MY TRIP TO BHUBANESWAR | BHUBANESWAR VLOG | 2020

A Hindi-language travel vlog of a trip to Bhubaneswar region (recorded Feb 2020). The speaker visits Konark (shows the famous temple), narrates a local legend about King Narsingh commissioning the temple—claiming ~12,000 artisans and a 12-year construction period—and recounts a popular (possibly apocryphal) technical story about magnets (a ~10-ton lower magnet and heavier upper magnet allegedly used to suspend the Sun deity statue). The vlog also reports visiting Udayagiri caves, comments on rapid development in Bhubaneswar, attendance at a workshop (held on 2 February), and visits to Buddhist sites such as Dhauli stupa (linked to Ashoka and the spread of Buddhism). Tone is informal, reflective, and occasionally critical about partial/unfinished work and local social issues.
Questions this video answers
Approximately 12,000 artisans.
About 12 years.
Around 10 tons for the lower magnet.
2 February.
हे गाईज हम लोग आ चुके हैं.
पूरी आज मैं हूँ कोर्णाक में सो.
हम लोग है इस समय भुवनेश्वर अभी हमलोग हैं उदयगिरी केव्स पे हे गाइज हम लोग आ चुके हैं पूरी.
साथ.
में मेरे ये घर से आये मैं ऐसी आया और अभी बैठे हुए है बीच पे सामने के पीछे समुंदर आवाज.
आ रही है की शायद.
इंजॉय कर रहे हैं सेलिब्रेट कर रहे है आप भी इंजॉय करो.
आज मैं हूँ कोर्णाक में और ये मेरे पीछे है संग टेंपल बहुत ही मशहूर और अपने जमाने का बेस्ट टेम्पल था पूरे वर्ल्ड में और मैं कहानी बताने वाला हूँ आपको राजा नरसिंह की कहानी ऐसी है कहानी है ठीक है तो मुझे नहीं पता कितनी सच्ची कितनी झूठी कहानी है कहानी ऐसी है कि टेंपल को जितना आप देख रहे हो इस के पीछे हुआ करता था और राजा नरसिंह ने इसलिए बनवाया क्योंकि उनकी माँ ने उनसे कहा था की मैंने इस मंदिर में यह छोटा रूप था पहले इस मंदिर में बहुत पूजा की थी तुम जन्मे थे क्योंकि उन लोगो को बच्चा नहीं हो रहा था सो जब राजा नरसिंह को ये बात पता चली उन्होंने कहा इतना भव्य मंदिर बनवाऊंगा की पूरा जमाना देखता.
रह जाएगा लगा दिए गए लगभग 12.
हजार कारीगर और समय लगा 12 साल का पूरा मंदिर डेवलप हो गया पूरा डिजाइन सब कुछ वास्तु शास्त्र के हिसाब से जितनी भी साइंसेस समय तक डेवलप थी सभी का ध्यान रखते हुए बहुत खूबसूरत मंदिर डेवलप हुआ था लेकिन जैसे ये मंदिर का टॉप दिख रहा होगा इसके टॉप पे खाली है तो कोई भी मंदिर मंदिर कहलाता है जब उसके ऊपर कलश की स्थापना होती है तो ऐसे जो उसके पीछे वाला मंदिर था वो मेन मंदिर था और कुछ स् मंदिर में क्या हुआ था की मैगनेटिज्म का यूज किया गया था तो नीचे 10 टन का मैगनेट था और ऊपर कुछ हंड्रेड प्लस टन का मैगनेट उस किया गया था जिससे रिपल्शन होता था और जो भगवान जी की मूर्ति थी सूर्य भगवान की वो हवा हैंग करती थी मैगनिटेजनकी