Birsa Munda Jayanti 2021| Unsung Warriors of Indian History | Freedom Fighter Story -Abhinav Saxena

A Hindi-language YouTube lecture by Abhinav Saxena celebrating Birsa Munda on his birth anniversary. The video covers Birsa Munda’s early life, conversion to Christianity and return to traditional religion, leadership of the Ulgulan (tribal uprising) against British land-grabs, his arrest and death in custody, and his cultural legacy and commemoration; the speaker draws motivational lessons and urges viewers to share the story.
गाँधी से पहले गाँधी किसको कहा गया है किनके नाम पर 1 एयरपोर्ट भी है, स्टेम भी आते हैं इनके नाम पर 1 इंजीनियरिंग कॉलेज भी इन्हीं के नाम पर है। 1 नॉवल लिखी गई है रनर अधिकार इनके ऊपर जिसको साहित्य अकेडमी पुरस्कार भी मिला और साथ में 1 पूरे पूरे प्रदेश का स्थापना दिवस भी इन्हीं के नाम पर मनाया जाता है। कौन है ये इंसान, इनका नाम है बिरसा मुंडा, फिर कहूँ भगवान विरसम नडा या कहूँ तो धरती आबा, भगवान विरसम, उंडा, भगवान विरसम उंडा आते हैं जो आज, झारखंड और उड़ीशा के नाम से जाना जाता है। प्रदेश पहले 1 हुआ करता था मैंने इन फैक्ट 1 वीडियो भी बनाया था क्यूँ उडीशा अंडररेटेड स्टेट है इंडिया का क्यों हमें सैल्यूट करना चाहिए। ओडिशा को अगर नहीं देखा है तो ऊपर लिंक दिया हुआ है जरूर जाकर देखना और इस वीडियो में इतना प्यार आप लोगों ने दिया और बहुत सारे लोगों ने रिक्वेस्ट की कि हमारे भगवान बिरसा मुंडा पर प्लीज वीडियो बनाइए तो आज उनके जन्म दिवस पर स्पेशली मैं ये वीडियो और ये सीरीज लांच कर रहा हूँ जिसमें हम लोग ऐसे बहुत सारे लीजेंड्स को कवर करेंगे जिनसे हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। इनके बारे में। मैक्सिमम लोग यह बात नहीं जानते की वो सिर्फ 25 साल तक ही जी और इस 25 साल की छोटी सी उम्र में इतना कुछ कर गया की भगवान की उपाधि मिल गयी। ऐसे थे बिरसा मुंडा और इसलिए वीडियो में बना रहा हूँ और इसलिए मैं चाहता हूँ ऐसे लेजेंड बिरसा मुंडा जी के बारे में बहुत लोगो को जानने की जरूरत है कि उन्होंने ऐसा क्या किया अपनी लाइफ में। इसलिए ये वीडियो न सिर्फ उड़िया के लिए नहीं है सिर्फ झारखण्ड वासी के लिए नहीं है। मैं चाहता हूँ हर 1 भारतीय इसको अपना माने, बिरसा मुंडा जी को अपना माने और इस वीडियो को शेयर कर देना अपनी फैमिली ग्रुप में जिसको भी जानते हो पहुँचाओ उनके बारे में। इनफार्मेशन तो आज जानते हैं बिरसा मुंडा जी के बारे में। मेरा नाम है डॉक्टर अभिनव सक्सेना मैं 1 ऑथर ऑं्टरपिनरऔर बिजनेस कोच हूँ। मैंने खुद भी बहुत कुछ सीखा है बिरसा मुंडा जी से, इसी लिए ये वीडियो