श्री ललिता रूद्र त्रिशती दीक्षा ||...जो मांगा वही मिल गया !

Shiv-yogis share stories of surviving accidents, illness, and poverty through their guru's grace. The speaker emphasizes that meeting the guru is the greatest miracle, and true devotion persists beyond miraculous rescue.
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बहुत से शिव योगी मुझे लिखते हैं, भैया हमारे जीवन में कोई एक्सीडेंट हुआ, कोई घटना हुई जिसको अगर देखा जाए तो कोई भी परिवार अगर उस अनुभव से निकलता तो शायद उस परिवार का बचना असंभव था लेकिन महादेव की कृपा से हमें 1 खरोच तक नहीं आई। ऐसे अनुभव के बाद शिवयोगी के भीतर 1 गहरा भक्तिभाव जागरत होता है, गुरु के प्रति 1 गहरा भक्तिभाव जागरत होता है। क्योंकि वो कहते हैं हमने देखा है हमने अनुभव किया है हम गहरी खाई में गिरे, लेकिन हमारे गुरु ने हमें बचा लिया, हमारे साथ न जाने कितना बड़ा हादसा हो सकता था, लेकिन हमारे गुरु ने हम पर 1 आज तक नहीं आने दी और आज भी हमारा परिवार हसता खेलता। मुस्कराता हमारे गुरु की कृपा की वजह से ऐसा शिवयोगी जिसकी रक्षा उसके गुरु ने की, वो बहुत धन्यवाद करता है अपने गुरु का और अपने गुरु के प्रति 1 भक्ति भाव महसूस करता है और फिर 1 दूसरा शिव योगी है जो लिखता है की मुझे तो कोई महामारी हो गयी थी। चिकित्सकों ने कहा था की कुछ हफ्तों में मैं मर जाऊँगा और पता चलता है कि सालों साल वो जीवित है और उसकी क्वालिटी ऑफ लाइफ बढ़ती चली जा रही है और वो स्वस्थ हैं और किसी न किसी तरीके से। भगवान महामृत्युंजय ने, महादेव ने उसकी आयु बढ़ा दी और वो धन्यवाद करता है भगवान शिव का और जागरत करता है अपने भीतर भक्तिभाव उस गुरु के प्रति जिसने उसे 1 नया जीवन दिया, जिसने उसे महामारी से मुक्त किया, फिर 1 शिवयोगी। मुझे लगता है की भैया जब मैंने अनुष्ठान की शुरुआत की थी तो मेरी प्रार्थना थी 25 हजार रुपए की नौकरी लग जाए और कुछ ही महीनों में जहाँ 25 हजार की नौकरी खोजता था। 1 बहुत बड़े मल्टीनेशनल टैक फॉर्म में मेरी नौकरी लग गई और अब साल का डेढ़ करोड़ कमाता और क्योंकि मेरे गुरु ने मेरा भाग्य बदल दिया, आज मेरे भीतर गुरु के प्रति बहुत बड़ा भक्ति भाव है क्योंकि पहले मैं कुछ भी नहीं था, मेरे पास पैसे ही नहीं थे, मैं गरीब था और आज मेरे पास बहुत पैसा है। आज मैं बहुत सफल हूँ और धन्यवाद उसको रुखा जिसने मुझे इतनी बरकत, इतनी सफलता आशीर्वाद में प्रदान किए, वही 1 और शिव योगी है, चौथा होगी, मुझे लगता है कि जीवन में बड़ी खुशी है और मैं अपने गुरु का सबसे बड़ा भक्त हूँ, कहता है सब कुछ बहुत अच्छा है और जरूरी नहीं भक्ति भाव जागरत हो जब पहले महामारी आए, पहले एक्सीडेंट हो, पहले गरीब हो जाऊँ और फिर गुरु मुझे हील करे, फिर मैं अमीर हो जाऊँ, सफल हो जाऊँ और एक्सीडेंट से बच जाऊँ। वो चौथा शिवयोगी लिखता है की मेरा कल मेरे गुरु की कृपा से बहुत हेल्दी था, बहुत डिवाइन था और मेरा आज भी मेरे गुरु की कृपा ऐसी बहुत डिवाइन है और मेरा आने वाला कल भी मेरे गुरु की कृपा से बहुत डिवाइन है और धन्यवाद उस गुरु का जिसने मुझे ऐसा जीवन प्रदान किया जो चौथा शिवयोगी है, न वो साक्षात्कार को अवश्य प्राप्त करेगा क्योंकि उसका भक्तिभाव किसी चमत्कार पर डिपेंडेंट नहीं है, किसी बहुत बड़े मेडिकल पर निर्भर नहीं है। वो चौथा शिव योगी कहता है कि मेरा तो मुझे मेरा गुरु मिलना ही 1 बहुत बड़ा मेरिकल है। पहला शिव योगी कहता है हे गुरुदेव मुझे मेरे एक्सीडेंट से बचा लो। दूसरा कहता है हे गुरुदेव मुझे मेरी बीमारी से बचा लो, फिर भक्ति जागरत हो जाएगी। तीसरा कहता है मेरे जीवन में थोड़ा पैसा आ जाए, फिर भक्ति जागरत हो जाएगी। चौथा कहता है छोड़ो अगर भक्ति जागृत हो गई, फिर तो सब कुछ हो जाएगा क्योंकि जहाँ मुझे मेरे गुरु मेरे शिव मिल गए तो शिव अनंत शिव कृपा, अनंता हर हर महादेव।










