Vedic Vastu: Easy Home Harmony Tips | Dr. Vaishali Gupta

Dr. Vaishali Gupta explains Vedic Vastu Shastra, an ancient Indian science using precise geometry and proportions to design homes as sacred instruments. Ancient builders created stable structures with positive energy through mathematical calculations without modern machinery. Homeowners can apply these principles to balance physical, financial, emotional, and spiritual wellbeing.
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अक्सर मैं अपने यूट्यूब वीडियोज में आपसे वैदिक वास्तु शास्त्र की बातें करती हूँ और अपने आज के विडियो में भी मैं आपके साथ 1 बहुत ही इंट्रस्टिंग टॉपिक को शेयर करने वाली हूं। वैदिक वास्तु शास्त्र जो है यह बहुत ही प्राचीन शास्त्र है और वास्तु शास्त्र का वर्णन वेदों में भी किया गया है और वास्तु शास्त्र के बहुत सारे स्क्रिप्चर्स जो हैं उनकी बहुत सारी इंटरप्रेटेशंस भी अवेलेबल हैं हालांकि शास्त्र की जितनी इंफॉर्मेशन हमारे पास होनी चाहिए उतनी तो नहीं है क्योंकि मुगल्जैंडइंग्लिश के इनवेजन के बाद बहुत सारे जो हमारे शास्त्र हैं वो कहीं लॉस्ट हो गए और उनके प्रिंसिपल्स को हमने अप्लाई करना छोड़ दिया लेकिन आज भी बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो कि वैदिक वास्तु शास्त्र को जानने में और समझने में रुचि रखते हैं उन्ही सब लोगों के लिए जो है मैं वैदिक वास्तु शास्त्र की नौलेज समय समय पर लेकर आती हूँ और उन्हीं के लिए मैंने खोला है अपना वैदिक वास्तु हब जो कि 1 ऑनलाइन प्लेटफार्म है 1 कम्युनिटी है जिसमें कि जो लोग ये जानना चाहते हैं कि वैदिक वास्तु शास्त्र को हम आज के मॉडर्न समय में कैसे अप्लाई कर सकते हैं अपने खुद के घर में उनके लिए जो प्लेटफार्म है यह सही जगह है। नमस्कार मैं हूं वास्तु एक्स डॉ वैशाली गुप्ता नंदी, फाउंडर ऑफ द वैदिक वास्तु ह आज के समय में वास्तु शास्त्र के सामने वैदिक लगाना बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि जो वास्तु शास्त्र का वैदिक एंगल है उसके ऊपर जो दृष्टि है, जो एम्फेसिस है, जो फोकस है वो आजकल थोड़ा कम हो गया है और यह हमारे लिए बहुत जरूरी है की हमारी जो कंट्री के धरोहर है, जो वैदिक वास्तु शास्त्र की नॉलेज है। ये इन फैक्ट इतनी सिंपल और इतनी इफेक्टिव नॉलेज है कि मुझे लगता है कि योगा, प्राण या मायुर्वेद की तरह ये भी घर घर तक पहुंचनी चाहिए। क्या आप जानते हैं कि वैदिक वास्तुशास्त्र जो है उसमें हमेशा जोमेट्री मैथमेटिक्स को यानि कि कैलकुलेशन को बहुत ज्यादा इम्पोर्टेंस दी गई थी एंड सारी चीजें जो है वो 1 कैलकुलेटेड वे में होती थी क्योंकि जब कोई चीज कैलकुलेटेड जोमेट्री से बनती है तो उसके अंदर रिदम क्रिएट होती है आप सोचिए जब आपका 1 स्ट्रक्चर ऐसे बनता है, कोई भी स्ट्रक्चर हमारी कंट्री में हो, चाहे हवा महल हो, चाहे ताज महल हो या कोई भी मंदिर हो, जब वो प्रपोषण के हिसाब से बनते हैं, साइज के हिसाब से बनते हैं तो 1 अलग ही पॉजिटिव और रिदमिक एनर्जी उनमें क्रिएट होती है और इसीलिए जब हम उनके अंदर जाते हैं तो हमें अच्छा लगता है और हमारे शास्त्रों