How Astrology relates to Vastu Shastra? | Dr. Vaishali Gupta

A Hindi-language lecture by Dr. Vaishali Gupta explaining how Vastu Shastra and astrology (jyotish) interrelate: each cardinal/intercardinal direction has a ruling planet whose virtues influence that direction and, thus, occupants' life domains. The speaker maps directions to planets (e.g., North—Mercury; North-East—Jupiter; East—Sun; North-West—Moon; West—Saturn; South-West—Rahu; South—Mars; South-East—Venus), describes typical home defects that reflect planetary weaknesses (toilets, staircases, closed spaces), and advises correcting Vastu faults by placating/energizing the associated planet and using muhurta (auspicious timing), rituals, or yantras. The video concludes with invitations to join her Vedic Vastu Hub and subscribe for more content.
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वैदिक वास्तु शास्त्र की जब हम बात करते हैं तो ग्रहों को वैदिक वास्तु शास्त्र में 1 विशेष इम्पोर्टेंस दी गई है। वास्तु शास्त्र के अनुसार हरेक दिशा के स्वामी ग्रह होते हैं जो कि उस दिशा को रूल करते हैं और उस स्वामी ग्रह के जो वाचेज हैं उस दिशा के वोचिज के साथ मिल कर के हमारे जीवन में असर करती हैं। अगर हमारे घर की कोई भी डायरेक्शन गलत हो जाए तो उससे असोसिएटेड प्लानेट को अफीज करके यानि कि शांत करके प्रसन्न करके हम अपने घर की उस दिशा के वास्तु दोष को ठीक कर सकते हैं। नमस्कार मैं हूँ, वास्तु एक्सपो डॉक्टर, वैशाली गुप्ता एंड एम, द फाउंडर ऑफ द वैदिक, वास्तु हप, वैदिक वास्तु हप की जो मैंने 1 कल्पना करी है वो इस धेय के साथ, इस उद्देश्य के साथ करी है कि मैं वैदिक वास्तु शास्त्र के प्रिंस को घर घर तक पहुंचा सकू और आयुर्वेद, प्राणायाम और योगा की तरह हर घर में इसके जो बेसिक प्रिंसिपल्स हैं वो हर 1 व्यक्ति जान सके और अपने निजी घर में उसको अप्लाई कर सके। आज हम जिस टॉपिक पर बात करने वाले है वो है ग्रहों और वास्तु का संबंध। कई बार ये सवाल आता है कि क्या वास्तु शास्त्र और स्ट्रोलॉजी रिलेटेड है, वास्तुशास्त्र एंड स्ट्रोलॉजीइज, वेरी क्लोजली, रिलेटेड एंड दैट इज फॉर, द सिंपल रीजन, द वेरी डrेकशoन लाइक, आई सेड हैज रूलिंग लॉड विच इनफ्लूएंसेज दी, वर्चूज ऑफ दैट पर्टिकुलर डायरेक्शन इमेंशलीतो। आइए सबसे पहले ये जानते हैं कि कौन सी दिशा जो है उसका स्वामी ग्रह कौन सा होता है और उसकी वजह से कौन सी वर्चूज या कौनसे गुण धर्म जो है वो दिशा के साथ एसोसिएट हो जाते हैं। तो आइए सबसे पहले बात करते हैं नॉर्थ की दिशा की और नॉर्थ की दिशा के जो रूलिंग प्लेनेट है वो है मर्करी मर्करी यानि कि बुद्ध ग्रह बुध जो कि इंटेलीजेंस मेमरी