Eeshan Shivanand warns that young people today lack close friendships and purpose, replacing emotional connection with video games and phones. He traces this to technology breaking social bonds, leaving youth depressed and directionless. He urges them to succeed without abandoning spiritual values and dharma.
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नौजवानों के ऊपर शोध किया गया और पाया गया की 10 साल 20 साल पहले हर 1 नौजवान के 5 से लेकर 3 मित्र हुआ करते थे और आज की तारीख में 1 बहुत बढ़िया और बड़ी पॉपुलेशन ग्रुप है जिनसे अगर आप सवाल पूछो कि तुम्हारे कितने मित्र हैं तो वो बोलेंगे कि हमारा 1 भी क्लोज फ्रेंड नहीं, वो मैत्री करने बाहर निकलते हैं क्योंकि मैत्री से जो 1 इमोशनल फुलफिलमेंट आती है वो वीडियो गेम खेल कर पूरी हो जाती है, सेल फोन पर पूरी हो जाती तो क्या जरूरत है, कौन शादी करे, कौन परिवार बसाए, कौन किटकिट करे, उनको लगता है कि अपना ही व्यसन पूरा करो, अपने ही जिंदगी को जियो और कहानी खत्म और क्यूंकि इस प्रकार की सोच आखिरी मनुष्य की पैदाइश उत्पन कर रही है इसलिए अब देखा जा रहा है ये जो मर्द है जिसकी कोई मोटिवेशन नहीं है, कोई 1 बड़ी लड़ाई नहीं, कोई 1 धर्मयुद्ध नहीं, तो अब ये इतना बेनाइन हो चुका है के अब डिप्रेशन, सुसाइडल, टेंडेंसी, सब्स्टेंस व्यूस 1 मुर्दा लाश अपना जीवन जी रही है और इस मुर्दा लाश में जीवन की चिंगारी तभी दिखती है जब कोई 1 व्यसन सामने आए और मैंने बहुत बड़े बड़े शहरों में ऐसे छोटे छोटे लोग देखे, कहने को बाप दादाओं ने बहुत पैसा बना दिया लेकिन अब ये छोटे छोटी सोच अब कोई एंबीशन नहीं, कुछ नहीं बस, भैया थोड़ा बहुत खा लें, थोड़ा बहुत चल जाए, थोड़ा बहुत इंजॉय कर ले, थोड़ी बहुत ब्रैंड आ जाए, भैया हम निकाल लेंगे और अब मैं आप सब नौजवानों से बात कर रहा हूँ की आपको सफल होना है और अगर ज्यादा सफल हो गए। फिर 1 समस्या है क्योंकि जब सोसाइटी में इंडस्ट्रिलाइजेशन हुई थी, फिर जैसा नीची ने कहा भगवान की मृत्यु हो जाती, जहाँ टेक्नोलॉजी आती है वहाँ भगवान की मृत्यु हो जाती है, जहाँ भगवान की मृत्यु हो जाती है वहाँ पे आखिरी मनुष्य का जन्म होता है और इसलिए मैं सभी नौजवान से कहना चाहता हूँ अगर आप सफल होना चाहते हो तो मैं महादेव से प्रार्थना करूँगा की आप सफल हो, लेकिन आपको प्रण लेना होगा कि आप ब्रह्म की हत्या नहीं करोगे, आप धर्म को मरने नहीं दोगे।