A practitioner describes life at Lucknow Ashram, where silence is mandatory and the day starts at 5:30 am with seva, sadhana, yoga, and meditation. The ashram houses Mahakaleshwar and Maa Bhadra Kali deities, and during parikrama the speaker feels a guiding presence.
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लखनऊ आश्रम ये प्लेस बहुत डिवाइन है इसके बारे में आज तक मैंने सिर्फ प्रैक्टिस ऑफ मोटालिटी की बुक में लीड किया था। पार्ट टू में उसमें भैया ने कितने अच्छे से बताया है कि यहाँ पर महाकालेश्वर जी है, यहाँ पर माँ भद्र काली है और ये प्लेस इतनी डिवाइन है। यहाँ पर चारो तरफ बहुत ज्यादा पेड़ पौधे होप्स है, इंडियन होप्स है। जब आप प्रेमिसेस में आते हैं तो प्रेमिसेस का सबसे पहला रूल है कि आपको मौन रहना है। मौन रहना इसलिए कंपल्सरी है क्यूँकि आप जितना मौन रहेगे। इस प्रेमिसेस में आप उतना अपने डीप जाके मेडिटेशन के बाद सेल्फ एनालाइज कर सकते ह। हमारे पास 1 घंटी सेवा होती है जिसके थ्रू जब भी वो घंटी बचती है तो हमको 1 आइडिया लगता है की अब हमें महाकाल मेडिटेशन रूम में इकट्ठे होना है। भैया ने बहुत ही अच्छे तरीके से वाईआई का पूरा करिकुलम दिया है उस करिकुलम में फर्स्ट ली हम सुबह, फाइव, थर्टी, सब इकट्ठे होते हैं, सेवा करते हैं, फिर हम साधना करते हैं, योगा ऑफ करते हैं और फिर हम इंटेंस साधना करते हैं। तो जब हम इंटेंस साधना के बाद परिक्रमा करते हैं महाकालेश्वर जी की तब हमें ऐसा लगता है जैसे बाबा ही हमारे साथ चल रहे हैं। ये प्लेस बहुत डिवाइन है, चारों तरफ बहुत ज्यादा पॉजिटिविटी है।