के पास ये नॉलेज बहुत पहले से थी और आप जान करके अचंभित होंगे कि पहले जो मंदिर निर्माण किए जाते थे उनमें मोटर का इस्तेमाल भी नहीं होता था वो इस हिसाब से इस साइज के जो हैं वो ज्योमेट्रिकल स्टोन्स का इस्तेमाल करते थे जिनको कि 1 के ऊपर 1 ऐसे लगाया जाता था कि वो अपने आप ही सेल्फ रहते थे इन फैक्ट जब तक लास्ट पत्थर नहीं लग जाता था तब तक वो स्ट्रक्चर अनस्टेबल होता था लेकिन जैसे ही वो लास्ट पत्थर लगता था वो पूरा स्ट्रक्चर स्टेबल हो जाता था। तो क्या आप इमेजिन कर सकते हैं 1 ऐसी कंस्ट्रक्शन जो कि बिना मोटर के किए जाती थी और इतने बड़े बड़े टेम्पल्स क्रिएट हो जाते थे वास्तु शास्त्र में अगर हम वैदिक वास्तु शास्त्र की बात करें तो आर्किटेक्ट जो है उसे स्थापति कहा जाता था और आर्किटेक्ट 1 बहुत इम्पोर्टेंट रोल प्ले करते थे जो स्थापति थे इनके साथ 1 तक्षक होते थे, सूत्र ग्रही होते थे साथ ही साथ इनके 1 वर्धकी भी होते थे यानि कि 1 कारपेंटर, 1 ड्राफ्ट्स मैन और 1 इंटीयर डिजाइनर जो कि हम आज की भाषा में जानते हैं। ये सब मिल करके अपनी टेक्निकल नॉलेज को यूज करके, 1 दुसरे से शेयर करके 1 स्ट्रक्चर का निर्माण करते थे और 1 दूसरे से एक्सपीरियंशल लर्निंग जो होती है वो भी लेते थे। अब सीक्रेट ज्योमेट्री जो है इसकी हिस्टॉरिकल सिग्निफिकेंट तो है ही क्योंकि हमारे जो प्राचीन मंदिर हैं चाहे वो नॉर्थ के हो या साउथ के हो। आपने देखा वो कितने जोमेट्रिकल और कितने प्रेसाइज होते हैं उसके अंदर के जो प कॉरिडोर्स होते हैं या उसके अंदर जो खिड़कियों के डिजाइन होते हैं। आप देखेंगे कि वो बिल्कुल एग्जैक्ट सेम प्रपोशण में होते हैं या फिर उसमें मैक्रो काजम और माइक्रोकॉजम का प्रिंसिपल होता है यानि कि जो छोटा 1 इमेज यूज किया जाता है मोटिफ यूज किया जाता है उसी प्रपोषण में उसको 1 बड़े वे में भी यूज किया जाता है जिससे 1 हार्मनी क्रिएट होती है और 1 रिदम क्रिएट होती है और 1 सीक्रेट फीलिंग हमारे अंदर आती है पवित्र भाव हमारे अंदर आता है। तो अगर हम बात करें कि जो सेक्रेट जॉमेट्री है इसे हम सेक्रेट या पवित्र क्यों कहते हैं इसलिए कहते हैं क्योंकि ये नेचर से इंस्पायर्ड है। विश्व के जो आर्किटेक्ट हैं विश्वकर्मा उन्होंने जिस हिसाब से संसार को बनाया उसी हिसाब से हम अपने घर को बनाते हैं और जो हमारे यंत्र है। आप सब जानते हैं श्री यंत्र है, कनक धारा यंत्र है, नवग्रह यंत्र है, अनेक तरह के जो यंत्र है ये भी सीक्रेट जोमेटरी पर ही बेस्ट है। अगर हम किसी भी सिंपल यंत्र की बात करे और किसी भी एनर्जी डायग्राम की बात करें तो आपने देखा होगा कि उसके अंदर 1 स्क्वेयर होता है उसमें 1 रेक्टैंगल होता है उसमें ट्राइंगुलर शेप होती है और उसमें सर्कुलर शेप होती है और ऑन द टॉप उसका जो एपेक्स है वो 1 बिंदु होता है। तो क्या आप जानते हैं कि जो 5 तत्व हैं वास्तु शास्त्र के वो कहीं न कहीं इन यंत्रों के अंदर समाए हुए होते हैं। आज मैं आपको बताती हूँ कि इन यंत्रों का जो है वो पंच महाभूतों से कैसे कनेक्शन हैं और कैसे इन्हें लगा कर के हम अपने घर की एनर्जी को भी बैलेंस कर सकते हैं और अपने घर में सीक्रेट जॉमेट्री को फॉलो करके आ आप अपने घर को भी 1 यंत्र बना सकते हैं। 