Ganesh Chaturthi 2021 | जानें, भगवान श्री गणेश के सूंड का महत्व | Ganesh Chaturthi Special

A Hindi-language YouTube talk by Vastu expert Dr. Vaishali Gupta explaining the significance of Lord Ganesha’s trunk (सूंड) direction. She describes three types: left-curving (वक्रतुंड) associated with ida nādī, lunar/feminine energy, household prosperity and easy rituals; right-curving (सिद्धि-विनायक) associated with pingala nādī, solar/tapas energy and requiring strict ritual observance (commonly housed in temples); and straight trunks linked to sushumna nādī, rare, and associated with moksha and advanced spiritual practices. The speaker also connects Ganesha worship to activation of the muladhara chakra and practical effects on peace, wealth, health, and spiritual progress.
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नमस्कार, मैं, हूँ, वास्तु, एक्सपर्ट, इंस्ट्रॉलेज, डॉक्टर, वैशाली, गुप्ता आज मैं आपसे बात करने वाली हूँ गणेश जी के बारे में गणेश जी जो हैं, गणपति जी जो हैं वो हमारे नॉर्थ इंडिया के, हमारे उत्तर भारत के 1 बहुत ही प्रिय देवता है वो हुत ही पॉपुलर देती है। जब हम गणेश जी की बात करते हैं तो गणेश जी की जो सून यानि कि उनका जो ट्रंक है वो 1 बहुत ही इम्पोर्टेंट उनका जो पार्ट है वो हमारे सामने आता है और हम अक्सर सोचते हैं कि आखिर गणेश जी की सूंड की क्या इंपोर्टेंस है। हमारे मन में ये भी सवाल आता है कि गणेश जी की सूंड जो है वो 3 तरह की होती है। किसी गणेश जी में ऐसा होता है कि उनकी मूर्ति में जो सूंड है वो लेफ्ट की तरफ जाती है, किसी में उनकी जो सूंड है वो राइट की तरफ जाती है और कहीं पर उनका ट्रंक स्ट्रेट होता है तो हम सभी के मन में अक्सर ये ख्याल आता है कि हमें किस तरह की मूर्ति अपने घर में लानी चाहिए और किस मूर्ति का क्या महत्व होता है। आज मैं इस बात के बारे में भी आपको विस्तार से बताने वाली हूं। सबसे पहले तो इस बात से शुरू करते हैं कि जब हम गणेश जी के ट्रंक यानि कि उनकी सूंड की दिशा की बात करते हैं तो वो दिशा किसकी अगर हम कहें सीधे हाथ की दिशा तो मेरे सीधे हाथ की दिशा या गणेश जी के सीधे हाथ की दिशा। तो सबसे पहले तो मैं के इस द्वंद को क्लियर करती हूँ कि जब भी हम गणेश जी के सूंड की बात करते हैं उसका अर्थ होता है कि जो सूंड है, जो ट्रंक है वो गणेश जी के किस हाथ की तरफ जा रहे हैं। अगर जो सूंड है वो गणेश जी के लेफ्ट हैंड की तरफ टर्न हो रही है तो उसको लेफ्ट की सून माना जाएगा अगर वो गणेश जी के राइट की तरफ टर्न हो रही है तो उसको राइट का ट्रंक माना जाएगा और जो सीधी होती है वो स्ट्रेट ट्रंक होती है सीधी सूंड होती है। अब बात करते हैं कि जो ये जो गणेश जी की ट्रंक या सूंड के डायरेक्शन है इसका हमारे जीवन में क्या महत्व है इसका क्या अर्थ होता है जो गणेश जी लेफ्ट सुन वाले होते है उनको कहा जाता है वक्रतुंड यानि कि उल्टी दिशा में उनकी जो सून है वो मुड़ी हुई है। ऐसा कहा जाता है कि वाली दिशा की ओर जाने वाली जो सून होती है वो इड़ा नाड़ी को रिप्रेजेंट करती है इड़ा नाड़ी जिससे की मून या फिर चंद्र नाड़ी भी कहा जाता है। ये तो हम सभी जानते हैं कि नारी जो है वो फेमिनिन कैरेक्टर को यानी कि स्त्री को रिप्रेजेंट करती है और हमारे जीवन में शांति और ठंडक जो है वो चंद्रमा लेके आते हैं। तो हमारी जो लेफ्ट साइड वाली वक्रतुंड वाली जो गणेश जी की प्रतिमा है, जिसमें सूल लेफ्ट