वर्तमान में जीना सीखें - ईशान शिवानंद

Ishan Shivanand teaches that time is our only real wealth, using the story of shirts bought across countries that rot unworn in closets. He explains procrastination as stuffing old worries in one drawer while adding new problems to another, and warns that people who act immortal never truly live in the present.
Chapters
मेरे गुरु ने ये चीज़ मुझे बहुत पहले सिखाई थी। उन्होंने कहा बेटा समय का हमेशा आदर करो, 1 ही चीज हमारे पास है, वो है समय। अगर कोई व्यक्ति मुझसे पूछता है माया का मतलब क्या है? अगर कोई व्यक्ति मुझसे कहता है? आप हमें 1 बात अगर सिखाना चाहते हैं, क्योंकि आप इतने सालों से बाबा जी के साथ है। दुनिया जहान में आप ज्ञान बांट रहे हैं। तो जो बात मैं आपसे करना चाहूँगा वो ये है। समझ ही नहीं आता मुझे क्यूँ इंसान ऐसे अपना जीवन जीता है मानो अमर हो, इनसान ऐसे लड़ाई करता है मानो अमर हो, इनसान ऐसे विचार बटोरता है मानो अमर हो। पता नहीं किस चीज का इंतजार कर रहा है। और सबके साथ ऐसा होता है। जब मैं नया नया आश्रम से बाहर निकला, बाबाजी ने कहा जा बेटा शिव योग की साधना को दुनिया जहान में फैला कर गया। तो मुझे याद है जब मैं पहली बार किसी और देश में गया, सबसे पहला देश था। मलेशिया तो होता है न, भारतीय बाहर जा रहा है तो कमीज खरीद कर लाता है। आई लव मलेशिया मैगनेट खरीद कर लाता है, के एल सी सी की छोटी छोटी मूर्तियां खरीद कर लाता है। दरअसल एयरपोर्ट पे दुकानें जो हैं, ऐसी शायद हम लोगों के लिए बनी है, हमें अच्छा लगता है। और वो जमाना था सेल्फी के पहले वाला पहले प्रमाण चाहिए कि कहीं हो करके हो। तो मैं भी कमीज खरीद करके लाता था। मलेरिया के बाद गया सिंगापुर, वहाँ से भी 2 कमीज खरीद लिए, लव सिंगापुर फिर आश्रम आया, कमी जल मारी में डाली। अब कमीज पहनने का समय तो था नहीं, क्योंकि 1 स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहा हूँ। फिर गया, अफ्रीका, फिर गया, इंग्लैंड, वहाँ से कमीज खरीदी आई, लव इंग्लैंड फिर गया। ऑस्ट्रिया साल बढ़ते चले गए, कमर और पेट का साइज भी बढ़ता चला गया होता है। हर कोई बढ़ता है अपने जीवन में, और मैं भी बढ़ता चला गया। मेरी भी ग्रोथ हुई, एसआई से एम पे आया, एम से एल पे आया, एल से एक्स एल पे आया। और सारी कमीजें बढ़ती जा रही है। अलमारी में पिछले साल बाद 1 दिन आश्रम गया, मेरी अलमारी से बास आ रही है। मैंने कहा क्यों बास आ रही, जरा सल समस्या यह हुई कमी से अन्दर डालता क्या? अलमारी कभी साफ नहीं की। 6 साल बंद पड़ी रही, पीछे वाली कमीजों में दीमक लग गई, दुनिया जहान के कीड़े लग गए। आश्रम में कहीं सीपेज गयी थी। और वो कमी जो मैं कभी पहन ना सका, वो सड़ना शुरू जो मेरा हाल था, मेरी कमीजों के साथ आश्रम की अलमारी में मैंने पाया। हर मनुष्य का हाल होता है मृत्यु के समय, क्योंकि हर मनुष्य जो भी उसके जीवन में अच्छा है, जो भी उसकी कमीज है, जो कुछ भी सुन्दर है, वो बटोरता है ये सोच के कि किसी दिन श अंत में भोगूंगा, पहले जो टेंशन है, उसपर थोड़ा जोर दे। 2 जब बाबा जी के भी पास लोग प्रार्थना करने आते हैं, 2 बच्चे होंगे, 1 बहुत अच्छा बच्चा होगा उसके लिए कभी धन्यवाद नहीं करेंगे। वो बोलेंगे बाबा जी उसको तो तुम छोड़ो मेरा यह चिंटु पागल है कभी भी बड़े वाले के लिए धन्यवाद किया ही नहीं। सारा ध्यान किस पर है चिंटू पर और क्यों की ध्यान चिंटु पर रहता है तो जो अच्छा है तुम अलमारी में डालते रहते हो, डालते रहते हो, डालते रहते हो कि कभी किसी दिन सोची जाएगी और जो चिंताएं भी हैं ऐसा नहीं है की वो सब रिजॉल्व हो जाती है मैंने कितने सारे लोगों के साथ काम किया जब हम प्रति पर साधना करते है और मैंने देखा ऐसा नहीं है की पुरानी चिंता चली जाती है जरा सा क्या होता है। पुरानी चिंता से जब नई बड़ी चिंता आती है तो हम पुरानी को अन्दर ड्रार में डाल देते है की कभी कभी सोची जाएगी इसके बारे में पहले इस पर फोकस करें तो तुम 2 अलग अलग ड्रार बनाते हो, 1 पुरानी चिंताओं की ड्राव ठूंसते चले गए, दूसरी अच्छी चीजों की ड्रार ठूसते चले गए और प्रोकास्टिनेट होता है किसी न किसी दिन मैं रिजोल्व करूँगा या किसी दिन मैं अनुभव करूँगा और फिर 1 दिन यमराज नकल खड़े हो जाते और न जाने क्यूँ हर व्यक्ति अपना जीवन ऐसे ही जीता है जैसे वो अमर है और वो सोचता ही नहीं कलयुग है कौन सा दिन आखिरी हो पता थोड़ी ना चलेगा।










