ZOMATO BUYS UBER EATS | ZOMATO UBER EATS DEAL | ALL STOCK DEAL | {BHUBANESHWAR}

Zomato acquired Uber Eats India in an all-stock deal valued at roughly 2,450 crore rupees. The food delivery platforms were burning cash and losing money, but the speaker sees the merger as good for India's startup ecosystem, though some delivery workers and Uber Eats staff will likely lose jobs.
Questions this video answers
Approximately ₹2,450 crore (speaker-reported headline).
No — the speaker states it was not a cash deal; it involved stock/stake transfer.
About 10% (speaker states 9%/10% interchangeably; speaker emphasizes ~10%).
Zomato raised $150 million in the January funding round; the speaker cites a valuation of about $3 billion.
Over ₹2,100 crore in losses across five months up to December 2019 (speaker-cited figure).
आज सुबर उठते ही बहुत बड़ा झटका। तो लगा बहुत सारे लोगों को, खासकर वो लोग जो उबर ईट्स पर बहुत डिपेंडेंट थे। बहुत फेवरेट था उनका, क्योंकि सुबह उठते ही पता चला उबर ईट्स का आप नहीं चल रहा था क्लिक करते ही जोमैटो पर री डायरेक्ट हो रहा था। क्योंकि उबर ईट्स बिक गया है। जोमैटो के हाथों इंडिया का ऑपरेशन जोमैटो ने खरीद लिया है, जो कि कई लोगों के लिए दुख की बात है। लेकिन मैं तो कहूंगा ओवरऑल यह 1 गुड न्यूज है, 2450ी करोड़ की यह डील हुई है बाय द वे डील कैश में नहीं हुई है। मतलब जेब में इधर से उधर पैसा नहीं गया है। सिर्फ पेपर वर्क स्टेक ट्रांसफर हुए हैं। तो 10 परसेंट। अब जोमेटो का जो स्टेक है नाइन प्वाइंट, नाइन इन पर्सेंट रूबी कोरेट जो स्टेक है, ऐसा पता चला न्यूज सोर्स से की, वो अब उबर इट्स के पास रहेगा। उबरईट्स आलरेडी नुकसान में था, लगभग 1 महीने से। ये लगा हुआ था इस बातचीत में कि जोमैटो इसको एक्वायर कर ले। और पहले तो न्यूज़ आई थी 1400 करोड़ के आस पास की। लेकिन जो फाइनल न्यूज आई है वो है थाउजंड फोर हंड्रेड एटी, फाइव करोड़ रूप की, जो कि होते हैं डॉलर्स में, अगर देखें तो 300 मिलियन। वैसे तो ये डील नहीं कहूंगा। लेकिन ठीक लॉस मेकिंग थी, बहुत जबरदस्त लॉस हो रहे थे। और उसके बाद 1 सक्सेसफुल चेन ही सक्सेसफुल कहेंगे एग्जिट मिल गया। ना ये कैश डील नहीं हुई जैसे मैंने मेंशन किया। मान लीजिये आपकी कंपनी है, मेरी कंपनी है, मैंने आपकी कंपनी खरीद ली। लेकिन बदले में मैंने आपको पैसे नहीं दिए, दे रहा हूँ। तो कुछ तो देना पड़ेगा। मैंने कहा आपकी और मेरी कंपनी 1 हो गयी। अब आपकी कंपनी की सारी चीजें मेरी हो गयी और मेरी जो कंपनी है बड़ी बन गई। तो वो बड़ी कंपनी का में 10 परसेंट आपको दे रहा हूँ। बदले में तो वो 10 परसेंट भी एग्जिट करोगे। तो मेरी कंपनी बड़ी हो चुकी है उसका