KEDARNATH VLOG | MY JOURNEY TO KEDARNATH PART - 2 | TRAVEL GUIDE

A first-person travel vlog transcript by Abhinav Saxena describing his arrival at Kedarnath after a long trek. He gives geographic and mythological context (glaciers, Kedarnath Peak, origin of the Ganga), recounts the devastating 2013 floods and large-scale rescue/reconstruction (including voluntary helicopter rescues and government-led rebuilding), and shares personal challenges and lessons from the high-altitude trek.
Chapters
Good morning, good morning, good morning, सो फाइनली रात के साढ़े 9 thus be k be made to kedarnat with moment at a so a e sub। केदार के दर्शन करने के लिए पीछे आप देख सकते हो जो आवाज आ रही है वो है ग्लेशियर्स के पिगल के नदी बनने की और मंदाकनी बनती है मंदाकनी अलग नंदी अलग नंदा भाग रति से मिलते गंगा बनती है तो ये पूरा प्रोसेस बताएगा मुझे और आप देख सकते हो की सारे ग्लेशियर यही मतलब बगल मे है जो कल से छोटे छोटे पहाड़ उसके थोड़ी थोड़ी बर्फ दिख रही थी वो भी सामने है। poking distant, amazing nazara फाइनल ली हम आ चुके है kedarnat beautiful तो फाइनली इस जर्नी के मुकाम तक पहुँच चुका हूँ मैं आलमोस्ट 24 घंटे की चढ़ाई और 3 दिन का ट्रैवल और लगभग 10 पंद्रह दिन की तैयारी के बाद हम लोग आ चुके हैं श्री केदार नाथ जी धाम पे सो ये वन ऑफ़ दी टफेस धाम कहा जाता है कुछ अमेजिंग फैक्ट बताता हूँ इस जगह के बारे में। आपको केदार नाथ जी है सिचुएटेड आलमोस्ट लाइक लेन सिक्स हंड्रेड सीट पे मतलब साढ़े 3000 मीटर सी लेवल से ऊपर और सबसे पहली बार इनका जिक्र था लगभग सेवन हंड्रेड जैसे टू थाजनडनाइनीनसलर रहा है तो 700 जब सर हा था तब पहली बार इनका जिक्र था और कहा जाता है कि महाभारत में भी इनके बारे में बताया गया इस के बारे में। लेकिन कहीं केदार नाथ वर्ड नहीं और कहते हैं कि पांडवों ने इसकी फिर से स्थापना की थी इसलिए इसके अन्दर जब हम गए तो कृष्ण जी से लेकर माता कुंती, द्रौपदी पांचों पांडव की मूर्तियां थी और लक्ष्मी नारायण जी की अलग सी मूर्ति थी केदार नाथ जी की जो है उसके अलावा इन्ही लोगो का था तो बहुत अमेजिंग था, बहुत अच्छे से हुआ 2013 16 जून में बहुत भयंकर फ्लड आये थे जिसके बाद ये पूरा एरिया बर्बाद हो गया। जितना आप मेरे पीछे दिख रहा है आपको थोड़ा सा डैमेज भी दिख रहा होगा। सब बर्बाद हो गया था लेकिन आज की डेट में आप देख सकते हो की वापसी कंस्टरक्शन कितना तरीके से हुआ यह पूरा फ्लोरिंग हो चुका है टाइप से से लेकर ट्रक्स सारी मशीने रखी हुई है, पूरी बाउंडरी पेंसिंग हो गई है और तरीके से काम किया गया है ताकि कभी ऐसी सिचुएशन दोबारा हो फ्लड की तो कुछ डैमेज न हो, इतनी इतनी बुरी बुरी हालत न हो। 1 लाख लोगों को बचाया गया था, रेसकीमिशनमेयतबाही हुई थी 2013 में जिसमें ऐसे बड़े अमेजिंग बात है कि सबसे पहले ये जो प्राइवेट हेलीकॉप्टर कंपनीज हैं इन्होंने वॉलेंटरी अपना सपोर्ट दिया था और सारे हेलीकॉप्टर रेस्क्यू किए थे। 