Harness Bliss at your home Using Vastu Shastra

Dr. Vaishali Gupta explains Vastu Shastra, an ancient Indian architectural system from the Atharvaveda that uses sacred geometry to shape a home's energy and influence residents' temperament and wellbeing. Too many southeast-facing openings increase fire element and can fuel ego and aggression.
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हम में से जितने भी लोग इस समय इस वीडियो को देख रहे हैं। हम किसी न किसी अपार्टमेंट, किसी न किसी बंगला, किसी न किसी कोठी में रहते होंगे यानि कि किसी न किसी भवन में रहते होंगे। क्या आप जानते हैं कि आपके भवन का जो आकार और प्रकार है वो आपके जीवन में होने वाली घटनाओं को निर्धारित करता है। वास्तु शास्त्र 1 ऐसा शास्त्र है जो कि आपके जीवन में होने वाली ईवेंटॉलॉजी को यानि कि कि किस तरह की घटनाएं आपके जीवन में होंगी, उसको निर्धारित करता है। इसे मैं ऐसे भी कह सकती हूं कि आपके भवन का जो आकार और प्रकार है, उसमें कहाँ से लाइट आ रही है, कौन सी ऊर्जा आ रही है, कौन सी डायरेक्शन खुली है, कौन सी डायरेक्शन बंद है, कहाँ पर उसमें खिड़कियाँ हैं, कहाँ पर उसमें दरवाजे हैं। वो ये डिसाइड करता है कि आपके भवन के अंदर की ऊर्जा कैसी होगी। अंदर की ऊर्जा पर निर्धारित होता है। गृहस्वामी का स्वभाव और उनके गुण और उनके स्वभाव और गुण से उनके जीवन का काल निर्धारित होता है। यानि कि वास्तुशास्त्र इज, द साइंस, दैट डिसाइड्स, द ईवेंट, कॉलेज ऑफ योर लाइफ नमस्कार मैं हूँ, वास्तविक स्पोट, डॉक्टर वैशाली गुप्ता एंड आम, दी फाउंडर ऑफ द वैदिक, वास्तु मेरे सारे, यूट्यूब वीडियोज में मेरे सोशल मीडिया प्रेजेंस पे मेरी। यह 1 जो है वो कोशिश रहती है कि मैं आप सबके सामने वास्तुशास्त्र के वैदिक एंगल को लेकर के आऊं। वास्तु शास्त्र की प्रैक्टिस में कहीं न कहीं मुझे ऐसा लगता है कि वेदों का जो ज्ञान है, हमारे शास्त्रों में जो वैदिक वास्तु शास्त्र का वर्णन किया गया है, उससे रिलेटेड जो रिचुअल्स है, उससे रिलेटेड जो अनुष्ठान हैं, जो महुरत हैं, वो कहीं न कहीं प्रैक्टिस में लॉस्ट हो रहे हैं। और मेरा यह मिशन है कि मैं वैदिक वास्तु शास्त्र को घर घर तक लेकर जाए। अगर हम वास्तु शास्त्र की बात करें तो वास्तु शास्त्र 1 बहुत ही प्राचीन, बहुत ही पारंपरिक, 1 द सेम टाइम 1 बहुत ही शक्त शास्त्र है जो कि हमारे जीवन में भाग्य कल्प लाने की क्षमता रखता है। वास्तु शास्त्र का वर्णन जो है वो अथर्ववेद में दिया गया है। इन फैक्ट अथर्ववेद का 1 पार्ट है स्थापत्य वेद जिसमें पूरा डिटेल में बताया गया है कि भवन का निर्माण कैसा होना चाहिए। टेम्पल आर्किटेक्चर के बारे में बताया है, टाउन प्लानिंग के बारे में बताया है, वाहन वास्तु का भी 1 सेक्शन है, कल्चर्स के बारे में बताया है, पिलर्स के बारे में बताया है और बहुत ही डीटेल से हमारे शास्त्रों में दिया गया है कि वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी भवन का या मंदिर का या नगर का निर्माण कैसा होना चाहिए। क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र को अगर हम उसकी डेफिनेशन जो है वो इंग्लिश में समझे तो उसे कहा जाता है