जो परसेंटेज आएगा रिटर्न, वैल्यू वो आपको इनकम होगी, वो आपकी कमाई होगी। तो इस तरीके की डील होती है। और मैं तो ये कहूँगा की हमारी इको सिस्टम के लिए 1 स्टार्ट। अप इको सिस्टम की बात करूँ भारत के एंगल से देखें तो 1 गुड न्यूज है। क्योंकि देखो जैसे चाइना में है तो चाइना में उनका खुद का गूगल है, उनका खुद का फेसबुक है, उनका खुद का वाट्सएप है, उनका खुद का ही सब कुछ चलता है। बाकी यू ट्यूब वगैरह नहीं चलता है, उनके खुद के प्लेटफार्म्स है। तो अगर बात करें इस मार्केट की ऑनलाइन फूड डिलीवरी की। तो स्वीगी इंडिया का था, जोमैटो इंडिया का था, बट उबर ईट्स बाहर का था। तो जोमैटो की डील से। हुआ यह है कि अब जोमैटो लगभग कई राज्यों में तो लगभग एईटी परसेंट तक मार्केट शेयर को पा कर चुका है। जैसे एम पी की बात करें तो यहाँ जोमेटो ज्यादा चलता है, उबर ईट्स ज्यादा चलता था। अब जोमैटो के साथ जुड़ गया तो उसके ज्यादा स्टेक हो गए। और अगर बात करें साउथ की तो वहाँ पर स्विगी ज्यादा चलता है। सुखी का ज्यादा स्टेक था। तो इस तरीके की कहानी हुई है। बहुत अच्छी चीज है। इसको साइड होने की जरुरत नहीं है। या ऐसा नहीं सोचना चाहिए की अरे यार बुरा हुआ विचार एम्प्लॉय का क्या होगा। अरे सब अच्छा होगा। बिजनेस होता ही इसलिए है कि आप बड़ा पैसा कमा सके। इनके जो लॉसेस थे उबर इड की बात कर रहा हूँ, आप बिलीव नहीं करोगे पिछले। सिर्फ 5 महीनों में, दिसम्बर 2019 तक 5 महीनों में थे 2100 से भी ज्यादा करोड़ रूपए के। तो इतना हैवी। बहुत तेजी से लीड कर रहे थे, पैसा लूज कर रहे थे, मार्केट में क्यों की एवरेज टिकट साइज में प्रॉब्लम था एवरेज टिकट साइज क्योंकि सस्ता देना चाहते थे और कम से कम ऑर्डर भी डिलीवर। आपने खुद भी देखा होगा उबर इट्स पे, जोमेटो पे। अगर कुछ भी अच्छा फीचर आपको चाहिए, चाहे डिलीवरी सस्ती करवानी हो, चाहे गोल्ड लगाना हो तो 300 रुपए की डिलीवरी मिनिमम रिकार्ड होती है। तो उनका जो एवरेज साइज है जोमेटो गो ल् का वो लगभग टू एटी फाइव रूपीस तक जाता है, वे उबर इट्स का था, वो सिर्फ वन सेवेंटी रुपीज का था। तो ऑर्डर भी कम आ रहे थे, एवरेज टिकट साइड भी कम था, ऑर्डर कितने कमा रहे थे। मैं कुछ रिफ्रेंसेस ले रहा हूँ, ऑलरेडी रिसर्च जो है हमारे साथ में, तो स्विगी के ऑर्डर। पूरे इंडिया की अगर बात करें तो दिसम्बर दिसम्बर में आये वन प्वाइंट फोर मिलियन मतलब। 14 लाख ऑर्डर आये सिर्फ दिसम्बर महीने में वर जोमैटो के आये थे 12 लाख वन प्वाइंट टू मिलियन और उबर इट्स के सिर्फ थे 4 लाख ऑर्डर। तो इतना कम ऑर्डर बस इतना कम। उसका एवरेज टिकट साइज। अब समझ रहे। पूरी प्रॉब्लम कहा से स्टार्ट हुई। तो इनका देखो नॉर्मली सारी कंपनी स्टार्ट में बहुत ज्यादा ऑफरिंग देती है ताकि बाकी प्लेयर्स मार्केट से आउट हो जाए और उसके बाद वो कैप्चर कर पाए राइट