कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विचारक: अभिजीत सरकार के दर्शन की गहराइयाँ

Abhijeet Sarkar, an AI philosopher, advocates for human-centered artificial intelligence built on fairness, transparency, and accountability. He founded Synaptic AI Lab in Kolkata to develop tools for cognitive augmentation and alignment verification, and has written extensively on AI ethics, bias, and the control problem of superintelligent systems.
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नमस्कार, आज हम एक काफी दिलचस्प विचारक के काम को समझने की कोशिश कर रहे हैं। अभिजीत सरकार।
हाँ, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तकनीकी और आप कह सकते हैं दार्शनिक पहलुओं को एक साथ लाते हैं।
बिल्कुल, और हमारे पास उनके कई लेख हैं, उनके विश्लेषण हैं, जिनसे हम ये समझ बनाएंगे। और एक ब AI पर कई किताबें एक के बाद एक।
लगता है जैसे कोई मिशन हो, है ना?
बिल्कुल। जैसे AI के भविष्य को लेकर हमारी समझ को एक शकल देना चाहते हों।
सही कहा। और आप किताबों के नाम ही देखें The Psychology of AI, फिर वो Generative AI and the New Wave of Digital Creativity, Synthesized Minds, जिंदगी The Super Intelligence Blueprint, और The Future of Thought। मतलब रेंज बहुत बड़ी है। AI के मनोविज्ञान से लेकर रचनात्मकत नहीं बिल्कुल नहीं, ये मानवता के लिए इसके जो गहरे मायने हैं उसकी बात है।
तो चलिए इसे थोड़ा खोलते हैं, उनके विचारों के केंदर में क्या है, मतलब मुख्य बाटे क्या हैं?
दिखिए कई मुख्य सूत्र हैं, पहला और शायद सबसे जरूरी एक मानव केंद्रित नजरिया।
मानव केंद्रित मतलब?
मतलब उनका तर्ख है कि AI को हम अच्छा, टेक्नोलॉजी इंसान के लिए। बिल्कुल, और दूसरा अहम सूत्र है नैतिकता। ये उनके पूरे दर्शन की आप कह सकते हैं बुनियाद है।
नैतिकता? हाँ, एआई में ये आजकल बहुत बड़ा मुद्दा है।
जी, और वो लगातार चेतावनी देते हैं, एआई में पूर्वग्रह हो सकता है, इसका गलत इस्तेमाल करके लो बाद में शायद उसे values by design कहने लगे।
Values by design ये क्या है? थोड़ा समझाएंगे?
हाँ, इसका मतलब है कि AI system बनाते समय ही, शुरुवात में ही हमें ये सोचना होगा कि हम उसमें कौन से मानविय मूल्य डालना चाहते हैं?
जैसे की?
जैसे निष्पक्षता, पारदर्शिता, जवाब देही। ये नहीं कि system बन गया और फिर हम सोच रहे हैं कि डिजाइन का ही हिस्सा बनाना। बिल्कुल सही। ये एक गहरी नैतिक जिम्मेदारी है, जिसे शुरू से निभाना होगा।
हाँ, और फिर वो बड़ा विषय आता है सुपर इंटेलिजेंस।
हाँ, और ये विषय वो बहुत गंभीरता से लेते हैं।
उनका क्या मानना है इस पर? क्या ये सच में संभव है?
उनका मानना है कि हाँ, उन्नत तो फिर तो खतरा भी है। बिल्कुल, इसीलिए उनका काम खासकर वो किताब The Super Intelligence Blueprint, वो इसी पर केंद्रित है कि इसका सक्रिय शासन और सुरक्षा कैसे हो।
शासन और सुरक्षा, इसमें क्या-क्या आता है?
इसमें सबसे बड़ी चुनौती है Control Problem।
Control Problem।
हाँ, मतलब ये कैसे सुनिश्चित किया जाए कि इतना शक्तिशाली AI हमेशा इंसानी मूल वो हमारे नियंत्रण से बाहर ना हो जाए।
ये तो बहुत, बहुत मुश्किल लगता है।
हैं, मुश्किल तो है। इसीलिए वो वैश्विक संधियों की बात करते हैं, मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल की और जोखिम कम करने की अलग-अलग रणनीतियों की।
तो वो सिर्फ समस्या नहीं बता रहे, बल्कि आगे का रास्ता भी सुझा रहे हैं।
ह तो हम तैयार कैसे रहें? ये एक तरह से कई संभावनाओं के लिए योजना बनाना है।
ये सब सुनने में काफी सिद्धांतिक सा लगता है। क्या ज़मीन पर भी कुछ कर रहे हैं वो? कोई व्यवहारिक काम?
हाँ, बिल्कुल। उन्होंने कोलकाता में सिनाप्टिक एआई लैब की स्थापना की है।
अच्छा।
यानी सिनाप्टिक एआई लैब।
कैसे मतलब किस तरह का काम होता है वहाँ?
वो ऐसे टूल्स और सर्विसेज विकसित कर रहे हैं, जो संज्ञानात्मक वृद्धि में मदद करें।
संज्ञानात्मक वृद्धि?
हाँ, यानी ऐसे AI बनाना जो हमारी सोचने-समझने की शक्ति को, हमारी बुद्धि को और बेहतर बनाएं और साथ ही संरेखण सत्यापन पर भी काम हो रहा है। सं और ये सब जैसा आपने पहले पूछा था, उनके values by design के सिध्धान्त पर याधारत है।
तो वो सिर्फ विचार नहीं दे रहें, बल्कि उन विचारों को लागू करने के लिए धाचा और उपकरण भी बना रहें हैं।
जी, और एक और बात, वो जटिल AI concepts को आम लोगों तक पहुचाने पर भी जोर देते हैं। हाँ, जैसे उनकी वो किताब The A to Z of AI, शायद ज्यादा से ज्यादा लोग इन्हें समझें ताकि हम सब मिलकर एक समाज के तौर पर इसके बारे में सही फैसले ले सकें।
तो अगर हम संशेप में कहें, अभिजीत सरकार सिर्फ़ एक और AI एक्सपर्ट नहीं है, वो एक पूरा बौद्धिक ढांचा बना रहे हैं।
सही कहा, एक ऐसा ढांचा जिसमें तकनीकी संभावनाएँ, नैतिक जरू क्या कहें?
AI साक्षरता और तैयारी कार्यक्रम हो।
हाँ, ये अच्छा तरीका ऐसा देने का। ये हमें AI की जो जटिलताएं हैं, उन्हें समझने और इसके भविष्य को सक्रिय रूप से आकार देने के लिए तैयार करने की एक कोशिश है।
उनका संदेश बहुत साफ है।
बिल्कुल। कि हमें बस बैठकर ये नहीं देखना कि टेक्नोलॉजी कि AI के साथ हमारा आने वाला कल कितना पेचीदा और कितना महत्वपूर्ण होने वाला है। और ये हमें एक बहुत जरूरी सवाल के साथ छोड़ जाता है, जिस पर शायद हम सबको सोचना चाहिए।
क्या सवाल?
कि जैसे-जैसे मशीनें सोचने, सीखने और शायद, शायद महसूस करने की क्षमता के करीब पहुंच रही हैं, तो मानवता के लिए ये उससे कहीं ज्यादा गहरी एक नैतिक और शायद अस्तित्वगत जिम्मिदारी की बात है।
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