Sharad purnima by Vastu expert Dr. Vaishali Gupta

A Hindi-language YouTube festival video by Vastu expert Dr. Vaishali Gupta explaining the significance and prescribed observances for Sharad Purnima. She gives the 2019 calendar/muhurat (Sharad Purnima on 13–14 October 2019; muhurat 12:37 on 13 Oct to 02:39 on 14 Oct; chandroday at 5:56), recounts myths (birth of Lakshmi, Krishna’s Raas Leela, 16 kalas), and describes Vastu-guided rituals: sit facing east or north-east for meditation, worship Lakshmi, Vishnu (Shaligram), Indra and one’s ishta-dev, keep a fast, recite Shri Sukt and Lakshmi Chalisa, and prepare cow-milk kheer with saffron, dry fruits and 2 teaspoons ghee to leave under moonlight overnight and consume in the morning. Claimed benefits include increased spiritual power, mental peace, healing of diseases, conception aid, and household prosperity.
Questions this video answers
13 October 2019 (observance spans night of 13–14 October 2019).
From 12:37 (12:37 PM) on 13 October 2019 until 02:39 AM on 14 October 2019.
05:56 (5:56 AM) on the day (chandroday time stated).
Chapters
नमस्कार फेस्टिवल सीरीज विडियोज में आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है। आज मैं आपको बताऊंगी शरद पूर्णिमा के बारे में। शरद पूर्णिमा का हमारे शास्त्रों में बहुत ही विशेष महत्व बताया गया है और ऐसा कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा इज वेरी वेरी ऑफिशल से अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन चंद्रमा पृथ्वी के बहुत नजदीक आ जाता है और चन्द्रमा की किरणें बहुत ही प्रबल होकर के पृथ्वी को स्ट्राइक करते हैं। अगर आज के दिन जब चंद्रमा इतना नजदीक होता है और उसकी किरणों की अमृत वर्षा होती है। अगर हम बैठ कर ध्यान करते हैं, मेडिटेशन करते हैं, मंत्र जाप करते हैं तो इसका विशेष फल हमारे जीवन में आता है। आज मैं आपको बताऊंगी कि शरत पूर्णिमा के दिन विधि विधान से और वास्तु के अनुसार आपको क्या क्या करना चाहिए जिससे कि आपके जीवन में सुख समृद्धि। आए इससे पहले कि मैं आगे शुरू करूँ सबसे पहले मैं आपको बता दूं कि शरत पूर्णिमा का मुहूर्त क्या है। इस साल यानि कि साल 2019 में शरत पूर्णिमा पढ़ रही है 13 अक्टूबर को और महूरत है 12 बजकर 37 मिनट से लेकर के 14 अक्टूबर की रात 2 बजकर 39 मिनट तक। तो इस शुभ महुरत में जो है इस साल शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। शरद पूर्णिमा को चंद्रोदय का समय 5 बजकर 56 मिनट पर है। ये तो हम सभी जानते हैं कि चंद्रमा के प्रभाव से चंद्रमा के मैग्नेटिक पुल की वजह से सागर में भी लहरें उठती हैं और आप सोचिए हमारे शरीर में 60 से 70 पर्सेंट वाटर है 60 से 70 पर्सेंट जल तक है। तो चंद्रमा का असर हमारे ऊपर क्या पड़ता होगा। जी हां, चंद्रमा का असर हमारे मन पर बहुत ही प्रबल होता है और आज के दिन इसलिए कहा जाता है कि हमें शांति से ईस्ट या नॉर्थ ईस्ट की फेसिंग में बैठ कर के मेडिटेशन करने चाहिए। इससे हमारे बॉडी में शक्ति आती है और हमारा माइंड स्ट्रॉंग होता है साथ ही हमारी सारी इच्छाएं भी पूर्ण होती है। शरद पूर्णिमा का दिन इसलिए भी विशेष होता है क्योंकि कहा जाता है कि आज के दिन लक्ष्मी जी का जन्म हुआ था। जन्म दिवस का दिन है आज जी लक्ष्मी जी का। साथ ही यह भी कहा जाता है कि आज के दिन कृष्ण जी ने अपने गोपियों के साथ रास लीला रचाई थी। ये