कम्यूनिकेशन, हमारे प्रोफेशन और 1 हद तक हमारे बच्चों का भी कारक होता है। अगर नॉर्थ में किसी तरह की दिक्कत आ जाए, कोई दोष आ जाए तो बुद्ध से रिलेटेड ये सारे वर्चूज इफेक्ट हो सकते हैं और नॉर्थ के दोष को दूर करके हम इन चीजों को करेक्ट कर सकते हैं। सिमिलरली अगर हमारा पत्री में, हमारी कुंडली में बुद्ध खराब हो तो उसका असर जो है वो हमारे घर में भी दिखाई देगा और कहीं न कहीं उससे रिलेटेड जो दिशा है नॉर्थ उसमें भी कुछ न कुछ दिक्कत दिखाई देगी या तो वहां कोई टॉयलेट होगा या फिर वहां कोई स्टेयरकेस होगी या वो दिशा कम्प्लीटली बंद होगी। अगली बात करते हैं नॉर्तीसकी दिशा की जो कि 1 और बहुत ही सात्विक दिशा है। कहा जाता है भगवान का स्थान है औ और यहां के जो स्वामी ग्रह हैं वो है गुरु यानि की ज्युपिटर। जुपिटर जो है वो ज्ञान के देव होते हैं, विस्तार के देव होते हैं। हमारे जीवन में संस्कार और हर तरह की सात्विकता लेके आते हैं और कहते हैं कि जब जीवन में गुरु का प्रकाश होता है तो हर तरह का अंधकार मिट जाता है नौर्थीजकीदशा क्योंकि वो गुरु से रूल होती है वो एप्ट दिशा है पूजा करने के लिए, ध्यान करने के लिए और ज्ञान को अर्जित करने के लिए और यह बहुत जरूरी है कि गुरु अगर आपके पत्री में टांग है तो आप अपने घर में नॉर्थ ईस्ट की दिशा को भी खुल्ला खाली और साफ रखें जिससे कि गुरु के सारे वर्चूज और नॉर्थ ईस्ट के सारे वॉचूज आपके जीवन में आए ईस्ट की दिशा के स्वामी ग्रह होते हैं सन और सूर्य जो है वो हमारी जिंदगी में नेम, फेम, रेप्युटेशन, सोशल, नेटवर्किंग, हर तरह का बिजनेस, डायमोसिफिकेशन, नाम, सम्मान सब चीजें हमारे जीवन में लेकर के आते हैं और अगर ईस्ट की दिशा में कोई दोष आ जाए तो वो हमारे सूर्य को भी खराब कर सकता है एंड द सेम टाइम अगर हमारी पत्री में सूर्य खराब हो तो ईस्ट की दिशा में भी आप देखेंगे कि ऐसे जातक के घर में कोई न कोई दोष दिखाई देगा अगर हम बात करें नॉर्थवेस्ट डिरेक्शन की तो नॉर्थवेस्ट डिरेक्शन के रूलिंग ग्रह चंद्रमा हैं तभी कहा जाता है कि अगर नॉर्थवेस्ट में वो लोग बहुत ज्यादा टाइम स्पेंड करते हैं जिनका चंद्रमा खराब है तो उनको डिप्रेशन की टेंडेंसी, रेस्टलेसनेस की टेंडेंसी, इमोशनल अपेंड डाउन और जीवन में लो फील करने की समस्या आ सकती है तो नॉर्थ वेस्ट की जो दिशा है वो चंद्रमा से रिलेटेड है और अगर हमारे पत्री में चंद्रमा खराब हैं तो नॉर्थ वेस्ट की दिशा को एनर्जाइज करके हम अपने चंद्रमा को भी कनेक्ट कर सकते हैं अगर हम बात करे वेस्ट की तो वेस्ट की जो दिशा है वो रूल होती है 1 बहुत ही इम्पोर्टेंट स्लो मूविंग प्लानेट से जोकि हैं शनी शनी यानि कि शनहेसनहेजोचलें जो धीरे धीरे चलते हैं वो हैं शनि ग्रह और अगर हमारे पत्री में और जो शनी की प्लेसमेंट है वो किसी गलत भाव में हो जाए तो हमारे घर की वेस्ट