भी बना रहा। इनका जन्म हुआ था फिफ्टीन नवम्बर 3 सेवंटी फाइव में। पता बचपन आसान भी था इनका बड़े ही पूर फैमिली से आते थे इन फैक्ट बचपन में, घर चलाने के लिए, खाना खाने के लिए, इन्होंने डेड बॉडी से ज्वेलरी तक चुराई थी। उस जमाने में 1 रिचुअल हुआ करता था कि जो लोग गुजर जाते थे, मर जाते थे उनके साथ उनके गहने भी दफना दिए जाते थे। तो हमेशा से बड़े रेबेलियस रहे। ट्रेडिशनल जो 1 रिचुअल्स होते है जो रूल्स बन जाते है जिसका कोई सरपर नहीं होता उनको तोड़ने में उनको कभी घबराहट नहीं हुई, हमेशा ये आगे रहे। अच्छा पढाई में तो काफी अच्छे थे लेकिन पढ़ने के लिए क्या चाहिए होते। पैसे जो थे नहीं तो क्या करें। पैसे नहीं है तो नहीं पढाई इन्होंने अपनी मजबूरी, अपने हालात को वजह नहीं बनायी कुछ न करने की, जो करना चाहते है, तरीके निकाल लेते। हमेशा कहता हँ और इसी तरीके से इन्होंने तरीका निकाला। उस जमाने में, उस समय उस एरिया में ऐसा चल रहा था की ब्रिटिशर्स कहते थे भाई क्रिश्न धर्म अपना लो आपकी पढाई हमारी तरफ से फ्री और इन फैक्ट जो भी आप का कर्जा है वो माफ हो जाएगा। आपसे जो लैंड हमने ले लिया है, जो जमीन आपकी हथियार है वो हम आपको वापिस कर देंगे। तो इन्होंने भी क्रिशियन धर्म अपनाया बिरसा डेविड बने। लेकिन ब्रिटिशर्स तो ब्रिटिशर्स थे, उन्होंने अपना प्रोमेस पूरा नहीं किया, जिसकी वजह से इन्होंने वापिस से प्रोटेस्ट किया, वापिस से विद्रोह किया और अपना धर्म भी चेंज किया और वापस से वैश्नव धर्म अपनाया। क्रिश्न छोड़ के इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी, पढाई छोड़नी पड़ी, लेकिन पीछे नहीं हटे, लाइफ आगे बढ़ी, फिर ये भी आगे बढे। सन था, टीन आईटी सिक्स, वैश्नव धर्म तो इन्होंने अपना ही लिया था, लेकिन अब अहिंसा की बारी थी इन्होंने गुरु बनाये मेंटल बनाया, अपनी लाइफ में सीखा, बहुत कुछ साधु सन्यासियों के बीच में रह कर और उसके बाद अहिंसा सिखाई दुनिया को। इसलिए इनको गाँधी से पहले गाँधी भी कहा गया। इनके ऊपर 1 नॉवेल भी लिखी गई है जिसका नाम गाँधी से पहले गांधी फिल्म भी आने वाली है। इसी नाम के ऊपर, अपने आयुर्वेदिक के ट्रीटमेंट से, अपने स्वच्छता रखने के उपदेशों से इन्होंने बहुत सारे लोगों को ट्रीट भी किया। लोगों ने तो ये भी मानना शुरू कर दिया था की अगर इनका नाम लेकर दवा लेते हैं तो दवा ऐसे काम हो जाता है, हमारी महामारी सही हो जाती है। और इसी लिए इनको दर्जा दिया गया भगवान का तभी से ये आदिवासी समूह, मुंडा समूह के बीच में भगवान के नाम से जाने जाने लगे। बहुत लोगों का बहुत सारा समर्थन और प्यार मिलने लगा। 