ट्रेडिशनल इंडियन सिस्टम ऑफ आर्किटेक्चर यानी की ट्रेडिशनल ये पारंपरिक है। यह भारतीय रूट से निकला हुआ है और ये सिस्टम ऑफ आर्किटेक्चर है। इन फैक्ट आप में से बहुत सारे लोग शायद जानते नहीं होंगे कि स्थापत्यवेद में आर्किटेक्ट को जो नाम दिया गया है वो है स्थापति और जो स्थापति होते थे वो बाकी लोगों के साथ मिलकर यानि की तक्षक या फिर सूत्र ग्रही। ये सारे कार्पेंटर जो डिजाइनर्स होते थे उनके साथ मिलकर के कम्प्लीट भवन का निर्माण करते थे जिसमें कि जो मेन निर्देश है वो स्थापति का रहता था। अगर हम आर्किटेक्चर की बात करें और वास्तु शास्त्र को भवन निर्माण से रिलेट करते हैं तो हम जोमेट्री को नजरअंदाज नहीं कर सकते। 1 बिल्डिंग जो है वो शुरुआत से ही बिल्कुल प्रिसाइज ज्योमेट्री पर बनती है। आपने देखा होगा आर्किटेक्चरल ड्राइंग में कितने प्रिसाइजली जो है वो लाइन बनाई जाती हैं, एंगल्स क्रिएट किए जाते हैं, विंडोज के साइज डिसाइड किए जाते हैं, महाद्वार का साइज डिसाइड किया जाता है क कहां से ओपनिंग आएंगी डिसाइड किया जाता है। तो आर्किटेक्चर की जब हम बात करते हैं तो हम कहीं न कहीं 1 जोमेट्री की बात करते हैं, प्रोपोस की बात करते हैं, रिदम की बात करते हैं और यही 3 चीजें जो हैं वो हमारे घर के अंदर हारमनी को प्रोड्यूस करती हैं। वास्तुशास्त्र के अगर हम कुछ प्राचीन ग्रंथों की बात करें जैसे कि मानसार, माना सार यानि कि मान और उसका सार मान यानि की मेजरमेंट। वो ये बताता था कि किसी भी बिल्डिंग को पॉजिटिवली एनर्जाइज करने के लिए उसमें किस मेजमेंट के बेसिस पर बिल्डिंग की प्लानिंग होनी चाहिए। इन फैक्ट प्राचीन शास्त्र में आयादी फॉर्मूले भी दिए गए हैं जो कि लेंटर ब्रेट को लेकर के मुखिया के जन्म नक्षत्र से मिलाते हुए कुछ इस प्रकार से घर की डिजाइनिंग की जाती थी कि वो जो घर है जो कि आयादी फार्मूला के अनुसार बना है वो मुखिया के नक्षत्र के हिसाब से इस तरीके से बनाया जाए कि वो उनके लिए हर तरह की सुख, संपत्ति शांति, हर तरह की जो वेलबिंग है वो मुखिया के लिए लेकर के आए। अगर मैं आपको इसे शॉर्ट वर्ड्स में बोलूं। तो मैं आज आपसे बात करने वाली हूं सेक्रेट ज्योमेट्री के बारे में। जब हम वैदिक वास्तु शास्त्र की बात करते हैं तो सेक्रेट ज्योमेट्री वैदिक वास्तु शास्त्र का 1 बहुत ही इंपॉर्टेंट पार्ट है और हम इस ज्योमेट्री के आगे सेक्रेट इसे लगाते हैं क्योंकि ये जो ज्योमेट्री है ये हमारे कॉसमोस सेइंस्पायड है। आप देखेंगे कि विश्व कर्मा जिनको की इस सृष्टि का पूरा आर्किटेक्ट कहा जाता है उन्होंने जिन प्रिंसिपल पल सृष्टि का निर्माण किया था जिसे प्रपोस को, रिदम को हम नेचर में देखते हैं अगर हम उन्हीं को ही अपने घर में अप्लाई करते हैं उसी ज्योमेट्री के अनुसार अपने घर को क्रिएट करते हैं तो 1 सीक्रेट ज्योमेट्री जो है वो हमारे घर में भी क्रिएट होती है। जब भी किसी बिल्डिंग का निर्माण होता है तो उस बिल्डिंग के अंदर जो है वो 1 इन्क्लोजडएनर्जी क्रिएट हो जाती है। जब भी हम किसी भवन की दीवारें खड़ी करते हैं उसमें दरवाजे देते हैं, खिड़कियां खड़े करते हैं तो उस भवन का अपना 1 स्वभाव बन जाता है और उसके अंदर की जो एनर्जी है वो 1 पर्टिकुलर वे में वाइब्रेट करने लगती है। अब मान लीजिए