ईशान शिवानंद बताते हैं कि प्राकृतिक घटनाएँ अनिवार्य हैं, लेकिन उनका असर हमारे मन पर निर्भर करता है। एक शिवयोगी हर घटना को विकास के रूप में देखता है और अपने परिवार के लिए शांति, शक्ति और सफलता का माइक्रो-इकोसिस्टम बनाता है।
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जो कुछ भी होना है, प्रकृति में वो तो होगा पर कुछ चीजों का ध्यान हमें रखना होगा कि हर घटना का हम पर क्या प्रभाव होगा, हम पर, हमारे प्रियजनों पर, हमारे मन पर, हमारे शरीर पर। क्योंकि अगर आप इतिहास देखते हो तो वही पत्थर जो आसमान से गिरा, जिसने सभी डायनासोर को मार दिया, उसी पत्थर ने कितने बंदरों को विकसित कर दिया कि वह बंदर फिर होमो सेपियन होमो, इरेक्टस बन सके। वही घटना जो कि 1 स्पिसिस का संघार का कारण बनती है, वहीं दूसरी स्पीशीज का विकास का कारण भी बन सकती है। अगर शिवयोग की शक्ति हमारे साथ है, तो मेरे गुरु ने जैसा कहा, 1 शिवयोगी के साथ हमेशा अच्छा होता है, फिर हर घटना न जाने कैसे तुम्हारे जीवन में किसी न किसी प्रकार का विकास दिव्यता संपन्नता उत्पन्न कर रही है। दूसरा जब कुछ भी हमारे जीवन में गठित होगा तो हमारा मेटल फ्रेम ऑफ माइंड क्या होगा? हम किस प्रकार से किस भाव के साथ उस 1 इंसिडेंट में प्रवेश करेंगे और हम किस भाव के साथ उस इंसिडेंट से बाहर आएंगे। हमने अपने शोध में देखा जो तुम्हारे गुरु भी कहते हैं, हर हाल में खुशी बाहर जो कुछ भी हो रहा हो। 1 शिव योगी के मन में 1 गहरी शांति है, 1 प्रेम है और इसलिए जो वो 1 माइक्रो इको सिस्टम का निर्माण कर रहा है, उस इको सिस्टम में शांति शक्ति सफलता फलीभूत होती है, उस शिवयोगी के लिए और उसके परिवार के लिए।