1 ऐसा यंत्र जो कि माइक्रोकॉजम को मैक्रो काजम से कनेक्ट करने में हेल्प करता है। अगर आप किसी भी यंत्र को देखें उसमें जो बेस की स्क्वेयर या रेक्टेंगल शेप होती है वो पृथ्वी तत्व को डिनोट करती है स्क्वेयर जो है वो 1 बहुत ही स्टेबल शेप है बिल्कुल पृथ्वी की तरह एकदम जैसे कह सकते हैं कि एकदम स्ट्रॉंग और स्ट टेबल और सेंटर 1 जो है स्ट्रक्चर को डिनोट करता है तो स्क्वेयर और रेक्टैंगल जो हैं वो डिनोट करते हैं पृथ्वी तत्व को। साथ ही आपने देखा होगा कि सर्कुलर शेप जो है कोंसेट्रिक सर्कल जैसे सर्कुलर शेप भी 1 यंत्र में आपको देखने को मिलेगी और ये सर्कुलर शेप जो है ये एयर एलिमेंट को डिनोट करती है। अगर हम बात करें ऑक्टरगनलकी या फिर ट्राइंगुलर शेप की तो यह अग्नि तत्व को डिनोट करती है और जो टॉप में उसका बिंदु होता है वो ब्रह्म बिंदु या कह सकते हैं 1 तरीके से हमारे घर के ब्रह्म स्थान को डिनोट करता है। आप देखेंगे ये सारे जो फीचर्स हैं यह आपको 1 श्रीयंत्र में मिलेंगे और जब उस श्रीयंत्र को आप एक्सट्रूड करके थ्री डी फॉर्म में ले आते हैं तो वो 1 मेरु यंत्र बन जाता है और वो 1 पिरिमिडिकल मेरू शेप में और पावरफुल वे में काम करने लगता है। तो ये हमने बात करी कुछ यंत्रों की और मैंने आपको बताया कि कैसे सीक्रेट जोमेट्री को अप्लाई करके आप अपने घर को भी 1 यंत्र बना सकते हैं ये जो यंत्र होते हैं अगर हम इनकी एनर्जी को अंडरस्टैंड करें तो जब तक इनकी प्राण प्रतिष्ठा नहीं होती ये अपने परपज को सर्व नहीं कर पाते। लेकिन जैसे ही मंत्रों के द्वारा यंत्रों की प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है और वो सीक्रेट जोमेट्री जो है उसके अंदर अगर हम 1 तरीके से प्राण डाल देते हैं तो वो अपनी इनर्शिया को अपने इनर्ट यानि कि अपनी जड़ता की स्थिति को छोड़ देता है और उस परपज में काम करने के लिए लग जाता है जिसके लिए आपने उस यंत्र को लगाया है। अगर आपने श्री यंत्र जो है वो धन लक्ष्मी प्राप्त करने के लिए लगाया है या यश और वैभव प्राप्त करने के लिए लगाया है, जब तक आप उसको अभिमंत्रित नहीं करेंगे उसकी सीक्रेट जॉमेट्री को एक्टिवेट नहीं करेंगे तब तक वो यंत्र अपना परपज जो है उसको सिद्ध नहीं कर पाता और इसीलिए वैदिक वास्तु शास्त्र में यंत्र, मंत्र और तंत्र तंत्र इन द सेंस टेक्नोलॉजी इन तीनों चीजों को हम साथ में लेके चलते हैं। रिचुअल्स यानि के अनुष्ठानों को बहुत इम्पोटेंस देते हैं। क? क्योंकि जब तक आप किसी चीज की मंत्रों द्वारा प्राण प्रतिष्ठा नहीं करेंगे वो यंत्र अपनी इनर्सिया के अपने जड़ता की स्टेट से नहीं निकलेगा और वो पर्पज वो सर्व नहीं कर पाएगा जिसके लिए जिसको प्राप्त करने के लिए आपने उसको संकल्पित करके लगाया है। सिक्रेट जोमेट्री का जो उदाहरण हैं वो हमारे टेम्पल्स यानि की हमारे मंदिरों से ज्यादा कहीं और हमें देखने को नहीं मिल सकते। क्योंकि जो हमारे प्राचीन वास्तु के शास्त्र थे, जैसे मायामत, माना, सार, समरण, सूत्रधार, अपराजिता, परीक्षा, उन सब में ये बताया गया था कि मंदिर निर्माण भी किस प्रकार से किया जाना चाहिए कि सेक्रेट ज्योमेटरी जो है वो उनके अंदर मेंटेन रहे उस सीक्रेट जोमेट्री से