Pitru Paksha 2021: Shraadh 2021 | पितृ पक्ष में क्या दान करना चाहिए | पितृ पक्ष पूजा विधि 2021

YouTube video (Sept 21, 2021) by Dr. Vaishali Gupta explaining Pitru Paksha (श्राद्ध): she states Pitru Paksha 2021 starts on 20 September and lasts 16 days. The video covers why Shraddh matters, when to perform it (individual ancestor death anniversaries or on Ashwin Amavasya if unknown), Vastu rules for placing ancestors' photos (south or southwest wall), dos and don'ts (avoid new purchases, no weddings/auspicious openings, avoid alcohol and non-vegetarian food during the 16 days), step-by-step Shraddh offerings and puja procedure (clean place, place a cloth and plate, offer sattvic food, light ghee), mantra practice (e.g., recite a pitru mantra or "पित्र देव नमः" 108 times), and recommended maha-dānas (cow, land, oil, grain, gold, donating a Bhagavad Gita). She also describes feeding crows (kaavā/कौवा) as symbolic transfer to ancestors.
Questions this video answers
20 September 2021.
16 days.
108 times.
On the south or south‑west wall.
Chapters
नमस्कार, मैं, हूँ, वास्तु, एकसपोटडस्ट्रॉलेज, डॉक्टर, वैशाली, गुप्ता आज मैं आपसे बात करने वाली हूँ श्राद पक्ष के बारे में जिसे की पित्र पक्ष भी कहा जाता है पित्र पक्ष जो है वो हमारे हिंदू शास्त्र में बहुत ही इम्पोर्टेंट और 1 बहुत ही पवित्र समय होता है। तो आइये सबसे पहले जानते हैं कि पित्र पक्ष जो है वो शुरू कब से हो रहा है। इस साल 2021 में पित्र पक्ष जो है वो 20 सितम्बर से स्टार्ट हो रहा है ऐसा कहा जाता है भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की जो पूर्णिमा है उससे पित्र पक्ष शुरू होता है और अश्विन मास के अमावस्या के दिन जो है ये पित्र पक्ष समाप्त होता है पक्ष के दौरान हमारे जो एनसेस्टर्स है हमारे जो पूर्वज है उनको कुछ ऑफिस दी जाती है और उनका जो श्राध है वो उस दिन मनाया जाता है जिस दिन उनकी पुण्यतिथि होती है कई बार ऐसा होता है कि हमारे जो पूर्वज हैं हम जानते ही नहीं है कि उनकी जो पुण्य तिथि है वो किस दिन पर है जाता है जब हमें अपने पित्रों की पुण्य तिथि नहीं पता होती तो हम ऐसा जनरल रूल अश्विन मास की अमावस्या के दिन उन पित्रों का तर्पण कर सके है आपने सबने पित्र दोष का नाम भी सुना होगा ज्योतिश शास्त्र में अक्सर पित्र दोष का नाम लिया जाता है और कहा जाता है कि इनकी पत्री में इनकी कुंडली में पित्र दोष है। जब हमारे पितर हमसे किसी बात पर नाराज हो जाते हैं हमसे रुष्ट हो जाते हैं तब हमारी कुंडली में पित्र दोष लग जाता है और आप जानते हैं कि ये श्राद का जो समय है ये पित्र पक्ष का जो समय है अगर हम इसमें विडी विदान से अपने पित्रों को ऑफरिसदेतेहैउनका पर करते हैं, पिंडदान करते हैं तो हमारे जो पित्र हैं वो हमसे प्रसन्न हो जाते हैं और ये जो पित्र दोष हम पर लगता है इससे हमें मुक्ति मिलने लगती है। हम सभी अपने ऑफिसेज में अपने घरों में अपने पित्रों का आशीर्वाद पाने के लिए अपने माता पिता जो की शरीर में नहीं रहे या हमारे जो दादा दादी हैं हम उनकी जो फोटोग्राफ है वो अपने ऑफिस और घर में लगाते हैं। वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार आपके पित्रों की एनसेस्टर्स की जो पिक्चर है वो आपके घर के ऑफिस