तुम्हारी सोच ही तुम्हारी बीमारी का कारण है। ~ ईशान शिवानंद

Eshan Shivand argues that negative thoughts sent to your subconscious act like a broken GPS, disrupting your hormones and creating disease. He uses family conflicts to show how anger and self-blame trigger physical illness. The fix: reprogram your mind toward joy and spiritual practice.
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क्योंकि तुम देखो भाई शरीर तुम्हारा और किसी और का भी। लेकिन कुछ लोग तो ऐसे जिनका शरीर न जाने कितने समय तक स्वस्थ रहता है, जवान रहता है। और कुछ लोग तो ऐसे जो जुविनाइल प्रीमेचोर इज हो जाते हैं, समय से पहले ही उनकी उम्र हो जाती है। फर्क सिर्फ इतना मेरे बाबा समझाते हैं कि जब तुम बार बार अपने जी पी एस में डेस्टिनेशन डालते हो कि हाय, मैं तो जी ही नहीं सकता। हाय इतना क्रोध, हाय, मैं तो किसी काबिल ही नहीं है, भगवान तो है भी या नहीं, मैं मूरख फुलका मे तो तुमने उसी समय अपने शरीर में सेल्फ डिस्ट्रक्टिव बटन दबा दिया। और वही शरीर जो तुम्हें स्वस्थ भी रख सकता है, वही एंडोक्राइन सिस्टम। अब सब्लिमिनल मेसेज तुम्हारी बॉडी को भेजना शुरू कर देता है। दिस मैन डजंट वन टू लिव पैकअप पैकअप करो, सबसे पहले घुटने पैकअप करो, फिर हृदय पैकअप करो और फिर ये मंतू जी पी एस है। जाने अनजाने में तुमने दिशा डाल दी की मेरे को तो बदला लेना है, मेरको तो मारना है, मेरे को तो क्रोधित होना है, मेरको तो जीना ही नहीं। मैंने पत्नियों को देखा, पति बहुत खुश रखता है, बहुत खुश रहता है। और जहाँ पति ने 1 बार लड़ाई क्या कर ली, हाय मेरी शादी तुमसे ही क्यों हुई, इमिडिएट सेल्फ डिस्ट्रक्टिव बटन। अब या तो उसका मन पाती को मार देगा या खुद को मार देगा। न जाने कितनी बार मैंने बच्चों को देखा, माता पिता इतना ध्यान रखते हैं, कुछ भी समस्या हुई, तुमने पैदा ही क्यों किया मुझको सब मैसेज। अब क्या पूछ के पहले न्योता भेजते के इन्विटेशन है। आजा पर ये 1 मैसेज तुमने अपने सबकांशस में डाल दिया। एनर्जी कैननॉट बी क्रिएटेड कैननोट बी डिस्ट्रॉयड इट कैन ओनली बी कनवर्टेड एंड टू एवरी एक्शन देर इस एंड इक्वल एंड अपोजिट रिएक्शन। तुम्हारी हर सोच 1 बीच का रूप धारण करेगी और वो बीच तुम्हारे जीवन में 1 ना 1 फल लेकर के आएगा। और जहाँ तुमने ये बीज अपने मन में डाला, ये मन जी पी एस के सामान तुम्हें 1 स्थान पर ला कर रख देगा। अगर बार बार में बीमारी ही सोचता आया तो फिर मेरा मन मेर को इस बीमारी के सामने लाकर के रखेगा। और बोलेगा यू हैव रीज यार डेस्टिनेशन। और तब। 1 अहंकारी व्यक्ति बोलेगा कि ये इसलिए कि जी पी एस खराब है, मन खराब है, जीवन खराब है, प्रकृति खराब है। तुम सड़कों को चाहे कितनी गाली दे। 2 सड़कों की गलती नहीं, तुम ट्रैफिक को कितनी गाली दे? 2 ट्रैफिक की भी गलती नहीं, वो तो निर्गुण है, तुम मन को भी कितनी गाली दे? 2 कुछ लोग तो फिर कहते हैं कि मन ही खराब है, मन को उठा के बाहर फेंको बाबा मुझे मन से मुक्ति चाहिए। ये तो ऐसी बात हो गयी कि अब जी पी एस को उठा कर बाहर फेंक। 2 ताकि अब अटक गए, कहीं और भी नहीं जा सकते। और बाबा कहता है? क्या जरूरत है इतने फसाद की जो तुम्हारा मन तुम्हें यहाँ तक लेकर के आ सकता है, वो तुम्हें कहीं और भी लेकर जा सकता है। अब फर्क सिर्फ इतना कि पहले तुम अनजाने में 1 दिशा की ओर बढ़ते थे, अब अगर मुझे बदलना ही है, अगर बदल ही रहा हूँ, बदलता ही रहूँगा। तो क्यों न मैं 1 दिशा निर्धारित कर कि अगर जाना ही है, तो केवल उस आनंद की, अगर जाना ही है, तो केवल उस परम दिव्यता की। और इसलिए शिवयोग में तुम पाओगे हम कभी भी भगवान से भय नहीं करते, हम प्रकृति से भी भय नहीं करते। क्यूंकि हम उर्जा के साधक हैं? हम पे ये घोड़ा गाड़ी के नियम और कानून और कायदे कभी लागू नहीं होते। बहुत लोग भागते हैं, भाग्य पढ़वाने, लेकिन हम जानते हैं कि हम पे ये नियम और कानून लागू ही नहीं। क्यूंकि वो अहंकार के नियम और कानून है। तुम मनुष्य हो, तुम पर केवल साधना का नियम लागू होता है। और अगर तुम साधना करोगे, तो तुम बदल जाओगे। अगर तुम बदल गए, तो प पृथ्वी का 11 कण तुम्हारी केवल सहायता करेगा?










