ईशान शिवानंद explains that your connection with Lord Shiva spans many lifetimes. Small acts of virtue accumulate as merit, gradually ripening into true devotion and surrender to a guru. When this bhakti matures, you become ready for Shiva's direct presence in a future birth.
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वी हैव। टू, अंडरस्टैंड आई, क्सेप्टमईशi वही फिर मेरे गुरु। मैं स्वीकारता हूँ, मैं आवाहन करता हूँ, मैं समर्पण करता हूँ, मैं स्वीकारता हूँ, मैं आवाहन करता हूँ, मैं समर्पण करता हूँ। क्यूँकी तुम्हें लग रहा है कि तुम बस आ गए, ऐसा हुआ ही नहीं। तुम्हारा शिव से रिश्ता पुराना है। कई जन्म तुमने बिताए होंगे। प्यार करना, नफरत करना, प्यार करना, वो प्यार नहीं था। अब भक्ति आई है। और यह भक्ति भी बहुत, बहुत श्रद्धा से मिलती है। ये जो छोटे छोटे तुम, अच्छे, अच्छे, गुण, अपने भीतर ले आते हो, जाने अनजाने में पुण्य कर लेते हो। यह फिर धीरे धीरे धीरे भक्ति का स्वरूप। और यही भक्ति फिर तुम्हारे शु स्वीकार कर। तुम्हें कहते हैं कि अब तुम तैयार हो। अब जब तुम जन्म लोगे, ये वाला जो जन्म होगा, इस जन्म में, पॉसिबिलिटी है। क्या है पॉसिबल किस चीज की साक्षात का।