के साउथ या फिर साउथवेस्ट वाल्ड पे होनी चाहिए दक्षिण यानि की साउथ या फिर नैरत्कोर्डयानि की साउथ वेस्ट की वार्ड पर होनी चाहिए। अगर आपने अपने पित्रों की पिक्चर नहीं लगाई है और आप उसे लगाना चाहते हैं तो इस पित्र पक्ष में आप अपने जो पित्र हैं उनकी जो डिपार्टेड है उनकी जो फोटो या उसको 1 गोल्डन फ्रेम में फ्रेम करवा कर के अपने घर या अपने ऑफिस की साउथ या साउथ वेस्ट वार्ड पर लगा सकते हैं। इस बात का ध्यान रखे की ये फोटोग्राफ जो है ये देवरूम में नहीं लगनी चाहिए और साथ ही साथ वास्तु शास्त्र के अनुसार जो हमारे पित्रों की फोटोज हैं, जो हमारे डिपार्टमेंट की पिक्चर है वो हमारे मंदिर में भी देवी देवताओं के साथ नहीं लगनी चाहिए। और अब मैं आपको बताउंगी की इस 16 दिन के 7 के समय में पित्र पक्ष के समय में दूध और डोंट्स क्या होते हैं यानि की इस पवित्र समय में हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए तो आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष के समय हमें क्या नहीं करना चाहिए सबसे पहले तो ये कहा जाता है कि पित्र पक्ष के समय पर श्राधों के समय पर हमें कोई भी नई चीज नहीं खरीदनी चाहिए वो नई चीज कुछ भी हो सकती है जैसे की जुली हो सकती है, कोई नए कपड़े हो सकते हैं, कोई नई गाड़ी हो सकती है, कोई नया गैजेट हो सकता है, आप कोई नया फ़ोन लेना चाहिए कोई भी नई चीज लेने चाहे तो ऐसा कहा जाता है कि पित्र पक्ष के दौरान कोई भी नई चीज नहीं खरीदनी चाहिए यह भी कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान कोई भी ऑस्फिशियल्स काम यानि की कोई भी मांगलिक कार्य जो है वो नहीं किए जाते अब यह मांगलिक कार्य क्या है जैसे की शादी या फिर कोई भी सेलिब्रेशन किसी भी तरह का कोई भी सेलिब्र जो है वो पित्र पक्ष में वर्जित होता है अगर आप किसी शॉप या शोरूम या किसी ऑफिस के ओनर हैं और आप उसका उद्घाटन करना चाहते हैं उसका इनॉगरेशन करना चाहते हैं तो वो भी पित्र पक्ष के समय पर नहीं करना चाहिए 1 और चीज जिसका ध्यान देना बहुत जरूरी है वो ये है कि पित्र पक्ष के समय खास हमें क्या नहीं खाना चाहिए अगर हम वास्तु शास्त्र की माने अपने शास्त्रों की माने तो यह कहा जाता है कि पित्र पक्ष के दौरान हमको नंबर वन यानि की शराब का सेवन नहीं करना चाहिए किसी भी तरह का आयकोऔहमेंकंज्यूम नहीं करना चाहिए इन 16 दिन तक यही नहीं इन 16 दिन तक हमें नॉनवेज यानि कि मासाहारी भोजन को भी अवॉइड करना चाहिए क्यूंकी इससे हमारी साप्तविकता कम होती है और हम में तमाशा आती है और इस पक्ष के दौरान हमारी पवित्रता कम होती है। 1 और चीज आपने देखा होगा कई घरों में पित्र पक्ष के दौरान किसी भी तरह का काम से भोजन ग्रहण नहीं किया जाता और जो भी खाना बनता है उसमे अन्य गार्लिक और जिंजर यानी की अदरक रहस और हमारा जो ब्याज है उसकी हम जो है खाने में उसको टोटली अवॉइड करते हैं तो कई लोग जो है वो पित्र पक्ष में ऐसा भी करते हैं और यह करना पित्र पक्ष में अच्छा माना जाता है और अब मैं आपको बताती हूँ की पित्र पक्ष दौरान हमें क्या करना चाहिए सबसे पहले तो पित्र पक्ष के दिनों में सुबह उठकर स्नान करके घर में पूजा जरूर करें नियमित रूप से पूजा करे इससे हमारे घर में पीस पॉजिटिविटी होगी और साथ ही साथ हमारे एनेस्टस आशीर्वाद भी हमारे जीवन में आएगा तो जरूर पित्र पक्ष के दौरान सुबह उठ कर पूजा करें ऐसा कहा जाता है कि पित्र पक्ष के दौरान हमारे जो पूर्वज है हमारे जो पित्र हैं वो किसी भी रूप में हमारे पास आ सकते हैं तो पित्र पक्ष के दौरान कोई भी निजी या कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति आपके घर में आता है तो उनको खाली हाथ न लौटाएं। 