A short Hindi YouTube transcript of Dr. Vaishali Gupta discussing Vastu Shastra guidance for locating borewells and procedures for foundation digging and backfilling during early construction. The speaker emphasizes that borewell placement (preferably north or north-east after expert calculation) is important because it’s hard to change later and affects household prosperity; foundation excavation and filling should follow directional sequences (excavation from north→north‑west→east→south‑west; filling from south‑west→south‑east→north‑west→north‑east) to ensure balanced construction and timely completion.
Chapters
डॉक्टर विशाल अपने यहाँ पर बोरवेल का.
जिक्र किया जी जानना चाहूंगी बोरवेल कब करनी चाहिए जी और उसको लेकर के वास्तव में क्या कुछ इंस्ट्रक्शन दिए गए.
हैं बिल्कुल जो बोरवेल की लोकेशन है.
पूजा बहुत इमपोर्टंट होती है और बोरवेल.
यानि की हमारी बोरिंग जिसे हम अपना.
सबमर्सिबल भी कहते हैं इसकी लोकेशन वास्तु.
शास्त्र में बहुत इम्पोर्टेंट होती है क्यूँकि.
यह 1 बार हो जाए तो इसकी.
लोकेशन चेंज करना मुमकिन नहीं हो पाता है काफी डीप हमारी बोरवेल जाती है और बोरवेल जो है वो हमारी ओवरॉल प्रोस्पेरिटी को, हमारी ओवरआल समृद्धि को, हमारे.
पैसे को, हर 1 चीज को जो है वो डिनोट करती है तो बोरवेल.
जो है वो कंस्ट्रक्शन के शुरुआती दौर.
में ही हो जानी चाहिए और बोरवेल.
की जो लोकेशन है वो बड़े कैलकुलेशन.
के साथ की जाती है ब बोरवेल.
करते वक्त मोटा मोटी इस बात का ध्यान रखें कि बोरवेल आपकी जो है वो कोण सूत्र पर नहीं पड़नी चाहिए और ब्रह्म स्थान से थोड़ी दूर होनी.
चाहिए बोरवेल को आप 1 मोटे तौर.
पर मैं कह सकती हूं के नॉर्थ और नॉर्थ ईस्ट में बना सकते हैं लेकिन आप किसी अच्छे विशेषज्ञ को दिखाकर.
प्रॉपर इसकी लोकेशन कैलकुलेट कर के आप अपने बोरिंग को कराएं और इसको नॉर्थ और नॉर्थ ईस्ट में ही लें और.
शुरुआती दौर में ही आप सबसे पहले.
बाउंड्री वॉल के बाद अपना बोरवेल आप.
जो है वो अपना डिसाइड कर सकते.
हैं उसको दे सकते हैं पहले जी जैसे आपने बताया कि जब भी कोई गड्ढा खोदे हैं उसकी मोटेंस होती है तो यहाँ पर 1 क्वेश्चन मेरे मन में आया कि फाउंडेशन डिगिंग जो होता है खुदा से कहते हैं या भराव करना इसकी क्या इम्पोर्टेंस होती है इसकी.
बहुत इम्पोर्टेंस होती है और यह भी हमारा जो है कंस्ट्रक्शन स्टेज का सबसे पहला काम होता है कि हम फाउंडेशन अपनी लेकर ते हैं नींव अपनी डालते.
हैं फाउंडेशन लेइंग के लिए भी अगर.
आप यह चाहते हैं कि आपका जो वास्तु है वो कंस्ट्रक्शन के स्टेज से.
ही जो है वो फॉलो हो तो.
इसके फाउंडेशन लेइंग के लिए भी वास्तु.
शास्त्र में नियम दिए गए हैं और.
अगर आप इसके अनुसार फाउंडेशन को ले करते हैं तो आपकी कंस्ट्रक्शन जो है.
वो काफी आराम से होती है फाउंडेशन.
को ले करते वक्त इस बात का.
ध्यान रखें जो खुदाई है वो सबसे.
पहले नॉर्थ ही से नॉर्थ वेस्ट की.
तरफ होनी चाहिए और उसके बाद साउथ.
ईस्ट से साउथ वेस्ट की तरफ होनी.
चाहिए और जब हम बात करते हैं.
भराई की तो भराई बिल्कुल इसके विपरीत.
दिशा में होनी चाहिए जो आपकी भराई.
है वो साउथवेस्ट से साउथईस्ट की तरफ.
होनी चाहिए और नॉर्थ वेस्ट से नॉर्थ ईस्ट की तरफ होनी चाहिए ऐसा करने.
से हमारे जो जो नीव के गड्ढे हैं वो राइट तरीके से होते हैं और भराव भी ठीक तरीके से होता.
है और काफी बैलेंस वे में हमारी कंस् स्टार्ट होती है और 1 रिकॉर्ड.
टाइम में खत्म हो जाती है वास्तु.
1 साइंस है जिसके पास आपकी हर प्रॉब्लम का सॉल्यूशन है डॉक्टर वैशाली गुप्ता से अपने घर, ऑफिस या फैक्ट्री की ऑनलाइन कंसल्टेंसी, मैप, मेकिंग या वास्तु विजिट के लिए स्क्रीन पर दिए गए नंबर पर कांटेक्ट करें। या फिर आप हमें ईमेल भी कर सकते हैं।