ईशान शिवानंद explains how sadhana dissolves past karmas and attracts transformative energy. A guru provides the single reliable path when you call upon Shiva directly, without intermediaries. He critiques limited conventional knowledge and urges listeners to expand beyond material thinking to merge with the infinite.
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अगर गुरु हैं, अगर धर्म है, अगर सिद्ध हैं, अगर भगवान हैं। इसलिए क्यों की उन्होंने 1 रास्ता बनाया है। कि कभी अगर तुम भटक जाओ। इस माया के जंगल में, तो तुम केवल पुकारना और जब तुम पुकारोगे तो कोई और नहीं, न नदी, न कोई और। गण स्वयं शिव ही आएंगे और कोई नहीं। उन्होंने रास्ता दिया है। अपने जीवन को बदलने का। हर व्यक्ति, हर मनुष्य गलती करता है। मैंने भी बहुत की, लेकिन तब अगर मेरा गुरु मुझे छोड़ देता, तो मैं भी कहीं भटकता फिरता रहता। मेरे गुरु ने मुझे नहीं छोड़ा और सबसे कीमती मैंने अपने गुरु को नहीं छोड़ा। मैं किसी न किसी प्रकार से, न जाने कितनी बार भागता 1 डोर से जुड़ा था, मैं वापस लौटा था। और जिस दिन मेरी साधना से मेरे कर्म खत्म होने शुरू हुए, तब लाइक एनर्जी, अट्रैक्ट लाइक एनर्जी, तब जीवन में अपने आप परिवर्तन आएगा और तुम केवल अनंत से जुड़ने की चेष्ठा। अब आज तक तुमने जो जाना, आज तक ने जो सीखा, इट, इस, अब्सोल्यूट वो सब घोड़े का ज्ञान है। रातों रात, इंसानी चेतना बदलती है रातों रात। जो लोग घोडे के विज्ञान में विश्वास रखते थे, वो बेचारे कंगाल हो गयी, क्योंकि गाडियां आ गई। 1 दिन सड़क पर चलने वाली बंद हो जायेंगी, हवा में उड़ने वाली ज चालू हो जाएंगी। तब यही रोल्स रॉयस। यही मर्सिडीस से टके सेर तुम्हें चमन्नीयठन्नीकी मिलेगी। फिर 1 दिन कोई बोलेगा 1 स्थान से दूसरे स्थान तक में जाऊंगी। क्यों क्यों न मैं अपने शरीर, अपनी शक्ति को ट्रांसफर करूँ। तब तुम्हारे हवाई जहाज भी कैसे। फिरेंगे फिर 1 दिन विश्वामित्र के समान चाहे चेतना उत्पन हो कि मैं क्यूँ स्थान पे जाओ, वो स्थान मेरे पास आ जाए। इंसान केवल अपनी सोच से सीमित है। तुम अपनी सोच अनंत की बनाओ, तुम अनंत के हो जाओगे।