Ishan Shivaanand reflects on life's purpose and how people criticize whatever you do, whether it's cooking aloo-gobhi or arranging a marriage. He argues that real opportunities for love are rare, and when lost, you should seek a guru's guidance rather than waste your mind.
Chapters
तुम्हें पता ही नहीं तुम पैदा क्यों हुए हो, जीवन का क्या उद्देश्य है और जीवन में 1 या 2 अपोर्चुनिटीज मिलती है। इधर तो लव, इधर तो फाइट लव की बहुत कम ऑपर्चुनिटीज है, फाइट की बहुत ज्यादा है। दिल्ली में गाड़ी चला और सब लड़ने को तैयार है, घर में कुछ भी करो, अच्छा काम करो, लोग लड़ने को तैयार हो जायेंगे। अगर तुमने लौकी बनाई, 6 लोग दुखी हो, जायेंगे की टिंडे क्यों नहीं बनाये, तुम टिंडे बनाओ, 10 लोग दुखी होंगे। आलू गोभी क्यों नहीं बनाया है तुम्हारे काम से कोई खुश नहीं होता, दुखी जरूर हो जाते हैं मेरे पास 1 माँ आएगी जो कहती है धन्यवाद आपका आपकी कृपा से मेरी बेटी की शादी हो गयी और फिर दुसरी बेटी को देख कर इस का भी कुछ कर। 2 कोई कारण नहीं होता लोग शुरू हो जाते हैं, गुरु है तो गुरु बतायेंगे, मन को वेस्ट नहीं करना, यूज करना है।