दिशा में भी आप देखेंगे कि कुछ न कुछ वास्तु दोष जरूर मिलेगा क्योंकि वास्तु और स्ट्रॉलॉजी जो है वो कहीं न कहीं हाथ से हाथ मिलाकर चलते हैं अगर आपके पत्री में शनी की कोई दिक्कत है या शनी की प्लेसमेंट किसी मैलिफिक प्लानेट के साथ है तो अपने घर की वेस्ट दिशा को आप इम्प्रूव करके अपने सैटन को भी अफीज कर सकते हैं क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करते तो साटन से रिलेटेड जो भी वर्चूज हैं यानी कि डीले आपकी लाइफ में आ सकती है हार्डशिप आपकी लाइफ में आ सकती है कार्मिकली जो है वो आपके ऊपर हर तरह की जो है वो 1 हार्डशिप आ सकती है अगर हम बात करें साउथवेस्ट दिशा की तो साउथवेस्ट के जो रूलिंग रह हैं वो हैं राहुल और अगर हमारे साउथवेस्ट में कोई दिक्कत आ जाती है तो हमारे राहु ग्रह इफेक्ट हो सकते हैं एंड ऑन द कॉन्ट्री अगर हमारे राहु ग्रह हमारे पत्री में डिस्टर्ब्ड है तो साउथवेस्ट में भी कहीं न कहीं वो वास्तु दोष झलकने लगेगा। साउथ की दिशा है मंगल की यानि कि मार्स की मार्ज हैं कमांडर इन चीफ ऑफ द सेलेस्ट मी एट द सेम टाइम यह हमारे कॉलेज को भी नोट करते हैं, हमारी इम्यूनिटी को भी नोट करते हैं। और अगर आपकी पत्री में मंगल का कोई प्रॉब्लम है तो आप अपने घर की साउथ दिशा को इम्प्रूव करके, वहां पे रेड कलर का इस्तेमाल करके और एलिमेंट को जो है यूज करके या वहां पर बम यंत्र लगा करके यानि कि मंगल यंत्र लगा कर के आप अपने उस घर की दिशा को करेक्ट कर सकते हैं। साउतीस की दिशा जो है वो है अग्नि की दिशा और ये दिशा है वीनस की वीनस यानि कि शुक्र ग्रह जो कि आपके जीवन में हर तरह की सुख संपत्ति, लग्जरी, कंफर्ट गाड़ी बंगला, ग्लैमर ब्यूटी हर 1 चीज को लेकर के आता है और आप देखेंगे कि अगर आपके शुक्र की अगर आपके कुंडली में कोई प्रॉब्लम हो या खराब शुक्र की दशा शुरू होती है तो आप 1 ऐसे घर में जाते हैं जहां पर आपके घर में साउथ हीस्ट में टॉयलेट होता है साउथ िस्ट के स्वामी ग्रह शुक्र हैं और अगर साउथइस्ट में हम टॉयलेट दे देते हैं तो उसके जो रूलिंग लॉड हैं शुक्र भी जो है एडवर्स ली अफेक्ट हो जाते हैं और हमारे जीवन से सारी लग्जरी, सारी, संपन्नता, सारा, ग्लैमर, सारी, ब्यूटी हर तरह का कंफर्ट जो हैं गाड़ी बंगला सब हमारे हाथ से जा सकता है। तो हमने अभी इन कुछ प्रमुख दिशाओं की बात करी, नॉर्थ की बात करी, ईस्ट की बात करी, नॉर्थ ईस्ट की बात करी, नॉर्थ वेस्ट की बात करी, साउथवेस्ट की बात करी, साउथ की बात करी और वेस्ट की बात करी। जब हम एस्ट्रोलॉजी और वास्तु शास्त्र की बात करते हैं तो हमें यह भी ध्यान देना है कि वास्तु शास्त्र और स्ट्रॉलॉजी में 1 बहुत इम्पोर्टेंट कनेक्शन और है और वो ये है कि जो इस घर के गृह स्वामी हैं उनकी जो कुंडली है उसमें जो ग्रह हैं उनकी प्लेसमेंट कैसी है, वो जो गृह स्वामी हैं उनका