारे में आपको पंडित जी गाइड करी देंगे कि उसमें क्या क्या डाला जाता है। भूमि पूजल में कुछ विशेष चीजें जो है वो रखी जाती हैं जैसे कि चांदी के नाग नागिन का जोड़ा रखा जाता है जो कि शेष नाग का प्रतीक होता है इसके अलावा तांबे का लोटा रखा जाता है, तांबे के लोटे का 1 ढक्कन भी होता है, 1 नारियल लिया जाता है पानी वाला, आम के कुछ पलों के पत्ते लिए जाते है, लाल रंग का वस्त्र लिया जाता है उसके अलावा कुछ चीजें और ली जाती है जैसे कि उसमें पंच रत्न भी डाले जाते हैं, पंच धातु भी डाली जाती है और इसमें जो है वो गीता की पुस्तक भी रखी जाती है तो कई सारी चीजें कौड़ियां भी डाली जाती है सुपारी डाली जाती है। तो ये आपके जो भी आपके ज्ञान ही पंडित हैं वो आपको इस प्रोसेस के बारे में गाइड कर देंगे और इसको करने के बाद जो है प्रोसेस खत्म करने के बाद 1 चीज का ध्यान रखना है कि आपके वहां पे जो मिस्त्री है जो मिस्त्री आपके लिए गड्ढा खो देंगे और गड्ढे को भरेंगे तो मेसन हो इस देर उनकी भी पूजा होनी बहुत जरूरी है तो जो आपके मेसन हैं, मिस्त्री हैं उनकी भी छोटी सी पूजा करें प्लस जिस औजार से जिस टूल से वो काम करेंगे उसकी भी पूजा करें। इस तरह से भूमि पूजन संपन्न करने के बाद आप उस गड्ढे को भर सकते हैं और आपका जो भूमि पूजन का प्रोसेस है वो आप अपने पंडित जी के द्वारा कम्प्लीट करवा सकते। तो ये थे कुछ ऐसे पॉइंट्स जो मैंने आपको बताए जिनकी जानकारी अगर आप खुद रखे तो भूमिपूजन के प्रोसेस में आपको क्लैरिटी आ जाएगी और जैसा मैंने पहले भी बताया भूमि पूजन जो है वो वास्तु शास्त्र में 1 शुरुआती दौर की बहुत ही इम्पोर्टेंट पूजा है अगर हम भूमि पूजन करके कहीं पर भी निर्माण शुरू करते हैं तो उस घर में रहने वालों को जब उस भवन का निर्माण हो जाता है उनको हर तरह का धन धान में सुख, समृद्धि विस्वास से सब प्राप्त होता है साथ ही यह भी कहा जाता है कि उस घर में रहने वालों के मन में कभी भी भय या भ्रम नहीं आता तो अब इस बात को आपने समझ लिया है तो अच्छे से अगर आप प्लॉट लेने जा रहे हैं तो पूरी विधि विधान से भूमि पूजन को जो है। उस प्रोसेस को कम्पलीट कराए और अपने अगले वीडियो में मैं। आपको बताउंगी कि भूमि पूजन के बाद जब नींव डालते हैं या कंस्ट्रक्शन शुरू करने जाते हैं, तो उस समय पर हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, कहां से नींव खोदनी चाहिए, कहाँ से नींव बंद होनी चाहिए, कंस्ट्रक्शन मटेरियल, कहां रखा जाना चाहिए? इस सबके बारे में आपको बताउंगी अपने अगले वीडियो में। तब तक के लिए नमस्कार एंड थैंक यू फॉर।










