Guru Purnima 2021 | Importance of Guru Purnima | गुरु पूर्णिमा कब है? | By Dr. Vaishali Gupta

A Hindi-language YouTube talk by Dr. Vaishali Gupta explaining the spiritual significance of Guru Purnima, the role of a guru (teacher/guide), and why full-moon day (Purnima) is auspicious for receiving guru‑consciousness. The speaker describes Shiva as the Adi‑Guru and Veda Vyasa's association with the day (Vyas Purnima), then gives practical ritual guidance: cleansing, shrine setup, offerings, aarti, mantra (Om Namah Shivaya), tr̥atak on the guru’s image, and sitting in moonlight for meditation.
Chapters
गुरु, गोबिंद, दोनों खड़े काके लागू, पाय, बलिहारी, गुरु, आप के की गोविंद, दियो, बताए, नमस्कार, मैं, हूँ, वास्तु, कंसल्ट, स्ट्रेज, डॉक्टर वैशाली गुप्ता। आज का जो प्रोग्राम है वो मैंने गुरु के दोहे से ही शुरू किया है क्योंकि आज का जो दिन है वो बहुत ही खास है। आज का दिन है गुरु पूर्णमा का दिन और ऐसा कहा जाता है कि किसी भी वक्त के लिए आज का दिन बहुत ही इम्पोर्टेंट होता है। आज शाम मार्च की जो पूर्णिमा होती है उसको गुरु पूर्णिमा के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है। हमारे भारतवर्ष में गुरु की परंपरा शुरू से रही है और हम यह मानते हैं कि हमारे जीवन में कोई भी कार्य गुरु की कृपा के बिना संभव नहीं हो सकता। गुरु की जो परंपरा है वो बहुत पहले से आ रह, ऐसा कहा जाता है कि जो शिव हैं वो सबसे पहले गुरु हैं, आदि गुरु हैं, उनके पास आदि संक्राचाररेजोकी इस गुरु परंपरा के माध्यम थे और आज तक के जितने भी गुरु हैं, जितने भी गुरुओं की चेतना है, उनका आह्वान और उनकी पूजा रचना आज के दिन की जाती है। ये तो हम सभी जानते है कि हमारे भारत में हमेशा से गुरु की परंपरा रही है। चाहे कोई भी हो, क्यों न, वो बड़े से बड़े राजा महाराजा हो, क्यों न, श्री राम खुद हो, सबके गुरु थे। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि गुरु के बिना गद्दी नहीं। अगर हम कुछ भी सीखना चाहते हैं, किसी भी चीज को सही मानने में जानना चाहते हैं तो उसके लिए गुरु की आवश्यकता पड़ती है। अगर हमें योगा सीखना हो तो भी हमें गुरु चाहिए। अगर हम संगीत में निपुण होना चाहते हैं तो भी हमें गुरु की आवश्यकता है और अगर हम आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ना चाहते हैं तो भी 1 सद गुरु का होना हमारे जीवन में बहुत ही जरूरी है। ऐसा कहते है कि हमारे जीवन में अगर सदगुरु आते हैं तो हमारे जीवन में जो हमारे टायलेट्स हैं, जो हमारी प्रतिभाएं हैं, वो खुद ही बाहर निकलने लगती है। साथ ही साथ जो भी दुख है उसका शायद हमारे जीवन से होने लगता है। बिना किसी कारण के हम आनंदित प्रफुल लेते और जॉयफुल महसूस करते है। और ये सब तब होता है जब गुरु हमारे जीवन में आते है। गुरु पूर्णमा का दिन 1 भक्त के जीवन में बहुत ही इम्पोर्टेंट दिन होता है क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि 1 भक्त अपने गुरु को नहीं चुनता। गुरु स्वयं सही समय आने पर अपने भक्त को चुन लेते है। वो जहाँ पर