5 Secrets to boost your Retail Business | Retail Ki Detail Episode 01 | Daily Vlog -AVlog 004

Abhinav Saxena and Sohil share five ways small Indian retailers can compete with big brands: keep customers loyal through service, use inventory software to cut theft and waste, run social media promotions, offer fixed discounts to regulars, and avoid the trap of constant price wars.
Hey guys, happy republic day for in opal, redi shot, live, jaenge, facbook, intagram.
U tube.
Thank you, once again, thank you everybody for joining, us and आज मैं आज हम लोग बात करने वाले हैं 5 स्टेप्स की या 5 ऐसी चीजों की जो रिटेलर्स को उनका बिजनेस नेक्स्ट लेवल पर ले जाने में मदद करेगा। 5 सीक्रेट की हम बात कर सकते हैं और साथ में 1 बोनस स्टेप्स भी हम देंगे आखिरी में जो कि आपके बिजनेस को ग्रो करने में भी आपकी हेल्प करेगा। ऑल राइट सो शुरुआत करते हैं सर जी, बिल्कुल ऑल राइट सो।
पहली प्रॉब्लम क्या है। आज जब से जीएसटी लागू हुआ है इंडिया के अंदर जुलाई 2017 से तो मार्केट में ये देखने मिलता है कि कुछ न कुछ कुछ, हर कंपनी अपने अपने तरीके से कोई डिस्काउंट ऑफर करता है, कोई कुछ करता है। सब अपनी सेल्स बढ़ाने में लगे हुए हैं। जो कि आपने देखा कि नीली जीएसटी के आते ही पहले रिटेलर्स को समझ नहीं आ रहा था कि काम को कैसे करना है। अब वो सेल्स छोड़ के और सब फाइलिंग एंड और यही सब समझ रहे थे पुराना माल की कैसे, उनको रिबेट मिली है। तो इसमें लग गए थे कैसे ट्रांडवनडट्राडटू उनको फिल्म करनी कुछ पता नहीं था। तो डेली अब उनका काम हो गया था सेमिनार में जाना, यहां जाना, वहां जाना तो काम धंधा छोड़के जो है वो सब जीएसटी जीएसटी के पीछे भाग रहे थे। अब जैसे ही सबको जीएसटी थोड़ा बहुत समझ में आया, उसके बाद जो है जीएसटी को लेके। और 1 मुझे लगता है कि जो हमारे लोकल रिटेलर्स हैं वो जीएसटी से पैसा कमाने की सोचने लग गए हैं कि मैं जीएसटी से कैसे पैसा कमाऊं, इंस्टेट ऑफ की। मैं अपना माल कैसे बेच यह सोच रहा है कि मैं जीएसटी से कैसे पैसा कमा हूँ। तो मुझे सबसे बड़ी प्रॉब्लम दिख रही है मार्केट के अंदर। आज जब भी कहीं हम देख रहे हैं, रिटेलर से कनेक्टेड हैं तो कुछ रिटेलर्स हैं। जो बड़े ब्रैंड्स हैं वो क्या कर रहे हैं। इस समय वो इस समय यह कर रहे हैं कि डिस्काउंट ऑफर कर रहे हैं। डिस्काउंट ऑफर होने के बात। आप जैसे पहले पता होगा कि पहले आपका वैट लगता था डिस्काउंट। अगर आप कहीं पर लेते थे तो एडिशनल वैट अप्लाई होता था। डिस्काउंट के ऊपर तो ये सब जगह ट्रेंड था। लेकिन आज बड़े रिटेलर्स क्या कर रहे हैं। बड़े बिग, चेंज, बिग, ब्रैंड्स क्या कर रहे हैं कि वो डिस्काउंट के बाद जीएसटी अप्लाई नहीं कर रहे है जीएसटी। इस इनक्लूजिव ऐसे कई सारे ब्रैंड्स हैं मेरे सामने जो जीएसटी भी नहीं ले रहे है। डिस्काउंट के बाद भी। अब प्रॉब्लम यहां से शुरू होती है जो हमारे लोकल रिटेलर्स हैं, जो अपना खुद उन्होंने अपने आप को सेल्फ ब्रैंड बनाया है। आज तक पब्लिक उनसे थोड़ा सा दूर जाके और बड़े रिटेलर्स के पास जा रही है। उसका सबसे बड़ा रीजन यह है कि वो लो डिस्काउंट ऑफर नहीं कर रहे अपने कस्टमर्स को। तो जब वो अपने कस्टमर्स को डिस्काउंट ऑफर नहीं कर रहे ये कह के कि यार जीएसटी आ गया है, जीएसटी आ गया है। तो बॉस पहले भी तो वाइड था आपके पास, तो मेरा यह कहना है कि जीएसटी आगे है तो बहुत बड़ा, ऐसा कोई मुद्दा नहीं है कि जीएसटी आ गया है। आप बाहर की कंट्रीज को देखिए कि वहां पर भी जीएसटी है और वो ज्यादा हमसे खुश है। तो मैं इसमें सिर्फ जीएसटी की बात नहीं कर रहा हूं कि जीएसटी के तो बहुत अच्छी चीज है या बुरी चीज है। ठीक है सबके अपने अपने ग्लास और माइनस जोशी सबके ओपीनियन सबके ओपीनियन है।
बट डेफिनिटली ये 1 इसको सिंपल भाषा में बोलें। तो 1 ये शॉर्ट विजन है जो आपको लग रहा है कि आज फायदा ले लो, आज ही अपॉर्चुनिटी है लेकिन लंबे टाइम में ये आपको नुकसान पहुंचाएगी। तो अभी के फायदे के बारे में मत सोचिए और लॉन टम प्लानिंग करके चलिए ये कस्टमर अगर आपने अभी छोड दिए जो मार्केट में इस बदलाव की.
