Ishan Shivānand argues that if just 1% of people become dedicated Shiva-yogis, society would transform completely, bringing health, peace, and divine presence into every home. He praises current practitioners for making time for Shiva despite family and work, saying their effort plants seeds that will eventually grow.
Chapters
आपका मन आपको भटकाता है, आपको शिव से दूर खींचता है, यही तो कलियुग है, कैसे पता चलेगा हमें कलयुग है क्यों? क्योंकि हमारा मन, हमें शिव से दूर खींचता। लेकिन हमारे पास आज की तारीख में फ्री विल है। हमारे पास आज की तारीख में तप करने की क्षमता है। और जहाँ हम तब करते हैं, तो हमारा जीवन तो बदलता ही है, दूसरों का भी बदलता है। अगर 1 प्रतिशत आप समाज को शिवयोगी बना, 21 प्रतिशत, तो वो समाज सत्युग से कम नहीं होगा। उस समाज में स्वास्थय शांति दिव्यता घर घर पहुँचेगी, उस समाज में अपने आप हर बच्चा शिव को खोजने के लिए प्रेरित होगा। उस समाज में हर चिकित्सक शिवयोगी की तरह होगा, उस समाज में हर टीचर शिवयोगी की तरह होगा। उस समाज में भूख और मुक् घर घर पहुंचेगा। उस समाज में कर्म पूरा करने के बाद संन्यास आश्रम सहेजी 1 व्यक्ति स्वीकार लेगा। और इसलिए में तो हमेशा महादेव से 1 ही प्रार्थना करता हूँ। महादेव मुझे आप मेरे 1 प्रतिशत, दे 21 प्रतिशत, तपस्वी 1 प्रतिशत, साधक 1 प्रतिशत, श्रीविद्या साधना करने वाले महादेव की, भक्ति में लीन होने वाले ललिता, रुद्र तरशति अपनाने वाले शिवयो की और अभी आप देखो, इतने सारे आप लोग स्थान पर 1 जुट हो साधना कर रहे हो और कितनी पॉजिटिविटी और सकारात्मकता आपके माध्यम से घर घर पहुंच रही है। इसलिए मैं आपको आपके भीतर स्थित महादेव को बहुत प्रेम से धन्यवाद करता हूँ, क्योंकि ये मेहनत जो आप कर रहे हो, यह सरल नहीं है। परिवार में रहकर भी, काम करते हुए भी आपने महादेव के लिए समय निकाला, ये चीज मैं देखता हूँ, मैं एप्रीसिएट करता हूँ, सिर्फ मैं ही नहीं, पूरी सनातन परंपरा आपको देख के एप्रीसिएट कर रही। और इसलिए आप ही के भीतर मैं सिद्धों की चिंगारी डालता हूँ, शिवयोग का बीज डालता हूँ। और मैं जानता हूँ आपके। तब से यह बीच जरूर अंकुरित होगा। ब्लेस।