हार्मनी क्रिएट हो उस हारमनी से जो है वो 1 ऐसी एनर्जी क्रिएट हो जिससे कि 1 ह्यूमन बींग की एनर्जी जब जुनेट करें तो वो उस मंदिर में बहुत ही पीसफुल और बहुत ही ब्लिस्टआउटऔर बहुत ही सेंटर्ड महसूस करे इनफैक्ट अगर हम 12 ज्योतिर लिंगों की भी बात करें तो वो भी सीक्रेट ज्योमेट्री पर ही बेस्ड हम जब भी किसी ज्योतिर लिंग को जो है दर्शन करने के लिए जाते हैं तो हम जो ऊपर धरती के ऊपर का जो पार्ट देख पाते हैं वो केवल हम लिंग का पार्ट देख पाते हैं लेकिन अगर हम उस पार्ट के बारे में जानें जो कि पृथ्वी के नीचे होता है जो हमको दिखाई नहीं देता जो लिंग के नीचे होता है तो उसमे भी आप देखेंगे कि उसमें वैर का बेस होता है निचे उसमें ऑक्टोगन होता है और सर्कुलर शेप होती है और उसके ऊपर जो है वो लिंगम स्थापित किया जाता है और वो लिंग का जो ऊपर का पार्ट है केवल वो हमको दिखाई देता है तो और कहीं नहीं तो हमारे जो प्राचीन जो हमारे 12 ज्योतिर लिंग है वो भी सीक्रेट जोमेटरी पर बेस्ट है और उसम में भी स्क्वेयर की शेप ऑक्टन की शेप सर्किल की शेप 1 एक्स्ट्रूडेड फॉर्म में 1 लिंग फॉर्म में जो है वो हमें देखने को मिलती है तो आप समझ सकते हैं कि जो सेक्रेट जोमेटरी है वो हमारे हिंदू टेंपल्स में कितना इम्पोर्टेंट पार्ट प्ले करती है और आपको जानकर हैरत होगी कि इन टेम्पल्स में 11 एलिमेंट को 11 फीचर को इतना केयरफुली चूज किया जाता है इतना केयरफुली सलेक्ट किया जाता है जिससे कि उसको डालने के बाद मंदिर के डिजाइन में वो 1 स्पिरिचुअली चार्ज स्पेस को क्रिएट करे यानी की सीक्रेट ज्योमेट्री को ध्यान में रखते हुए प्रपोशनस को ध्यान में रखते हुए साइजेज को ध्यान में रखते हुए इन टेम्पल्स में 11 एलिमेंट चूज हुआ है जिससे कि जब आप उस स्पेस में जाए तो आप स्पिरिचुअली चार्ज हो जाए और यहां पर मैं आपको 1 खास एग्जांपल देना चाहूंगी जो शाम में देवी कामख्या का जो बहुत प्रसिद्ध कामख्या मंदिर है वो मंदिर जो है वो 1 बिल्कुल 1 बहुत ही आप एग्जांपल है सीक्रेट ज्योमेट्री का और वो मैं इसलिए कह रही हूं कि पूरा का पूरा जो टेंपल है कामख्या देवी टेम्पल ये इस प्रकार से डिजाइन किया गया है कि इस बहुत सारा जो डिजाइन है वो श्रीयंत्र से इंस्पायर्ड है यानि कि जो श्रीयंत्र की सीक्रेट जामेट्री है उसको बेस लेते हुए कामख्या मंदिर का निर्माण किया गया है और जो श्रीयंत्र के बारे में जानते हैं वो इस एकदम डिरेक्ट कंपेरिजन को वहां पे ड्राउट कर सकते हैं। श्रीयंत्र जो होता है अगर हम श्रीयंत्र की बात करें तो श्रीयंत्र बेसिकली जो है वो कॉन्सेंट्रिक ट्रायंगल से बनता है और ट्रायंगल जो होते हैं वो देवी एनर्जी को रिप्रेजेंट करते हैं और ये श्रीयंत्र जो है 1 बहुत पोर्टेंट एनर्जी डायग्राम होता है और जब इस श्रीयंत्र को जैसा कि मैंने पहले भी कहा हम एनर्जाइज कर देते हैं, अभिमंत्रित कर देते हैं, इसकी प्राण प्रतिष्ठा कर देते हैं तो ये डायरेक्टली जो जीवात्मा है उसको परमात्मा से कनेक्ट करने की ताकत रखता है और इसके पीछे का कारण है सीक्रेट जामेट्री। तो जब हमारे मंदिरों में सीक्रेट ज्योमेट्री का इस्तेमाल करके हम जो है कितना स्पिरिचुअली चार्ज डाटमोस्फेयर क्रिएट कर सकते हैं तो