साइड की तरफ जाती है वो रेप्रेजेंट करती है। इड़ा नाड़ी को और हमारे जीवन में शांति लाती है। ऐसा भी कहा जाता है कि जितने भी मटेरियल प्लेजर्स हैं, जितने भी सांसारिक सुख है ऐसे गणपति यानि कि वक्रतुंड गणपति की पूजा से हमारे घर में आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो वक्र तुंड गणेश जी का फॉर्म होता है जिसमें उनकी सूंड लेफ्ट में होती है वो घर में रखनी चाहिए उनकी पूजा करने के लिए कोई बहुत ज्यादा विधि विधान नहीं होते और अगर हम नियमित रूप से उनको दिया दिखाते हैं, चंदन चढ़ाते हैं, अक्सर जल पुश पर्पित करते हैं, उनकी आराधना करते हैं, दिन में 1 बार तो वो प्रसन्न हो जाते हैं और हमें हर तरह की सुख समृद्धि देते हैं। इसलिए क्यूंकि नियम बड़े ही सिंपल होते हैं। इसलिए कहा जाता है की हम लेफ्ट साइड वाले सूंड के जो गणेश होते हैं वक्रतुंड गणेश जो होते हैं उनको लेकर आए 1 हाउस होल्डर के गृह की जो भी रेक्वारमेंट होती है धन धन में सुख संपति, गश्ते संतान, अच्छा स्वास्थ, ये सारी चीजें जो है वक्रतुंड गणपति हमको देते है। जब गणेश जी की सूंड राइट की तरफ जाती है तो गणेश जी के उस रूप को कहा जाता है सिद्धि विनायक। ऐसा कहा जाता है कि राइट में जाने वाली जो सूंड है वो पिंगला नाड़ी को यानि कि सन एनर्जी को डिमोट करती है और हमारे जीवन में तप और सिद्धी से सुख लेके आती है। सिद्धि विनायक वाले गणपति जी होते है उनकी पूजा और रचना बहुत ही ध्यान और नियम से करनी चाहिए। इसी लिए आपने अक्सर देखा होगा की राइट सूंड वाले जो सिद्धि विनायक गणपति होते हैं उनकी प्रतिमा अक्सर मंदिर में रखी जाती है। मंदिर 1 ऐसी जगह होती है जहाँ पर 1 यज्ञोपवीत धारण किए हुए ब्राह्मण जो होते हैं वो उनकी पूजा अर्चना करते हैं। 3 पहर की उनकी आरती होती है सुबह शाम उनको जोर चलाई जाती है, बहुत ही नियम जो है उनका पालन किया जाता है। इसलिए जो सिद्धि विनायक वाली प्रतिमा होती है यानि कि राइट सूंड वाली जो प्रतिमा होती है वो अक्सर मंदिरों में पाई जाती है। ये जो प्रतिमा होती है सिद्धि विनायक वाली ये हमारे जीवन में सिद्धियां लेकर आती है। ऐसा कहा जाता है कि जो सबसे रै और सबसे जो दुर्लगणेशजी की मूर्ति होती है वो होती है सीधी सूंड यानि की स्ट्रेट ट्रंक वाली, ऐसा कहा जाता है कि इसको पाना बहुत ही दुर्लभ है और साधु संत इस की पूजा करते है क्यूंकि ये हमारे जीवन में मोक्ष लेकर के आती है। जो वक्रतुंड वाली मूर्ति होती है लेफ्ट की तरफ टंड होती है वो नॉर्थ दिशा को डिनोट करती है जो सिद्धि विनायक वाली मूर्ति होती है, राइट की तरफ टंड होती है वो साउथ यानि कि दक्षिण को नोट करती है और जो सीधी होती है वो मोक्ष की प्राप्ति को दर्शाती है और सुषुम्ना नाड़ी को इंडिकेट करती है। ऐसा कहा जाता है कि अगर हम सीधी सूंड वाली गणपति जी की आराधना करते हैं तो हमारी कुंडली में जागरित हो जाती है, हमारा सहसा खुल जाता है। सारे चक्र अलाइन हो जाते हैं और इसी लिए साधु संत सिद्ध पुरुष की इस तरह की मूर्ति की पूजा और अर्चना करते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि जो हमारा सबसे नीचे का जो बेसिल चक्र है यानि कि मूलाधार चक्र है उसके स्वामी होते हैं गणेश जी और जब हम गणेश जी की पूजा करते है तो मूलाधार चक्र एक्टिवेट होता है और वहाँ पर जो जड़ता और इनर्शिया हमारे जीवन में होती है वो हमको छोड़ के जाने लगती है। तो ये मैंने आपको बताया कि जो 3 प्रकार के सूम यानि कि ट्रंप के डायरेक्शन वाले गणेश जी होते हैं उनका हमारे जीवन में क्या असर पड़ता है।