तो हम सभी जानते हैं कि कृष्ण जी 16 कलाओ के मालिक थे। ऐसा कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन जो भी विधि विधान से पूजा करता है, मेडिटेशन करता है या फिर मंत्र जाप करता है उसके अंदर भी उनकी पर्सनैलिटी में भी 16 कलाओं का विकास होता है। चंद्रमा आज के दिन पृथ्वी के बहुत नजदीक आते हैं और इन 16 कलाओं को बिखेरते हैं। इस समय जो भी व्यक्ति विधि विधान से पूजा कर रहा होता है। ऐसा माना जाता है कि वो भी इन 16 कलाओं का मालिक बन जाता है। शरत पूर्णमा के दिन विशेष रूप से लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। लक्ष्मी जी के साथ साथ श्री हरी विष्णु जी की पूजा होती है। इन्द्र देव की पूजा होती है और साथ ही हमारे इष्ट देव का भी पूजन किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि आज के दिन उपवास रखने का भी बहुत ही विशेष महत्व है। जो लेडीज कंसीव करना चाहती हैं लेकिन उनको बेबी के इशू आ रहे हैं, वो कंसीव नहीं कर पा रहे हैं। अगर आज के दिन वो विधि विधान से पूजा करके व्रत रखती हैं तो ऐसा कहा जाता है कि उनको निश्चय ही संतान की प्राप्ति होती है। शरद पूर्णिमा के दिन पूजा और उपवास करने से असाध्य रोगों से भी मुक्ति मिलती है। यही नहीं जो लोग शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उनके घर में, धन धन में और हर तरह की सुख, समृद्धि, की और धन की वर्षा होती है। और मैं आपको यह भी बता दूं कि शरद पूर्णिमा को कुमार पूर्णिमा भी कहा जाता है। जो भी कंवारी लड़कियां 1 अच्छे से सहयोगी वर्ग को ढूंढ रही है। अगर आज के दिन वो व्रत रखती है, पूजा करती हैं और भगवान का नमन करती है तो कहते हैं कि कार्तिक के समान कुमार व उनके जीवन में आता है। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन की गयी लक्ष्मी जी की पूजा दीपावली पूजन के बराबर होती है, दिवाली पूजन के तुल्य होती है। ऐसा भी कहते हैं कि आज के दिन माँ लक्ष्मी घूम रही होती है और ढूंढ रही होती है कि मेरे कौन से भक्त हैं, जो कि बैठ कर मेरी पूजा कर रहे है, मेरा नमन कर रहे हैं और जो भी भक्त उन्हें पूजा करते हुए मिलते हैं, ध्यान करते हुए मिलते हैं, उनके जीवन में वह विशेष अनुकंपा प्रदान करती है। अब मैं आपको बताउंगी की विधि विधान से और वास्तु के अनुसार आज के दिन आपको पूजन कैसे करना चाहिए। सबसे पहले सुबह उठ कर के जल्दी उठ कर के स्नान कर ले और उसके बाद अपने मंदिर में जाए मंदिर के नोटिस की तरह लकड़ी की चौकी लगाए और चौकी के ऊपर पीला या सफेद रंग का वस्त्र बिछा दे। उसके ऊपर माँ की प्रतिमा रखे और श्री हरी विष्णु जी का शालीग्राम या फिर उनकी प्रतिमा रखें। इसके बाद विधि विधान से पूजन करे माँ को लाल रंग के पुष्प चढ़ाएं, रोली चढ़ाएं, चंदन चढ़ाएं, अक्षत चढ़ाएं और घी का 1 दीपक भी चढ़ाएं। ऐसा कहा जाता है कि आज के दिन हम भगवान इंद्र की पूजा भी करते हैं। ऐसा मानते है कि वर्षा ऋतु के लिए हम भगवान इंद्र का धन्यवाद करते हैं और फिर आज के दिन उनका पूजन करते हैं। इंद्र भगवान की पूजा इंद्र धनुष से यानि कि सतरंगी रेम्बो से की जाती है। इसके लिए आपको ज्यादा चिंता करने की जरुरत नहीं है। अगर आपके घर में कोई छोटे बच्चे हैं तो आप उनसे बोलिए कि वो 1 पेपर के ऊपर आपको सतरंगी धनुष बना के देते। इस इंद्र धनुष को सतरंगी। इंद्र धनुष को आप अपनी चौकी पर रख दें और इसका भी जो है वो टीका करके अक्षणत्रोली से इसकी भी पूजा कर दें। तो ऐसा माना जाएगा कि आज के दिन अपने लक्ष्मी जी, विष्णु जी, इंद्र जी और अपने इष्ट देव सभी की पूजा कर लें। ऐसा करते समय अपने