How To Be A Super Salesman | कैसे एक सुपर सेल्समेन बने | How To Series 02

Abhinav Saxena breaks down what makes a super salesman: attitude matters most, since 40% of failed sales come from a bad one. Focus on smiling, keeping promises, and building real friendships with clients instead of just chasing deals.
सोचिए। अगर आपको कुछ बेचने की जरूरत ही न पड़े। जो भी आप प्रोडक्ट या सर्विसेज में डील करते हैं वो खुद ब खुद बिकने लगे। लोग खुद आप से खरीदना चाहते हैं। आकर कितना इंटरस्टिंग होगा न, ये हो सकता है। hi i m अब सक्सेना एंड वेलकम टू सक्सेना पीडिया जो लोग मुझे नहीं जानते हैं i m s you in four of ear फॉर you one ऑफ़ द मोस्ट स्पायरिंग स्टार्ट ऑफ इंडिया im आलसो founder of business training program with my ten ear of experience i help लॉ ऑफ बिजनेस तो बिकम प्रोफेट आलसो। मैंने बहुत हजारों स्टूडेंट्स को पढाया है, ट्रेनिंग दी है न की सिर्फ प्रोफेशनल और प्रेजेंटेबल बनने की बट, साथ ही बहुत सारा पैसा भी कमाने की। इस के साथ। तो चलिए समझते हैं सुपर सेल्समैन कैसे बने सेल्स ही बिजनेस की किसी भी बिजनेस की नींव होती है। आपकी सेल से पैसे आ रहे हैं। अगर आपके पास तो डेफिनेटली और चीजों पर काम किया जा सकता है। सो मैंने कुछ बहुत रिसर्च किया और कुछ प्वाइंट्स निकाले जिन पर अगर आप काम कर लेते हैं तो कोई भी बिजनेस होगा। मुझे बहुत दुख होता है। जब मैं देखता हूँ छोटे छोटे बिजनेस जो खत्म हो जाते हैं अपनी कुछ कुछ छोटी छोटी गलतियों की वजह से, और इसलिए मैंने जिम्मेदारी ली की उनको मैं ऐसा क्या रिसर्च कर सकता हूँ। ऐसा क्या अपने एक्सपी कर सकता हूँ जिससे उनको थोड़ी समझ आये और वो वो गलतियों से बच जाए और छोटे बिजनेस से बड़े बिजनेस में कनवर्ट हो पाये। आल राइट तो पेन और कॉपी लेकर बैठिएगा क्योंकि ये शायद वीडियो आपके बिजनेस की दिशा बदल सकता है। ठीक है सो जो मैं पॉइंट्स बताऊंगा उसको ध्यान से सुनिएगा। पहला प्वॉइंट सबसे पहले यह समझते हैं की सेल्स होती क्यों नहीं है? ठीक है, हम सेल करने जाते है, या कोई हमारे दुकान पर आता है, स्टोर पर आता, शोरुम पर आता है। तो बिकता क्यों नहीं है? समान हमारा स्टाफ, हमारी टीम बेच क्यों नहीं पाती। सबसे बड़ा जब रिसर्च तो सबसे बड़ा प्वाइंट निकल आया। बड आटिट्यूड फोर्टी परसेंट। आपको पता है फोर्टी परसेंट कॉन्ट्रिब्यूट होता है, सिर्फ बाढ़ एटिट्यूड की वजह से, जिसकी वजह से सेल नहीं होती, उसके बाद आता है आपका पोर कम्यूनिकेशन। आपका बोलना नहीं आता, ढंग से न लिखना आता है ढंग से, या शायद मैनेजमेंट आपकी आपके कंपनी में कैसा आपको ट्रीटमेंट मिल रहा है या स्टाफ को कैसा ट्रीटमेंट मिल रहा है, वो कैसा फील कर रहे हैं, वो क्या एनर्जेटिक पॉजिटिव फील कर पा रहे हैं, ये सारे फैक्टर्स बाद में आते हैं। सबसे बड़ा लेकिन रीजन होता है। बैड आटिट्यूड अफकोर्स मार्केट