1 और चीज जिस काम में पित्र पक्ष में ध्यान देना चाहिए खासकर वो ये है की पित्र पक्ष के दौरान ब्राहमणों को भोजन कराए और सात्विक भोजन कराए। ऐसा करने से भी कहा जाता है की वो भोजन जो है वो जाकर हमारे पुत्रों को लगता है और हमारे जो पित्र है वो प्रसन्न होते हैं। अगर हम शास्त्रों की माने तो यह भी कहा जा है कि इन 16 दिनों तक यानि कि पित्र पक्ष के दौरान हमें पहली रोटी जो है वो गाय माता के लिए निकालनी चाहिए जो भी आपके घर में बन रहा है उसमें जो पहली रोटी है जो भी भोजन है उसमे से थोड़ा सा पहले गाय माता को खिलाये और उसके बाद जो है घर के सभी लोग खाएं तो ये चीजें हैं जो कि हमें स्टाफ पक्ष में करनी चाहिए। और अब मैं आपको बताऊंगी की जिस दिन आप अपने पित्रों का श्राद्ध करने जा रहे हैं उस दिन आपको पूजा कैसे करनी है उनको भोग कैसे लगाना है यह तो मैं आपको बता ही चुकी हूँ की अगर आपको अपने मित्रों की कितनी न याद हो तो आप अमावस्या के दिन जो है उनका श्राद कर सकते हैं। किस तरीके से करना चाहिए अपने मित्रों को हमें कैसे भोग लगाना चाहिए आइए ये जानते हैं। सबसे पहले तो आप 1 जो भी स्थान पर आप करना चाहते हैं उसको गंगा जल सड़क के अच्छे तरीके से साफ़ कर ले और फिर वहाँ पर 1 पतला या फिर 1 छोटा सा स्टूल बदले उस टूल के ऊपर 1 कोई वस्त्र बिछाकर कर 1 थाली रख लें। इसके बाद जो भी भोजन अपने अपने पितरों को भोग लगाने के लिए बनाया है उसको आप इस थाली में रखे आप थाली में 5 पुलिया रख सकते हैं थोड़ी सी खील रख सकते हैं कोई भी हरी सब्जी आप रख सकते हैं सादा हरी सब्जी रख सकते हैं आप चाहें तो थोडे से पापड़ भी रख सकते हैं। ये सभी चीजें कुछ लोग जो है वो उड़द की दाल भी बनाते हैं ये सारी चीजें आप जो है पित्रों को भोग लगाने के लिए रख दीजिये और इस बात का ध्यान दे की ये सारा खाना जो है वो सात्विक रूप में बना होना चाहिए। इसके बाद आप 1 पात्र ले और उसमे जो है गाय के उपले रखे आप 1 जगह जो है वो गाय का घी भी ले सकते है और आप इसको प्रज्वलित करे और इसमें गाय का घी डाल दें। इसके बाद जो आपने पूरी और खीर बनाई है वो थोड़ी सी आप ले और वो के रूप में आप अपने पित्रों को अर्पित कर दे उस अग्नि में समर्पित कर दे आप 1 किसी पात्र में थोड़ा सा जल भी ले सकते हैं चांदी के ग्लास में ले सकते हैं जल लीजिये और उस जल में थोड़ा सा बताशा डाल दीजिये और ये मीठा जल भी आप उस गली में छिड़क कर के थोडा स्प्रिंग कर करके अपने पित्रों को समर्पित कर सकते हैं। अब ऐसा भी कहा जाता है की 4 छोटी छोटी पूरियां बनाई जाती है और उसके ऊपर थोड़ी थोड़ी खीर रखी जाती है और ये 4 छोटी पुरिया जो है ये गाय माता को दी जाती है 1 ड्राव यानि की कुत्ते को दी जाती है, चीटी को दी जाती है यानि की एंड को दी जाती है और 1 जो हमारे देवता में उनको समर्पित की जाती है जो देवता को समर्पित करने वाली, भोग लगाने वाली, हमारी जो पूरी होती है वो भी हम गाय माता को खिला सकते है। तो इस बात का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है की हम ये 4 पूरियां निकाल करके ड्राव को, गाय को, चीटी यानी की एंड को और देवताओं को भोग लगाए समर्पित करें। आइये बात करते है कि पित्र पक्ष की ये जो पूजन