भी होता है, जब वो तैयार होता है तो जो गुरु है उसके सामने प्रकट हो जाते हैं। यूं तो हम देखे तो हमारे जो माता पिता हैं वो हमारे सबसे पहले गुरु हैं। जब हम पैदा होते है, अगर हम कुछ भी सीखते हैं, अगर हम चलना सीखते हैं, बोलना सीखते हैं, खाना सीखते हैं, कुछ भी सीखते हैं तो वो हमारे माता पिता, हमको सिखाते हैं, हमारे माता पिता, निसंदेह, हमारे जो है वो पहले गुरु होते हैं, जो कि 1 अनकंडीशनल लव के साथ, 1 निस्वार्थ भाव के प्रेम के साथ हमें जीवन में आगे बढ़ना सिखाते हैं। 1 माँ का जगह तो बहुत ही विशाल होता है और कहा जाता है कि जो गुरु का प्रेम है वो माँ के प्रेम से भी हजार गुना ज्यादा होता है। गुरु अपने जीवन में कुछ नहीं चाहते। वो सिर्फ ये चाहते हैं, ये देखना चाहते हैं कि कैसे वो अपने शिष्य को इस पद पर आगे बढ़ा सकते है। हमारे भारतवर्ष में हमारे वेदों में गुरु को 1 तत्व माना गया है। इट इज सेड दैट गुरु इज एन एलिमेंट वो 1 असीमित चेतना है। इन्फरनाइट कांशसनेस 1 सीमित शरीर में आती है। हमको ये बताने के लिए कि हम अपने जीवन में अपने हाइयेस्ट पोटेंशियल पर हम कैसे पहुँच सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो गुरु का ज्ञान है वही उनका शरीर है। और हमने अंग्रेजी में भी कहावत सुनी होगी। द लाइफ ऑफ मास्टर जज मेसेज जो 1 गुरु का जीवन है वही उनका संदेश होता है वो असीमित चेतना। जब 1 सीमित रूप में गुरु के रूप में भौतिक शरीर में आती है तो वो हमको सिखाती है कि हम अपने जीवन को इस शरीर में रहते हुए कैसे जी सकते हैं और कैसे प्रेम की अनुभूति कर सकते है। गुरु अपने जीवन से हमको यही सिखाते हैं। और इसी लिए जो आज का दिन है वो बहुत ही खास दिन है। गुरु पूर्णिमा यानि कि गुरु का दिन तो है ही है साथ ही साथ आज पूर्णिमा का दिन है। पूर्णिमा। यानि की फुल मून। आज जो है वो पूर्ण चंद्रमा का दिन है। ये तो हम सभी जानते हैं कि ज्योतिश शास्त्र में चंद्रमा जो होता है, मून जो होता है वो माइंड यानि कि मन का कारक होता है। और आज पूर्णिमा का दिन है। यानि कि फुल मून का डे है। यानि आज जो हमारा मन है, जो हमारा माइंड है, वो विजडन से, ज्ञान से फुल ली ब्लूम हो सकता है। ऐसा कहा जाता है कि आज के दिन गुरु तत्व के गुरु कांशेसेंसकी, गुरु चेतना की विशेष कृपा हमारे जीवन में आती है। और आज का जो दिन है वो हर शिष्य के लिए, हर डिवोटी के लिए, हर भक्त के लिए, ज्ञान में डूबे रहने का दिन है। और यही वजह है कि पूर्णिमा का जो संदर्भ है वो भी गुरु पूर्णिमा के दिन में आता है। बिकॉज फुल, मून, इज, रेप्रेजेंटेटिव ऑफ माइंड विच, स फुल्ली, ब्लॉसम, दिन विज्डम। और ये किसी गुरु की प्रेजेंस के बिना संभव हो ही नहीं सकता। ऐसा कहा जाता है कि हम कितने भी वेद पढ़ ले, कितने भी पुराण पढ़ ले, कितने भी उपनिषद स्क्रिप्चर्स पढ़ लें, अगर हम इस सही मायने में अपने सेल्फ की अनुभूति करनी है तो उसके लिए गुरु की कृपा की विशेष आवश्यकता है। तो अभी तक तो हमने बात करी गुरु पूर्णिमा के महत्व के बारे में, गुरु के महत्व के बारे में जिसका वर्णन करना शब्दों में बहुत ही मुश्किल है। और अब मैं आपको बताऊंगी कि आज के दिन आप क्या कर सकते