मोनोपाली कर पाए। लेकिन ऊपर इडस उनको बाहर कर पाता जोमैटो को और सुगी को मार्केट से उससे पहले उसका फंड बहुत तेजी से फेल होने लग गया जिसकी वजह से वो चाहते थे कि यार अब इसको रैप अप किया जाए। और रही बात इनकी वर्कर्स की जो ये काम करने वाले लोग थे तो जितने भी एग्जीक्यूटिव थे उनको उबर इट्स के एग्जीक्यूटिव को जोमैटो ने नहीं लिया है, साफ मना कर दिया है की हमें नहीं चाहिए आप बड़ी बड़ी सैलरी पैकेज वाले हमारे पास अपनी टीम है तो उनकी जॉब तो या तो जाएगी नहीं तो उबर के में भी उनके जो दुसरे वर्टिकल्स है, आपकी कार हो गई, जो भी है तो उसमे में भी सैक हो जाएगा, ठीक है उसमें ट्रांसफर कर दिए जायेंगे। ज्यादातर लोगों की तो जॉब जाने वाली है। देखो सच बात तो यही है दूसरा यह है की जो डिलीवरी बॉय थे खासकर वो बहुत ज्यादा फ्लीट है। बहुत बड़ी तादाद में थे, जोमैटो ने अभी तो कहा है की उनको ले रहा है। लेकिन आपको क्लिप दिखाता हूँ। तो इससे हमें और डीटेल में पता चला की क्या उनके ऑफिस में 1 उनका परस्पेक्टिव जानने को मिला। नाव पता यह चला है कि अभी तो जो जोमैटो वाले हैं वो काम करते रहेंगे और साथ में उनके जो ऊबर वाले हैं वो भी जुड़ जायेंगे काम करने के लिए। डिलीवरी 22 की बात कर रहा हूँ। टीशर्ट पे लोगो ऐसा जाएगा आधा ऊपर आधा जोमैटो बैग्स भी चेंज होकर मिल जायेंगे। उन लोगों को ऐसा बोला गया है। लेकिन यार अगर नंबर ऑफ़ ऑर्डर्स 1 लिमिट शन में है और इतने ज्यादा डिलीवरी ब्वॉयज की जरुरत नहीं है। आज भी जैसे हमने ऑर्डर मंगाया तो बंदे बहुत जल्दी में थे। क्यों? क्योंकि जहाँ 1 ऑर्डर आता था, फिर वो वापस हफ्ते जाते थे, तब दूसरा ऑर्डर आता था, लेने जाते थे। वहां उनको पैरलेल 3 ऑर्डर आए हुए थे। तो 1 और 2 और 3 तो ऐक्चवली आज है। क्योंकि एकदम से पम्प हुआ न कि ऊबर ईट्स के सारे कस्टमर सोमाटो। लेकिन आने वाले टाइम में शायद इतने ज्यादा लोगों की जरुरत नहीं पड़ेगी। आलरेडी इतना बड़ा मार्केट है, कैप्चर करके रखा है। इतनी बड़ी फ्लीट थी जोमैटो की तो उबर इट्स के जो भी वर्कर्स थे, उनकी भी जॉब जाने की संभावना है। अगेन स्टेशन मैं बोल रहा हूँ, जो की थोड़ी सी बुरी बात है। लेकिन ठीक है, समझना चाहिए। जब भी कोई कंपनी ऐसी आती है जो बहुत बड़े बड़े ऑफरिंग दे रही हो, चाहे वो स्टार्ट अप हो, चाहे वो इंटरनेट कंपनी हो। 20 हजार 25 हजार 30 हजार का पैकेट सिर बाइक से इधर से उधर डिलीवरी करने का टी, एल टू सिटी में आई डोंट थिंक सो उतना प्रैक्टिकल है। तो ओला ने भी यही किया था। उबर में ये किया था। कार चलाने के डेढ़ डेढ़ लाख रुपए दे रहे थे। स्टार्टिंग में लोगो ने कारें लगा ली, कार खरीद ली की कार्ड की। मई तो इसी से निकाल लेंगे। उसके बाद 20 हजार पचीस हजार से ज्यादा कमाई नहीं हो पा रही, 30 हजार से ज्यादा कमाई नही हो पा रही। महीने की क्यूँ। तो