A man recounts a scooter accident that nearly killed him. Unconscious and pulled toward darkness, he called to Mahadev and his wife's guru, then saw divine light. He woke in an ICU with his wife's photo of Babaji beside him. He credits his survival to her recitation of the Lalita-Rudra-Trishati and now practices Shiv-Yog daily with her.
Chapters
मुझे 1 शिवयोगी लिखता है, कहता है, आप धन्य हैं, महादेव धन्य हैं, शिवानंद धन्य है। मेरा कभी भी गुरुओं पर, शिवयोग पर कोई विश्वास नहीं था। मेरी पत्नी रोज बैठकर ललिता, रुद्रतृश्यति का पाठ करती, मैं उसको सुनता तैयार होता, अपने काम पर निकल जाता लेकिन भगवान की माया कुछ ऐसी 1 दिन काम पर जा रहा था और मेरे स्कूटर को गाड़ी नहीं मारती। मैं होश गंवा बैठा और जब मेरी जात खुली, मैंने पाया मैं किसी और दुनिया में हूँ और उस दुनिया में मुझे कुछ उर्जा अंधकार की ओर खींचते हुए ले जा रही है। मुझे पता नहीं था मैं कहाँ जा रहा हूँ मुझे पता नहीं था ये स्थान क्या है लेकिन मेरे भीतर 1 बहुत डर था। उसी समय मैंने महादेव को याद किया और अपनी पत्नी के गुरु को याद किया और न जाने कहाँ से 1 दिव्य प्रकाश 1 शक्ति का मुझे आभास होना शुरू हो गया। वो शक्ति, मेरे और इन सभी ऊर्जाओं के बीच आ कर के खड़ी हो गई। जैसे ही मुझे उस शक्ति का आभास हुआ, मेरे भीतर शांति थी, मेरे भीतर ताकत थी, मुझे लग रहा था कि अब मैं बच जाऊँगा। इस ऊर्जा ने मुझे पकड लिया जैसे 1 माँ अपने बच्चे को पकड़ती है और मुझे धीरे धीरे धीरे धीरे मेरे शरीर की ओर ले गई। कुछ ही देर बाद मेरी जाग खुली और मैंने पाया मैं आईसीयू में हूँ, मेरे आसपास चिकित्सक खड़े हैं, मुझे जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं। और फिर मेरी आँख बिस्तर के बगल में बाबा जी के चित्र पर पड़ी जो मेरी पत्नी ने वहाँ रखती थी। मेरा ये जन्म सिर्फ बाबाजी और आपकी कृपा की वजह से मैं आपको शिवयोग को, बाबाजी को, महादेव को धन्यवाद करता हूँ, प्रणाम करता हूँ। मैं बिस्तर पर पड़ा रहा और धीरे धीरे मेरे शरीर में शक्ति लौटने लगे, मेरे मन में शांति लौटने लगे। कुछ देर बाद मेरी पत्नी और मेरा परिवार मेरे पास आए और मैंने खुश होकर अपनी पत्नी को अपना अनुभव बताया। मेरी पत्नी ने मुस्कुरा कर मंत्र बोलना शुरू कर दिया। अब धुतम महासिद्ध आदि व्याधि बोगमोक्रदमदेव, महा सिद्ध ना। मेरी पत्नी ने मुझे गले लगाया और बाबा जी की फोटो को चूम लिया। वो दिन था और आज का दिन है। मैं अपनी पत्नी के साथ रोज बैठकर अनुष्ठान करता हूँ, रोज महादेव का नाम लेता हूँ, रोज ललिता और उदर त्रिशति का पाठ करता हूँ। मेरी प्रार्थना है हर व्यक्ति से आप जो कहीं भी हो, जहाँ कहीं भी हो, चाहे आपका विश्वास है या नहीं, आप शिवयोग सनातन परंपरा की शक्ति से जुड़ा, आप इस ऊर्जा को महसूस करो और जब कहीं भी आप अपने आप को अंधकार में पाओगे, यह ऊर्जा आपको उस अंधकार से खींच कर ले। आएगी आज मैं धन्य हूँ, मुझे 1 जीवन प्रदान हुआ है, मेरे बच्चों को 1 पिता प्रदान हुआ है, मेरी पत्नी को 1 पति प्रदान हुआ है और बाबाजी को 1 शिष्य मिला है। धन्यवाद भगवान शिव का धन्यवाद, मालविता, त्रिपुर सुन्दरी का धन्यवाद, शिव शिवानंद का नमशिवाय।