आप अपने घर का एग्जाम्पल लीजिये या किसी के घर का एग्जांपल लीजिए। जिनके अंदर साउथ िस्ट की जो है वो ओपनिंग बहुत ज्यादा है या दरवाजे बहुत ज्यादा है या साउथ िस्ट की तरफ जो है वो बड़ी बड़ी खिड़कियां बैलकनी दरवाजे आ रहे हैं ऑबवियसली उनके घर में जो है वो अग्नि तत्व बहुत ज्यादा हाय होगा यानि कि भवन की जोमेट्री कुछ ऐसी है भवन का आकार कुछ ऐसा हो गया कि इस भवन में हमने साउथ िस्ट को बहुत ज्यादा खोल दिया जिसकी वजह से अग्नि तत्त्व जो है वो घर में हाय हो गया। अग्नि तत्व को वैदिक वास्तुशास्त्र में जो है वो अगर हम सटल माइंड कॉम्प्लेक्स की बात करें तो अग्नि तत्व को ईगो से यानि कि अहंकार से जोड़ा जाता है। जिस घर में अग्नि तत्व बहुत ज्यादा होता है वहां पर ये पॉसिबिलिटी हो सकती है कि उस घर के जो स्वामी हैं उनके अंदर अहंकार थोड़ा सा बढ़ जाए या अग्रेसिव न थोड़ी सी बढ़ जाए और ये जो उनका स्वभाव बनेगा उसके बेसिस पर उनके जो आगे के जीवन का काल है वो निर्धारित हो सकता है। तो कहने का अर्थ यह है कि अगर हम अपने भवन का निर्माण सीक्रेट जॉमेट्री के अनुसार करते हैं, प्रपोशंस के हिसाब से, रिदम के हिसाब से अपने घर का निर्माण करते हैं तो हमारा घर भी 1 यंत्र की तरह जो है हमारा घर हमारे लिए एक्ट करने लगता है और हमें वो सब चीजें अचीव करने में हेल्प करता है जिनको कि हम अपने जीवन काल में अचीव करना चाहते हैं। इन फैक्ट जितने भी वास्तु के सारे यंत्र हैं ये भी सब सीक्रेट जोमेट्री पर बेस्ट है और अपने फ्यूचर वीडियोज में इनके बारे में भी मैं डिटेल में आपसे बात करूंगी और आज का जो हमारा टॉपिक था यानि कि सेक्रेट जोमेट्री का, अगर आप इसके बारे में और जानना चाहते हैं। आप जानना चाहते हैं कि वैदिक वास्तु शास्त्र के जो प्रिंसिपल्स हैं वो कैसे आपके जीवन को जो है वो परिपूर्ण बनाने में हेल्प करते हैं। कैसे ये शास्त्र आपके जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि, सुख, हर तरह की वेलबिंग लेके आता है। तो आप ज्वाइन कर सकते हैं। मेरी ऑनलाइन कम्यूनिटी वैदिक वास्तु, वैदिक वास्तु हपका। मैंने निर्माण इसलिए किया है कि मैं इंटेंट और मॉडल को कंबाइन कर सकूं। क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि आज के टाइम के जो वास्तु शास्त्री हैं उनके लिए सबसे बड़ा चैलेंज यही है कि पुराने शास्त्रों की नॉलेज को पुराने स्क्रिप्चर्स की नॉलेज को कैसे वो ब्रिज कर सकते हैं। आज की मॉडन डे लिविंग के लिए। तो अगर आप भी उनमें से हैं जो कि वैदिक वास्तु शास्त्र से रिजोनेट करते हैं और जानना चाहते हैं कि कैसे शास्त्रों के उन प्रिंसिपल्स को आज के मॉडल डे लिविंग में हम अमैलगुमेट कर सकते हैं तो आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर के मेरी ब्रांज मेंबरशिप ज्वाइन कर सकते हैं जो मात्र 5 सौ रुपये की है और जिससे आपको यह पता लग जाएगा कि अगर आप फि जर्नी में आगे मेरे साथ चलते हैं तो आपका ये सफर कैसा रहेगा और वैदिक वास्तु शास्त्र की क्या क्या बातें आपको जानने को मिलेगी सो आई होप। आज का जो वीडियो है वो आपको अच्छा लगा होगा और इसी तरह के कुछ और वीडियोज लेकर मैं जल्द ही आपके सामने आउंगी। थैंक यू सो, मच फॉर लिस्टिंग टु, मी एंड हैव नाइस डे।