हैं। सबसे पहले तो प्रसन्न मन से आप सुबह समय से जाएं और अच्छे से स्नान करके कुछ साफ वस्त्र पहन ले और अपने मंदिर में आ जाए अपने मंदिर को गंगाजल से छलककर अच्छे से उसकी शुद्धिकरण करके वहाँ पर आप 1 चौकी लगा सकते हैं उसके ऊपर 1 साफ कपड़ा बिछाएं और उसमें अपने गुरुदेव की फोटो या प्रतिमा को रखे अगर आपके जो गुरुदेव है वो ब्रह्मलीन हो गए हैं तो आप मानसिक रूप से भी उनको याद कर सकते हैं या उनके पादुका जो है वो अपनी उस चौकी पर रख सकते हैं वैसे तो गुरु का कोई शरीर होता ही नहीं है तो हम अपने मन में जिस भी रूप में वो इस जीवन में हमारे सामने आए हैं या तो उस फोटो के रूप में उनको याद कर ले या उनके पादुका अपने सामने रख लें या बस मन में उनका स्मरण कर ले और अगर आपके गुरु जो है वो अभी तक आपके जीवन में नहीं आए हैं तो आप भगवान शिव की आराधना भी कर सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि शिव जी जो हैं वो आदि गुरु हैं ही द फर्स्ट गुरु और उनकी आराधना करने से हम शिव जी की आराधना अगर करे तो पूरी की पूरी गुरु चेतना की आराधना हम करते हैं। तो अपने मंदिर में आये 1 चौकी लीजिये उसके साफ कपड़ा बिछाइए अपने गुरु की प्रतिमा रखिये उसके बाद आप अपने गुरु को आसन पर बैठाने के बाद उनको स्नान करा सकते है उनके चरणों को स्नान करा सकते हैं इसके बाद आप उनके ऊपर कोई वस्त्र चढ़ा सकते हैं जनधन चढ़ा सकते हैं साथ ही साथ अक्षत जो है वो गुरु चरण में समर्पित कर सकते हैं। आप चाहें तो कुश भी जो है उनके चरणों में समर्पित कर सकते हैं आप धूप और दीपक जो है वो अपने गुरु की प्रतिमा के सामने जला सकते हैं चाहे तो कुछ नए वैद्य भी कुछ भोग भी जो है वो अपने गुरु के चरणों में समर्पित कर सकते हैं और आप चाहे तो पान का पत्ता या फिर नारियल भी उनको समर्पित कर सकते हैं। ये सब करने के बाद आप पूरी श्रद्धा से अपने गुरुदेव की जय गुरु ओमकारा करके आरती भी कर सकते है। ये सब करने के बाद पूरे दिन ऐसा कहा जाता है कि 1 भक्त को 1 डिवोटी को 1 शिष्य को 1 ग्रैटिट्यूड यानि की कृतज्ञता के भाव में रहना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि हमारे जो गुरु है वो हमसे सिर्फ यह चाहते हैं कि हम जीवन में अपने आप को धन्य, भागी महसूस करे, ब्लेस्ट महसूस करें, ग्रैटिट्यूड में रहे, कृतज्ञता में रहे कि हमें जो भी मिला है वो आपकी कृपा से मिला है और ऐसा कहा जाता है कि हम जितनी कृतज्ञता से अपना जीवन बिताते हैं उतनी ही कृपा हमारे जीवन में आने लगती है। तो आज के दिन तो खासकर अपने गुरु का स्मरण करे चाहे तो उनके फोटो पर आप त्राटक भी कर सकते हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से गुरु की जो भी क्वालिटीज हैं वो सारी की सारी क्वालिटीज हमारे अंदर आने लगती है और त्राटक करना बहुत ही आसान है किसी भी शांत कोने में बैठे प्रिफरेबली अपने घर के ईस्ट या नॉर्थ ईस्ट कार्नर में बैठे और ईस्ट और नॉर्थ स्ट की फेसिंग में बैठे अपने सामने अपने गुरु देव की आप पिक्चर लगा सकते हैं या फोटो लगा सकते हैं और उसको आप जो है वो लगातार देखे ऐसे त्राटक किया जाता है और फिर कहते हैं कि हमारी चेतना जो है वो गुरु चेतना से जुड़ जाती है और गुरु की सारी क्वालिटी सारा आशीर्वाद जो है वो हमारे जीवन में आने लगता है क्योंकि आज के दिन पूर्णिमा का दिन है तो शाम के समय भी आरती करने के बाद आप चंद्रमा की किरणों में स्नान जरूर करें आज का चंद्रमा जो है वो बहुत ही इंपॉर्टेंट होता है उसका बहुत ही महत्व होता है हालांकि यह चंद्रमा रोज निकलता है लेकिन पूर्णिमा के दिन यह चन्द्रमा कम्पलीट होता है पूर्ण होता है और साथ ही साथ गुरु के ज्ञान की जो किरणे हैं वो भी इस चंद्रमा के साथ हमारे जीवन में आ रही होती है तो रात के समय बाहर जाएं अपने किसी बैलकलियाछतपर, बैठे और चन्द्रमा की किरणों के नीचे स्नान करे आप चाहे तो वहाँ बैठकर मेडिटेशन या ध्यान भी कर सकते हैं अगर आप चाहे तो आप बैठ कर के ओम नम शिवाय का जवाब भी कर सकते हैं पुराने टाइम में ऐसा कहा जाता था कि अगर किसी गुरु को अपने शिष्य को कोई भी गुरु मंत्र देना होता था तो वो गुरु पूर्णिमा के दिन ही ऐसा करते थे क्यूंकि यह गुरु का दिन है क्योंकि यह पूर्णिमा का दिन है और बहुत ही शुभ दिन है इसलिए आज के दिन जो है वो शिष्यों को गुरु के द्वारा मंत्र भी दिया जाता था तो आप आज ऐसा जरूर करें कि आप अपने घर की छत पर जाए चंद्रमा की किरणों में बैठे थोड़ी देर ध्यान लगाए ओम नंबर शिवाई का जवाब करे और अपने गुरु का स्मरण करे और जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि अगर आपके जीवन में कोई गुरु नहीं है तो आप भगवान शिव का भी ध्यान कर सकते हैं या आपके कोई गुरु है तो आप उनका भी स्मरण अपने मन में कर सकते हैं और उनसे आप ये प्रे करें उनसे है यह निवेदन करें कि हमें भी जो है वो ज्ञान का आप पात्र समझे और इस ज्ञान को हमारे जीवन में दें। 1 और बात जो बहुत ही जरुरी है वो ये भी है कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है ऐसा कहा जाता है कि आज वेद व्यास जी की जयंती है और इसी लिए इस पूर्णिमा का नाम गुरु पूर्णिमा का नाम व्यास पूर्णिमा भी पड़ा है वेद व्यास जो थे वो ज्ञान का भंडार थे और कहा जाता है कि चारों वेदों को जिन्होंने कोलेट किया था जिन्होंने चारों वेदों को जो है वो बनाया था वो मारुषि वेद व्यास ही थे इसलिए आज का दिन तो बहुत ही शुभ है हर तरीके से हर महीने में 1 बहुत ही स्पेशल दिन है। और जैसा कि मैंने कहा अगर आज के दिन आप ग्रैटिट्यूड में रहते हैं, ग्रेड फुलनेस में रहते हैं, कृतज्ञता में रहते हैं, ध्यान करते हैं, पूजा करते हैं, अपने गुरु का स्मरण करते हैं, जॉब करते हैं। तो इसका फल आपके जीवन में बहुत ज्यादा होके, कई गुना होके आपके जीवन में वापस आता है। ये लोग तो हम सभी ने सुना है। गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो, महेश्वर, गुरु साक्षात, परम, ब्रह्म, तस्मै, श्री गुरुवे नम। तो हमारे भारत वर्ष में गुरु को जो है वो 1 देवता से भी ऊपर का सम्मान दिया गया है। ऐसा कहा गया है कि गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही जो है वो महेश्वर हैं। साक्षात जो भगवान का रूप हैं वही गुरुदेव होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि हमारे सेल्फ में, गुरु में और गार्ड में कुछ भी फर्क नहीं होता और जब हम ध्यान से, अपने हायर सेल्फ, से कनेक्ट होते हैं तो ऐसा कहा जाता है कि हम अपने गुरु से और फाइनली भगवान से ही कनेक्ट होते हैं, उस परमात्मा से ही कनेक्ट होते हैं। अब गुरु शब्द का अगर हम अर्थ देखेंगे तो हम सभी जानते है गुरु यानि कि क्या विशाल जो की बहुत ही बड़ा है। 