वजह से मॉल के गया और मैंने प्रैक्टिकल देखा 2 ही ज माइक लाइन। तो 1 लेडी कस्टमर ने उसने ट्वेल्व थाउजन्ड की शॉपिंग करी और रिटेलर से बोला भैया डिस्काउंट होने का मैडम पहले तो मैं 10 पर्सेंट दे देता था लेकिन अब तो मेरे बिजनेस से ही 12 परसेंट तो टैक्स लग रहा है, अब 10 परसेंट भी किया, ऊपर से मुझे तो 2 परसेंट एक्स्ट्रा ही लग रहा है, मैं आपको डिस्काउंट नहीं दे रहा फिर भी 2 पर्सेंट मेरा एक्ट्रा जा रहा है। तो लेडी का दिमाग ऐसा हो गया कि बस कह क्या रहे हो ये तो बस पहले भी आपको वैट लगता 14, 12 पर्सेंट गया, 18 परसेंट लग गया तो उसे कुछ नहीं होता, वो कस्टमर आपका है आपको कस्टमर को अपने साथ बांधे रखना है अगर आप नहीं। दोगे, ठीक है अभी उसको सामान पसंद आ गया तो आज तो आपसे ले लेगा मेरी, लेकिन वो अगली बार आपके चढ़ने से पहले कहीं और जरूर चेकआउट करेगा। और अगर उसे वहाँ पसंद आने लग गया और वो ब्रैंड उसको डिस्काउंट दे रहे हैं तो वो आपके पास शायद मुश्किल होगा। दोबारा आना सिर्फ इस बात पर कि वो आपको जानता है, जान पहचान अपनी जगह है पर्सनल लेशंस अपनी जगह है, लेकिन वो अपनी जेब क्यों भरी करेगा आपके पास आके। अगर उसे सेम चीज, कहीं और डिस्काउंट मिल रही है तो तो मेरा सीक्रेट टेप यही है आपके लिए कि आप जो है कस्टूमर आता है अगर आप उसे पहले डिस्काउंट दे रहे थे अगर तो प्लीज आप उतना डिस्काउंट का एटलीस्ट मेंटेन करें ईवन हम आगे बात करेंगे कि हम बेहतर डिस्काउंट कैसे दे सकते हैं और कैसे कस्टमर्स को अपना बना सकते हैं, कैसे कॉम्पिटीट कर सकते हैं हम बड़े ब्रैंड से जो कि हम शायद नहीं कर पा रहे हैं या फिर हम उतने ही लिमिटेड स्टॉप के साथ खेल के और हम उतना ही अपना मार्जिन हाय रखना चाह रहे हैं। तो बड़े चेंज कैसे काम करते हैं की हम बात करेंगे शो के अन्दर डेफिनिटली मिस्टर आगे की बातें आपको बताएंगे.
बिल्कुल और मी वायल। जब तक हम आगे की बातों पर आते हैं अगले प्वाइंट्स पर आते हैं। अगर आप लोगो को ये वीडियो प्रॉपरली दिख रहा है, आवाज प्रॉपर्ली आ रही है तो थमसब करें हार्ड शेप बनाएं ताकि हमें समझ में आए कि आपका आवाज और वीडियो दोनो प्रॉपर दिख रहा है। यही जरिया होता है आपके कमेंट्स और आपके। हार्ट हमको बताते हैं कि हमारी बात आप तक प्रॉपर पहुंच रही है कि नहीं। अगर कोई भी डाउट हो या कोई भी प्रॉब्लम आए या आपको नहीं कोई प्वाइंट समझ में आया तो आप कमेंट में पूछ सकते हैं। आखिरी में हम सारे कमेंट्स को 1 साथ लेंगे और मैक्सिमम लोगों की प्रॉब्लम सॉल्व करने की कोशिश करेंगे। जो भी आपने कोई रीस पूछी है तो जरुरी नहीं है की आप अगर बिजनेस मैन अभी नहीं है, हो सकता है मैं भी इन फ्यूचर आप करने वाले हैं तो उससे रिलेटेड भी अगर आपकी कोई क्यूरीज हो तो वो भी आप पूछ सकते हो। कमिंग मूविंग फॉर मोड सो स लाइक थैंक यू थैंक यू गाइज ऑल राइट सो मूविंग फॉर्मो। अगर बात करें कॉमन मिस्टेक्स की जो रिटेलर्स कॉमन मिस्टेक्स करते है तो सबसे बड़ी मिस्टेक जो दिखती है वो होती है कि कस्टमर सर्विस पर उतना ध्यान नहीं देते हैं। ट्रेडिशनल तरीके से आज तक चलती आ रही है दुकान तो आगे भी चलेगी जिसकी गरज होगा वो आए आएगा खरीदने। हम नए कस्टमर बनाने में तो पूरे मार्केटिंग के पैसे डाल रहे हैं, पूरे फफर डाल रहे हैं लेकिन जो कस्टमर आ जा रहा है उसकी उतनी इज्जत नहीं कर रहे हैं। कुछ लोग कर रहे हैं इन चीजों पर, कुछ लोग में देखता हूँ बहुत अच्छा ध्यान देते हैं लेकिन बहुत सारे ऐसे सेगमेंट है जो की नहीं भी दे रहे हैं। जिसकी वजह से वो अगेन जो कस्टमर बुलाने कॉस्ट है वो कमी नही हो पाती है। तो बार बार बार बार बार बार आपको वो कॉस्ट लगते है।