1 महामारी तो जैसे तैसे धीरे धीरे सही भी हुई। लेकिन दूसरी महामारी का क्या जिसने देश को खोखला ही कर दिया था। और वो थे ब्रिटिशर्स। अत्याचार दिन पर दिन इतना बढ़ता जा रहा था। इनका आदिवासियों को तो कुछ समझते ही नहीं थे, आम इंसान को नहीं समझते थे तो आदिवासी क्या है। और तो और इनकी जमीन छीनने लग गए थे, इनके जंगल जलाने लग गए थे। डेवलपमेंट के नाम पर बहुत अत्याचार किए, जलिया वाला बाग तो आपने नाम सुना ही होगा। कांड कितने मासूमों की हत्या की गयी थी। लेकिन उससे पहले ऑलरेडी 1 जलिया वाला कांड हो चुका था। लोमारी पहाडी पे, जहाँ पर आदिवासियों को इसी तरीके से भून दिया था। अपना जल, अपना जंगल, अपना जमीन और अपने लोगों को बचाने के लिए उन्होंने शुरुआत की, उलगुलान विद्रोह की। आज मैं अगर आपसे बोलूं 6000 लोग इकट्ठे करने हैं कितना मुश्किल होगा, जबकि इंटरनेट भी है, फ़ोन भी है उस दौर में जब ये दोनों ही नहीं थे, 6000 से ज्यादा की फौज खड़ी कर ली थी आदिवासियों की। और आदिवासी न बड़े मिल झुल के नहीं रहते थे, आपस में 1 दूसरे से लड़ते रहते थे। इन सब को 1 साथ लाना ही अपने आप में बहुत बड़ी बात थी। लेकिन कहते हैं न अगर आप 1 मिशन से जुड़ जाओ तो वो आप से भी बड़ा बन जाता है। इन्होंने ऐसे ही अपना 1 मिशन बनाया कि इस देश में अब रानी का राज्य नहीं चलेगा, हमें अपना राज्य वापस लेना है। और इसीलिए शुरुआत हुई ब्रिटिशर्स के साथ गुरिल्ला वार फेयर की जहाँ ब्रिटिशर्स की आर्मी थी, बहुत ज्यादा तादाद में उनके पास थे गोला बारूद, बंदूकें वहाँ, इनके पास थे तीर कमान, तीर कमान से छिप छिप के गोरिल्ला वार फेयर करके इन्होंने ब्रिटिशर्स के नाक में दम कर दिया। ब्रिटिशर्स की चौकियां जला दी जाए तो जाए कहाँ रहे। तो रहे कहाँ लिट्रेली उनसे जितना भी जमीन छीनी गई थी वो सब वापस ले ली। सालों तक ब्रिटिशर्स परेशान ही रहे, मिल नहीं पा रहे थे। लेकिन फाइनली जब ब्रिटिशर्स ने इनाम रखा 5 सौ रुपए का, तो कहते हैं अपने ही अपनों को धोखा देते। वही हुआ इनके साथ और पकड़े गए 1900 का इनका देहांत हुआ जेल में। कहते हैं बहुत लोग की जहर देकर धीरे धीरे मार दिया गया। बहुत लोग कहते हैं कोलरा से मर गया इतना सफाई पसंद इंसान जिसने इतने लोगों को ट्रीट किया हो। मुझे नहीं लगता कि नैचुरली हुआ होगा। जो हुआ बहुत बुरा हुआ, बहुत दुखद भी था लेकिन बहुत कुछ बिरसा मुंडा। भगवान बिरसा मुंडा हमारे लिए, आपके मेरे लिए छोड़ गया, बहुत कुछ सीखने के लिए, उनसे हमारे लिए छोड़ गए। जब मैं इनके बारे में पढ़ रहा था, सीख रहा था तो मैंने भी बहुत कुछ सीखा और इसलिए वीडियो बनाया की आप भी सीखे क्या सीख सकते है। भगवान बिरसा मुंडा से इनकी लीडरशिप, क्वालिटी कैसे इन्होंने 1 मिशन बनाया। अंग्रेजों को बाहर निकालना है, अपना जमीन पर अपना खुद का हक वापस लेना है। जब भी आप प्रॉब्लम को इग्नोर करेंगे, जब भी आप