ईशान शिवानंद explains why the guru-shishya lineage is essential to Sanatan tradition. When this relationship is turned into entertainment or broken, it erodes spiritual values and exposes seekers to misinformation instead of authentic awakening and higher consciousness.
Chapters
सनातन तब नहीं खत्म होता जब तुम ग्रंथ के साथ छेड़छाड़ करते हो। सनातन तब खत्म होगा जब तुम गुरु शिष्य परंपरा के साथ छेड़छाड़ कर दोगे, और गुरु शिष्य परम्परा के साथ छेड़छाड़। कैसे होगी की अब पहले गुरु ज्ञान हमें परम्परा में मिलता था, हमें परम्परा पता है की ये ये वो गुरु परम्परा है जिससे हमारे पिता सिद्ध हुए, ये वो गुरु परम्परा है, जिससे हमारे दादा सिद्ध हुए, ये वो गुरु परम्परा है जिससे हमारा परिवार चल रहा है। इसलिए रिषि मुनि के पास रजवाड़े राजकुमार को भेजते थे, उन्हें पता था ये गुरु को, लेकिन अब तुम परंपरा तोड़। 2 अब अब गुरु, और जहाँ गुरु परंपरा का मतलब था, साधना से शिव तक पहुँचना, साधना से चेतना को उठाना, वही मैं गुरु परम्परा को एंटरटेनमेंट बना दे, वही मैं मिसइनफॉर्मेशन फैला। 2 और जिस बिचारे की कांशसनेस अभी यहाँ पर है, वो ऐसे प्रोपोगंडा में बहुत आसानी से फंस जाएगा, ब्रेनवाश हो जाएगा। क्यूँ क्यूंकि गुरु का काम था, ऊपर उठाना, कहाँ, ऊपर उठाना, शांति लाना, मेच्योरिटी लाना, फॉरगिवनेस सिखाना, गुरु का काम था, आँखें खोलना, गुरु का काम था, शिव से जोड़ना और, और फिर तुम उधर ही उसी कोंशसनेस में दौड़ रहे हो, दौड़ रहे हो, दौड़ रहे हो, दौड़ रहे हो। और इसलिए भाग्यशाली है वो लोग जिन्हें महासिद्ध अवधूत की कृपा प्राप्त हुई।