वही बात आ गई, आपने कस्टमर को बुलाया एड दिया जी आज आपने डिस्काउंट दिया जी आज आपने उसे आदत लगाने की आपके स्टोर पर डिस्काउंट होता है, अब वो धीरे धीरे आपका रेगुलर कस्टमर बन गया। अब आपने उसे आदत लगा दी टेन पर्सेंट डिस्काउंट की। अब वो कुछ दिन बाद आया, आपने उसका कोई कार्ड नहीं बना रखा, वो सिर्फ आपको जानता है आप उसे जानते हो अब आप उस दिन अवेलेबल नहीं थे, आप बाहर अपना माल खरीदने गए थे, आपके वहा पे कोई और बैठा हुआ है, अब वो आया उसे जरूरत थी उसमें बोला मेरा डिस्काउंट आप बोलते हो, आपके दुकान का बंदा बोलता है भैया, वो तो मुझे नहीं मालूम होता, देखते हैं भैया तो अभी बाहर है तो यार भैया बहरे भावी बहार है। ये सब कैसे आप रिटेल बिजनेस करोगे आप बड़े ब्रैंड्स पर जाओ कोई भैया भाभी कोई बाहर नहीं होता है, आप उसे कुछ ऐसा की प्वाइंट 2 न की वो आपका प्रीमियम कस्टमर है, आप उसे कार्ड इशू कर 2 बड़े ब्रैंड्स कार्ड इशू करते हैं सभी कस्टमर्स के लिए आप प्रीमियम मेंबर को सिर्फ कार्ड दे। 2 न कुछ तो ऐसा करो की आप की प्रेजेंस की जरुरत न पड़े। फिर आप स्केल कैसे करोगे? आज कई ऐसे रिटेलर्स के साथ मैंने काम किया है जिनके बिजनेस को ऐसी छोटी छोटी टिप्स देकर। आज बड़े ब्रैंड से कम्पलीट कर रहे हैं और उनसे ज्यादा बिजनेस कर रहे हैं उनसे कम स्क्वायर फीट एरिया में आप रिटेलर। सभी जानते होंगे कि हम कैसे 1 स्टोर को आर्गेनाइज करते हैं। पर स्क्वायर इंच की हमारे पास कॉस्ट होती है, उस कॉस्ट को हम कैसे इनकार करते हैं, कैसे हमारे लॉसेज होते हैं, हमें हर चीज देखनी होती है। तो प्लीज अपने साथ कुछ ऐसे की पॉइंट्स रखें कि जैसा ना बोल रहे हैं कि कुछ कस्टमर को जरूर दें कि वह आपसे हमेशा इंगेज रहे।
लेकिन देखा जाए सोहली तो प्रोब्लम रिटेलर्स की भी नहीं है। प्रॉब्लम यह है कि कोई सॉफ्टवेर ही नहीं है, कोई टेक्नोलॉजी नहीं यूज कर रहा है, कोई ऑटोमेशन नहीं यूज करना है। तो ऐसी सिचुएशन में हर चीज का ट्रैक कैसे रखेगा। मान लीजिये एम्प्लॉयर ने डिस्काउंट नहीं दिया और जो ओनर आया तो उसको बोल दिया। मैंने तो डिस्काउंट में दे दिया था, वो डिस्काउंट चल रहा अपना लेकिन उसकी वजह से अब वो पूरा पैसा उसकी जेब में चला गया। जो की अगेन 1 शॉप या ब्रांड.
या 1 इमेज का नुकसान पूरी बात टेक्नोलॉजी पर। तो अब अगर वो आल्टिमेट करता है इन चीजों को और अपने सॉफ्टर को बता के रखता है कि कौन मेरा प्रीमियम कस्टमर है और कौन नॉर्मल कस्टमर है और कौन मेरा रिश्तेदार है। इस रिश्तेदार को मैं 20 परसेंट देता हूँ। अब कल से मेरा स्टोर है आप मेरे रिश्तेदार हैं। अगर आप मेरे स्टोर पर आए, अब आपको मुझे फोन ही करना पड़ेगा। अल्टीमेटली और मैं कहीं ट्रैवलिंग कर रहा हूँ, मेरा फोन नहीं लगा तो मेरे स्टोर का बंधन आपको कुछ भी सामान नहीं लेगा क्योंकि वो आपको नहीं जानता बिना अब आप पैसे उधार भी नहीं करना चाहते तो आपके पास तो कोई जरिया नहीं बचा मेरे से समान लेने का आप निराश होके जाओगे। अब आप अगली बार रिश्तेदार क्या नहीं पढ़ोगे? तो ऐसी सब चीजों से हमें टेक्नोलॉजी से आगे बढ़ना चाहिए। जो लोग टेक्नोलॉजी पे बहुत से रिटेलर्स हैं, जो टेक्नोलॉजी के साथ काम कर रहे हैं, चीजों को मैनेज कर रहे हैं बट उनके टेक्नोलॉजी में कुछ न कुछ लूपोल्स हैं जो इन सब चीजों को शायद सही से मेटर नहीं कर पा रहे हैं तो वो भी हम उनको बता सकते हैं। आपके जो भी क्वेश्चन शो आप पूछ सकते हैं कि ऐसी क्या चीजें हैं जिससे आप उस चीजों को प्रॉपर मैनेज कर पाएं। तो डेफिनेटली यू कैन आस क्वेशन फॉर दैट। और जैसा कि हम देख रहे हैं कि एफ डी आई इंडिया के अंदर आ रहा है तो एफ डी आई के बारे में आई डोंट नो की अभी कितने लोग उससे अवैर हुए हैं या नहीं हुए हैं तो एफ डी आई जैसे ही हमारे इंडिया में कदम रख लेगा पूरी तरीके से तो सबसे बड़ा उसका हार्ड सेक्टर जो है वो रेल ही है गारलैंड और यही सारी चीजें हैं। तो अगर वो है तो क्या होगा?