1 लाख लोग तो इन्होंने अकेले खुद ही बचा लिए थे, उसके बाद जाके मिलिटरी आई थी, एयरफोर्स आई थी, इंडियन आर्मी आई थी तो हार्डसऑफटोदीज गाई बिना स्टेट की या मिनिस्ट्री की रिक्वेस्ट के या ऑर्डर के। उन्होंने वोलेंटरी लिंक सपोर्ट किया, सब लोगो को बचाया, 1 लाख लोगो को बचाया। बहुत सारे लोग मारे गए। जितने भी पंडित हैं खासकर जितने भी 3 यात्री थे सारे के सारे, बहुत सारे लोग मरे, कई लोगों की लाशें भी नही मिली, 1 साल बाद तक लाशें मिलती लोगों की दुख था। लेकिन वो कहते है न आपका काम बोलता है तो मैं किसी पॉलिटिकल पार्टी को सपोर्ट तो नहीं करता हूँ लेकिन यहाँ पर सब के मुंह पर 1 ही नाम है वो है मोदी जी का, क्योंकि ये जितना भी कंस्ट्रक्शन हुआ है ये जितना भी तरीके से कम हुआ है, इसको खूबसूरत बना दिया गया है वो मोदी जी ने किया है और इसलिए वापस ज्यादा टूरिस्ट आ रहे हैं। पिछले साल जहाँ 7000 आये थे इस बार यहाँ 70 हजार से ज्यादा लोग आ चुके हैं। और मोदी जी जिस गुफा में जाकर बैठे थे वो गुफा काफी फेमस हो गई है, उस गुफा के लिए भी काफी लम्बी लाइन लगती है। तो बहुत अमेजिंग ये चीज है सूखदार पीछे या आपको ग्लेशियर्स और माउंट पीक दिख रहे होंगे। इसको पीक केदारनाथ भी बोलते हैं मैंने थोड़ी रिसर्च की। तो पता चला ये पिक है लगभग 6900 मीटर प्लस और जो माउंट एवरेस्ट है जिसकी सबसे जो सबसे ज्यादा ऊँचा माउंटेन माउंटेन की ऊँचाई है लगभग साढ़े 7000 मीटर। तो आप समझ सकते हो की ऑलमोस्ट ये आधा किलो मीटर कम है माउंट एवरेस्ट से, दुनिया की सबसे ऊंची चोटी से, जहाँ भी हम खड़े हैं सो केदार जी और उसके पीछे माउंट केदार पीक अच्छा 1 और अमेजिंग फैक्ट बताता हूँ, आपको बड़ा इंट्रस्टिंग फैक्ट है यह केदार नाथ मंदिर के पीछे, यह बड़ा सा पत्थर दिख रहा है, बड़ा सा पत्थर, ये आपको दिख रहा होगा। शायद यहाँ पर, सो ये कहते हैं, ये बताया बताया लोगों ने की, जब फ्लड्स आये थे न, ये ग्लेशियर है, यह पूरा ग्लेशियर है, यह वाइट पूरा ग्लेशियर है और ये टूटा था, इसका नाम है चोराबारी ग्लेशियर, ये टूटा था और टूट के ये पूरा बहते हुआ आया था। बहते हुए मलवे में 1 बड़ा सा पत्थर भी था जो पत्थर आकर ठीक मंदिर के पीछे देख सकते है। यहाँ के टिक गया था जिसकी वजह से जब पानी आया तो पानी और राइट मुड़ गया। तो सब कुछ तो बहा दिया लेकिन मंदिर को टच भी नहीं किया, पानी थोड़ा पानी में था लेकिन डैमेज नहीं किया, सी डैमेज नहीं किया जिसकी वजह से मंदिर आज भी इंटरेक्ट है। जब ये फ्लड तो सबने पढ़ गया था सेवाएं ंदिर के, और काफी पुराना मंदिर है यह 700 सदी की किताबों में, अगर इसका जिक्र है तो आप समझ सकते उससे कितना पहले बना होगा उस चीज का जिक्र करने के लिए, लेकिन अमेजिंग डेवलपमेंट है यहाँ पर, जो नदी सामने ये ये से पिघल रहे हैं। यहाँ से मंदाकनी बहती है, मंदाकनी बह के आगे अलकनंदा में मिलती है, अलखनंदा आगे जा कर भागे रति से मिलकर गंगा बनती है और कहते हैं कि शिव जी ने जो अपनी जटाओं में गंगाजी को उतारा था वो यही जगह थी, यही से उतारा था और आगे बहुत खूबसूरत घाट बना दिए गए हैं। तो जो भी यात्री है वो मतलब इतने फोर्स का पानी है, उसमें भी घाट है। तो वो बड़ा अमेजिंग था। बहुत अच्छे अच्छे होटल्स बन गए है, क्वार्टर बन गए है तो क्वालिटी काम किया और काम बोलता है। 