A devotee shares stories of disciples whose lives transformed after receiving Shri Lalita Rudra Trishati initiation and practicing Shiv Yog. People healed from physical ailments like chest lumps and mental stress, then experienced increased family love, financial prosperity, and spiritual growth. The speaker describes a pattern: healing first, then happiness and love, then social contribution.
Chapters
मुझे बहुत सारे साथको ने अपने जीवन के मेडिकल ले कर के भेजे की, किस प्रकार से दीक्षा के बाद उनके परिवार में 1 बदलाव आ गया, किस प्रकार से परिवार के कुछ सदस्य से जो पहले साधना की ओर रुचि नहीं ले रहे थे, जो पहले थोड़े एंटी सोशल हो रखे थे, अब दीक्षा के बाद कैसे वो साधना में भी बैठ रहे हैं, कैसे प्रेम भी कर रहे हैं। मुझे बड़े सारे साथको ने लिख कर के भेजा कि किस प्रकार से उनका भाग्य उदय होना शुरू हो गया। 1 बच्ची बहुत प्यार से लिखती है की भैया पहले तो मैं सोचती रही, आपको, लिखूं न लिखूं तो अब मैं सभी कुछ लिख कर भेज रही हूँ, तो आप ही झेल लेना, मुझे बहुत सारी बात करनी है आपसे, लेकिन आज काम की बात करती हूँ, शिव योग की कृपा से मैंने होश में जीना शुरू किया, इस साल से कहते हो आपके नया जन्म होते आये। आज की खबर ये है कि मैं करोड़ों की मालकिन हो गई, बड़ा आशीर्वाद है आपका और फिर धन्यवाद करती गई, लिखती चली गई और बहुत इनफार्मल खुशी से भरपूर 1 बच्चे ने अपने अनाहत को खोल कर के लिखा है और मैं बहुत खुश हूँ की साधना के बाद, अनुष्ठान के बाद, दीक्षा के बाद जो बच्चे हैं वो अपने आप को महादेव से बहुत क्लोज महसूस कर रहे हैं। मानो शिव और शिवानंद परिवार का 1 हिस्सा है। और यही तो मैं आपको सिखाना चाह रहा हूँ। शिव शिवानंद शिवयोगी शिवयोगी लिखता है की उसके हृदय में उसको बहुत पीड़ा महसूस हो रही थी और फिर आखिरकार जब उसने चिकित्सक से जाँच करवाई तो उसने देखा की उसकी छाती में गाठें हैं। और वो बहुत घबरा गया कि न जाने क्या होगा। और फिर उसने अनुष्ठान की साधना की, उसने फोर्म की साधना की और धीरे धीरे उसकी पीड़ा बिल्कुल बिल्कुल खत्म होनी शुरू हो गई। और फिर जहाँ पर 1 मेडिकल डिलेमा हो सकता था कि अरे ये देखो, पता नहीं क्या डायग्नोस हो गया, पता नहीं क्या कोर्स ऑफ ट्रीटमेंट होना चाहिए। वहीं पर इसी शिवयोगी ने अपने जीवन में साधना को जागृत कर, महादेव की शक्ति को स्वीकार कर पहले ही अपने आप को हीलिंग कर डाली। तो कुछ 1 पैटन जो देखने को मिल रहा है वो पैटन यह है की महादेव की भक्ति से सबसे पहले तो जीवन में खुशहाली आती है, 1 व्यक्ति जीना सीख लेता है उसके बाद परिवार और शिवयोगी के बीच बहुत प्रेम बढ़ जाता है, 1 व्यक्ति अपने जीवन में खुशी को अनुभव करना शुरू कर देता है उसके बाद शिव योगी के काम बनने शुरू हो जाते हैं। ऐसे ऐसे मेडिकल्स होते हैं कि जो उसने अपने लिए सोचा था प्रोफेशनली, वो उस गोल से कई गुना ज्यादा अपने जीवन में उत्पन कर सकता है, अनुभव कर सकता है, उसके बाद देखने को मिला। अगर शिव योगी के जीवन में कहीं 1 मानसिक दुख है या फिर 1 मेंटल हेल्थ इशू है या फिर 1 शारीरिक इशू है। धीरे धीरे अनुष्ठान के माध्यम से द हीलिंग स्टार्ट टू हैप्पन। जिसको बाबा जी ने सिखाया था, समझाया था। क्योर इस पॉसिबल और फिर देखने को मिलता है कि अनुष्ठान के माध्यम से धीरे धीरे 1 शिव योगी की साधना बढ़नी शुरू हो जाती है वो साधना में और गहरा उतरता है उसे शिव और शिवानंद की अनुभूति होती है उसका शिव और शिवानंद के साथ 1 बहुत पक्का रिश्ता बन जाता है और इस रिश्ते के बाद वो शिवयोगी सही मायने में शिवयोग सनातन को अनुभव कर सकता है।