तो सबसे बड़ा चैलेंज इन छोटे रिटेलर्स को झेलना पड़ेगा क्योंकि उसे उसकी तो पॉकेट दीप है, वो तो ऑफर्स देगा और वो कस्टमर को भर के ले जाएगा क्योंकि कस्टमर आपसे खुश नहीं थे पहले से, लेकिन अगर इस टाइम लाइन में आपने आप खेल गए, आपने उस कस्टमर को अपना बना लिया। 1 पर्सनल टच इमोशनल टच जो कि बड़े ब्रांड के लिए थोड़ा मुश्किल होता है, इमोशनली आपने उसको कनेक्ट कर लिया, यह ऑफर्स देखे और बुलाकर उसको पर्सनल के साथ राइट और पर्सनली उसको हेल्प करके 1 कनेक्ट बनाकर तो डेफिनिटली आपको वो कस्टमर छोड़ के नहीं जाएंगे इसलिए सो कमिंग इसी से रिलेटेड हमारा चौथा पॉइंट है, जो की है, चेंज तो हो रहा है। अब पहचान लीजिये या इग्नोर कर दीजिए, अगर आपने इग्नोर कर दिया तो एवेंचुअली बड़ी बड़ी कंपनियां जब लुट गई हमारे आंखों के सामने। इतनी सारी न्यूज आती रहती है जो इतने बड़े लाखों करोड़ रुपए के जो ब्रांड्स थे वो नहीं दे पाए को बस इसी जिद की वजह से किया। अरे हमें क्या जरुरत है जिसको जो वो आएगा अपने पास इस स्टेटमेंट की वजह से कितनी बड़ी बड़ी कंपनियां खत्म हो गयी। तो फिर आपकी तो छोटी सी दुकान.
है उनके कंपेरिजन में, मार्केट में जो पाया है, उन्होंने भी ऐसे डस्टिन कर लिया है की कौन सा रिटेलर जो है वो थोड़ा सा अडियल है और कौन सा रिटेलर जो है वो थोड़ा सा पोलाइट है या किसके ज्यादा एटिकेट्स हैं। अब यहाँ पर भी थोड़ा सा डिफरेंट आ जाता है, मैं 1 रिटेलर अड़ियल तो है लेकिन वो डिस्काउंट देता है। 1 रिटेलर पोलाइट तो है लेकिन डिस्काउंट नहीं देता। तो अब दोनों फैक्टर मेकसाइंडमैच हो जाता है। अडियल रिटेलर जो डिस्काउंट दे रहा है, फिर भी अरे चलो ठीक है। 2 बातें उसकी भी सुन लेंगे, थोड़े पैसे तो बचेंगे लेकिन अगर सोचिए अगर वही अडियल रिटेलर थोड़ा सा पोलाइट हो जाए, थोड़ा सा टेक्नोलॉजी एडाप्ट कर ले चूंकि उसका रेट कम है और वो डिस्काउंट देना जानता है और वो डिस्काउंट इसलिए दे पा रहा है। शायद यह डिस्काउंट नहीं दे रहा बेसिक रेट उसके कम है क्योंकि वो ऐसा कभी न पा रहा है, कभी आप छोड़ोगे नहीं, बर इच्छा होती है। छोड़ने की, सही से बात नहीं करते, स्टाफ कैसे सही से बिहेव नहीं करता। तो थोड़ा सा। इन सारी चीजों को भी हम आगे कैरी आउट कर सकते हैं कि कैसे हमें स्टाफ की ट्रेनिंग करनी चाहिए? कैसे स्टाफ के चेहरे पे। 1 एंगल नहीं होना चाहिए कि यार ये भी दिखा। 2 वो भी दिखा। 2 ये भी दिखा। 2 अरे आप तो हर बार आते हो, कुछ लेते नहीं हो। अब ये सब चीजें थोड़ा सा ट्रेंड चेंज कर चुकी हैं। आप मॉल में जाते हो, विंडो शॉपिंग करते हो, शॉपिंग करी नहीं करी। किसी के चेहरे पर कभी एंगल नहीं आता कि या आपने कुछ लिया क्यों? नहीं तो बार बार न मेरे स्टोर में आ जाते हो तो ये सारी चीजों से अगर हम बाहर निकलेंगे तो शायद हम कुछ कॉम्पिट कर पाएंगे और शायद ही डेफिनिटली ही कर पाएंगे। क्योंकि मीनवेल जैसे ही एंड ऑफ द ईयर टू थाउजंड एटीन तक एफडीआई के बड़े स्टोर्स अगर इंडिया में आते हैं तो अभी तो इंडियन स्टोर से ही कम्पलीट करना मुश्किल होता है। और अगर बाहर के लोग आने लग जाएंगे तो आप उनसे कैसे कॉम्पीलीट करेंगे ये सबसे बड़ा सवाल है।
