ईशान शिवानंद कहते हैं कि कृतज्ञता सभी धर्मों की नींव है और शारीरिक-मानसिक हीलिंग की कुंजी। हर आरती, भजन और प्रार्थना मूलतः भगवान का धन्यवाद है। सच्चे मन से धन्यवाद करने से प्रकृति अनंत गुना प्रतिफल देती है।
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अगर आप अपने भीतर हीलिंग शक्तियों को बढ़ाना चाहते हैं तो आपको अपने जीवन में धन्यवाद जोड़ना होगा। इस प्रकृति में सबसे जरूरी वस्तु है धन्यवाद। जितने धर्म हैं, उनकी नीव धन्यवाद है। हमारे धर्म को ही तुम देखो। हर आरती, जो हम करते हैं, हर भजन, जो हम गाते हैं, हम भगवान का धन्यवाद कर रहे हैं। किसी और धर्म को भी तुम देख लो, उसमें भी हर प्रार्थना भगवान का केवल धन्यवाद दिखाती हैं। धन्यवाद का अर्थ सिर्फ इतना है कि जो यह ब्रह्माण्ड है, यह निर्गुण है। इस ब्रह्मांड में इतनी शक्ति नहीं कि ये तुम्हारे तर्क के भीतर से तुम्हारी ख्वाहिश को बाहर निकाल सके। यह तो सिर्फ तुम्हे समझता है। यह प्रकृति में इतना इतना दर्द नहीं है कि तुम प्रकृति के सामने जाओ और तुम दुखी हो। और प्रकृति समझ पाए कि तुम दुख नहीं, तुम सुख चाहते हो। प्रकृति तो बहुत साधारण हैं। तुम प्रकृति के सामने जो भाव उत्पन करोगे प्रकृति, तुम्हें वही भाव अनंत गुना प्रदान करना शुरू कर देगी। दिस इज, नोन ऐस, द डोमिनो इफेक्ट, दिस इज, नोन ऐस फाintunin। और जब हम धन्यवाद करते हैं, तो चाहते ना चाहते हुए हम अपने कण कण को उस भगवान से जोड़ रहे हैं। क्यूंकि दुखी होके, कभी धन्यवाद किया जा नहीं सकता। धन्यवाद करने के लिए सबसे पहले तुम्हें अपना ध्यान उस प परम सुख की ओर ले जाना होगा। तभी तुम धन्यवाद कर पाओगे। पूरा का पूरा शिवयोग, पूरी की पूरी हीलिंग पूरी की पूरी संभव धन्यवाद पर निर्धारित है। मेरा बाबा कहता है? जो कुछ भी तुम अपने जीवन में उत्पन करना चाहते हो, उसके लिए तुम भगवान का धन्यवाद करना शुरू कर। 2 अगर स्वास्थ चाहिए तो स्मरण करो। हे शिव सेवा, मैं धन्यवाद करता हूँ। वो स्वास्थ जो मुझे आज तक प्राप्त हुआ और जो आज से मुझे प्राप्त होने वाला है।