A devotee with a painful childhood experienced Mahadev's presence during a ritual, awakening to love and acceptance for the first time. He now practices daily sadhana and writes a "Golden Book" he says manifests miracles, though his family dismisses him as delusional. True worship, the speaker says, fills the heart with bhakti and transforms the practitioner into Shiva's essence.
Chapters
मुझे 1 साधक ने लिखा कि भैया, जिस घर में मैं पैदा हुआ, जो जीवन मैंने किया, जब मैं आँखें बंद करके अपने बचपन के बारे में सोचता हूँ, तो मेरे सामने केवल दुख भरी घटनाएं ही आती। जब मैं माता पिता के बारे में सोचता हूँ, मुझे चीखना चिल्लाना याद आता है जब मैं भाई बहन के बारे में सोचता हूँ, मुझे सब लड़ाई झगड़ा याद आता है और फिर न जाने क्यों, न जाने कैसे महादेव की मेरे पर कृपा हुई और महादेव ने मुझे अनुष्ठान में बुला लिया। कहता है, अनुष्ठान में आते ही मुझे स्वयं का सत्य महसूस हुआ, मुझे आत्म सत्य की अनुभूति हुई, मुझे महादेव की अनुभूति हुई और पहली बार मैंने प्रेम और एक्सेप्टेंस को महसूस किया। कहता है कि मेरी आँखों से आंसू निकलने शुरू हो गए और मैं पूरी शाम बस रोता रहा। जब मैं सुबह उठा तो मानो 1 गहरी नींद के बाद उठा हूँ, लेकिन रात भर की नींद नहीं, जीवन भर की नींद। और मैं बहुत खुश मुस्करा कर अपने जीवन को जी रहा है। रोज सुबह जब अनुष्ठान की बारी आती है, मैं साधना करता हूँ, कहता है भैया, आपके कहने पर मैंने गोल्डन बुक लिखनी शुरू कर दी और गोल्डन बुक मानो, गोल्डन बुक नहीं, बैंक के चेक की तरह है। मैं जो लिखता हूँ, मैं उसे ब्रह्मांड से विड्रॉ कर सकता हूँ। मेरे जीवन में चमत्कार हो रहे है। और फिर कहता है मेरा परिवार मेरी खुशी को देख कर बहुत दुखी है। मेरा परिवार कहता है कि मैं भ्रमित हो चुका, मेरा परिवार कहता है कि मैं भटक चुका हू। कहता है मैंने जीवन में कभी इतना स्वस्थ नहीं महसूस किया, मैंने जीवन में कभी उपवास नहीं रखा और अब मैं रख रहा हूँ। कहता है मैंने जीवन में कभी साधना नहीं की और मैं साधना कर रहा हूँ। मैंने जीवन में कभी खुशी अनुभव नहीं की, सुना अनुभव नहीं की। और अब पहली बार मुझे खुशी हो रही है। और हां, अब जब परिवार लड़ता है, चीखता है, चिल्लाता है, तो मैं साथ उनके बैठके चीखता, चिल्लाता नहीं, मैं उठ के अपने कमरे में आकर अपना काम करना शुरू कर दे। और जब मेरा परिवार पूछता है, क्या तुम्हे हमसे प्रेम नहीं, क्या, तुम्हे हमसे लगाव नहीं, तो मैं उन्हें बताता हूँ। प्रेम का मतलब ये थोड़ी कि तुम्हारी गुथाई में मैं भी कूद पड़ूँ केर एंड कंसर्न, डजंट मीन, येलिंग केर कंसर्न मीन, geigनएंगकेयर मींस, लव एंड कंफेशन और कहता है जब मैं अपने परिवार को बोलता, मेरा परिवार कहता है, मुझे मत सिखाओ कहते है कि मेरा परिवार ऐसा नहीं, पूजा पाठ नहीं करते, कहने को दिखने में बड़े धार्मिक है, वो भी बैठ जाते हैं, टीवी के सामने कथा चल रही होती है और वो सुनते सुनते लड़ते हैं। 1 दूसरे से ऐसा नहीं है, पूजा पाठ नहीं करते, खूब घंटी बजती है, खूब आरती होती है, खूब दिया गोल गोल घुमाया जाता है, लेकिन दिया घुमाते समय भी भी माथे पर 1 टेंशन दिखाई पड़ती है, चेहरे पर 1 क्रोध दिखाई पड़ता है। और मैं उन्हें कहता हूँ कि आओ अनुष्ठान करो, साधना करो। पूजा पाठ ऐसी हो जो तुम्हें शिव की ओर लेकर के जाए, तो तुम्हारे हृदय को भक्ति भाव, प्रेम भाव से भर दें। साधना ऐसी हो कि तुम्हारा कण कण शिवमय हो जाए और आँखें बंद हो और महादेव की महिमा से खुशी के आंसू टपक पड़े।