अब लूटी और इसी से रिलेटेड 1 प्वाइंट में खबर करना चाहूंगा। जो कि ये है कि मार्केट में जो यूज ली हम देखते हैं कि फिक्स प्राइसिस मोस्टली रीटेलर्स लेकर नहीं चलता है, वो जैसा बंदा देखते हैं उसको वैसा प्राइज लगा देते हैं। अच्छा उनकी सेल्स इम्प्लॉइज को भी इतना ट्रेन करके रखते हैं कि वो भी जैसा बंदा देखता है वो उसको वैसा रेट लगा देता है जिसकी वजह से उनकी नींद हो जाती है कि अब मुझे गल्ले पर बैठना पड़ेगा मुझे दुकान पर बैठना पड़ेगा क्योंकि इसने पीछे कितने में बेच दिया को पता नहीं चलेगा।
1 बजट आप लोग बना लेते हैं कि मेरा यार से वन लाख रुपीज का बजट है और उसको मुझे यूटिलाइज करना है। आप थोड़ा थोड़ा 10 हजार 10 मीडियम में डाल देते हैं। रिस्पोंस इसी से उतना नहीं आता। तो ऐसे कई सारे नए मीडियम्स डेवलप हो चुके हैं जिसपर यूएस के लोग काम कर रहे हैं। इंडिया धीरे धीरे आना उससे शुरू करता है। जब तक कुछ लोग बहुत तेजी से आ जाते हैं, एकदम से आगे बढ़ जाते हैं। तो अगर आपको ये सब भी जानना है तो डेफिनेटली रिटेल की। डीटेल एपिसोड 2 में हम आपसे इस के बारे में बातें करेंगे कि आप लोग क्या ऐसा नया कर सकते हैं जिससे बिजनेस को डेफिनिटली कुछ नए तरीके से आप ग्रो कर पाएं। फिट टेक्नोलॉजी ऑफ कोर्स तो डिजिटल कुछ ऐसे मीडियम की आपको जानकारी डिटेल में मिलेगी की जहाँ पर आप एक्चुअली काम कर सकते हैं उसके बारे में हम आपको बताएंगे राइट सो।
इसके अलावा हम आखिरी में हमने जैसा की प्रोमिस किया था कि हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे बोनस स्टेप्स जिससे आज आपके कस्टमर बिल कर सकते हैं। आज जो भी कस्टमर आ रहे हैं उनको आप बढ़ा सकते हैं।
शो.
यस, प्लीज सोहीजी कुछ ऐसे टिप्स.
जो हैं आपके लिए टिप नंबर वन है। सबसे पहला जैसा मैंने कहा कि आप सबसे पहले उन्हें कुछ डिस्काउंट दे। र कुछ न कुछ 1 फिक्स डिस्काउंट आप अपने कुछ प्रीमियम कस्टमर्स को स्टार्ट करें, सेकेंडरी टेक्नोलॉजी को एडाप्ट करे। कुछ प्रीमियम मेंबरशिप आप उनके अलाव करें। थर्ड आप 1 टेक्नोलॉजी में किसी न किसी 1 सॉफ्टर को अपना पार्टनर बनाए। किसी भी सॉफ्ट को जो बहुत अच्छा हो जो आपके सारे कवर करता हो। अगर आपको ये भी मुश्किल हो रही है कि कौन सा सॉफ्टवेयर है जो इस एक्सपेक्ट को कवर करेंगे और आपके दिमाग में अगर बहुत सारे एक्सपेक्ट लिस्ट है तो डेफिनेटली वो भी आप क्शन करें उसका भी हम आपको जवाब देंगे कि आप किस सॉफ्टवेर के थ्रू आगे बढ़ सकते हैं और उसके बाद अगली चीज पर अगर हम बात करें कि कैसे आप प्रमोशन में अपनी कॉस्ट लगाए जिससे आपको बिजनेस मल्टीप्लाई हो के इससे.
पहले की हम प्रमोशन पर जाएं सॉफ्टवेयर वाले पार्ट में मैं थोड़ा सा लिबरेट करना चाहूंगा। मुझे लगता है कि सॉफ्टवेयर की परिभाषा आज की डेट में लोग अकाउंटिंग से ज्यादा समझते ही नहीं है। जो मोस्टली डीटेल्स हैं वो सॉफ्ट मतलब हाथी है अकाउंटिंग के लिए वो तो हमारा सीजे देखता है उससे हमें क्या लेकिन ऐसा नहीं है अगर आप सॉफ्ट सेल्फ बिलिंग के लिए या मुझे तो.