मन में वो संकल्प पी ले जिसकी इच्छा पूर्ति की आप प्रार्थना कर रहे हैं। आज के दिन लक्ष्मी जी को पंजीरी का प्रसाद चढ़ाना भी बहुत ही शुभ माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन श्री सुक्त का पाठ जरूर करें। लक्ष्मी जी की चालीसा भी जरूर पड़े। माँ लक्ष्मी के हजार नामों का उच्चारण भी जरूर करे। साथ ही साथ लक्ष्मी जी की आरती करके अपनी पूजा का समापन करें। अब मैं आपको बताऊंगी की आज के दिन यानि कि शरत पूर्णिमा के दिन आपको सबसे स्पेशल, सबसे विशेष काम क्या करना है। आज के दिन गाय के दूध की खीर बनाई जाती है और इस खीर को चंद्रमा के नीचे रखा जाता है। जब आप ये खीर बना रहे है तो इस बात का ध्यान दे कि खीर जो है वो गाय के दूध से बने। साथ ही साथ ये खीर प्लेन नहीं बननी चाहिए। इसमें पंच, मेवा के सर और 2 चम्मच गाय का घी जरूर डाले। ऐसा करने के बाद इस खीर का चंद्रमा को भोग लगाएं और रात के समय इस इस खीर को अपने घर के किसी ऐसे स्थान पर रख दे जहाँ पर चंद्रमा की किरने डायरेक्टली इस खीर के अन्दर आए। आप चाहे तो इस खीर को अपनी बैलकनी में रख सकते हैं, अपने छत पे रख सकते हैं या किसी भी ऐसी जगह पर रख सकते हैं जहाँ पर चंद्रमा की किरणें अब बंडंसमेंइस खीर के अन्दर जाए। रात भर इस खीर को रखने के बाद सुबह के समय यानि कि 14 अक्टूबर के दिन आप इस खीर को ग्रहण करें। ऐसा कहा जाता है कि चंद्रमा से शरद पूर्णिमा के दिन अमृत वर्षा होती है और ये सारा का सारा अमृत उस खीर के अंदर स्टोर हो जाता है। इसे खाने से हमारे अंदर शरीर की जितनी ताकत है वो बढ़ती है, हमारा मन शांत होता है। जितने भी रोग शरीर में होते हैं माना जाता है कि उससे भी हमें मुक्ति मिलती है। तो आज के दिन खीर जरूर बनाये उसको ऐसी जगह पर रखे जहाँ पर चंद्रमा के खिरने भरपूर उस खीर के अन्दर जाये खीर को बिल्कुल भी प्लेन न बनाये। जहाँ तक हो सके केसर पंचमेवा और 2 चम्मच गाय का घी डालकर इस खीर को बनाये। शरत पूर्णिमा के दिन कुछ लोग रात को जागरण भी करते हैं। और ऐसा भी माना जाता है कि अगर शरद पूर्णिमा के दिन हम ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देकर के खीर खिलाते हैं तो उससे भी हमारे जीवन में बहुत ही शुभ फल आता है। बस इस बात का ध्यान रखे कि जो खीरा ब्राह्मणों को खिला रहे हैं उसमें भी 2 चम्मच गाय का घी जरूर डाले। शरत पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी के बहुत ही नजदीक होते हैं और हम जानते हैं कि चंद्रमा का सीधा असर हमारे मन पर पड़ता है। तो जो लोग अपने जीवन में आध्यात्मिक ताकत को बढ़ाना चाहते हैं, मानसिक शांति बढ़ाना चाहते हैं, ध्यान और अध्यात्म क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए आज का दिन बहुत ही इम्पोटेंट है। आज के दिन ईस्ट या नॉर्थ ईस्ट में बैठ करके जरूर आप मेडिटेशन करे। साथ ही साथ विधि विधान से मां, लक्ष्मी, विष्णुजी, इष्टदेव और इंद्र जी का पूजन करें। इसके साथ घर में खीर जरूर बनाएं उस खीर को रात भर चंद्रमा की रोशनी में रखें और सुबह उठकर उसे ग्रहण करें। अगर आप इस प्रकार से विधि विधान से पूजा करके आज के दिन ध्यान करते हैं तो ये दिन आपके जीवन में बहुत ही शुभ फल लेकर के आता। मैं उम्मीद करती हूँ की आज का यह वीडियो आपको अच्छा लगा और आगे भी मैं आपके लिए बहुत सारे फेस्टिवल सीरीज के वीडियोज लाती रहूंगी। अगर आपको ये वीडियो अच्छा लगा तो इसको लाइक करें कमेंट करना न भूलें। हमे जरूर बताए कि आगे आप किस बारे में वीडियोज देखना चाहेंगे। साथ ही साथ हमारे यू ट्यूब चैनल को जरूर सबस्क्राइब करें। थैंक यू।










