जीवन में प्रगति के लिए चेतना की उन्नति जरूरी है। ~ ईशान शिवानंद

Ishan Shivanand maps human consciousness across five chakras, from the root chakra focused on physical needs to the throat chakra centered on truth and communication. Most people get stuck at the second level, caught in sensory satisfaction, but practice and charity can elevate consciousness to higher stages of power, love, and authentic expression.
Chapters
मूल आधार माने पृथ्वी, तत्व मूल आधार माने शारीरिक, प्रलोभन, रोटी, कपड़ा और मकान। जिस मनुष्य की चेतना मूलाधार में है, वो केवल अपने शरीर की पूर्ति के लिए ही भागता रहेगा, स्वाद की भी नहीं। शरीर की पूर्ति की मैं थोड़ा और पैसा कमा लो की मेरे 23 और घर जायदाद बन जाए। वो साधना भी करेगा, उसकी प्रार्थना भी तुम सुनना प्रार्थना सुन कर। तुम बता सकते हो की 1 व्यक्ति चेतना के कौन से स्तर पर है, प्रार्थना भी यही करेगा, हे भगवान, थोड़ा और पैसा दे दे 1 और प्रॉपर्टी हो जाए। वो फंसा हुआ है, उसके प्रलोभन, उसकी हंसी भी बहुत शारीरिक होगी। तुम कभी देखना। जब 1 बच्चा 1 बालक पैदा होता है, तो उसकी चेतना का स्तर उसके मूलाधार पर है। तो तुम देखना 1 बच्चे की हंसी खुशी भी मूलाधार के हिसाब से ही होगी। तुम्हें कुछ नहीं करना, सिर्फ शारीरिक प्रक्रियाओं के बारे में बोलना है। और 1 बच्चा ठहाके मार कर हंसना शुरू हो जाएगा करना तुम कोशिश 1 छोटे बच्चे को अपने सामने खड़ा करना, और कुछ मत बोलना सिर्फ बोलना पति हंसी छूट जाएगी, उसकी शारीरिक प्रकिया, कुछ बोलने की, कुछ ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं। तुम बच्चे के सामने खड़े होना और आवाज निकालना बच्चा खुश वो जोर से हंसेगा, क्योंकि अभी उसकी चेतना यहाँ पर है तो उसकी माया भी उसी प्रकार से वो बना रहा है। लेकिन जैसे जैसे 1 आदमी फिर जोड़ता है, फिर उसकी चेतना उठेगी स्वादिष्ट न स्वादिष्ट। मतलब। अब मैं शरीर के इन्द्रियों के पीछे भागता हूँ। मुझे कौन सा स्वाद मिल जाए, मेरी जिव्या मुझे कौन सा प्रलोभन देखने को मिले। मुझे कौन सी आवाज सुनाई दे? क्यूंकि ये मेरे भीतर का जल। तत्व यह है मेरे भीतर का स्वाद। जो व्यक्ति ऐसी चेतना के स्तर पर होगा, वो भगवान से यही मांगेगा। हे भगवान, मेरे को नई गाड़ी, नए कपड़े, कुछ ऐसा कुछ जिस से मेरे को प्रलोभन मे बहुत स्वादिष्ट मांगे होंगे, उसके ऐसे व्यक्ति को तुम देखना। 1 व्यक्ति जब हँसता है, 1 मनुष्य तुम बता सकते हो, तुम देख सकते हो की उसकी चेतना का स्तर कहाँ पर है? ज्यादातर नौजवानों का चेतना का स्तर स्वादिष्ट थान, पर होता है। जो व्यक्ति प्रजनन प्रक्रियाओं के बारे में सुन कर, बहुत हंसे नॉन, वैज डर्टी, जोक्स उसकी चेतना यहाँ पर है, तुम्हें पता चल जाएगा, क्योंकि फिर वो व्यक्ति अपनी इंद्रियों, अपनी माया, उस प्रकार की बना देता है। फिर चेतना उठी अगर वो अपने जीवन में बढ़ाएगा जोड़ेगा, मेहनत को जोड़ेगा, साधना को जोड़ेगा जरूरी नहीं है, चेतना उठेगी। बहुत लोगों की, 99 प्रतिशत लोगों की स्वादिष्ट से ज्यादा चेतना नहीं उठती, वो मरते दम तक प्रलोभनों में अटक जाते हैं। और अगर मैं जोड़ता हूँ, साधना करता हूँ, तब करता हूँ, फिर मेरी चेतना मणिपुर तक पहुँचती है। मणिपुर मतलब अगनी तक ताकत पैसा सेल्फ कॉन्फिडेंस मान्यता शक्ति ऐसे व्यक्ति को तुम देखना। इस व्यक्ति को अगर तुम्हे खुशी प्रदान करनी है, तो जितना सरकाज्म होगा, उतना इस व्यक्ति को मजा आएगा उतना ही ठहाके मार कर हंसे। गा। अगर तुम इस आदमी से बात करो। तुम इसको कहानी सुना की। 1 व्यक्ति था, बहुत अमीर था, बहुत अपनी नाक पर करके चल रहा था और चलते चलते गिर गया, वो ठाके मारकर हँसना शुरू होगा। क्या बात है जिस मैन विल लाइक सार्कास्टिक हूमर इस आदमी को पसंद आएगा किसी और की हार में, उसको हंसी आएगी किसी और के दर्द में यह सुख प्राप्त करेगा। फिर अगर 1 व्यक्ति जुड़ता है। फिर हृदय अनाहत, अनाहत का मतलब वायु, तत्व वायु, तत्व, तुम्हारे भीतर का प्रेम, तुम्हारे भीतर का सुख, तुम्हारे भीतर का दुख, ऐसे व्यक्ति को बहुत मजा आएगा। अगर तुम इससे रिश्तों की बातें करोगे। अगर तुम जोक सुना रहे हो और पति पत्नी के, जोक श्रीमान श्रीमती के बहुत प्रसन्न हो जाएगा, वह क्यूंकी। अब इसकी चेतना अनाहत है। अब इसको ये रिश्ते समय आते, ये केंद्र हैं। तुम्हारी हीलिंग शक्तियों का यह अनाहत बहुत कीमती है। अनाहत के बाद आता है विशुद्धि, तुम्हारे भीतर का आकाश, it is अबाउट the कम्युनिकेशन, ऐसे व्यक्ति को मजा आएगा, अगर बात होगी, कम्युनिकेशन फेलियर्स की मिस कम्युनिकेशन, ऐसे व्यक्ति को मजा आएगा, जब बात होगी सच और झूठ के ऐसे व्यक्ति के सवाल और जवाब भी ऐसे ही होंगे, शुद्धि के ऊपर, आचरण के ऊपर ऐसा व्यक्ति जस्टिफाई करेगा। अपने हर 1 विकार को तुमने ऐसे भी लोग देखे होगे। अब अगर तुम देखो, ये फिर अशुद्धि का कारण है। अब ज्ञान तो उसको मिल गया, लेकिन उस ज्ञान से कोई क्रांति न हो पाएगी। क्योंकि चैरिटी बिगिन्स एट होम, चैरिटी बिगिन्स एट होम, जितने बदलाव मुझे लाने हैं। जब मैं यहाँ नहीं लाता, तब तक कोई भला नहीं होगा। जिस सेवा की मेरी बाबा बात करता है, चैरिटी बिगेन्स एट होम।