बस बिल निकालना है कस्टमर को बिल देना है बाकी मुझे नहीं पता सॉफ्टर में क्या है कभी खोल के भी नहीं देखा शायद इसमें है क्या।
अब ये होगा शॉर्ट विजन जैसा की मैंने स्टार्टिंग में भी कहा था कि प्लेफॉर्म लॉंगर रन लॉंग वीजन के लिए आपके लिए तो अगर आप सॉफ्टवेयर की फुल पोटेंशियल पर जाएंगे इसके लिए बहुत ज्यादा बड़ा लिखा होना जरूरी नहीं है। बहुत सारे रिटेलर्स कहते हैं कि हमारा हम तो बड़े लेख चलो हमारे स्टाफ नहीं हैं, हम भी पड़े लिखे नहीं है तो उस केस में हम क्या करें। तो बहुत सारे मार्केट में ऑलरेडी सॉल्यूशन है हम खुद भी ऐसे सॉलूशन पर काम करते हैं जो कि इतना ज्यादा सिम्प्लीफाइड रहता है कि आप उसमें 11 चीज जो है स्टेप वाइज स्टेप है उसके वीडियोज मिल जाते हैं मतलब हिंदी में वीडियोज हैं तो आप समझ सकते हो कि उसमें कुछ पढे लिखे जैसा होना रिक्वाइर्ड नहीं होता और खासकर कुछ कुछ ट्रिक बताता हूँ मैं ये भी बोनस का पार्ट है कुछ ट्रिक्स जिससे आप कैलकुलेट कर सकते हैं कि ऐक्चवली सॉफ्टवेयर कैसे आपके बिजनेस में हेल्प कर सकता है। तो ट्रिक नंबर वन अगर आप का स्टॉक बहुत सारा स्टॉक है ठीक है लेकिन आपको ये भी नहीं पता कि कितना स्टॉक कितना पुराना है या कितना स्टॉक रोटेट नहीं हो रहा है तो ये तो बात सुनने में छोटी लगती है लेकिन यह आपका कैश बढ़ा हुआ है तरीके से जो रोटेट होता तो उससे आप नया स्टॉक लाते जिससे आप नए कस्टमर्स को अट्रैक कर सकते थे और अपनी सेल बढ़ा सकते थे। तो अगर आप पुराना देखें रजिस्टर पर ढूंढना बहुत मुश्किल होगा आइये एग्री निकालना की कौन सा माल कितना पुराना था थोड़ा टाइम लगता है इसके लिए थोड़ा टफ होगा बिना सॉफ्टवेर के स्कोर बट सॉफ्टवेयर मोस्टली जो सिम्पलिफाइड एकदम सिम्पल सॉफ्टवेयर जो मार्केट में अवेलेबल है वो 1 क्लिक पर आपको लिस्ट दे देते है कि ये साल 6 महीना पुराना 1 साल पुराना माल हो गया है इसको आप जल्दी निकाल 2 तो उस केस में अगर आप उनपे ऑफर निकालते हो तो वो आपको जो बेनिफिट देता है जो आपको 1 कैलो रोलिंग आ जाती है आपकी जिसकी वजह से आप नया फर्दर आप प्रोडक्ट खरीद पाते हो टिप नंबर टू अगर आपको नहीं पता कि आपकी शॉप में कौन सा प्रोडक्ट मिसिंग है कभी भी कुछ गायब हो रहा है या कोई में भी कस्टमर हो सकता है में भी स्टाफ हो सकता है आई डोंट नो लेकिन अगर आपको नहीं पता है की कहाँ जा रहा है कौन लेके जा रहा है कुछ तो गायब हो रहा है आप मन मानो कुछ न कुछ प्रोडक्ट तो गायब होता है महीने में साल में लेकिन अगर आप उसका ट्रैक नहीं रख पा रहे हो तो डेफिनेटली यह आपका लॉस है आपको लगता है ठीक है थोड़ा बहुत चला गया तो चला गया। अच्छा क्यों आपको लगता है कैसे ट्रैक करोगे आप रजिस्टर से ट्रैक कर नहीं सकते न उसको की कितना स्टॉक या 10 हजार पीस उसमे 1 गायब हुआ या 5 गायब हुआ लेकिन वो 5 5000 के तो आपका तो अच्छा खासा चूना लेकिन वो भी कौन से थे कौन से थे क्यूंकि अगर जैसे कपड़े के जूतों की बात करें तो काला जूता काला जूता नहीं होता है उसके बहुत सारी वैराइटी होती है ब्लू साड़ी ब्लू साड़ी नहीं होती है उसके अगेन बहुत सारी वैराइटी होती है सो इस केस में आपको सॉफ्टवेयर अगेन बहुत हेल्प करता है जिसमे आप 1 क्लिक पर बता सकता है स्टॉप चेकिंग बहुत एडवांस फीचर है बहुत सारे सॉफ्टवेर में नहीं है लेकिन हम तो इसके एटलीस्ट बहुत करीब है और धीरे धीरे शायद कुछ लोग और भी लेकर आ रहे हूँ बट ये फीचर स्टॉप चेकिंग का जो फीचर होता है अगर किसी सॉफ्टवेर में है तो वो डेफिनेटली आपको 1 क्लिक पर बता सकता है कि ये कौन कौन से प्रोडक्ट है जो मेरी शॉप में थे और अभी नहीं है जो होनी चाहिए और फिर उस समय कौन लॉगिंग था जिसकी वजह से आप उसे बुला कर आप सवाल पूछ सकते हो तो सी सी टी वी कैमरा लगते हो आप ये चीज चेक करने के लिए लेकिन टाइम नहीं होता न 1 बटन दबाने का टाइम होता है और उसके लिए तो मोबाइल एप्स वगैर भी हैं तो आपको स्टॉप चेक करने में उतना टाइम नहीं लगेगा लेकिन अगर आपने 1 बार भी ये काम कर लिया तो स्टाफ के मन में डर बैठ जाता है कि यार इनसे कुछ नहीं छुप सकता ये सॉफ्टवेयर जो है न यह हमें पूरा छील के रख सकता है तो वो फियर फैक्टर बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट है मेरे यार ऐसे तो कस्टमर.