असेंडेंट साइन क्या है उसके बेसिस पर भी जो है उससे कोरिलेट करके भी हम घर के वास्तु को करेक्ट कर सकते हैं। अनदर इम्पोर्टेंट थिंग दैट कम्स इनटू कंसिडरेशन वैन मी टॉक अबाउट रास्ट्र वास्तु इज द महूर था। यानी कि अगर हम दिशा और समय को 1 साथ जोड़ कर के उपाय करें तो उसका जो रिजल्ट है वो हमारी लाइफ में एक्सपोनेंशियल हो जाता है खासकर वैदिक वास्तु शास्त्र में महूरत को बहुत ज्यादा इंपोर्टेंस दी है और यही कुछ चीजें हैं महूरत रिचुअल्स अनुष्ठान जो कि आज के मॉडर्न डे वास्तव में कहीं न कहीं निगलेक्ट हो रहे हैं और जिनको मैं चाहती हूं अपने वीडियोज के माध्यम से हाईलाइट करूं क जब भी आप किसी दिशा में कोई भी निवारण करते हैं, कोई भी उपचार करते हैं तो महूरत यानि कि काल का ध्यान जरूर रखें और उस दिशा से असोसिएटेड जो तिथि है उस दिशा से या फिर उस पर्टिकुलर यंत्र से असोसिएटेड जो रिजुअल है जिससे कि उस यंत्र की या उस रेमेडी की प्राण प्रतिष्ठा होगी उसको भी जरूर ध्यान में रखें। तो जब हम वैदिक वास्तु शास्त्र और ज्योतिश शास्त्र के संबंध की बात करते हैं तो हम बात करते हैं स्वामी ग्रहों की, उनके वर्चूज की, गृह स्वामी के नक्षत्र की, लगन की, महूरत की भी बात करते हैं और ये देखते हैं कि कैसे अनुष्ठानों और चूल् के द्वारा हम रेमिडीज को एनर्जाइज करते हुए एस्ट्रोलॉजी और वास्तु शास्त्र को यूज करते हुए कैसे उस घर को रेमिडी कर सकते हैं, कैसे उसका उपाय शास्त्र कर सकते हैं। क्योंकि ऐस्ट्रवास्तु का जो सबसे इम्पोर्टेंट 1 जो आस्पेक्ट है वो तब काम में आता है। इन दोनों का जो कोई रिलेशन है वो तब काम में आता है जब हम किसी घर की रेमिडी करते हैं। तो अगर आप भी वैदिक वास्तु शास्त्र में रुचि रखते हैं, वैदिक वस्त्र शास्त्र के बारे में जानना चाहते हैं और गहराई से उसमे उतरना चाहते हैं, अपने घर का वास्तु करना चाहते हैं, अपनों को हेल्प करना चाहते हैं या वैदिक वास्तु शास्त्र के प्रैक्टिशनर बनना चाहते हैं तो आप ज्वाइन कर सकते हैं मेरी ऑनलाइन कम्यूनिटी द वैदिक वास्तु हब जिसमें कि मैं अपने कोर्सेज और वेबिनार्स के माध्यम से आपको वैदिक वास्तु शास्त्र की गहराइयों में लेकर चलूंगी और अगर वैदिक वास्तु शास्त्र की नॉलेज आपको अच्छी लगी और आप चाहते हैं कि ऐसी इंफॉर्मेशन आप रेगुलर बेसिस पर सुनते रहे, अपने घर के वास्तु को अंडरस्टैंड करते रहें तो मेरे यू ट्यूब चैनल से जुड़े रहिये क्योंकि वैदिक वास्तु शास्त्र से संबंधित जो भी इंफॉर्मेशन है वो मैं समय समय पर आपके पास लाती रहूंगी और शेयर करती रहेंगी। सो थैंक यू सो मच फॉर लिस्टिंग टू दिस वीडियो डू सब्सक्र स्काइप टू माई चैनल एंड डू प्रेस द बेल icon जिससे कि इस तरह का कोई भी वीडियो जब आए तो उसकी इंफॉर्मेशन आपको तुरंत मिल जाए थैंक यू सो मच फॉर लिस्टिंग to me and have नाइसeडaई।










