ईशान शिवानंद explains how repeated listening to a guru's teachings gradually deepens wisdom, each exposure a drop that accumulates within you. True transformation requires elevated consciousness through dedicated sadhana, and negative inner states attract negativity while practice purifies the inner field. Chakra imbalances manifest as physical and emotional ailments, dissolved only through consistent spiritual practice.
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जब तुम किसी सिद्ध की कोई सीडी सुनते हो, कोई प्रवचन सुनते हो, या मेरे बाबा की कोई सीडी ले लो, तुम कभी देखो कि जब पहली बार सुनते हो तो तुम्हें कुछ ज्ञान प्राप्त होता है, लेकिन जब दूसरी बार सुनते हो तो थोड़ा और तीसरी बार सुनते हो तो कुछ और, नई बातें, चौथी बार सुनते हो तो कुछ और, नया कुछ और प्राप्त होता है। मैंने तो ऐसे भी लोग देखे। बचपन से लेकर आज तक वही 1 शास्त्र पढ़ते जा रहे है, लेकिन हर बार जब उस शास्त्र को पढ़ते है, मानो भगवान उनसे बात कर रहा है, कुछ नया। और इसका मतलब सिर्फ इतना है कि पहले मैं संकुचित था, तो 1 बूंद ही मेरे भीतर प्रवेश कर पाए, लेकिन वो 1 बूँद भी जो मेरे भीतर प्रवेश की, उसने 1 छोटी क्रांति उत्पन्न की? अगली बार 2 बूंद बाकी सारा बह गया, फिर 4, फिर 5, फिर 6 मा के बहे, फिर थोड़ी और बूंदे और शिवयो कहता है? तुम्हारा उद्देश्य यह होना चाहिए कि 1 ऐसा दिन आय की मेरा गुरु, जितना मेरे पर अमृत डाले, उसकी 11 बूंद में पूर्णता प्राप्त कर सकू। हमारी बस, यही तैयारी है। और वो केवल तब होगा जब चेतना उठेगी। इसलिए अगर आज 1 व्यक्ति क्रोधित हो रहा है, तुम ज्ञान देने की बात मत करना, उससे कुछ नहीं होगा। मेरे बाबा ने जो मुझे सिखाया, साधना, सर्वोपरी साधना से तुम्हारे भीतर भी बदलाव आएगा, और उसके भीतर भी बदलाव आएगा। लाइक एनर्जी अट्रैक्ट्स लाइक एनर्जी। अगर। आज तुम्हारे जीवन में तुम अपने आप को कहीं पाते हो, जो तुम्हें पसंद नहीं, वो, इसलिए क्यूंकि अभी तुम्हारे भीतर नकारात्मक है। और वो नकारात्मक को आकर्षित कर रहा है। जब तुम साधना करोगे, फिर बदलाव आएगा, और जहाँ तुम बैठे थे, वहीं बैठे बैठे, अब सकारात्मक तुम्हारी ओर आकर्षित हो, क्योंकि अगर कोई भी पीड़ा है तुम्हारे जीवन में, वो इसलिए क्योंकि तुमने अपनी कांशसनेस से उस निर्गुण को अपने चक्करों में, नकारात्मक स्वरूप में भर दिया। कोई भी बीमारी, अगर किसी को हड्डियों की बीमारी है, किसी को लार्जिटसटटाइन में बीमारी है, किसी को बहुत भय है। इसका मतलब उसने अपने मूलाधार में बहुत कुछ भरा हुआ, बहुत विकार, बहुत कर्म, अगर किसी को प्रजनन क्रिया में बीमारी, अगर किसी को utरसfelopintups, हरमोनलम्बैलेंस की बीमारी, तो उसने अपने स्वादिष्ठान में बहुत कुछ भरा हुआ है। अगर किसी व्यक्ति को पेट, पचाना लीवर, पैंक्रियास मास्पेशिया की बीमारी है, अगर 1 व्यक्ति के भीतर कॉन्फिडेंस नहीं, तो उसने अपने मणिपुर में बहुत मल भरा हुआ है, बहुत ग्रजेश, बहुत रिजेंटमेंट भरी हुई है। अगर किसी व्यक्ति को फेपडों की, हृदय रोग है, फेपड़ों का रोग है, उसके थाइमस, ग्लैंड में कोई प्रॉब्लम है। अगर 1 व्यक्ति का सौंदर्य कम है, तो उसने अपने अनाहत में दुख रूपी बहुत मल भरा होगा। और तुम देखोगे, जितना, तुम दुख भरोगे उतना, तुम्हारा आकर्षण, उतना, तुम्हारा हृदय, उतना, तुम्हारी सांस आसमान, न जाने कितनी समस्याएं। उस व्यक्ति ने अपने अनाहत में इस प्राण ऊर्जा को संकुचित कर लिया। क्योंकि जब जब हम सोचते हैं, तब तब हम मंत्र स्वरुप में उस ऊर्जा को इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं। क्यों, क्योंकि टो एक्शन देर इज इक्वल एंड अपोजिट रिएक्शन।