को डराने की बजाय जो है खुद डरें थोड़ा सा और चीजों में बदलाव लाए नाकि आर्टिफिशल इंटेलीजेंस हफ्ते हावी हो जाए बट आप आर्टिफिशल इंटेलीजेंस को कंट्रोल कर कर इतना आप सीख जाए अदरवाइज पता चलेगा कि आर्टिफिशल इंटेलीजेंस को आपको ऑपरेट करना भी नहीं रहा आज मैं कोई 1 नया मोबाइल भी हाथ में पकड़ा देता हूं तो उसको भी सीखने में बहुत ज्यादा समय लगेगा क्योंकि ठीक है सबके टीचर्स अलग है माना लेकिन वो कुछ ऐसी टेक्नोलॉजी है जो शायद बहुत टेक्निकल इंसान भी जल्दी नहीं समझ पाता और उसके क्या उपयोग और 2 उपयोग हो सकते हैं वो भी पता चलने में बहुत समय लग जाता है.
सो इसके अलावा कोई और आप प्वाइंट सेट करना चाहेंगे जो कि टेक्नोलॉजी या ऑटोमेशन रिटेलर्स की मदद कर सकता है.
देखिये ऑटोमेशन को अगर देखा जाए तो अगेन मैं वही बात कह रहा था कि ऐसे कई सारे प्रमोशन की तो 1 अलग स्ट्रेटेजी है। बात अगर ऑटोमेशन की जाए तो ऑटोमेशन के लिए 1 नए बहुत सारे अच्छे टूल्स आए हैं टूल्स कहें कुछ हार्डवेयर आए हैं। बीकन जिसका नाम होता है तो बीकन के बारे में मुझे नहीं लगता कि अभी ऑडियंस यहाँ पर जानती है बढ़ना डेफिनिटली बीकन 1 बहुत ही अच्छा डिवाइस होता है जिसको आप अपने स्टोर में लगा सकते हैं। जैसे ही कोई कस्टमर आपके स्टोर में एंटर करता है तो उसको 1 नया फ्लैश मैसेज चला जाता है तुरंत ही और अगर वो आपके स्टोर में एंटर नहीं कर रहा है तो उसको कोई मैसेज नहीं आएगा तो उसको यह पता चल जाएगा कि आज किस ची पर क्या ऑफर है सपोज आपको ग्रॉसरी स्टोर या सुपर मार्केट चला रहे हैं और 50 चीज का ऑफर है उसको 11 ऑफर ढूंढने में तो ढूंढ नहीं पाएगा क्या है तो आप उसको फ्लैश मेसेज दे सकते हैं कि मेरे यहाँ क्या ऑफर चल रहा है तो इस तरह से कुछ लोग तो ऐसे भी करते हैं कि उसकी थोड़ी सी रेंज बढ़ा देते हैं। तो अगर कोई कस्टमर शॉप के बाहर भी आगे खड़ा हुआ है भले शॉप के अंदर घुस नहीं रहा उसको भी मैसेज चला जाता है तो शायद ऑफर देखे.
अच्छा आइड यू तो किसी को पसंद नहीं होता लेकिन अगर आप उसी दुकान में खड़े हो और उसी दुकान का अगर आपको आइड दिख रहा है तो किसी को कोई माइंड भी नहीं करता की चलो यार कुछ ऑफर ही दे रहा है कुछ इम्प्रूवमेंट ही होगा तो डेफिनेटली प्रमोशन से आप कुछ बता रहे थे।
प्रमोशन पर बात की जाए तो प्रमोशन बहुत सारी ऐसी नई तकनीक हैं बाज जैसे आप हम लोग वो लाइव देख रहे हैं तो शायद मुझे नहीं लगता कि कोई रीटेलर्स लोग लाइफ पर वर्क कर रहे हैं। तो आप ऐसे भी बात की ऑडियंस से आपका स्टोर है आपका स्टोर का सबसे पहले तो 1 फेसबुक पेज बना होना चाहिए जो कि आज की तारीख में बहुत इम्पोर्टेंट है। अब बहुत कम रिटेलर्स का हो, कम रिटेलर्स का है। मैंने कई रिटेलर्स के चेक किए, पेजेस बट मुझे तो पेज नहीं मिलते उनकी ईवन प्रोफाइल तक में कुछ अपडेट नहीं होता। वो सिर्फ अपने पर्सनल यूज के लिए उसको यूज करते हैं। तो अगर आप उसको थोड़ा सा बिजनेस और इंटरेड लेके आने की कोशिश करेंगे तो आप थोड़ा सा पहले उसको चलाइए फिर मैं आपको बताता हूं कि आप उसको कैसे ऑप्टिमाइज करके कैसे उसका फायदा उठा।
सोल बार मुझे क्या लगता है कि प्रॉब्लम जो है वो माइंडसेट में है। हम इस मेंटालिटी से रिटेलर्स की बात करूं तो ये मेंटालिटी से या बाकी साल बिजनेस भी मैं देख रहा हूँ और मैं इस पर काफी बात करता हूँ। इस मेंटालिटी से निकाल पा रहे हैं कि अरे आयड चलाना है तो मतलब न्यूज पेपर में डालना है यह मतलब एफ में डालना यह मतलब बैनर लगाना है यह मतलब पैमप्लेट छाप वारे हैं उस मेंटालिटी से बाहर नहीं आ पा रहे। हम ये नहीं देख पा रहे हैं की आप खुद भी पुरे टाइम मोबाइल में लगे हुए हो। तो अगर आप खुद इस मोबाइल में लगे हुए हो, आप देख रहे हो आपके घर में बच्चे हैं वो पूरे टाइम अगर मोबाइल में लगे हुए हैं तो उन्हीं की उम्र भी तो आपके कस्टमर्स भी है तो वो भी तो मोबाइल में लगे हुए है और मोबाइल में कर क्या रहे है वो फिफ्टी थ्री परसेंट टाइम वो सोशल मीडिया पर है और आप अगर सोशल मीडिया पर अपना मतलब बैलर ऐसे लगाते हैं की कहाँ से ज्यादा से ज्यादा लोग गुजरेंगे या कहा ज्यादा रुकेंगे तो उनको ये आइड दिखेगा यही कांसेप्ट होता है। तो अगर आप अभी आँखों को अब्जर्व नहीं कर रहे हो लोगों की आखें मोबाइल के सोशल मीडिया पर है तो इसको ऑवजर्व करो और यहाँ पे आई चला यहाँ पर लोगो तक पहुंचाओ चाहे.