प्रॉब्लम को प्रोब्लम समझेंगे और जब भी प्रॉब्लम ऐसी हार मान जाएंगे, आप कुछ नहीं कर पायेंगे। लेकिन प्रॉब्लम को अगर आपने मिशन में कनवर्ट कर दिया और अपना जीने का उद्देश्य बना लिया की इसको सोल्व करना है तो ये अब मोमेंट बन जाती है। अकेले आप नहीं रह जाते हैं आपके साथ, तमाम लोग जुड़ जाते हैं जैसे हमने भी 1 बड़ी समस्या देखी, फूड बिजनेस ओनर्स के साथ जो हो रही थी वो प्रॉफिटेबल नहीं हो पा रहे थे, वो सक्सेसफुल नहीं हो पा रहे थे। और हमने स्टार्ट किया 1 मोमेंट क्लाउड किचन नेटवर्क और देखते ही देखते आप लोगों ने इतना सपोर्ट किया है, इतने सारे लोग जुड़ गए। सोचिए अगर आप अकेले है तो आप कुछ नहीं है लेकिन आपके साथ अगर 2000 ढाई हजार 5000 लोग जुड़े हैं जो आपको सक्सेसफुल देखना चाहते हैं, आप क्या नहीं कर सकते। और दूसरी चीज सीखी कंपैशन किस तरीके से इन्होंने करुणा दिखाई, किस तरीके से इन्होंने दूसरों को अपना समझा। हम सब हैं तो इंसान फिर हम दूसरों में कमियाँ क्यों निकालते है, क्यूँ न हम भी दूसरों की तरह करुणा दिखाए, दूसरों को प्यार दे। अगर आपको ऐसे कंटेंट अच्छा लगता है, वीडियो अच्छा लगता है, हमको भी प्यार देना है। 1 लाइक कर दोगे तो बड़ा प्यार मिलता है, बड़ा मोटिवेशन मिलता, तीसरा बड़ा अलग सा प्वाइंट मैंने। इनसे सीखा वो था फ्लेग्जिबिलिटी का। कई बार हम अपने ही नियम बना लेते है और उसी पर चलते रहते हैं। चाहे कुछ भी हो जाए, दुनिया इधर से उधर हो जाए। गलत बात देखिये, आपका मिशन जो है न वो फिक्स होना चाहिए। आपके रास्ते बदल सकते है। जैसे इनका रास्ता क्रिशियानिटी था, बाद में नेशनल घर में भी आये, जैसे इनका रास्ता अहिंसा था, लेकिन बाद में अंग्रेजों को परेशान भी किया। तो गोल फिक्स रखे रास्ते बदल सकते हैं। हो सकता है आपको सक्सेसफुल बनना है और हो सकता है जो आप अभी बिजनेस कर रहे है वो काम नहीं कर रहा। या जो करियर में आप सक्सेसफुल बनना चाहते हैं वो करियर मजा नहीं दे रहा। सक्सेस इम्पोर्टेंट है तो मिशन 1 रखिये गोल 1 रखिये, उसके लिए रास्ते बदलने भी पड़े तो बदलने के लिए ओपन रहिए चौथी चीज जो देखी वो था ट्रेडिशनल रूल्स को तोड़ने से डरे नहीं। कभी आपके भी घर में कई बार घर वाले बोलते होंगे, बेटा मत करिये नहीं, काम करेगा नहीं चलेगा और आप क्या बोलते हो मुझे सपोर्ट नहीं मिल रहा। मैं कहता हूँ बिरसा मुंडा जी से सीखे, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अगर रूल तोड़ने भी पड़े जैसे उन्होंने अंधविश्वास थोड़ा मरने के बाद साथ में आपके गहने दफनाने की प्रथा थोड़ी तो ऐसी कौन सी चीज है जिसको आपको तोड़ने की जरुरत है जो आपका समाज कहता है। लेकिन आपको पता है कि वो सही नहीं है। और पांचवी चीज जो इन से सीखी वो था। रिसोर्स