1 असीमित जो चेतना है वही गुरु कांशसनेस होती है जो बहुत ही विशाल होती है। जब भी हम अपने गुरु के सामने जाते हैं तो हम बोलते हैं जय गुरुदेव किसकी जय कार करते हैं। हम उस बड़े मन की, उस बिग माइंड की जज कार्य करते हैं। जब हम कहते हैं जय गुरुदेव हम अपने अन्दर ये बोलते हैं कि जो हमारा छोटा है वो हमारे जीवन को रूल न करे। जो बड़ा मन है, जो बिग माइंड है, जो कि गुरु की एनर्जी से एलाइंड है, परमात्मा की एनर्जी से एलाइंड है, वही एनर्जी हमारे अंदर चैनल करें और उसी माइंड से हम भी ऑपरेट करे, उसी बिग माइंड के जो है आधार पर हम भी अपना जीवन बिताएं। ऐसा कहा जाता है कि हमारे जीवन में बहुत सारे ऐसे काम है जो कि प्रयास से बन जाते हैं लेकिन बहुत सारे ऐसे काम है जो कि प्रार्थना से ही बन पाते हैं। और गुरु जो है वो हमारे जीवन में वही शक्ति और वही कृपा लेकर के आते हैं। जो काम हम अपने प्रयास से नहीं कर पाते वो काम जो है वो बड़े बड़े काम जो है वो गुरु की कृपा से हो जाते हैं। ऐसा होता है कि हमारे जीवन में हमने कुछ ऐसे कर्म किए होते हैं जिसकी वजह से हमारे जीवन में कुछ ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं जिसमें हम समझ ही नहीं पाते कि हम इस परिस्थिति में क्या करें, इससे बाहर कैसे निकलें। ऐसा कहा जाता है अगर उस समय हम अपने गुरु के चरणों में समर्पित होते हैं, बोलते हैं कि गुरुदेव हमारी जो भी समस्या है यह हम आपके चरणों में समर्पित करते हैं। तो ऐसा कहा जाता है कि गुरु की विशेष कृपा हमारे जीवन में आती है और वो जो समस्या है वो स्वत ही ठीक होने लगती है। उस प्रॉब्लम का सलूशन जो है वो हमको मिलना शुरू हो जाता है। तो ये जो विशेष कृपा है, यह भी हमारे जीवन में तभी आती है। जब हमारे जीवन में गुरु होते हैं। तो इसी लिए गुरु पुर्णिमा को जो दिन है, आज का जो दिन है वो हमारे जीवन में बहुत ही खास दिन है। आज के दिन जो जो मैंने आपको बताया वो आप जरूर करें। ऐसा हो ही नहीं सकता कि अगर आप ये सारी चीजें करें और गुरु की कृपा आपके जीवन में न आएं। जो गुरु तत्व है, गुरु कांशसनेस है, वो हर समय हमारे चारों ओर होती है और हमको ब्लेस करने के लिए हमेशा तैयार रहती है। लेकिन कभी कभी ऐसा होता है कि हमारा पात्र इतना भरा होता है कि उसमें गुरु कृपा के लिए जगह ही नहीं बन पाते। तो आज के दिन ध्यान करें, आज के दिन पूजा करें, आज के दिन जाप करें, अपने गुरु का स्मरण करें, उनके बताए हुए ज्ञान पर आप चले और अपने पात्र को खाली करें। जैसे ही हमारा पात्र खाली होगा, गुरु की जो कृपा है वो हमारे जीवन में आने लगेगी। तो इस गुरु पूर्णिमा की, आप सबको मेरी तरफ से बहुत बहुत शुभकामनाएं और मैं उम्मीद करती हूँ कि आपका आज का दिन बहुत ही शुभ होगा और आपके सारे कार्य सफल हो जायेंगे और आपका मन जो है वह प्रसन्नचित और आनंद में रहेगा। जय गुरदेव।










