Ishan Shivanand explains how Shiva-yogis are born with spiritual inclination but suppress it without a guru, chasing worldly success while feeling inner pain. When a realized master appears, their presence awakens the heart and releases a wave of inner energy, leading to direct experience of the Self.
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जो शिव योगी होते हैं उनके बहुत अच्छे कर्म होते है तो बचपन से ही उनका स्वभाव ऐसा है की वो शिव के प्रति आकर्षित है, साधना के प्रति आकर्षित है और फिर धीरे धीरे क्या होता है अगर गुरु न मिले तो हम उस स्वभाव को मारना शुरू कर देते हम जानते तो हैं, हम दुनिया से अलग हैं लेकिन दुनिया क्या सिखाती है तो हम अपने स्वभाव से लड़ते है, हम अपने आप को बुरी आदते देते है तो लुक कूल हम अंटसंट गोल्स की ओर भागना शुरू करते है तो लुक सक्सेसफुल लेकिन अन्दर ही अन्दर क्यूँ की हमने अपना स्वभाव मारना शुरू कर दिया तो हम जो कुछ भी प्राप्त कर ले हमें दुःख और कष्ट अनुभव होता है और फिर 1 दिन हमारे जीवन में महा सिद्ध आते है और उन्हें देख कर वो सारा स्वभाव जो आप भीतर कहीं बंद किए छिपाए बैठे थे वो आपका अनाहत खोल देता है और भाव की 1 लहर अनंत ताकत से बहना शुरू कर देती है और तब आपको आपजी के 1 बार फिर दर्शन होते है।