की नॉलेज भी बहुत पोटेंट क्या मार्केट में चल रहा है। पता चला आप आउट डेट रेट सामान बेचने जाओगे तो नहीं दिखेगा न ऑवियसली। तो बाहर एटिट्यूड को अगर आपने सही कर लिया तो फोर्टी पं जंग आपने जीत ली। अब बार एटिट्यूट मतलब आप अच्छे दर से नहीं बेच रहे, आपके मन में पॉजिटिव नहीं है, कुछ भी बेचने बेचते समय। तो अच्छे आटिट्यूड से बचें, गुड एटिट्यूड से बेचे पॉजिटिव टिट्यूट से, बेचे सेकंड प्वाइंट आता है। जब भी आप बेचे तो मुस्करा के बेचिए और खूब सारा बिकेगा में देखता हूँ। अक्सर शॉप्स पे रूम से बड़े बड़े कंपनी के सेल्स एम्प्लॉय से बात करता हूँ तो वो मुस्कुराते भी नहीं है। थैंक यू, विनिंग बोलते और अच्छा फील ही नहीं करते कि हमको अच्छा फील करा पाए। कस्टमर जब आपको कोई बहुत प्यार से बात करता है न, मक्खन नहीं लगा रहा है, डिफरेंस होता है, मक्खन लगाने हैं और प्यार से बात करने में, अच्छे से बात करने में, तमीज से बात करने में तो बहुत अच्छा लगता है। तो वो जमाने गए मक्खन लगा के आप सामान नहीं बेच सकते, कस्टमर भी समझदार हो गया है लेकिन आप उसको अच्छा फील जरूर करा सकते है। तीसरा प्वाइंट आता है की गुड एट्टिट्यूड बनता। कैसे पेड़ पर तो लगता नहीं। कैसे पैदा करे। इसको गुड एटिट्यूड बनता है। 2 चीजों से 1 डिसिप्लिन और दूसरा थॉट्स डिसिप्लिन याने अनुशाशन। अब जब जब क्लाइन आपको बुलाए तब आ जाते हो, टाइम्स आपकी दुकान खुलती है या शो रूम खुलता है। जब आपने बोला कि आप सामान डिलीवर करोगे तब आप डिलीवर करते हो तो वो दिखाता है की आप कितने डिसिप्लिन हो। कस्टमर को आप पर भरोसा बढ़ता है वो और आपके साथ बिजनेस करना चाहता है तो हमेशा डिसिप्लिन रहिए अपने भी और अपने टीम नंबर्स को भी, अपने स्टाफ को भी डिसिप्लिन रखे। ठीक है। सबसे ज्यादा ड्रेस बिल्ड होता है डिसिप्लिन से सेकंड होता है। थॉट्स हम सोच के ही जाते हैं की अरे यार कस्टमर ने मना कर दिया तो दाग दिया तो अच्छा नहीं लगा उसको तो अगर आप सोच रहे, अच्छा नहीं लगा तो डेफिनेटली अच्छा नहीं लगेगा। पॉजिटिव सोचिए तो सोचने में क्या जाता है। आपने देखा होगा इस कोड में, इस कांड में जो पुजारी होते हैं, जो प्रभु होते हैं काउंटर रखते है और वो जपते रहते हैं। हरे राम, हरे राम राम राम हरे हरे सो। कुछ इस टाइप का काउंटर होता है, कुछ इस टाइप का काउंटर होता है जो वो रखते हैं जिसकी वजह से वो राम को अपने अंदर उतार रहे होते हैं। कृष्ण को अपने अंदर उतार ही होते है। जब आप नेगेटिव अपने थॉट्स की सेल नहीं होगी, सेल नहीं होगी बुरा मान गया, डाट दिया। जब बोल रहे है तो वो आप अपने अंदर उतार है। आपको यह नहीं करना आपको उल्टा बोलना, उसका सेल होगी, सेल होगी, मैं उसको फायदा पहुंचाउंगा और मेरा भी फायदा होगा। जब आप पॉजिटिव थॉट्स सोचते हो न तो डेफिनेटली आपकी सेल होती है। ठीक है। तो जितना आप पॉजिटिव सोच सकते हैं उतना पॉजिटिव सोचिए चौथा प्वाइंट से आते है, चौथा प्वाइंट