ये समझो जब भी ऐसा शॉर्टकट आप लेना चाहोगे न। ऐसी कोई कोई को रिच गेट रिच स्कीम में जाना चाहोगे तो सिर उसमें 1 टाइम बाद वो दिक्कत आती है। आप जुडमेंट करो, स्किल बेस काम करो, अपनी स्किल पर काम करो। अगर वाकई आप में बाइक चलाने में बताओ मुझे क्या टायलेट लगता है, खाना पहुँचाने में मुझे बताओ क्या टाइलेंट लगता है। मानना लेबर क्लास है। लेकिन लेबर भी अगर अपनी स्किल बढ़ाए कोई ऐसा काम जो उसी टाइप के लोग कर पाए तो फिर ज्यादा जैसे अर्बन क्लैप के बंदों को रिप्लेस करना बहुत मुश्किल है। क्योंकि कोई हेयर कटिंग है, कोई सैलून है, कोई मसाज है। मतलब एफर्ट लग रहे है, उसकी कला लग रही है। उसमें तो भले ही लेबर। क्लास में भी होता है। ऐसा नहीं है। अगर एफर्ट पे जाते हो तो डेफिनेटली आप लम्बा, गेम खेलते हो तो इंडिया में फूड डिलीवरी की मार्केट में कौन कौन था। शुरू से देखते है। सुगी था, उबर इट्स था और जोमैटो था यह 3 प्लेयर। फूड पांडा तो पहले ही टाटा बाग हो गया था। स्ुगीकीअगरबात करे तो स्वीगी इंडियन है। अगर जोमैटो की बात करे तो वो भी इंडियन है। लेकिन उबर इड, जो था, वो ऊबर का था। तो बाहर से आया था। तो उबर के बाहर जाने से या ऊबर के इंडिया ऑपरेशन एलीस खरीद लेने से जोमैटो बड़ा बन गया है। अब इंडिया में जोमेटो भी इंडिया का है, स्वीव इंडिया का है। तो इंडिया के स्टार्ट अप्स को और बढ़ावा मिल रहा है। टैक्सी के मार्केट में भी ओला ज्यादा पेनटेड कर पा रहा है। फास्ट मूवर है। ऊबर के कंपेरेटिव नाव चाइना में अमेजन तो नहीं आ पाया, लेकिन यूएस में अली बाबा जरूर चला गया। तो अली बाबा इस तरीके से और बड़ा बन गया। गेम समझना तो जितने ज्यादा इंडियन स्टार्ट अप्स को इस तरीके से बाहर आवा मिलेगा उतना ज्यादा इन्वेस्टर्स को भी कॉन्फिडेंस आएगा इंडियन स्टार्ट में ज्यादा जायेंगे। क्यूंकि इंटरनेशनल स्टार्ट के पास ऑलरेडी पैसा होता है। लेकिन भारत की इकोनॉमी में भी फायदा होता है। देखो ओवर ऑल और में डिक में जाऊं तो है मेटो में भी पैसा लगाया। सॉफ्ट बैंक का सॉफ्ट बैंक जो जापान की कंपनी है। तो हाँ कंट्रोलिंग स्टेक। और अगर ये कंपनी बड़ी होती है, बिकती है तो डेफिनेटली बाहर की, कंट्रीज की। ये जो कंपनीज हैं, उनको फायदा होगा और रिस् की इकॉनमी को भी फायदा होगा। लेकिन ओवरऑल देखा जाए। आज की डेट में। अगर आज के हालात देखें तो इंडिया को जो बस की जरूरत है, इंडिया को जो सपोर्ट की जरुरत है, वो डेफिनेटली मिल रहा है। नाव में चाहता हूँ की कमेंट कर के मुझे बताइए कि आपकी राय में क्या यह 1 अच्छी डील हुई या बुरी डील हुई। अगर बुरी बोल रहे हो तो भी 1 लाइन लिख देना कि क्यूं। और अच्छी बोल रहे तो भी 1 लाइन लिख देना। क्यूँ जिसका आंसर बेस्ट लगेगा, उसको मैं मौका दूंगा। मुझसे वन टू वन बात करने का फ्री ऑफ कॉस्ट। जो भी आपकी हेल्प हो, पाएगी