है ये हमें वास्तु के अनुसार किस डायरेक्शन में करनी चाहिए। वास्तु के अनुसार दक्षिण को, नृत्य कोण को हमारा पित्रों का स्थान माना गया है क्योंकि ये यौन स्थान भी है और नृत्य कोण भी है। तो जो भी आप पूजा अर्चना कर रहे हैं जैसे मैंने, आपको, बताया जैसे आप भोग लगा रहे हैं यह तर्पण कर रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखे की आपकी जो फेसिंग है वो साउथ डायरेक्शन की तरफ होनी चाहिए। साथ ही साथ हम यह भी सोचते हैं कि पित्र पक्ष के दौरान पितरों को प्रसन्न करने के लिए कौन से मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। तो मैं आपको 1 बहुत ही सरल सा मंत्र बताउंगी जो की आप आसानी से चैट कर सकते हैं। आप चाहे तो पित्र मंत्र का भी 100 8 बार जाप कर सकते हैं। आप चाहें तो पित्र का भी 100 8 बार जाप कर सकते हैं या फिर आप चाहे तो पित्र देव नम इस मंत्र का भी 1 माला लेकर के 100 8 बार जाप कर सकते हैं। ऐसा कहा जाता है की यह करने से भी हमारे जो पत्र है वो प्रसन्न होते हैं। पित्र पक्ष के दौरान कुछ महादान भी बताए गए है। महादान में सबसे पहला दान है दान पक्ष के दौरान अगर हम गाय माता का दान करते हैं तो उससे हमारे जीवन में समृद्धि आती है। दूसरा जो महा दान हमारे शास्त्रों में बताया गया है, जिसे पित्र पक्ष के दौरान करना चाहिए वो है भूमि का दान। अगर आपकी क्षमता है। अगर इस तरह का आपका सामर्थ्य है तो आप पित्र पक्ष के दौरान थोड़ी भूमि दान करें। पित्र पक्ष के दौरान तेल दान का विशेष महत्व बताया गया है ऐसा कहा जाता है। अगर पित्र पक्ष में हम तेल का दान करते हैं तो हमारा जो परिवार है वो रोग से मुक्त होता है और किसी भी तरह की बीमारी जो है वो हमारे परिवार में नहीं आती। पित्र पक्ष के दौरान अनाज यानि कि अन्न का भी दान किया जाता है ऐसा कहा जाता है। अगर हम किसी प्रकार के अनाज का दान करते हैं, गरीबों को देते हैं, ब्राहमणों में देते हैं तो इसका भी जो शुभ आशीर्वाद है वो हमारे जीवन में आता है और हमारे जीवन में कभी भी अन्न की कमी नहीं होती और हमारे घर में सुख समृद्धि बनी रहती है ऐसा भी कहा जाता है कि पित्र पक्ष के दौरान हमें भगवत गीता जो है वो किसी ब्राह्मण को दान करनी चाहिए क्योंकि इसका भी विशेष पुण्य है यह भी कहा जाता है कि स्वर्ण का दान यानि कि गोल्ड अगर हम डोनेट करते हैं पित्र पक्ष के दौरान तो यह भी हमारे जीवन में प्रोस्पेरिटी लाता है, समृद्धि लाता है और हमारे घर में कभी धन धान्य की कमी हमारे पित्रों के आशीर्वाद से कभी नहीं होती। 1 और चीज जिसका कि दान हम पित्र पक्ष में कर सकते हैं वो है गाय का घी यानी कि जो गो गृ होता है कहा जाता है कि अगर हम गाय के घी का दान भी करते हैं तो वो भी हमारे जीवन में शुभ फल लेकर आता है ऐसा भी कहा जाता है कि जो कहा है यानि कि जो क्रो होता है वो हमारे पित्रों को रिप्रेजेंट करता है और पित्र पक्ष के दौरान हमारे जो पित्र हैं हमारे जो अपने हैं जो की अब सुक्ष्म शरीर में चले गए हैं वो कौवे के रूप में जो है वो हमारे जीवन में आते हैं और इसी लिए कहा जाता है कि पित्र पक्ष के दौरान कौवे को यानि कि क्रो को हमें फील्ड करना चाहिए कौवे को हमें दाना खिलाना चाहिए ऐसा कहा जाता है की अगर हम कौवे को दाना खिलाते हैं तो हमारे पित्र ही उस कौवे के रूप में हमारे पास आते हैं और फिर वो उस दाने को ग्रहण करके कृत होके जाते हैं और हमें आशीर्वाद देकर जाते हैं।










