ईशान शिवानंद बताते हैं कि निरंतर साधना से मन, शरीर और जीवन में क्रमिक परिवर्तन होता है। साधना गहरी होने से क्षमा करना आसान हो जाता है और प्रेम दिव्यता की अभिव्यक्ति बन जाता है, जिससे परिवार और आसपास के लोगों के प्रति व्यवहार बदलता है।
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साधना से भी तुम्हारे मन में, तुम्हारे जीवन में तुम्हारे शरीर में 1 म्यूटेशन होनी शुरू होती है और म्यूटेशन क्या है धीरे धीरे तुम्हें सकारात्मक दिखता है, धीरे धीरे तुम्हें शुभ की अनुभूति होती है, धीरे धीरे तुम्हारी साधना गहरी होती है धीरे धीरे तुम पाओगे माफ करना आसान हो गया क्योंकि तुम्हें पता चल जाएगा दिव्यता ही मेरी शक्ति है और माफ करने में दिव्यता है तो तुम माफ कर देते हो प्रेम करने में दिव्यता है तो तुम प्रेम बनाना शुरू कर देते हो क्योंकि तुम्हारे गुरु क्या कहते हैं तुम चाहते क्या हो अब तुम्हें यह बात पता है तुम जुड़े हुए हो और तुम चाहते हो डिविनिटी तुम चाहते हो हैप्पीनेस और तुम समझ जाते हो कि प्रेम दिव्यता है तो तुम अपने परिवार को बहुत प्रेम करते हो।