आपके करियर या बिजनेस से रिलेटेड करने की कोशिश करेंगे। नाव ये वीडियो मैंने बहुत रॉ बनाया है। क्योंकि तुरंत न्यूज आई थी, तुरंत शूट किया, तुरंत बनाया है। तो इसको ज्यादा ज्यादा लोगों तक अवेयरनेस पहुंचाने की कोशिश करना। कई बार लोग कंपनी बिक जाने को नेगेटिव न्यूज की तरह देखते हैं। मेरे हिसाब से तो ये पॉजिटिव न्यूज है। और ऐसा होना चाहिए। बिजनेस को न बहुत अटैच नहीं होना चाहिए। बिजनेस को अपने बच्चे की तरह नहीं देखना चाहिए। अगर बच्चे को तरह देखोगे तो बच नहीं पाओगे। मैं ये नहीं कह रहूं पैशन से काम मत करो। लेकिन हाँ, बिजनेस को अल्टीमेट गोल बड़ा पैसा कमाना होता है। और अगर बड़ा पैसा कमाने की ऑफॉर्चुनिटी आ रही है तो बेटर है। सेल एंड क्रिएट, न वन, एंड क्रिएट, नदर वन रदरद। जरुर। ये बात भी कहूँगा कि एम्प्लॉयज के बारे में जरूर सोचना चाहिए। हो सके तो अपनी टीम को कहीं आप सेटल कर दे। या साथ में लेकर अगले स्टार्ट अप में जाए वो बेटर 1 ऑप्शन होता है वो चीज थोड़ी नहीं हुई यहां पर तो ठीक है बट स्टिल बिजनेस गेम कुछ ऐसा होता है नाव जोमैटो की अभी जनवरी में फंडिंग राउंड हुआ था 150 मिलियन डॉलर का और जो एग्जिस्टिंग वेंचर के प्लेस थे जो भी फंडिंग की थी उन्हीं लोगों ने किया था और उससे जोमैटो का वैल्युएशन 3 बिलियन डॉलर हो गया जो कि अगेन 1 काफी बड़ा वैल्युएशन है शायद इंडिया में लाइक टॉप फाइव स्टार अप में तो आता ही है लगभग ऑलमोस्ट तो अच्छी चीज है यह अच्छी न्यूज़ है और जैसे ही अब इसने एक्वायर किया है उबरीकोतोअफकॉर्ट्स इसका वैलुएशन और ज्यादा तेजी से ग्रो करेगा तो देखना चाहिए इसलिए प्रॉफिटेबल अगर बिजनेस मॉडल पर काम करते हो तो डेफिनेटली आपके चांसेज सेल आउट के कम होंगे अगर यही उबरी प्रॉफिटेबल होता तो शायद बेचने की जरुरत नहीं पड़ती और अगर बेचते जो की बहुत सही चीज है बेचना कोई बुरी बात नहीं होती है लेकिन बेच दे तो 1 अच्छे वैलुएशन पर बेच दे क्योंकि अभी रीसेंटली न्यूज आई थी न फ्लिपकार्ड जब सेल हुई थी तो वो हुई थी 1 लाख 13 हजार करोड़ की वहाँ पर ये हुई है 2450ी करोड़ की तो पर्स्पेक्टिव समझ में आ रहा होगा और अगर आपने अभी तक अपने आप को बदलने के बारे में नहीं सोचा है अगर आप अभी भी अपने सिर्फ जॉब पर डिपेंडेंट हो बिजनेस पर डिपेंडेंट हो क्योंकि वो खानदान ही था अगर आप अपने कुछ नया नहीं सीखना चाहते और वह ट्रैक पर चल रहे हो तो लाइफ थोड़ी टफ होने वाली है लेकिन वहीं जो लोग सीखने के लिए तत्पर है उनके लिए बहुत सारी ऐसी ओपोर्चुनिटी खुलने वाली है क्योंकि नए साल नई आपॉर्चुनिटी भी लेकर आया है हमेशा की तरह आपके सारे कमेंट्स को मैं नीचे 11 करके पढूंगा और सबको रिप्लाई करूँगा जितना मैं कर पाऊंगा अपने टाइम में और इस चैनल को सबस्क्राइब करने के लिए 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