वो फेसबुक को आपको पता ही होगा कि कैसे जो है आपका माइक्रोसॉफ्ट जो है वो मोबाइल पर नहीं आया सब आपको पता ही होगा माइक्रोसॉफ्ट जो है वो सिस्टम हार्डवेयर सीपी उस बेचने लैपटॉप बेचने में ही रह गया मोबाइल पर कभी वो अपना इतना आगे कोई स्कोप नहीं बना पाया, कोई ऐसा ओएस नहीं बना पाया जो मोबाइल में बहुत ही फ्रेंडली हो और गूगल ने धीरे से एंड्रॉयड बना दिया आई ओ एस बना दिया एप्पल ने। तो ये लोग मोबाइल के किंग हो गए और वहीं 1 बड़ी कंपनी जो कि बहुत कुछ कर सकती थी उसने उस तरफ सोचा ही नहीं। तो कुछ दूसरे प्लेयर्स कहाँ निकल गए। और पहला प्लेयर जो सालों से लोगों को जिसने सिस्टम की आदत लगाई कि वो चलाना सिखाया ओ एस क्या होता है जिसने बताया वो पीछे रह गया। मोबाइल की दुनिया से तो आज भी यही हो रहा है कि आप अभी भी पुराने मीडियम लगे हुए हैं। आज जो चीज चल रही है आप उसका यूज भी नहीं कर रहे मोबाइल भी हो सकता है कि आगे आने वाले 3 सालों में मोबाइल कुछ न हो कुछ या तो आपको नहीं पता भी आपको शायद हंसी आएगी ये मोबाइल के आगे क्या है। तो ऐसे पहले सोचते थे न कि आपको पहले नोकिया छांछंठसौदिखता था, बहुत ज्यादा ट्रेंड हुआ था उस जमाने में, तो आपको लगता था न यार ये तो किंग इसके आगे क्या बट बॉस उसके अंदर बहुत ही छोटा सा ओएस डला हुआ था, जावा 10 तो अब उसके आगे भी ये सब एंड्रॉयड और ये सब आ गए। तो लगता है न इसके आगे क्या तो बॉस को है अभी शुरू हुई है मेरे दोस्त। तो देखिए क्या होगा सिर्फ देखिए मत उसका एक्शन लीजिये आज और अभी सिर्फ इस वीडियो को देखने के बाद ये मत सोचिए कि ठीक है बता दिया देख लेते हैं देखिये मेरा कुछ नहीं होना है आपको बताने से, यह न बताने से करना आपने है, आपको इम्प्लीमेंट करना है मैं सजेशन आपको जरूर दे सकता हूँ यही मैं आपकी हेल्प कर सकता हूँ।
अल राइट सो मेरे ख्याल। से हमने बहुत सारे आज प्वाइंट कवर कर लिया और इसके आगे भी एपिसोड आएंगे। रीटेल की डिटेल शो का नाम है इस शो में हम रिटेलर्स की प्रॉब्लम सॉल्व करते हैं हम उनके जितने भी प्रॉब्लम कोरी या बिजनेस से रिलेटेड परेशानियां होती हैं उनको दूर करने की पूरी कोशिश करते हैं हम और भी एपिसोड लाते रहेंगे इसके अलावा हमारे पॉडकास्ट शो चलते हैं जो कि सिर्फ ऑडियो शो होते हैं जिनको आप काम करते हुए, चलते हुए, गाड़ी जाते हुए सुन सकते हैं। तो अभिनव सकसेना पॉडकास्ट शो है और इसके अलावा आप यू ट्यूब चैनल पर जा सकते हैं अभिनव सक्सेना इंस्टाग्राम पेज है रीटेल की डीटेल और आई एम अभिना सक्सेना जिससे आपको बहुत सारा ऐसी इंफॉर्मेशन मिलेगी जो आपके बिजनेस में या अगर आपने बिजनेस अभी स्टार्ट नहीं किया आप करना चाह रहे हैं तो ऐसा बहुत सारा मोटीवेशन मिलेगा विद मोटर ठीक है ताकि आप कुछ एक्शन ले पाओ आप उसमें अपना कुछ जितना जहां पे आप हो उससे आगे बढ़ पाओ कुछ नॉलेज में गिन कर पाओ तो प्लीज जाइए लाइक कीजिए सब्स्क्राइब कीजिए एंड दैट्स ऑल फ्रॉम आर साइड थैंक यू सो मच बबाई।
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