Eeshan Shivanand explains how moving from human consciousness to divine consciousness means staying curious and exploratory rather than clinging to what you already know. Shiva, he says, is the ever-expanding realm of science itself, and making life divine means discovering something new in every moment.
Chapters
मनुष्य भाव के बाद 1 और भाव आता है शिव योगी का भाव जिसको कहते हैं देव भाव और देव भाव। 1 मनुष्य को केवल इतनी सी बात समझाता है कि तुम बहुत कुछ हो, तुम बहुत कुछ जानते हो लेकिन और बहुत कुछ है जो जानना बाकी शिव अनंत शिव कृपा अनंता देव भाव जो मनुष्य को समझाता है। याद रखो जिस शिव को तुमने जान लिया वो विज्ञान है और बहुत सारा विज्ञान है जो अभी तुम जान नहीं पाये हो और वही शिव शिवा है जिस दिन तुम उस शिव शिवा को पूरी तरीके से जान जाओगे तो तुम्हारा विज्ञान भी बदलता चला जायेगा और इसलिए तुम देखो विज्ञान बदलता रहता है। हर साल विज्ञान बदल जाता है। हर साल विज्ञान कुछ न कुछ तुम्हारे सामने लेकर खोज ही तो रहे हैं। तुमने और विज्ञानिक में कोई फर्क नहीं है तुम दोनो शिव को खोज रहे हो लेकिन वो अपने शिव को विज्ञान कहता है कहते हो तुम दोनो खोज रहे हो इसलिए हर साल तुम्हें भी कुछ नया मालूम होता है। तुम्हारे विज्ञानिक को भी कुछ नया मालूम होता है। 2 ही चीजें हो सकती है 1 माइंड सेट है जिसको कहा जाता है एक्सप्लोर ट्री दूसरा एक्सप्लोरेटरी 1 खोजी और 1 जो शोषण करे एक्प्लोयट्री शोषण करने वाला माइंडसेट कौन सा है जो कहता है कि मैं अपने प्रेजिडेंट को एक्सप्लेन करूँगा अपने पास्ट के द्वारा और वो व्यक्ति क्लोए करेगा वो तोते की तरह है वो विज्ञान को आगे नहीं बढ़ाएगा रोक देगा और जो क्लोरेट वो कहता है की आज अगर कुछ है कल और बेहतर हो सकता है आज अगर अच्छा हूँ तो हे शिव शिवा ऐसी शक्ति 2 की हर शन हर कन शिवमय हो रहा है और जो देव भाव है वो एक्सप्लोरेटरी है।