है। क्लाइन को दोस्त बनाइए। बचपन से हमें सिखाया जाता है कि दोस्ती करो, खूब सारे दोस्त बनाओ। लेकिन हम बिजनेस में इसको नहीं अप्लाई करते। वही करना है बस आपका क्लाइन भी तो दोस्त बन सकता है। आप क्यों उसको बेचने के लिए सिर्फ कॉल करते है। वो वो सिर्फ ऑफर देने के लिए क्यों कॉल करते हैं कभी उससे हालचाल पूछिये कभी उससे उसके बिजनेस का हालचाल पूछिए प्रोफेशनल रही है कोई बात नहीं लेकिन उसके बिजनेस का तो हाल चाल पूछ सकते हैं न कोई भी फेस्टिवल आता है दिवाली ईद होली आप बात कर सकते हैं उससे आप उसके उसके बिजनेस में क्या ऑप्शन डांस आ रहे है उससे रिलेटेड अगर आपने केंसर दिखा दी न और जेनविनली दिखानी पड़ेगी ऐसे मन से नहीं दिखावा करेंगे दिख जाएगा आपकी आँखों में आपको मन से समझना पड़ेगा कि उसका बिजनेस ग्रो करेगा तभी तो वो आपको खुशी मुझे पैसा देगा तो अगर आपको पैसा कमाना है तो उसके बिजनेस को ग्रो करवाएगे और उसका बिजनेस ग्रो कैसे करेगा या उसकी चीजें कैसे ग्रो करेगी तो वो है 1 फ्रेंडली नोट पर जाइए 1 दोस्ताना हाथ बढ़ाइए ऑफिस में मत निकालिए ऑफिस के बाहर निकालिए जाइए कभी उसको कॉफी पे चाय पे या कही भी ऑफिस के बाहर मिलने की कोशिश कीजिए अफकोर्स उसकी कंफर्टेबिलिटी का पूरा ध्यान रखते हुए है लेकिन अगर आप ऐसा करते हैं न जब आप उससे जेनविन फीड बैक लेते हैं कि भाई बताओ यार क्या मतलब मेरा प्रेजेंटेशन कैसा लगा मेरा प्रोडक्ट कैसा लगा थोड़ा बताओ प्लीज आप जब आप ऐसी बात करोगे न तो उनको डेफिनेटली फील आएगा की ये जेनविन जानना चाहता है की मैं क्या सोचता हूँ इसके बारे में और ये सिर्फ अपने अपने में इंटरस्टेड नहीं है तो ये थे कुछ प्वाइंट्स में और भी प्वाइंट्स कवर करूंगा डिपेंडिंग ऑन यार इंट्रेस्ट अगर आपको ये वीडियो पसंद आया है तो प्लीज लाइक कीजियेगा उससे मुझे समझ में आएगा की इस टॉपिक में आपको ज्यादा इंटरेस्ट आ रहा है और मैं ज्यादा ज्यादा वीडियो बनाऊंगा टॉपिक्स बहुत सारे है और इस हर टॉपिक में प्वाइंट बहुत सारे है वीडियो छोटा बनाना होता है तो इसलिए ये वीडियो यहीं तक एंड मेरा फेसबुक पेज है विद नेम भिन सक्सेना म भिन सक्सेना भी आप लिखेंगे एफबी कॉम के बाद तो आपको वो पेज मिल जाएगा उसमें मैं बहुत सारे मोटिवेशनल वीडियोज और पोस्टर्स डालता हूँ वो डेफिनेटली आपको पसंद आएंगे साथ ही आप इंस्टाग्राम पर फॉलो कर सकते हैं अगेन आई एम सक्सेना सिम्पल है इसके अलावा मेरी वेबसाइट है आम अभिनव सक्सेना उसको प्लीज विजिट कीजिये आपको शायद पसंद आये और प्लीज इस वीडियो को डाउनलोड कीजिये और जो भी आपके ऐसे बिजनेस दोस्त हों जो बिजनेस कर रहे हों, जिनका छोटा बिजनेस हो, जो खत्म होने की कगार पर हो या लग रहा हो आपको की अच्छा नहीं कर पा रहे हैं उनको डेफिनिटली शेयर कीजिये क्या पता उनका बिजनेस आपकी 1 छोटे से शेयरिंग की वजह से बन जाए अल राइट थैंक यू थैंक यू 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