A devotee shares her spiritual transformation after receiving guru initiation from Maha-Siddh Dhooth at the Lucknow ashram and practicing Lalita-Rudra Shivyog daily. She credits the practice with over 120 million miracles in her life, her daughters' success, and inner peace that would otherwise elude her.
Chapters
1 शिवयोगी लिखता है। प्रणाम, पूज्य बाबाजी और इशान भैया। मैं बहुत समय से शिवयोग से 1 चैनल के माध्यम से जुड़ा हूँ। फिर मेरे 1 मित्र के द्वारा लखनऊ आश्रम में जाना हुआ और वहाँ मेरे जीवन का आध्यात्मिक गुरु। हमारे गुरु महासिद्ध धूत के दर्शन हुए। मेरा जीवन शायद उसी पल से बदलना शुरू हो गया। मेरे कुछ पुण्य जाग्रत हुए और बाबा जी से गुरु दीक्षा प्राप्त हुई। तब से आज तक का सफ़र मैं जब आँख बंद करके सोचती हूँ तो देखती हूँ कि मैं कहाँ थी और कहाँ आ गई हूँ। आध्यात्मिक मार्ग पर चलकर जीवन में कई चमत्कार हुए। बहुत सारी शक्ति साधना मैंने प्राप्त की। मैं बहुत शिविर नहीं जुड़ सके, पर जो कुछ भी मेरे गुरु ने सिखाया, उस साधना को रोज करके जीवन में सबकुछ पा लिया। शिवयोग वे हम कहते है, हम ही अपने भाग्य के विधाता हैं। और हां, म मैंने कर दिखाया। अब धीरे से इशान भैया हमारे जीवन का हिस्सा बन गए, कब पता ही नहीं चला। बहुत कृपा है आपने कितनी आसानी से हम लोगों का उत्साह वर्धन किया। साधना बढ़ती चली गई और मैं पूरी तरीके से शिवमय हो गई। मेरी दोनों बेटियां अपने जीवन में सफलता के सौ पण चढ़ रही है। मेरे जीवन में 12 नहीं करोड़ों चमत्कार हुए हैं। मेरा व्यक्तित्व ही पूरी तरह बदल गया। महामारी के समय मेरे लिए वरदान साबित हुआ, सब ऑनलाइन हो गया। इशान भैया 1 भाई की तरह मेरा मार्ग प्रदर्शन कर रहे हैं। जो भी मिला है, शब्दों में उसकी अभिव्यक्तता नहीं हो सकती। ललितारउद्रतृष्ति की साधना निरंतर चल रही है। आप ऐसे ही जीवन थामे। रहिये। आज बहुत खुशी है। ये मेल लिख रही हूँ। कभी न कभी आप इसे पढें, निरंतर यूं ही ज्ञान गंगा हमें प्रदान करे। साधना करने से ही जीवन सार्थक लगता है। और अगर कभी मैं किसी कारण वश न कर पाया तो मन दिन भर बेचैन रहता है। तो मैं वो दुख ना महसूस करूँ इसके लिए मैं हर हाल में साधना करती हूँ। भैया आपका बाबाजी का, महादेव का बहुत बहुत धन्यवाद कोटी कोटी प्रणाम लवयू, ब्लेस हर हर महादेव। और जैसे इस साधक ने लिखा कि कहाँ से महादेव की कृपा से मैं शिव योग में प्रवेश कर सके और तब और अब में जमीन आसमान का अंतर है। देखो प्रवेश तुम्हें करना है और 1 बार जब तुम प्रवेश कर लोगे तो जैसे धरती 1 बीज को गले से लगा कर अंकुरित कर देती है, परिवर्तित कर देती, विकसित कर देती। तुम्हारे भीतर भी कप कहाँ 1 देवीय बदलाव होना शुरू होगा, तुम्हें पता ही नहीं चलेगा। लेकिन पहली छलांग बहुत कीमती है।