2 पूरी जर्नी अभी नहीं तैयार हुई है, रास्ते भर हमने देखा काम चल रहा था। लाइन स्लाइड्स को रोकने के लिए बहुत अच्छे से फेंसिंग की जा रही है, पत्थरों का ऐसा बैरिगेट बनाया जा रहा है वही पत्थर तोड़ के उसी को ढाल की तरह यूज किया जा रहा है की कुछ भी गिरेगा तो गिरते गिरते सड़क तक है। बहुत अमेजिंग कंसेप् लगा मुझे ये सब काम किया जा रहा है। बहुत तरीके से चल रहा है, काफी हज़ार करोड़ रूपए खर्च हुए होंगे डेफिनेटली और हैडसऑफटोगवर्नमेंट आलसो मोदीजी आलसो की उन्होंने ये स्टेप लिया, ये इनिशिएटिव लिया, इतने आसान किया चीजों को स्टिल अभी जर्नी काफी टफ थी, रास्ते में कई बार ऐसा हुआ कि सांस फूल रही थी, रास्ते में कई बार ऐसा हुआ कि सीने में दर्द होने लगा, ऑक्सीजन की बहुत कमी थी और उसके बाद भी हम लोग चलते रहे, आगे बढ़ते रहे। मॉम डायड को साथ में लेकर चल रहा था, पापा का मन था की यार पैदल चलके जायेंगे और पापा का बड्डे था। पापा का बडे तो पापा की माँ ने और ये सब किया बहुत अमेजिंग रही जर्नी काफी कुछ सीखने को मिला। सबसे बड़ा लाइसेंस जिसमे था कि नेवर लोन के वक्त कोई फर्क नहीं पड़ता कितना मुश्किल लगे कोई फर्क नहीं पड़ता सांस कितनी फूले। बीच में बारिश भी चालू हो गई थी, हमने 4 ग्लेशियर क्रॉस की, 1 के बाद 1 के बाद 1 और ग्लेशियर काट कर रास्ता बनाया गया था, उसमें से जा रहे थे, बर्फ में से जा रहे थे और साथ में ग्लेशियर क्रॉस करने के बाद पानी अलग बरसने लगा। पानी में क्या ग्लेशियर वगैरह पिघलने लगते हैं और लैंड स्लाइड वगैरह होने का चांस होता है। बट हम लोग चलते रहे, चलते रहे, चलते रहे। लगभग 66 किलोमीटर हमने पानी में चढाई थी और लगभग पंद्रह 20 किलोमीटर तो हम लोगो ने ओवरआल चढाई किए, हमें 12 14 घंटे लगे ओवर आल कितनी भी पर ये प्रॉब्लम जो मैं आपको बता रहा हूँ। ये इसलिए बता रहा हूँ क्यूंकी मे आपकी लाइफ में भी बहुत सारे ऐसे चैलेंजेज आते होंगे जो लगता होगा बॉस नहीं हो पायेगा इम्पॉसिबल है कर ही नहीं सकते। लेकिन गाइज हमारे साथ भी ऐसा हो रहा तो पापा मेरे उनको डायबिटीज है, उनको बी पी है और उनको माइनर हार्ट अटैक भी पहले आ चुका है, हार्ट प्रॉब्लम भी है उसके बाद भी उन्होंने डिसाइड किया कि मैं पैदल चले जाऊंगा और उन्होंने गिव अप नहीं किया तो बहुत कुछ सीखने को मिलता है पापा से भी और मैंने भी पूरा ख्याल रखा। रास्ते में मेरा खुद का सीना दर्द कर रहा था तो पापा की तो क्या होगी सोचो सांस लेने में लिटरली यहाँ पर पीच में पेन हो रहा था, बीच में बहुत चैलेंजिंग था लेकिन वही है अगर आपकी लाइफ में भी ऐसे चैलेंजेज आ रहे हैं। लग रहा है कि बॉस नहीं हो सकता, हो ही नहीं सकता यार पॉसिबल नहीं है। जस्ट की moving on डोंट गिव अप मैं गारंटी देता हूँ कि आप मंजिल तक मंजिल तक पहुँच ही जाओगे और पहुंचने के बाद लगेगा वर्ेटलीयेचारो धाम में वन टफेस धाम कहा जाता है। हमने तो कर लिया, आप भी, आप भी करो और चल क्या ना चैलेंज आपके लिए खुल्ला ओपन गाइज सो अभी हम लोग जा रहे वापिस केदार नाम से जाने जाते जाते। ये ग्लेशियर है इसकी काफी रात में बर्फ आ गई तो खुदा ही चल रही है और मैं हूँ मे घोड़े मजा आ रहा है जा।
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