कभी दिक्कत नहीं होते। इनके पास से तीर कमान सामने थी बंदूकें, लेकिन क्या इन्होंने कहा कि मैं नहीं लड सकता। नहीं ये गए और लड़े और तीर कमान से लड़े और हरा के दिखाया तो 1 बार चेक कर लेना। कहीं आप भी यही कंप्लेन तो नहीं कर। मेरे पास ये नहीं है, मेरे पास समय नहीं है, मेरे पास पैसे नहीं है, जिसकी वजह से मैं कुछ कर नहीं पा रहा हूँ। अपनी लाइफ में बार चेक कर लेना क्योंकि रिसोर्सेस असलियत में प्रॉब्लम नहीं है। अगर आप वाकई करना चाहते हो न हमेशा तरीके ढूंढ लोगे करने के, तो ऐसे थे हमारे भगवान बिरसा, मुंडा जिनसे सीखने को बहुत कुछ है। ये तो कुछ चीजें थी जो मैं आपको बता पाया। आप मुझे बताना की आपने इनसे क्या सीखा। लेकिन 1 सच्चाई भी मैं आपके सामने रखना चाहता हूँ। बिरसा मुंडा जी आते हैं। झारखण्ड के रांची के खुंटी गाँव से। उनके गाँव में आज तक पक्की सड़क नहीं बन पाये। हर जन्म दिवस पर उनकी समाधि पर भरपूर सफाई की जाती है। लेकिन क्या पूरे साल नहीं। पानी की समस्या आज भी इस गाँव की बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है। स्कूल है, लेकिन भरपूर शिक्षक नहीं, ऑफिसर्स हैं, लेकिन भरपूर ऑफिसर नहीं। 1 भगत सिंह थे, 23 साल की उम्र में क्या कुछ कर गए, 1 बिरसा मुंडा है। 25 साल की उम्र में क्या कुछ कर गए, अब बारी है आपकी और हमारी क्या हम बिरसा मुंडा जी से कुछ सीख कर अपनी लाइफ में अप्लाई कर सकते हैं, क्या उनके सिद्धांतों को हम और फेमस कर सकते हैं और लोगों तक पहुंचा सकते है। इस वीडियो को इतना फैलाओ कि ये सही लोगों तक पहुंचे और ऐक्चवली कुछ एक्शन लिए जाए। वैसे मुझे खुशी है कि गवर्नमेंट ने कुछ इनिशिएटिव्स लिए है। जनजाति गौरव दिवस पंद्रह नवम्बर को इसी साल हमारे प्रधान मंत्री ने घोषित किया है। मुझे लगता है अभी बहुत कुछ करना बाकी भी है जहाँ से आते है बिरसा मुंडा उन गाँव में और ऐसे बहुत सारे गाँव में आज भी स्वच्छ पानी नहीं है, आज भी बेरोजगारी है, आज भी स्वच्छता नहीं है और ऐसे वीडियोज बनाकर। हमारा उद्देश्य है की ऐसे मेसेजेस को दुनिया तक पहुँचा है। आगे भी मैं बहुत सारे और ऐसे वीडियो बनाने वाला हूँ अगला विडियो हम लाने वाले हैं जे आर डी टाटा का क्या लाइसेंस है उनसे जो हम सीख सकते हैं और अपने लाइफ में, करियर में, बिजनेस में अप्लाई कर सकते हैं। अगर आपको जे आर डी टाटा का वीडियो चाहिए सौ कमेंट नीचे अगर आयेंगे तो डेफिनेटली मैं जे आर डी टाटा जी पर भी वीडियो बनाऊंगा आपके हर 1 कमेंट को मैं बहुत ध्यान से पढता हूँ कमेंट जरूर करना, इस वीडियो को लाइक करके, इस चैनल को सब्सक्राइब करके, बेल नोटीफिकेशन को हिट करके, हमें मोटीवेट करने के लिए थैंक यू सो मच।
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