भवन निर्माण शास्त्र में भी हम जो है वो कुछ टेक्निक्स और फॉर्मल्स को यूज करते हुए अपने घर को 1 बहुत ही स्पिरिचुअली एंड अफकोर्स इन वर्ल्डली टर्म्स आल्सो 1 लाइफ और 1 बहुत ही पॉजिटिव स्ट्रक्चर बना सकते हैं। इन फैक्ट जो हमारे शास्त्र हैं उनमें आयादी शवर्ग, आयादी फॉर्मूलास का भी वर्णन किया गया है उसमें सीक्रेट जोमेट्री का भी वर्णन किया गया है स्थापत्य वेद में रेजोनेंस और रिदम की भी बात करी है कि कैसे हम सीक्रेट जोमेट्री को यूज करके अपने स्ट्रक्चर को 1 बहुत ही पॉजिटिव और बहुत ही 1 मंडलाकार ऊर्जा का 1 स्त्रोत बना सकते हैं तो आज के मैंने अपने इस वीडियो में आपको बताया कि कैसे सेक्रेट जोमेटरी को यूज करते हुए कैसे जो है वो यंत्रों को यूज करते हुए या अपने घर में प, पोषण, रिदम और हार्मनी को अप्लाई करते हुए कैसे हम अपने घर को 1 पॉजिटिवली चार्ज स्ट्रक्चर बना सकते हैं जो कि नेचर की एनर्जी को वेलकम करता है और उनको ब्लॉक नहीं करता और उस घर को 1 यंत्र मानते हुए हम जो है अपने लाइफ में वो सारी चीजें अचीव कर सकते हैं बी फिनेंशियल, बीट मटीरियल, बीट वर्ली, बीट बी इमोशनल वो सारी वेलबिंग हम अचीव कर सकते हैं जो कि हम इस जीवन में प्राप्त करना चाहते हैं। तो मैं जानती हूं आप में से बहुत सारे लोग जो हैं उनको ये वीडियोज बहुत ही इंट्रस्टिंग लग रहे होंगे और वो अपने कोर्स से वैदिक वास्तु शास्त्र के साथ रेसोनेट करते हैं और जैसा मैंने अपने कई वीडियोज में बताया है मेरा ऐसा वैदिक वास्तु शास्त्री यही 1 मोटे या यही 1 एम रहता है कि एंशियंट और मॉडन को मैं कैसे अमेलगमेट करके आज का जो वास्तु है उसमें कॉन्ट्रीब्यूट कर सकूं क्योंकि एंशियंट नॉलेज जो है वो शास्त्रों की नॉलेज जो है वो जब तक आज की मॉडर्न डे लिविंग में अमेलगमेट होकर, अप्लाई होकर के रिजल्ट शो नहीं करती तब तक 1 वैदिक वास्तु शास्त्री का जो काम है वह पूरा नहीं होता तो अगर आप भी चाहते हैं कि अपने स्वयं के घर का जो वास्तु है वो आप खुद करें वैदिक प्रिंसिपल्स को अंडरस्टैंड करें कैसे आप अपने घर को परमशेयेकामंडल के हिसाब से विभाजित कर सकते हैं, कैसे पद विन्यास कर सकते हैं, देवताओं को समझना चाहते हैं, ऊर्जाओं को समझना चाहते हैं तो मेरे बहुत ही सिम्प्लीफाइड वे में और ये सारी चीजें अपने वैदिक वास्तु हब जो कि मेरा ऑनलाइन कम्यूनिटी है उसमें कोर्सिस के माध्यम से देने की कोशिश करी है कि 1 सिम्पल पर्सन 1 लेमैन जिसको कि वास्तु शास्त्र की कोई प्रायर नॉलेज नहीं है वो भी वैदिक वास्तु शास्त्र को समझते हुए अपने घर में उसको अप्लाई कर सकते हैं या वैदिक वास्तुशास्त्र के प्रैक्टिस्नर भी बन सकते। तो आप भी अगर उन्हीं लोगों में से हैं तो आप मेरे वैदिक वास्तु आपको ज्वाइन कर सकते हैं नीचे दिए गए लिंक में आप क्लिक कर सकते हैं और ब्रॉन्ज मेंबरशिप को ले सकते हैं और इस जर्नी का पार्ट बन सकते हैं। सो आई होप यह वीडियो आपको अच्छा लगा एंड यू विल कीप योर सेल्फ कनेक्टेड विथ, दिस, चैनल, आप जरूर चैनल को सब्स्क्राइब करेंगे बेल आइकन को भी प्रेस करेंगे जिससे कोई भी इस तरह का वीडियो आए तो आप सबसे पहले नोटिफाइड हो जाएं। थैंक यू सो मच फॉर लिस्टिंग तो मी ऑन हावनाइसडेई।