वजह से ना इतना खूबसूरत मंदिर तो बन गया था लेकिन क्योंकि मैगनेट का बहुत ज्यादा यूज हुआ था लेकिन टॉप पे कल जो था वो गोल्ड का था जो की मैगनेट कुछ कर नही पा रही थी उसका तो राजा ने आदेश दिया की ये कल की स्थापना मुझे कल तक चाहिए नहीं हुई तो तुम सब के सर कलम सोचो नाइनटी नाइन परसेंट कम हो गया लेकिन नाइनटी नाइन के बाद भी इस इन कंप्लीट राइट सो। फिर हालांकि उसकी बात की कहानी और डीटेल में है लाइक की उनमें से 1 जो मेजर लीडर था उनका जो बेटा था उसने कहा की दादा में कलश की स्थापना कर सकता हूँ और उसने लोहे की पट्टी बना दी जिसके अन्दर क्यूंकि वो लोहे की थी तो मैने उसको ट्रैक कर रही थी और उसके ऊपर कलश को स्थापित कर दिया तो खैर वो कहानी अपनी है अलग है और उसके बाद फिर लोगों ने कहा की उसको पता चल गया इस लड़के ने कर दिया जो बारा हजार कारीगर नहीं कर पाया। तो हम सब को मरवा देगा। तो लड़के ने कूद के स्पेशल जान दे दी। बाद पीछे यही पर समुन्दर था जो 3 किलोमीटर दूर चला गया और ये यहाँ पर बहुत सारी कलाकृतिया जो है वो कमल की तरह है, कमल जैसे पानी के ऊपर होता है तो उसको पानी के ऊपर बनाया गया था उस सेंस में तो ले इससे ये लेना चाहिए की मैं हमेशा कहता हूँ की इन कंपलीट या फिर नॉन दन इज ऑल सेम मतलब आधा अधूरा खराब तरीके से किया हुआ या बिल्कुल नहीं किया गया, काम बिल्कुल सेम होता है और मैं कुछ काम की परफेक्शन की बात नहीं कर रहा हूँ, यहाँ पर मैं बात कर हा हूँ कंपलीशन की ध्यान देना कई बार वो उल्टा काम जल्दी जल्दी कर देते हैं जस कंप्लीट करने के लिए कुछ काम को न करने की बात कर रहा हूँ। तो जैसे राजा ने नाइन नाइन परसेंट पर भी कंसीडर नहीं किया उसने बोला की वो सर कलम करवा देगा। वैसे ही आपको समझना चाहिए की हंड्रेड परसेंट मतलब हंड्रेड परसेंट होता है, नाइनटी नाइन परसेंट मतलब हंड्रेड परसेंट नहीं होता है.
सो हम लोग है इस समय भुवनेश्वर में, भुवनेश्वर में भी अभी हम लोग है उदयगिरी केव्स पे ये थोड़ा सा हे टाइप का है यहाँ पर मै खड़ा हूँ पीछे जो शहर दिख रहा है, पूरा भुवनेश्वर है बहुत प्यारा सा और इधर जो हिल दिख रही है ये खान डिग्री हिल्स है बहुत प्यारी अगेन तो यहाँ हम लोग आये थे बिजनेस शाप के लिए, जो की थी कल 2 तारीख को जब भी आप विडियो देख रहे होंगे 2 फरवरी को वर्क शॉप थी बहुत प्यारी वर्कशॉप रही कुछ चीजें मुझे जो बहुत अच्छी लगी, घूमने वो यह है की बहुत तेजी से ये शहर डेवलप हो रहा है, लोग भी यहाँ कर रहे हैं की 23 साल पहले जो कहानी थी वो भी बदल चुकी है, पूरी तरीके से इतना तेज डेवलपमेंट हो रहा है। तो यह चीज मुझे अच्छी लगी, वहीं पर कुछ चीजें थी जो थोड़ी बुरी भी लगी, जैसे बहुत सारे लोग कई सिटी में प्रबल, मैं नहीं कह रहा की इसे भुवनेश्वर की है, बहुत से लोग नई चीजों के विरुद्ध है, राइट इ कॉमर्स के खिलाफ पूरे देश में चल रही है, चीजें ऊपर के खिलाफ सारी चीजे है, कस्टमर को प्रॉब्लम होती है उसकी वजह से रेलवे स्टेशन पर आपको आधा से 1 किलोमीटर दूर चल के जाना पड़ता है। अगर आपने ओला उबर की तो नहीं तो उनकी महंगी कार या गाड़ी आपको बुक करनी पड़ेगी नहीं तो आधा किलोमीटर पैदल चले जाइए। अगर आपको ऐसी जाना है तो नोट राइट पुलिस भी इस में कुछ नहीं कहती। पुलिस का कहना है की हमारे पास और काम नहीं है क्या जो की ठीक भी है लेकिन ऐसा कस्टमर हम लोग को भी दिक्कत होती है तो ये थोड़ा सोचना चाहिए। हाँ ये जरूर कहूँगा बहुत डेवलपिंग सिटी है भुवनेश्वर और ओडिशा की भी अगर ओवरऑल बात करूँ पूरी भी हम लोग गए थे काफी अमेजिंग एक्सपीरियंस रहा वहाँ का भी थोड़ा सा गुना पंती जिसे कहते है वो कहूँगा थोड़ी ज्यादा लगी यार मुझे यहाँ पे थोड़ी चोटी छोटी चीजों पर बड़ी चीजों पर नहीं गुंडा राज नहीं कह रहा हू मै गुना पंती थोड़ा होता बात बात पर झगड़ लेना बात बात पे चीजें करना तो ये थोड़ा यहाँ मैंने ज्यादा देखा लोग बड़े प्यारे थे कल जो लोग हमारे वर्ड कप में भी आये तो बड़ी खुली सोच वाले थे उन्होंने साफ साफ 1 बंदे से मिला सत्यकाम नाम था सत्यकाम जी ने बोला मुझे और उन्होंने आगे के लिए भी साइन अप किया है वो लम्बी जर्नी पर है हमारे साथ उन्होंने कहा सर 1 इंसान को हमेशा लाइफ लोंग स्टूडेंट रहना चाहिए अगर उसको ग्रोत चाहिए तो अगर वो हीरो बोलता है तो कभी हीरो नहीं बन पाएगा या खुद को हीरो समझता है तो कभी हीरो नहीं बन पायेगा अगर खुद को जीरो समझता है तो देने की ये दिन हीरो जरूर बन जाएगा ये कुछ बातें उन्होंने शेयर की तो मुझे लगा की मुझे शेयर करनी चाहिए.
अपनी ऑडियंस भी बड़ी प्यारी लगी ऐसी छोटी छोटी बातें.
ये सोच बहुत कम लोगों में मैं देखता हूँ अकसर लोग नहीं ऐसा सोचते मुझे पता है आप लोग ऐसा सोचते है और यहाँ के लोग डेफिनिटली ऐसा सोचते हैं तो ओवरऑल एक्सपीरियंस बड़ा अच्छा लगा आज हम लोग घूम रहे हैं खान डिग्री उदयगिरी और भी जगह घुमेंगे आपको भी घुमाएंगे सारी जगह आप भी हमारे साथ इंजॉय करे और यह है ढोली का स्तूपा भुवनेश्वर में है लेकिन बहुत फेमस है बुध के लिए बहुत ही स्पेशल जगह का क्यूँ की आप ने वो कहानी सुनी होगी न अशोका द ग्रेट की कलिंग वार जो हुआ था बस यही पास में हुआ था ग्राउंड है और उसके बाद जब अशोका खुद आये थे देखने की क्या हुआ वार के बाद और वार में जो मरी हुई लाश उनको दिखती डोली नदी जो है ये वही नदी है जिसके बारे में कहा जाता था लाल खून से कई लोग कहत है अभी ऐसा नहीं है इसके बाद.
ही उन्होंने.
बोला था और बुधि ज्वाइन कर लिया था और फिर शांति का सन्देश फैलाया था इसलिए इसका नाम भी शांति स्तूप रखा गया है बहुत ही खूबसूरत है आपको आना चाहिए.
सांची का.
तूपाऔरउसकेबादफिर धौली का टोपा बहुत ही ज्यादा है और बोध गया लाइट में आप.
देख सकते हो पीछे.
यहाँ पर सारनाथ.
बने हैं.
और यह सांची के तू है और आपको बोध गया भी मिलेगा इस तरह की की बड़ी आकृतियां बनी हुई है बड़ा खूबसूरत है आ कर 1 बार बेक और बहुत ही हाइट बहुत है।
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